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3 hrs ago
user_Rajpal singh Rajput
Rajpal singh Rajput
गोपदबनास, सीधी, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का सख्त रुख समय पर कार्यालय न पहुंचने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगाई जमकर क्लास *♦️रीवा : समाचार अपडेट* शासकीय कार्यों में कसावट लाने और कार्य संस्कृति में सुधार के उद्देश्य से कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी इन दिनों बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय एवं जिला पंचायत कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।इस दौरान निर्धारित समय के बाद कार्यालय पहुंचने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को कलेक्टर की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा। *औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप* आज सुबह जैसे ही कार्यालयीन समय शुरू हुआ, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अचानक कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत कार्यालय जा पहुंचे। उनके साथ अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी एवं जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर भी मौजूद रहे।निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी अपने कक्षों से नदारद मिले, जिसे देखकर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। *अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी* देरी से आने वाले कर्मचारियों को मौके पर ही बुलाकर कलेक्टर ने जमकर फटकार लगाई।उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित समय सुबह 10:00 बजे सभी अधिकारी और कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आम जनता दूर-दराज के गांवों से अपने काम लेकर आती है, ऐसे में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें भटकना पड़ता है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है। *अधिकारियों को दिए निर्देश* कलेक्टर श्री सूर्यवंशी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि विलंब से आने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उपस्थिति रजिस्टर और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की नियमित निगरानी हो।भविष्य में भी इसी तरह के आकस्मिक निरीक्षण जारी रहेंगे।इस औचक निरीक्षण के बाद से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। कलेक्टर के इस सख्त तेवर से यह साफ संदेश गया है कि शासकीय सेवा में लापरवाही और समय की पाबंदी का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी गाज गिर सकती है।
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    कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का सख्त रुख समय पर कार्यालय न पहुंचने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगाई जमकर क्लास
*♦️रीवा : समाचार अपडेट*
शासकीय कार्यों में कसावट लाने और कार्य संस्कृति में सुधार के उद्देश्य से कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी इन दिनों बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय एवं जिला पंचायत कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।इस दौरान निर्धारित समय के बाद कार्यालय पहुंचने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को कलेक्टर की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा।
*औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप* 
आज सुबह जैसे ही कार्यालयीन समय शुरू हुआ, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अचानक कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत कार्यालय जा पहुंचे। उनके साथ अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी एवं जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर भी मौजूद रहे।निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी अपने कक्षों से नदारद मिले, जिसे देखकर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
*अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी*
देरी से आने वाले कर्मचारियों को मौके पर ही बुलाकर कलेक्टर ने जमकर फटकार लगाई।उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित समय सुबह 10:00 बजे सभी अधिकारी और कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आम जनता दूर-दराज के गांवों से अपने काम लेकर आती है, ऐसे में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें भटकना पड़ता है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है।
*अधिकारियों को दिए निर्देश* 
कलेक्टर श्री सूर्यवंशी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि विलंब से आने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उपस्थिति रजिस्टर और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की नियमित निगरानी हो।भविष्य में भी इसी तरह के आकस्मिक निरीक्षण जारी रहेंगे।इस औचक निरीक्षण के बाद से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। कलेक्टर के इस सख्त तेवर से यह साफ संदेश गया है कि शासकीय सेवा में लापरवाही और समय की पाबंदी का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी गाज गिर सकती है।