पद दिलाने के बदले धन लेने के आरोपों से भाजपा की छवि पर उठे सवाल,संगठन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय फतेहपुर। जनपद में डीआईओएस कार्यालय के बाबू विनोद श्रीवास्तव और उसकी पत्नी भाजपा नेत्री पूनम श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इन आरोपों के चलते भाजपा की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और जनपद में पार्टी की किरकिरी होती नजर आ रही है। चर्चा है कि बाउंसर बाबू के नाम से विख्यात विनोद श्रीवास्तव ने खुलेआम यह आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी को संगठन में पद दिलाने के लिए उसने तत्कालीन जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को दो महंगे मोबाइल फोन दिए थे, जिनमे प्रत्येक मोबाइल की कीमत लगभग 1.30 लाख रुपये थी। इतना ही नहीं उसने पत्नी को राज्य महिला आयोग में पद दिलाने के लिए मुखलाल पाल कों 25 लाख रुपये भी दिए थे। लेकिन उसकी पत्नी को पद नही मिला। बाउंसर बाबू द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने आम लोगों के बीच यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में पार्टी में पद दिलाने के लिए धन लिया जाता है, या फिर ये आरोप बेबुनियाद हैं और किसी साजिश के तहत पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, और यदि ये आरोप बेबुनियाद है तो पार्टी संगठन ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई कार्रवाई या टीका-टिप्पणी क्यों नही की? बताते हैं कि विनोद श्रीवास्तव, जो कभी डीआईओएस कार्यालय में अपने रसूख के लिए चर्चित रहा है, उसका प्रभाव ऐसा बताया जाता था कि अधिकारी भी उसके आगे पीछे नजर आते थे। निजी लग्जरी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाकर बाउंसरों के साथ चलना और हाईप्रोफाइल जीवनशैली उसकी पहचान बन चुकी थी। ऐसे में उसके द्वारा अचानक खुद को कर्जदार बताना और नींद की गोलियां खाने की घटना भी कई सवाल खड़े कर रही है। वहीं उसकी पत्नी पूनम श्रीवास्तव को लेकर भी चर्चा है कि वह लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही कार्यकर्ता हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे पार्टी की कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं थी, कि पार्टी में पद के बदले धन लिया जाता है या नही! उन्होंने पद के लिए धन क्यों दिया या फिर लगाए जा रहे इन आरोपों के पीछे कोई और वजह है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद भाजपा संगठन या जिला अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पार्टी संगठन की चुप्पी से चर्चाओं को और बल मिल रहा है। फिलहाल, यह मामला जनपद में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग भाजपा की भ्रष्टाचार मुक्त छवि और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और सच्चाई क्या और कब सामने आती है।
पद दिलाने के बदले धन लेने के आरोपों से भाजपा की छवि पर उठे सवाल,संगठन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय फतेहपुर। जनपद में डीआईओएस कार्यालय के बाबू विनोद श्रीवास्तव और उसकी पत्नी भाजपा नेत्री पूनम श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इन आरोपों के चलते भाजपा की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और जनपद में पार्टी की किरकिरी होती नजर आ रही है। चर्चा है कि बाउंसर बाबू के नाम से विख्यात विनोद श्रीवास्तव ने खुलेआम यह आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी को संगठन में पद दिलाने के लिए उसने तत्कालीन जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को दो महंगे मोबाइल फोन दिए थे, जिनमे प्रत्येक मोबाइल की कीमत लगभग 1.30 लाख रुपये थी। इतना ही नहीं उसने पत्नी को राज्य महिला आयोग में पद दिलाने के लिए मुखलाल पाल कों 25 लाख रुपये भी दिए थे। लेकिन उसकी पत्नी को पद नही मिला। बाउंसर बाबू द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने आम लोगों के बीच यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में पार्टी में पद दिलाने के लिए धन लिया जाता है, या फिर ये आरोप बेबुनियाद हैं और किसी साजिश के तहत पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, और यदि ये आरोप बेबुनियाद है तो पार्टी संगठन ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई कार्रवाई या टीका-टिप्पणी क्यों नही की? बताते हैं कि विनोद श्रीवास्तव, जो कभी डीआईओएस कार्यालय में अपने रसूख के लिए चर्चित रहा है, उसका प्रभाव ऐसा बताया जाता था कि अधिकारी भी उसके आगे पीछे नजर आते थे। निजी लग्जरी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाकर बाउंसरों के साथ चलना और हाईप्रोफाइल जीवनशैली उसकी पहचान बन चुकी थी। ऐसे में उसके द्वारा अचानक खुद को कर्जदार बताना और नींद की गोलियां खाने की घटना भी कई सवाल खड़े कर रही है। वहीं उसकी पत्नी पूनम श्रीवास्तव को लेकर भी चर्चा है कि वह लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही कार्यकर्ता हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे पार्टी की कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं थी, कि पार्टी में पद के बदले धन लिया जाता है या नही! उन्होंने पद के लिए धन क्यों दिया या फिर लगाए जा रहे इन आरोपों के पीछे कोई और वजह है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद भाजपा संगठन या जिला अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पार्टी संगठन की चुप्पी से चर्चाओं को और बल मिल रहा है। फिलहाल, यह मामला जनपद में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग भाजपा की भ्रष्टाचार मुक्त छवि और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और सच्चाई क्या और कब सामने आती है।
