राती खेड़ा स्टेशन पर दो मटकों के सहारे सैकड़ों यात्रियों की प्यास, सुनील आचार्य ने उठाए सवाल गुना मध्य प्रदेश के छोटे रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले राती खेड़ा स्टेशन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां भीषण गर्मी में यात्रियों को पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुनील आचार्य ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बताया कि राती खेड़ा स्टेशन पर रोजाना कई सवारी गाड़ियों का ठहराव होता है। लंबा-चौड़ा प्लेटफॉर्म होने के बावजूद यहां यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। हालात यह हैं कि सैकड़ों यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए स्टेशन पर केवल दो मध्यम आकार के मिट्टी के मटके रखे गए हैं, जिनकी क्षमता लगभग 6–7 लीटर ही है। आचार्य के अनुसार, स्टेशन पर लगा हेडपंप भी अक्सर खराब रहता है। यात्री जब ट्रेन रुकने पर पानी की तलाश में प्लेटफॉर्म पर उतरते हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लगती है। कई बार ट्रेन के चलने का समय हो जाता है और यात्री बिना पानी के ही वापस डिब्बों में चढ़ने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे के मानकों के अनुसार, जहां भी सवारी गाड़ियां रुकती हैं, वहां यात्रियों के लिए छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं होना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। सुनील आचार्य ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि राती खेड़ा जैसे छोटे स्टेशनों पर भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उनका कहना है कि टिकट लेने के साथ ही यात्रियों का इन सुविधाओं पर अधिकार बनता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राती खेड़ा स्टेशन पर दो मटकों के सहारे सैकड़ों यात्रियों की प्यास, सुनील आचार्य ने उठाए सवाल गुना मध्य प्रदेश के छोटे रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले राती खेड़ा स्टेशन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां भीषण गर्मी में यात्रियों को पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुनील आचार्य ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बताया कि राती खेड़ा स्टेशन पर रोजाना कई सवारी गाड़ियों का ठहराव होता है। लंबा-चौड़ा प्लेटफॉर्म होने के बावजूद यहां यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। हालात यह हैं कि सैकड़ों यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए स्टेशन पर केवल दो मध्यम आकार के मिट्टी के मटके रखे गए हैं, जिनकी क्षमता लगभग 6–7 लीटर ही है। आचार्य के अनुसार, स्टेशन पर लगा हेडपंप भी अक्सर खराब रहता है। यात्री जब ट्रेन रुकने पर पानी की तलाश में प्लेटफॉर्म पर उतरते हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लगती है। कई बार ट्रेन के चलने का समय हो जाता है और यात्री बिना पानी के ही वापस डिब्बों में चढ़ने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे के मानकों के अनुसार, जहां भी सवारी गाड़ियां रुकती हैं, वहां यात्रियों के लिए छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं होना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। सुनील आचार्य ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि राती खेड़ा जैसे छोटे स्टेशनों पर भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उनका कहना है कि टिकट लेने के साथ ही यात्रियों का इन सुविधाओं पर अधिकार बनता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- अभिभावक गोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न, शिक्षा के प्रति जागरूकता का उमड़ा जनसैलाब छीपाबड़ौद - विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मन्दिर केलखेड़ी छीपाबडौद में आयोजित अभिभावक गोष्ठी अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में अभिभावकों की प्रभावशाली उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। गोष्ठी का शुभारम्भ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय परिवार द्वारा अभिभावकों का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य महोदय पर हरिसिंह गोचर द्वारा विद्यालय की शैक्षिक उपलब्धियों, संस्कारयुक्त शिक्षा पद्धति एवं आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही अभिभावकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु सहयोग का आह्वान किया। गोष्ठी में बच्चों की प्रगति, अनुशासन, अध्ययन पद्धति एवं नैतिक मूल्यों पर विशेष चर्चा की गई। अभिभावकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यालय के प्रयासों की सराहना की तथा शिक्षा के स्तर को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु सुझाव दिए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय के भैया-बहिनों द्वारा प्रस्तुत प्रेरणादायक कार्यक्रम रहे, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग एवं सहभागिता मिलती रहेगी। यह गोष्ठी निश्चित ही विद्यालय एवं समाज के मध्य सशक्त सेतु का कार्य करेगी।10