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सिंगरौली (सरई) | जिले की सरई नगर परिषद इन दिनों विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने को लेकर चर्चा में है। आलम यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी भाजपा समर्थित अध्यक्ष और पार्षदों के आगे 'नतमस्तक' होकर मूकदर्शक बने हुए हैं। वार्ड नंबर 13: 25 लाख का सामुदायिक शौचालय या भ्रष्टाचार का स्मारक? नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 में इन दिनों एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भूमि पूजन के अनुसार इसकी लागत 24 लाख 92 हजार रुपये बताई गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति भयावह है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता को ताक पर रखकर बालू, गिट्टी और सीमेंट का उपयोग नाममात्र के लिए किया जा रहा है। हैरान करने वाली खामियां: • रेत की नींव: आरोप है कि शौचालय के कॉलम के लिए गड्ढे रेत वाली मिट्टी में मात्र 2-2 फिट गहरे खोदे गए हैं। • घटिया सामग्री: निर्माण कार्य में मानक के विपरीत सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। • जल्दबाजी में लीपापोती: काम को इतनी तेजी से निपटाया जा रहा है ताकि कोई अधिकारी खुदाई करके गुणवत्ता की जांच न कर सके। चर्चा है कि निरीक्षण को केवल 'गुलाबी नोटों' के दम पर मैनेज करने की तैयारी है। कमीशनखोरी और 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' का खेल। सूत्रों की मानें तो सरई नगर परिषद में निर्माण कार्य 'ठेकेदारी पर ठेकेदारी' (Sub-letting) के आधार पर चल रहे हैं। जब मुख्य ठेका कमीशन की बुनियाद पर तय होता है, तो गुणवत्ता की उम्मीद बेमानी हो जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं; स्थानीय जनता उन्हें केवल सत्ताधारियों की 'कठपुतली' मान रही है। कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल: सोशल मीडिया तक सीमित जिला प्रशासन? सिंगरौली कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल सोशल मीडिया पर उपलब्धियों के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरई नगर परिषद के भ्रष्टाचार को लेकर अब तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं की गई है। उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता से जनता की उम्मीद। वार्ड नंबर 13 के पार्षद और नगर परिषद के उपाध्यक्ष आदरणीय विजय कुमार गुप्ता से क्षेत्रीय जनता ने अपील की है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की समीक्षा करें। जनता का कहना है कि जो लोग खुद को 'सामाजिक कार्यों के दाता' कहते हैं, उनका समाज सेवा का रास्ता भ्रष्टाचार की सीढ़ियों से होकर गुजर रहा है। "क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की नीति को सरई नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।"
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    सिंगरौली (सरई) | जिले की सरई नगर परिषद इन दिनों विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने को लेकर चर्चा में है। आलम यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी भाजपा समर्थित अध्यक्ष और पार्षदों के आगे 'नतमस्तक' होकर मूकदर्शक बने हुए हैं।
वार्ड नंबर 13: 25 लाख का सामुदायिक शौचालय या भ्रष्टाचार का स्मारक?
नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 में इन दिनों एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भूमि पूजन के अनुसार इसकी लागत 24 लाख 92 हजार रुपये बताई गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति भयावह है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता को ताक पर रखकर बालू, गिट्टी और सीमेंट का उपयोग नाममात्र के लिए किया जा रहा है।
हैरान करने वाली खामियां:
• रेत की नींव: आरोप है कि शौचालय के कॉलम के लिए गड्ढे रेत वाली मिट्टी में मात्र 2-2 फिट गहरे खोदे गए हैं।
• घटिया सामग्री: निर्माण कार्य में मानक के विपरीत सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
• जल्दबाजी में लीपापोती: काम को इतनी तेजी से निपटाया जा रहा है ताकि कोई अधिकारी खुदाई करके गुणवत्ता की जांच न कर सके। चर्चा है कि निरीक्षण को केवल 'गुलाबी नोटों' के दम पर मैनेज करने की तैयारी है।
कमीशनखोरी और 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' का खेल।
सूत्रों की मानें तो सरई नगर परिषद में निर्माण कार्य 'ठेकेदारी पर ठेकेदारी' (Sub-letting) के आधार पर चल रहे हैं। जब मुख्य ठेका कमीशन की बुनियाद पर तय होता है, तो गुणवत्ता की उम्मीद बेमानी हो जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं; स्थानीय जनता उन्हें केवल सत्ताधारियों की 'कठपुतली' मान रही है।
कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल: सोशल मीडिया तक सीमित जिला प्रशासन?
सिंगरौली कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल सोशल मीडिया पर उपलब्धियों के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरई नगर परिषद के भ्रष्टाचार को लेकर अब तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं की गई है।
उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता से जनता की उम्मीद।
वार्ड नंबर 13 के पार्षद और नगर परिषद के उपाध्यक्ष आदरणीय विजय कुमार गुप्ता से क्षेत्रीय जनता ने अपील की है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की समीक्षा करें। जनता का कहना है कि जो लोग खुद को 'सामाजिक कार्यों के दाता' कहते हैं, उनका समाज सेवा का रास्ता भ्रष्टाचार की सीढ़ियों से होकर गुजर रहा है।
"क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की नीति को सरई नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।"
    user_Mithilesh Kumar Yadav
    Mithilesh Kumar Yadav
    Newspaper publisher सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by Abhishek Pandey
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    Post by Abhishek Pandey
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    1 hr ago
  • Post by Prime 24 News
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    Post by Prime 24 News
    user_Prime 24 News
    Prime 24 News
    हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by बुद्धसेन चौरसिया
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    Post by बुद्धसेन चौरसिया
    user_बुद्धसेन चौरसिया
    बुद्धसेन चौरसिया
    Photographer रायपुर - करचुलियां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • TMC की चली भयंकर आंधी,जब्त हो गई भाजपा की जमानत?
