मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ सामान्य हैं और इन्हें व्यापक संकट या एक प्रवृत्ति के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थल पूरी तरह सुरक्षित हैं और पर्यटकों को अनावश्यक रूप से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। चौहान ने बताया कि मीडिया में कुछ क्षेत्रों की आपदा संबंधी खबरें प्रमुखता से दिखाए जाने के कारण पूरे हिमाचल को लेकर पर्यटकों में भय का माहौल बन जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि केवल गिने-चुने इलाकों में ही बारिश से नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और प्रशासन प्रभावित लोगों के साथ खड़े हैं और अधिकांश सड़कें खुली हुई हैं, हालांकि लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए। नगर परिषदों और नगर समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी संबंधी भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, नरेश चौहान ने कहा कि जिन स्थानों पर किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा के 'लोकतंत्र की हत्या' के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि हिमाचल में नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र खतरे में है, जहाँ चुने हुए जनप्रतिनिधियों को केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर द्वारा सिराज क्षेत्र में आपदा प्रभावितों को मुआवजा न मिलने के आरोपों पर नरेश चौहान ने केंद्र सरकार पर अपेक्षित सहायता न देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों को ₹7 लाख से अधिक का मुआवजा पहले ही दे चुकी है। चौहान ने प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल के लिए घोषित ₹1500 करोड़ की सहायता राशि के अब तक लापता होने का भी जिक्र किया और भाजपा से सवाल किया कि वह राशि आखिर कहाँ गई। राम मंदिर चंदा चोरी मामले को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना' बताते हुए, नरेश चौहान ने कहा कि मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से मंदिर में चोरी की घटनाएँ हो रही हैं और इस मामले की गहन जाँच होनी चाहिए। चौहान ने यह भी माँग की कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे पर नरेश चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए लगातार केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष रख रहे हैं और इसी उद्देश्य से वे दिल्ली जाते हैं।
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ सामान्य हैं और इन्हें व्यापक संकट या एक प्रवृत्ति के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थल पूरी तरह सुरक्षित हैं और पर्यटकों को अनावश्यक रूप से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। चौहान ने बताया कि मीडिया में कुछ क्षेत्रों की आपदा संबंधी खबरें प्रमुखता से दिखाए जाने के कारण पूरे हिमाचल को लेकर पर्यटकों में भय का माहौल बन जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि केवल गिने-चुने इलाकों में ही बारिश से नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और प्रशासन प्रभावित लोगों के साथ खड़े हैं और अधिकांश सड़कें खुली हुई हैं, हालांकि लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए। नगर परिषदों और नगर समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी संबंधी भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, नरेश चौहान ने कहा कि जिन स्थानों पर किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा के 'लोकतंत्र की हत्या' के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि हिमाचल में नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र खतरे में
है, जहाँ चुने हुए जनप्रतिनिधियों को केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर द्वारा सिराज क्षेत्र में आपदा प्रभावितों को मुआवजा न मिलने के आरोपों पर नरेश चौहान ने केंद्र सरकार पर अपेक्षित सहायता न देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों को ₹7 लाख से अधिक का मुआवजा पहले ही दे चुकी है। चौहान ने प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल के लिए घोषित ₹1500 करोड़ की सहायता राशि के अब तक लापता होने का भी जिक्र किया और भाजपा से सवाल किया कि वह राशि आखिर कहाँ गई। राम मंदिर चंदा चोरी मामले को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना' बताते हुए, नरेश चौहान ने कहा कि मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से मंदिर में चोरी की घटनाएँ हो रही हैं और इस मामले की गहन जाँच होनी चाहिए। चौहान ने यह भी माँग की कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे पर नरेश चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए लगातार केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष रख रहे हैं और इसी उद्देश्य से वे दिल्ली जाते हैं।
- सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कुछ बड़ी बातें कही हैं, और दर्शकों/श्रोताओं को उन्हें सुनने के लिए आमंत्रित किया गया है।1
- नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने 03 जुलाई को बिलासपुर के घुमारवीं में तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विभागीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें विशेष रूप से राज्य में स्थापित किए जा रहे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) सेंटर, स्किल अकादमी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा विभाग की भावी कार्य योजना की विस्तार से समीक्षा शामिल थी। मंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य हिमाचल के युवाओं को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में घुमारवीं में स्किल अकादमी स्थापित करने तथा मल्टी स्किल एवं डिजिटल यूनिवर्सिटी विकसित करने की घोषणा की है। बैठक के दौरान मंत्री राजेश धर्माणी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घुमारवीं में निर्माणाधीन स्किल अकादमी सेंटर का कार्य हर हाल में 30 जुलाई तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक स्किल सेंटर लगभग 4.5 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। स्किल अकादमी सेंटर में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया, भाषा कौशल तथा उद्योगों एवं रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी तथा उन्हें स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसका उद्देश्य युवाओं को केवल प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल से सशक्त बनाना है जिनकी आवश्यकता वर्तमान और भविष्य के उद्योगों में होगी। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए अधिक उपयोगी एवं रोजगारोन्मुख बनाने को कहा। मंत्री ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने विभाग को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक रोहित राठौर, डिप्टी डायरेक्टर संजीव सहोत्रा, ललित शर्मा, रविंदर बनियाल, ज्वाइंट कंट्रोलर (फाइनेंस) नाग सिंह यादव, दिनेश शर्मा (ज्वाइंट डायरेक्टर), हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के जनरल मैनेजर अमित काल्थिक, घुमारवीं आईटीआई के प्रिंसिपल जनक सिंह, अनुदेशक कमल देव, करण सिंह ढटवालिया तथा विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।3
- हिमाचल जूनियर हॉकी टीम के लिए वर्ष 2026 के ट्रायल मंडी में आयोजित किए गए। इन ट्रायलों में कुल 85 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह चयन प्रक्रिया कोयम्बटूर में होने वाले नेशनल टूर्नामेंट के लिए टीम बनाने के उद्देश्य से की गई।1
- यमुनानगर जिले के सढोरा में नकटी नदी के पुल के नीचे से मिट्टी हटाने का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा शुरू कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। यह पहल पार्षद एवं सीएम विंडो एमिनेंट पर्सन नैब सैनी और नगर पालिका वाइस चेयरमैन दविंद्र सैनी द्वारा सिंचाई विभाग को लिखे गए पत्र के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने बरसात में पानी के बहाव का रास्ता बनाने और नदी का पानी नगर में प्रवेश करने से रोकने के लिए नदी की सफाई की मांग की थी। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी प्रार्थना की थी। सिंचाई विभाग ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए मशीन भेजकर नदी में सफाई का कार्य आरंभ किया है। पूर्व पंच शिवकुमार सैनी, चमन लाल सैनी और जय सिंह ने बताया कि लंबे समय से नदी की सफाई न होने के कारण इसमें अत्यधिक मिट्टी जमा हो गई थी, जिससे हर बरसात में नदी का पानी नगर की ओर मुड़कर लोगों के घरों में घुस जाता था और नुकसान पहुंचाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्षद नैब सैनी और दविंद्र सैनी (जिन्हें दविंद्र लवली भी कहा गया) इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहे। अब उनके प्रयासों से ही नदी की सफाई का कार्य शुरू हो पाया है। लोगों ने इसके लिए पार्षद नैब सैनी और दविंद्र लवली के प्रति आभार व्यक्त किया है।1
- ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के प्रधान विनोद धीमान ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला है, जिसमें कहा गया है कि हाल ही में हुई मात्र 10 मिनट की बारिश ने अंबाला शहर की सफाई व्यवस्था और प्रशासन के खोखले दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है, जिससे यह डूबने की कगार पर है। धीमान ने यह भी बताया कि सांसद वरुण चौधरी (मुल्लाना) और विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने शहर के दौरे के दौरान जो शंका जताई थी कि नालों की सफाई का कार्य सिर्फ सोशल मीडिया की तस्वीरों और कागजों तक सीमित है, वह पूरी तरह सच साबित हुई है। प्रेस नोट में विनोद धीमान ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिनमें मुख्य रूप से एक ही चहेते ठेकेदार को हर महीने करोड़ों रुपये का भुगतान करना शामिल है, जबकि 10 मिनट की बारिश में भी पूरा शहर जलमग्न हो गया। उन्होंने कहा कि जनता पिछले 10 साल से इसी नारकीय समस्या को झेलने को मजबूर है। धीमान के अनुसार, विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने समय-समय पर बड़े अधिकारियों को अनियमितताओं के प्रति सचेत किया, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे शहर के सभी विकास प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। उन्होंने कागजों में करोड़ों के टेंडर होने के बावजूद धरातल पर सफाई कर्मचारियों की संख्या ना के बराबर होने और ठेकेदार को एडवांस में बिल पास करने, जबकि गरीब कर्मचारियों को 3-3 महीने से वेतन न मिलने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा, नियमों के विरुद्ध सभी तीन अलग-अलग प्रकार के ठेके (नाला सफाई, वार्ड सफाई और नाइट शिफ्ट) एक ही कंपनी को सौंपकर पारदर्शिता की अनदेखी करने की बात भी कही गई, जिससे जनता को यह तक नहीं पता कि किस वार्ड में कितने कर्मचारी तैनात हैं। इस मामले पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी चेतावनी दी है। विनोद धीमान ने कहा है कि अंबाला की जनता के टैक्स के पैसे की इस तरह लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम ने जल्द ही सफाई टेंडर और कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी इस कथित महाघोटाले के भंडाफोड़ के लिए माननीय लोकायुक्त और हाई कोर्ट में केस दायर करेगी। इन गंभीर मुद्दों और शहर की बदहाली को लेकर, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अंबाला के उपायुक्त (DC) से मुलाकात करेगा और उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत करवाकर सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।1