- हरनावदाशाहजी.थाना क्षेत्र के कचनारिया खुर्द में अपने भाई के साथ खेल रही 12 साल की आलिया ने सोचा भी नही होगा कि खेल खेलते समय जिसे वो खिलौना समझ रही थी वो खिलोना नही बल्कि असली बंदूक थी जिसने बालिका की जान ही ले ली। बंदूक से बालिका की खोपडी बुरी तरह बिखर गई थी। घटना शुक्रवार दोपहर के समय की है लेकिन पुलिस शाम तक भी कुछ बताने से इनकार करती रही। और सिर्फ संदिग्ध मौत होने एवं मामले में पुलिस की जांच करने का हवाला देती रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कुम्भाखेड़ी ग्राम पंचायत के कचनारिया खुर्द गांव में शुक्रवार को 12 वर्षीय बालिका आलिया पुत्री निजाम मेव की गोली लगने से मौत हो गई। घटना के समय बालिका अपने 15 वर्षीय भाई के साथ कमरे में खेल रही थी। इसी दौरान अचानक गोली चल गई, जो बालिका के सिर में जा लगी। आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे तो आलिया चारपाई पर लहूलुहान हालत में पड़ी मिली। घटना के समय पिता गांव से बाहर थे, जबकि मां घर पर गेहूं साफ कर रही थी और दादी बाहर बैठी थी। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का निरीक्षण कर उसे सील कर दिया। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि घर में रखी अवैध टोपीदार बंदूक से यह हादसा हुआ। खेल-खेल में नाबालिग भाई से गोली चल गई, जिससे बालिका की मौके पर ही मौत हो गई। बारां के पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु के अनुसार, घर में अवैध हथियार रखने के मामले में पिता निजाम और हत्या के मामले में बालिका के नाबालिग भाई को डिटेन कर लिया गया है। बालिका के शव का शनिवार को पोस्टमार्टम करा पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया , जिसको गमगीन माहौल में सुपुर्दे खाक कर दिया गया । पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के दौरान निकले बंदूक के छर्रे - पोस्टमार्टम के दौरान प्रथम दृष्टया बंदूक की गोली लगने वाली बात ही सामने आई है। इस दौरान सिर में से बंदूक के छर्रे भी मिले हैं। एसपी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।3
- जानकारी रविवार शाम 7 बजे मिली शाहबाद में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई वहीं कस्बाथाना में दिनभर की तेज गर्मी के बाद शाम होते ही मौसम ने करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई। अचानक बदले मौसम से जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली, वहीं सड़कों पर पानी भरने से कुछ देर के लिए आवागमन प्रभावित भी हुआ। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों ने ठंडक का अहसास किया। बच्चे और युवा बारिश का आनंद लेते नजर आए। किसानों के लिए भी यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है। हालांकि, कुछ जगहों पर जलभराव की समस्या भी देखने को मिली।1
- Post by Narendra Kushwah1
- उपखंड के देवरी क्षेत्र का ढूंढावर गांव आदिवासी सहरिया बाहुल्य क्षेत्र में विकास के दावो की दम निकालता नजर आता है। एआई टेक्नोलॉजी के इस आधुनिक युग में पीने के पानी के इंतजाम के लिए पैदल लंबी दूरी तय कर पेयजल के जुगाड़ की कवायद यह दर्शाती है कि हमने कितना विकास किया है। ढूंढावर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओ वंचित है। गांव के लोग वर्षों से कुन्नू और तिलपसी नदी के दूषित पानी को छानकर पीने को मजबूर है। एन.एच. -27 से 3 किमी की दूर बसे इस गांव में करीब 180 मतदाता हैं, लेकिन यहां अब तक स्थाई पेयजल व्यवस्था नहीं हो सकी है, गर्मी के दिनो में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि पूरे साल यही हाल रहता है। गांव की महिलाएं प्रतिदिन एक किलोमीटर दूर दुर्गम रास्तों से होकर नदी तक पहुंचती है। यहां कंकड़ पत्थर हटाकर छोटी-सी झिरियां (गड्डा) बनाती हैं। शुरुआत में गंदा पानी निकालकर फेकती हैं, बाद में उसे कपड़े से छानकर बर्तनों में भरकर घर लाती है। यही पानी पीने और घरेलू उपयोग में लिया जाता है। है। हलाकी दो दिन से सोशल मीडिया पर ढूंढावर गांव में पेयजल समस्या की खबरें चल रही इस दौरान जलदाय विभाग शाहाबाद ने ढूंढावर सहित जहां पेयजल की दिक्कत है जल्द ही समाधान की कोशिश की पोस्ट की है।1
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- yada karta hu aap sab ka aayog milega4
- जानकारी रविवार सुबह 11 बजे मिली ग्राम ओगाड़ में अज्ञात कारणों से बाड़ों में भीषण आग लग गई, जिससे कई ग्रामीणों की सामग्री जलकर नष्ट हो गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। आग की चपेट में प्यारेलाल, भरत पुत्र जगन्नाथ, घसीटा, हरगोविंद, सुआलाल, गुलाब, बलवीर और रामगोपाल सहित कई लोगों के बाड़े आए, जहां रखे पाइप, भूसा और देशी खाद जल गई। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कुओं में पंप डालकर आग बुझाने का प्रयास किया और काफी हद तक आग पर काबू पा लिया। फायर ब्रिगेड को सूचना देने पर वाहन करीब ढाई घंटे बाद मौके पर पहुंचा, तब तक लगभग 40 प्रतिशत आग बुझ चुकी थी। नुकसान में कल्याण सिंह के 200 पाइप, भूसा और खाद, जगदीश के 150 पाइप व अन्य सामग्री, भरत के 60 पाइप , घसीटा के 110 पाइप, हरगोविंद के 25 पाइप सहित कई किसानों का भूसा और उपकरण जल गए। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।1
- काला धुंआ छोड़ती शाहाबाद की सड़कों पर मध्यप्रदेश की बसें1