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    TMC की चली भयंकर आंधी,जब्त हो गई भाजपा की जमानत?
    user_Neeraj tiwari
    Neeraj tiwari
    पत्रकार हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • 🚨 क्या बिहारी होना गुनाह है? 🚨 दिल्ली में एक दर्दनाक घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। पांडव कुमार, एक मेहनतकश बिहारी युवक, जो Zomato में डिलीवरी का काम करते थे, उनकी कथित तौर पर एक दिल्ली पुलिस हवलदार द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पहले उनसे पूछा गया — “कहाँ से हो?” और जैसे ही उन्होंने कहा “बिहार से”, नफरत ने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया। गोली पांडव के सीने को चीरती हुई उनके दोस्त कृष्ण को भी जा लगी। पांडव अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि कृष्ण जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्या मेहनत करना गुनाह है? क्या बिहार, यूपी, राजस्थान या किसी दूसरे राज्य से होना अपराध है? या फिर इस देश में अब इंसान की पहचान उसके कर्म से नहीं, उसके राज्य से होगी? “अगर खिलाफ हैं होने दो, जान थोड़ी है, ये सब धुआँ है, कोई आसमान थोड़ी है। हम सबका खून शामिल है यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।” — Rahat Indori आज देश को बाँटने की राजनीति, जाति-धर्म और क्षेत्रवाद का ज़हर समाज को खोखला कर रहा है। दिल्ली जैसी राजधानी में अगर कोई मेहनतकश युवक सुरक्षित नहीं, अगर गरीब न्याय के लिए दर-दर भटकता है, तो यह सिर्फ कानून व्यवस्था पर नहीं बल्कि हमारी इंसानियत पर भी सवाल है। मैं एक वकील होने के नाते यह प्रण लेता हूँ कि गरीब, मजलूम, पीड़ित और बेआवाज़ लोगों के लिए आख़िरी साँस तक न्याय की लड़ाई लड़ता रहूँगा — चाहे लड़ाई सिस्टम से ही क्यों न लड़नी पड़े। 🇮🇳 ना बिहारी, ना मद्रासी, ना राजस्थानी, ना पहाड़ी — सबसे पहले हम हिंदुस्तानी हैं।
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    🚨 क्या बिहारी होना गुनाह है? 🚨
दिल्ली में एक दर्दनाक घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।
पांडव कुमार, एक मेहनतकश बिहारी युवक, जो Zomato में डिलीवरी का काम करते थे, उनकी कथित तौर पर एक दिल्ली पुलिस हवलदार द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पहले उनसे पूछा गया — “कहाँ से हो?” और जैसे ही उन्होंने कहा “बिहार से”, नफरत ने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया।
गोली पांडव के सीने को चीरती हुई उनके दोस्त कृष्ण को भी जा लगी।
पांडव अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि कृष्ण जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।
क्या मेहनत करना गुनाह है?
क्या बिहार, यूपी, राजस्थान या किसी दूसरे राज्य से होना अपराध है?
या फिर इस देश में अब इंसान की पहचान उसके कर्म से नहीं, उसके राज्य से होगी?
“अगर खिलाफ हैं होने दो, जान थोड़ी है,
ये सब धुआँ है, कोई आसमान थोड़ी है।   
हम सबका खून शामिल है यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।”
— Rahat Indori
आज देश को बाँटने की राजनीति, जाति-धर्म और क्षेत्रवाद का ज़हर समाज को खोखला कर रहा है। दिल्ली जैसी राजधानी में अगर कोई मेहनतकश युवक सुरक्षित नहीं, अगर गरीब न्याय के लिए दर-दर भटकता है, तो यह सिर्फ कानून व्यवस्था पर नहीं बल्कि हमारी इंसानियत पर भी सवाल है।
मैं एक वकील होने के नाते यह प्रण लेता हूँ कि गरीब, मजलूम, पीड़ित और बेआवाज़ लोगों के लिए आख़िरी साँस तक न्याय की लड़ाई लड़ता रहूँगा — चाहे लड़ाई सिस्टम से ही क्यों न लड़नी पड़े।
🇮🇳 ना बिहारी, ना मद्रासी, ना राजस्थानी, ना पहाड़ी —
सबसे पहले हम हिंदुस्तानी हैं।
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    Local News Reporter Mauganj, Rewa•
    3 hrs ago
  • 'शराबी' माताओं पर धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान: छिड़ी नई बहस बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों के कारण एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने बड़े घरानों की महिलाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि संपन्न परिवारों की माताएं शराब पी रही हैं। उन्होंने तीखा प्रहार किया कि जो माताएं खुद शराब पिएंगी, वे बच्चों को संस्कार कैसे देंगी? शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि ऐसी महिलाएं बच्चों के रोने पर उन्हें भी शराब पिलाकर सुला देंगी।
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    'शराबी' माताओं पर धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान: छिड़ी नई बहस
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों के कारण एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने बड़े घरानों की महिलाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि संपन्न परिवारों की माताएं शराब पी रही हैं। उन्होंने तीखा प्रहार किया कि जो माताएं खुद शराब पिएंगी, वे बच्चों को संस्कार कैसे देंगी? शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि ऐसी महिलाएं बच्चों के रोने पर उन्हें भी शराब पिलाकर सुला देंगी।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • जिसमें सैकड़ो यात्री और सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थी हो रहे परेशान
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    जिसमें सैकड़ो यात्री और सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थी हो रहे परेशान
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    1 hr ago
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