राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।
- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- आजमनगर में सड़क चौड़ीकरण के कारण प्रतिदिन सड़कों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते नागर स्टेशन से ट्रेन पकड़ने जाने वाले यात्रियों को अक्सर विलंब का सामना करना पड़ता है। इसी सड़क पर सदर अस्पताल भी स्थित है, जिसके कारण आपातकाल की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुँचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आजमनगर के केसरी चौक पर आए दिन भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। वीडियो में दिखाया गया है कि सड़क के बगल में पानी और कचरा जमा होने के कारण यह जाम लगता है। यह सड़क आजमनगर प्रखण्ड की मुख्य सड़क है, जो पूरे प्रखण्ड को जोड़ती है और इसे मुख्य मार्ग भी कहा जा सकता है।1
- बिहार के कटिहार जिले में महत्वपूर्ण कटावरोधी कार्य ₹10 लाख की 'लेवी' या 'रंगदारी' की मांग के चलते अधर में लटक गया है। इस स्थिति ने स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि यह वास्तव में विकास का प्रयास है या रंगदारी वसूलने का खेल।1
- कटिहार में भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से बेरोजगारी दूर करने तथा मछली व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मत्स्य विभाग ने पुरुष एवं महिला मछली विक्रेताओं के बीच आजीविका उपार्जन हेतु विशेष किट वितरित किए हैं। इन किटों में तराजू, छाता, आइस बॉक्स, और सूखे व गीले कचरे को रखने के लिए ट्रे जैसी आवश्यक सामग्री शामिल थी। विभाग ने कटिहार में इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मत्स्यजीवी कार्यालय में इन किटों का वितरण कर अपनी जिम्मेदारी पूरी की।1
- डंडखोरा प्रखंड क्षेत्र की सोरिया पंचायत के सिहला गांव में 24 प्रहर अखंड हरीनाम संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया है। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भक्ति रस में सराबोर दिखे, जिससे पूरा वातावरण भजन, कीर्तन और हरिनाम की गूंज से भक्तिमय हो उठा। आयोजन समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि विभिन्न जगहों से आईं छह कीर्तन मंडलियों ने इसमें भाग लिया, जिनमें सिहला, मरंगी, हरियाणा, रटनी और मरंगी गांव की बी टीम कीर्तन मंडलियां मुख्य रूप से शामिल थीं। आयोजनकर्ताओं ने बताया कि पूजा-अर्चना के माध्यम से क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई। उनका मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में भाईचारा, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, साथ ही लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। समिति के सदस्यों की सराहना करते हुए यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया और देर रात तक भजन-कीर्तन का सिलसिला जारी रहा। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भारी उपस्थिति से आयोजन स्थल गुलजार रहा। पूजा समिति के सदस्य निरंजन केवट, मोती केवट, रंजीत केवट, प्रकाश केवट, मुन्ना केवट, संजय केवट, लड्डू केवट सहित अन्य ग्रामीण इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे पूरे गांव में उत्साह का माहौल है और दूर-दराज के लोग भी इसमें भाग लेने पहुंच रहे हैं।1
- प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़ने वाली एक बेटी का उसके परिवार ने जीते जी अंतिम संस्कार कर दिया है। यह चौंकाने वाली घटना गांव में सामने आई, जहां जीवित बेटी के लिए बाकायदा अर्थी निकाली गई। परिवार द्वारा उठाए गए इस कदम से रिश्ते की मर्यादा और सामाजिक प्रतिक्रिया की गंभीरता स्पष्ट होती है।1
- ओडिशा के पुरी में एक घटना सामने आई है जहाँ अधिकारियों द्वारा एक ठेलेवाले को अवैध वेंडिंग के आरोप में हटाए जाने के बाद, स्थानीय लोगों ने उसकी खाजा मिठाइयों को लूट लिया।1