- Sibu Khanबिंदकी, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश🙏12 hrs ago
- जय श्री राम, बाला जी महाराज की जय के जय घोष से गूंजा मंदिर परिसर खागा फतेहपुर ::- इस वक़्त की बड़ी खबर से आपको रूबरू करवा दें की आज हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर मे नगर पंचायत खागा के विभिन्न स्थानों मे सुन्दर कांड का पाठ के उपरांत प्रसाद वितरण हुवा नौबस्ता रोड खागा बड़े हनुमान मंदिर, श्री धाम अकोढ़िया, कैंनाल रोड, किशनपुर रोड सहित ज़्यादातर स्थानों मे भक्तो को सुखद अनुभूति हुई. भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा अनोखी मानी जाती है. उनकी ताकत और पराक्रम की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है. ऐसा विश्वास है कि जब भी जीवन में परेशानी या संकट आता है, हनुमान जी का स्मरण करने से राह आसान होने लगती है. खासकर हनुमान जयंती के दिन उनकी पूजा और भक्ति करना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे मन को शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है इसी क्रम मे विजय नगर खागा के कुछ युवाओं ने सुन्दर कांड के उपरांत प्रसाद वितरण किया युवाओं का इस तरह से सनातन धर्म के प्रति सच्ची लगन को देखते हैँ तो ऐसा प्रतीत होता हैँ की अब वो दिन दूर नहीं ज़ब हर एक सनातनी को अपने आप पर गर्व महसूस होगा कहते हैँ "जिस ओर जवानी चलती हैँ, उस ओर ज़माना चलता हैँ " इस मौके पर दिनकर मिश्रा, शुभम कुमार द्विवेदी, प्रद्युम्न मिश्रा, प्रतीक शुक्ला, हर्षित शुक्ला, अंशू सिंह, रविंद्र प्रजापति, अमन पाण्डेय, शिवम मिश्रा, अलोक कुमार केशरवानी सहित स्थानीय बंधू उपस्थित रहे.4
- Post by कौशाम्बी एक्सप्रेस न्यूज1
- आज दिनांक 03/04/2026 को जिला पंचायत ऊंचाहार तृतीय क्षेत्र1
- Post by KEN1
- Post by प्रदुम कुमार मीडिया कौशाम्बी2
- Post by D.D.NEWS UTTER PRADESH1
- *फतेहपुर के गाजीपुर पुलिस को मिली लावारिस पड़ी मोटरसाइकिल* फतेहपुर के थाना गाज़ीपुर पुलिस ने नाले से निकलवाया बाहर गाड़ी में मिले फटे रजिस्ट्रेशन के अनुसार गिरजा शंकर पुत्र स्वर्गीय बिहारी लाल UP71AC 9757 है1
- पद दिलाने के बदले धन लेने के आरोपों से भाजपा की छवि पर उठे सवाल,संगठन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय फतेहपुर। जनपद में डीआईओएस कार्यालय के बाबू विनोद श्रीवास्तव और उसकी पत्नी भाजपा नेत्री पूनम श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इन आरोपों के चलते भाजपा की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और जनपद में पार्टी की किरकिरी होती नजर आ रही है। चर्चा है कि बाउंसर बाबू के नाम से विख्यात विनोद श्रीवास्तव ने खुलेआम यह आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी को संगठन में पद दिलाने के लिए उसने तत्कालीन जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को दो महंगे मोबाइल फोन दिए थे, जिनमे प्रत्येक मोबाइल की कीमत लगभग 1.30 लाख रुपये थी। इतना ही नहीं उसने पत्नी को राज्य महिला आयोग में पद दिलाने के लिए मुखलाल पाल कों 25 लाख रुपये भी दिए थे। लेकिन उसकी पत्नी को पद नही मिला। बाउंसर बाबू द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने आम लोगों के बीच यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में पार्टी में पद दिलाने के लिए धन लिया जाता है, या फिर ये आरोप बेबुनियाद हैं और किसी साजिश के तहत पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, और यदि ये आरोप बेबुनियाद है तो पार्टी संगठन ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई कार्रवाई या टीका-टिप्पणी क्यों नही की? बताते हैं कि विनोद श्रीवास्तव, जो कभी डीआईओएस कार्यालय में अपने रसूख के लिए चर्चित रहा है, उसका प्रभाव ऐसा बताया जाता था कि अधिकारी भी उसके आगे पीछे नजर आते थे। निजी लग्जरी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाकर बाउंसरों के साथ चलना और हाईप्रोफाइल जीवनशैली उसकी पहचान बन चुकी थी। ऐसे में उसके द्वारा अचानक खुद को कर्जदार बताना और नींद की गोलियां खाने की घटना भी कई सवाल खड़े कर रही है। वहीं उसकी पत्नी पूनम श्रीवास्तव को लेकर भी चर्चा है कि वह लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही कार्यकर्ता हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे पार्टी की कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं थी, कि पार्टी में पद के बदले धन लिया जाता है या नही! उन्होंने पद के लिए धन क्यों दिया या फिर लगाए जा रहे इन आरोपों के पीछे कोई और वजह है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद भाजपा संगठन या जिला अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पार्टी संगठन की चुप्पी से चर्चाओं को और बल मिल रहा है। फिलहाल, यह मामला जनपद में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग भाजपा की भ्रष्टाचार मुक्त छवि और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और सच्चाई क्या और कब सामने आती है।1