- कुलदीप पठानिया ने आरोप लगाया है कि सांसद अनुराग ठाकुर हमीरपुर की जनता को रेल लाइन के विषय में गुमराह कर रहे हैं। पठानिया के अनुसार, सांसद इस मुद्दे पर हमीरपुर के लोगों को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं।1
- हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू होने से पहले ऊपरी शिमला की जर्जर सड़क व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर चौपाल विधानसभा के गोरली मडावग से जिला परिषद सदस्य अतुल शर्मा ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) शिमला को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि पिछले वर्ष जैसी लापरवाही इस बार दोहराई गई, तो हजारों किसान-बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अतुल शर्मा ने जोर देकर कहा कि ऊपरी शिमला की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेब उत्पादन पर आधारित है, और हजारों किसान अपनी पूरे वर्ष की आय के लिए इसी फसल पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने पिछले वर्ष की स्थिति का हवाला दिया, जब प्रशासनिक तैयारियों के अभाव में एचपीएमसी के गोदामों, बगीचों और सड़कों पर हजारों टन सेब फंसा रह गया था, जिससे किसानों को भारी क्षति हुई थी। इस वर्ष भी, जहाँ बरसात शुरू हो चुकी है और 15 जुलाई से विभिन्न क्षेत्रों में सेब सीजन आरंभ होने जा रहा है, वहाँ अभी तक पर्याप्त तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। शर्मा ने विशेष रूप से करगोली नाला–देहा मुख्य मार्ग, देहा–चौपाल सड़क, सरांह–जोड़ना–पुलबाहल–नेरीपुल मार्ग तथा बमटा–मडावग–खिड़की सड़क सहित कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों की बेहद खराब हालत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन मार्गों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, क्षतिग्रस्त सड़कें और झुके हुए पेड़ दुर्घटनाओं के खतरे को बढ़ा रहे हैं, और यदि सेब सीजन से पहले इनकी मरम्मत नहीं हुई तो सेब का परिवहन बुरी तरह प्रभावित होगा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि सेब सीजन से पहले सभी मुख्य और वैकल्पिक मार्गों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें यातायात योग्य बनाया जाए। इसके अतिरिक्त, भारी वर्षा के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग की मशीनों की अलग से व्यवस्था करने और पुलिस विभाग द्वारा प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन योजना लागू करने की भी बात कही गई, ताकि सेब समय पर मंडियों तक पहुँच सके। अतुल शर्मा ने पंचायत स्तर पर लिंक रोड खोलने के लिए विशेष फंड जारी करने, एचपीएमसी द्वारा किसानों का लंबित भुगतान जल्द जारी करने, बिना लाइसेंस सेब खरीद पर रोक लगाने और आढ़तियों द्वारा किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराने जैसी अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाईं। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और बागवानों को प्रशासनिक तैयारियों की पूरी जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अंत में, उन्होंने चेतावनी दी कि सेब केवल एक फसल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और यदि सरकार तथा प्रशासन ने समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए तो इसका सीधा असर प्रदेश के हजारों किसान परिवारों पर पड़ेगा। इसलिए प्रशासन को इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करनी चाहिए।1
- राजकीय महाविद्यालय झंडूता में साइंस संकाय की कक्षाएं एक बार फिर से बहाल कर दी गई हैं।1
- नगर पालिका (नपा) ने आज सतपुड़ा के सढोरा मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया, जिससे अस्थाई दुकानदारों में गहरा रोष व्याप्त हो गया। यह अभियान शनिवार को विशेष बाजार लगने के कारण चलाया गया, जब काफी संख्या में बाहरी दुकानदार भी अपनी अस्थाई दुकानें लगाए हुए थे। अभियान के दौरान, नपा कर्मचारियों ने दुकानों के बाहर रखे सामान और अनेकों अस्थाई दुकानों को हटाया। इस कार्रवाई से प्रभावित अस्थाई दुकानदारों ने नपा पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नगर पालिका प्रशासन अपने चहेते दुकानदारों को कुछ नहीं कहता, जबकि गरीब दुकानदारों पर बेवजह मार डाली जा रही है। स्थानीय आमजन का भी कहना है कि मुख्य बाजार में कई स्थायी दुकानदार पैसे लेकर अपनी दुकान के सामने अस्थाई दुकानें लगवा देते हैं, लेकिन नपा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नपा सिर्फ गरीब अस्थाई दुकानदारों पर ही कार्रवाई करती है, जबकि मार्केट में मौजूद स्थायी अतिक्रमण और सढोरा नदी में अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाती। आमजन ने मांग की है कि नगर पालिका को स्थायी अतिक्रमण और नदी के अवैध अतिक्रमण को भी हटाना चाहिए।1