कटिहार में बाबा साहब आंबेडकर की जयंती पर भव्य रैली, जनसैलाब उमड़ा जनसैलाब कटिहार में बाबा साहब आंबेडकर की जयंती पर भव्य रैली, जनसैलाब उमड़ा कटिहार। भारत के संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर कटिहार में भव्य रैली का आयोजन किया गया। “आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति” के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पूरे शहर में बाबा साहब के प्रति श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। रैली की शुरुआत कटिहार के राजेंद्र स्टेडियम से हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए शहर चौक, जीआरपी चौक होते हुए आंबेडकर चौक पहुंची। इस दौरान रैली में शामिल लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर बाबा साहब के विचारों और संविधान की रक्षा के समर्थन में नारे लगाए। चारों ओर “जय भीम” और “संविधान बचाओ” के नारों से शहर गूंज उठा। आंबेडकर चौक पहुंचने के बाद रैली में शामिल लोगों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को याद किया। इस दौरान वक्ताओं ने बाबा साहब के योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्था के अनुरंजन पासवान ने कहा कि “आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति” के बैनर तले कटिहार जिले के हर घर से लोग इस ऐतिहासिक रैली में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चारों ओर जनसैलाब उमड़ा है, वह बाबा साहब के प्रति लोगों की आस्था और उनके विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाता है। उन्होंने रैली में भाग लेने वाले सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। वहीं, संस्था के भोला पासवान और शिव शंकर पासवान ने कहा कि आज बाबा साहब का 135वां जन्मोत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने देश को एक मजबूत संविधान दिया, जिसने सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय का मार्ग दिखाया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। रैली में शामिल लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी वर्ग के लोग इसमें बढ़-चढ़कर शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया, जिससे रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाबा साहब आंबेडकर के विचार और उनका संघर्ष आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा
कटिहार में बाबा साहब आंबेडकर की जयंती पर भव्य रैली, जनसैलाब उमड़ा जनसैलाब कटिहार में बाबा साहब आंबेडकर की जयंती पर भव्य रैली, जनसैलाब उमड़ा कटिहार। भारत के संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर कटिहार में भव्य रैली का आयोजन किया गया। “आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति” के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पूरे शहर में बाबा साहब के प्रति श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। रैली की शुरुआत कटिहार के राजेंद्र स्टेडियम से हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए शहर चौक, जीआरपी चौक होते हुए आंबेडकर चौक पहुंची। इस दौरान रैली में शामिल लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर बाबा साहब के विचारों और संविधान की रक्षा के समर्थन में नारे लगाए। चारों ओर
“जय भीम” और “संविधान बचाओ” के नारों से शहर गूंज उठा। आंबेडकर चौक पहुंचने के बाद रैली में शामिल लोगों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को याद किया। इस दौरान वक्ताओं ने बाबा साहब के योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्था के अनुरंजन पासवान ने कहा कि “आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ संघर्ष समिति” के बैनर तले कटिहार जिले के हर घर से लोग इस ऐतिहासिक रैली में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चारों ओर जनसैलाब उमड़ा है, वह बाबा साहब के प्रति लोगों की आस्था और उनके विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाता है। उन्होंने रैली में भाग लेने वाले सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने के
लिए धन्यवाद दिया। वहीं, संस्था के भोला पासवान और शिव शंकर पासवान ने कहा कि आज बाबा साहब का 135वां जन्मोत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने देश को एक मजबूत संविधान दिया, जिसने सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय का मार्ग दिखाया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। रैली में शामिल लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी वर्ग के लोग इसमें बढ़-चढ़कर शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया, जिससे रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाबा साहब आंबेडकर के विचार और उनका संघर्ष आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा
- कटिहार शहर स्थित अग्रसेन भवन में गुरुवार से चार दिवसीय बिहार राज्य शतरंज प्रतियोगिता का शानदार शुभारंभ हुआ है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी लगातार तीसरी बार कटिहार को मिली है, जिससे खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस आयोजन की जिम्मेदारी कटिहार जिला शतरंज संघ ने ली है। प्रतियोगिता का उद्घाटन महापौर उषा देवी अग्रवाल, डॉ. शंभू नाथ, गीत अविनाश, डॉ. आलोक राज, पीयूष कुमार, संजीव सुरेखा और विकास खंडेलिया सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजकों ने इस अवसर पर कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता, धैर्य और रणनीति का एक अद्भुत संगम है। संघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने जानकारी दी कि इस प्रतियोगिता में विजयी होने वाले खिलाड़ियों को पुडुचेरी में होने वाली राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस आयोजन को बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रतियोगिता में राज्य के 19 जिलों से 13 वर्ष आयु वर्ग के कुल 109 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें पूर्णिया, पटना, किशनगंज, छपरा, बांका, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पश्चिम चंपारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, सारण, खगड़िया, मुंगेर, भोजपुर, भागलपुर, मधुबनी और वैशाली जैसे कई जिलों के खिलाड़ी शामिल हैं। संघ के संयुक्त सचिव सत्यम समदर्शी ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन हर साल ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन जारी रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इन आयोजनों से ऐसी प्रतिभाएं निकलेंगी जो ग्रैंडमास्टर बनकर न केवल कटिहार जिले, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगी। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और पूरे शहरवासियों में हर्ष और उत्साह का माहौल बना हुआ है।1
- कटिहार जिले के आजमनगर में पिछले 15 सालों से एक प्रमुख सड़क की स्थिति दयनीय बनी हुई है, जहाँ रोड जर्जर हालत में है और पानी के निकास की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यह सड़क आजमनगर मार्केट को जोड़ने वाली मुख्य मार्ग है, जिसकी बदहाली के कारण वार्ड नंबर 5 और 7/8 के निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महलदार टोला ठाकुरबाड़ी क्षेत्र में, ग्रामीणों को घर से निकलते ही जलभराव की समस्या झेलनी पड़ती है। इस जलभराव के कारण आए दिन स्कूल जाने वाले बच्चे भी गिर जाते हैं। पिछले डेढ़ दशक से चली आ रही यह समस्या स्थानीय लोगों के लिए लगातार गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है।2
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण जहां एक ओर माहौल सुहाना हो गया है, वहीं झमाझम बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। इस बरसात के चलते अब किसान आसानी से पशुओं के लिए चारा और भदुई मक्का की खेती कर पाएंगे। साथ ही, आम लोगों को भी भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है।1
- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- बंशीपुर बेला में BPL क्रिकेट टूर्नामेंट का भव्य आगाज़ हो गया है। इस टूर्नामेंट में कुल 16 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है।1
- भागलपुर के सनोखर थाना क्षेत्र के सीलन गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां देवर-भाभी के रिश्ते ने ऐसा मोड़ लिया कि पूरा गांव हैरान रह गया। मोनी कुमारी की शादी साल 2018 में धर्मवीर साह से हिंदू रीति-रिवाज के साथ हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। पति के काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहने के कारण पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगीं। इसी दौरान मोनी कुमारी की मुलाकात घर के बगल में रहने वाले दिलखुश यादव से हुई। पहले बातचीत शुरू हुई, फिर मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता गया और यह रिश्ता प्यार में बदल गया। महिला का कहना है कि दिलखुश अक्सर उनके घर आता-जाया करता था, जिससे उनकी नजदीकियां बढ़ती चली गईं। यह प्यार इतना गहरा हो गया कि महिला अपने पति और दो बच्चों को छोड़कर दिलखुश यादव के साथ रहने चली आई। महिला ने दावा किया है कि वह इस समय दिलखुश से दो महीने की गर्भवती भी है। हालांकि, गांव में इस मामले को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महिला कभी दिलखुश यादव के घर रहती है तो कभी अपने पहले पति के घर भी चली जाती है, जिस कारण मामला अब विवाद का रूप लेता जा रहा है। मोनी कुमारी ने साफ कहा है कि वह दिलखुश यादव के साथ ही रहना चाहती हैं, लेकिन पुराने रिश्तों और बच्चों की याद आने पर वह कभी-कभी पहले पति के घर भी चली जाती हैं। फिलहाल, यह पूरा प्रकरण पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और गांव में लोग इसे लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।1
- PMCH में खबर कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।1