सरई नगर परिषद बना भ्रष्टाचार का अड्डा: विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं, कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहा सरकारी पैसा। सिंगरौली (सरई) | जिले की सरई नगर परिषद इन दिनों विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने को लेकर चर्चा में है। आलम यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी भाजपा समर्थित अध्यक्ष और पार्षदों के आगे 'नतमस्तक' होकर मूकदर्शक बने हुए हैं। वार्ड नंबर 13: 25 लाख का सामुदायिक शौचालय या भ्रष्टाचार का स्मारक? नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 में इन दिनों एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भूमि पूजन के अनुसार इसकी लागत 24 लाख 92 हजार रुपये बताई गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति भयावह है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता को ताक पर रखकर बालू, गिट्टी और सीमेंट का उपयोग नाममात्र के लिए किया जा रहा है। हैरान करने वाली खामियां: • रेत की नींव: आरोप है कि शौचालय के कॉलम के लिए गड्ढे रेत वाली मिट्टी में मात्र 2-2 फिट गहरे खोदे गए हैं। • घटिया सामग्री: निर्माण कार्य में मानक के विपरीत सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। • जल्दबाजी में लीपापोती: काम को इतनी तेजी से निपटाया जा रहा है ताकि कोई अधिकारी खुदाई करके गुणवत्ता की जांच न कर सके। चर्चा है कि निरीक्षण को केवल 'गुलाबी नोटों' के दम पर मैनेज करने की तैयारी है। कमीशनखोरी और 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' का खेल। सूत्रों की मानें तो सरई नगर परिषद में निर्माण कार्य 'ठेकेदारी पर ठेकेदारी' (Sub-letting) के आधार पर चल रहे हैं। जब मुख्य ठेका कमीशन की बुनियाद पर तय होता है, तो गुणवत्ता की उम्मीद बेमानी हो जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं; स्थानीय जनता उन्हें केवल सत्ताधारियों की 'कठपुतली' मान रही है। कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल: सोशल मीडिया तक सीमित जिला प्रशासन? सिंगरौली कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल सोशल मीडिया पर उपलब्धियों के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरई नगर परिषद के भ्रष्टाचार को लेकर अब तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं की गई है। उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता से जनता की उम्मीद। वार्ड नंबर 13 के पार्षद और नगर परिषद के उपाध्यक्ष आदरणीय विजय कुमार गुप्ता से क्षेत्रीय जनता ने अपील की है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की समीक्षा करें। जनता का कहना है कि जो लोग खुद को 'सामाजिक कार्यों के दाता' कहते हैं, उनका समाज सेवा का रास्ता भ्रष्टाचार की सीढ़ियों से होकर गुजर रहा है। "क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की नीति को सरई नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।"
सरई नगर परिषद बना भ्रष्टाचार का अड्डा: विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं, कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहा सरकारी पैसा। सिंगरौली (सरई) | जिले की सरई नगर परिषद इन दिनों विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने को लेकर चर्चा में है। आलम यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी भाजपा समर्थित अध्यक्ष और पार्षदों के आगे 'नतमस्तक' होकर मूकदर्शक बने हुए हैं। वार्ड नंबर 13: 25 लाख का सामुदायिक शौचालय या भ्रष्टाचार का स्मारक? नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 में इन दिनों एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भूमि पूजन के अनुसार इसकी लागत 24 लाख 92 हजार रुपये बताई गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति भयावह है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता को ताक पर रखकर बालू, गिट्टी और सीमेंट का उपयोग नाममात्र के लिए किया जा रहा है। हैरान करने वाली खामियां: •
रेत की नींव: आरोप है कि शौचालय के कॉलम के लिए गड्ढे रेत वाली मिट्टी में मात्र 2-2 फिट गहरे खोदे गए हैं। • घटिया सामग्री: निर्माण कार्य में मानक के विपरीत सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। • जल्दबाजी में लीपापोती: काम को इतनी तेजी से निपटाया जा रहा है ताकि कोई अधिकारी खुदाई करके गुणवत्ता की जांच न कर सके। चर्चा है कि निरीक्षण को केवल 'गुलाबी नोटों' के दम पर मैनेज करने की तैयारी है। कमीशनखोरी और 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' का खेल। सूत्रों की मानें तो सरई नगर परिषद में निर्माण कार्य 'ठेकेदारी पर ठेकेदारी' (Sub-letting) के आधार पर चल रहे हैं। जब मुख्य ठेका कमीशन की बुनियाद पर तय होता है, तो गुणवत्ता की उम्मीद बेमानी हो जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं; स्थानीय जनता उन्हें केवल सत्ताधारियों की 'कठपुतली' मान रही है। कलेक्टर
की कार्यप्रणाली पर सवाल: सोशल मीडिया तक सीमित जिला प्रशासन? सिंगरौली कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर भी क्षेत्र में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल सोशल मीडिया पर उपलब्धियों के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरई नगर परिषद के भ्रष्टाचार को लेकर अब तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं की गई है। उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता से जनता की उम्मीद। वार्ड नंबर 13 के पार्षद और नगर परिषद के उपाध्यक्ष आदरणीय विजय कुमार गुप्ता से क्षेत्रीय जनता ने अपील की है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की समीक्षा करें। जनता का कहना है कि जो लोग खुद को 'सामाजिक कार्यों के दाता' कहते हैं, उनका समाज सेवा का रास्ता भ्रष्टाचार की सीढ़ियों से होकर गुजर रहा है। "क्या मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की नीति को सरई नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।"
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- सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र में मंगलवार को रेलवे निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया, जहां बाल कल्याण समिति की सदस्य एवं अधिवक्ता रंजना मिश्रा ने नाबालिग बालिकाओं के साथ धरना प्रदर्शन करते हुए न केवल रेलवे कार्य रोकने की चेतावनी दी, बल्कि सड़क निर्माण न होने पर आत्मदाह करने तक की बात कह दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला उस स्थल का है जहां रेलवे लाइन निर्माण के चलते पुरानी सड़क को तोड़ा गया है और नई अप्रोच सड़क बनाई जा रही है, जो अभी अधूरी है। प्रदर्शन के दौरान रंजना मिश्रा ने कहा कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो “मैं और हम सब आत्मदाह कर लेंगे, उसके बाद हमारी लाशों के ऊपर से रेलवे का काम किया जाए।” उनके इस बयान से मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। धरने में नाबालिग बालिकाओं की मौजूदगी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बाल संरक्षण से जुड़े पद पर रहते हुए इस तरह बच्चों को विरोध प्रदर्शन में शामिल करना नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। सूचना मिलने पर तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष मिश्रा मौके पर पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हुई। रंजना मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्हें सड़क निर्माण को लेकर गलत जानकारी दी गई थी और मौके पर स्थिति अलग मिली। वहीं तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि रेलवे कार्य नियमानुसार जारी रहेगा और किसी भी प्रकार का अनैतिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। तहसीलदार आशीष मिश्रा ने यह भी कहा कि विरोध व्यक्तिगत हितों से प्रेरित प्रतीत होता है और प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई हैं। कुछ लोग सड़क की समस्या को जायज बता रहे हैं, जबकि कई इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत हितों से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। नाबालिगों की भागीदारी और आत्मदाह जैसे बयान ने इस विरोध को और अधिक संवेदनशील और विवादित बना दिया है।1
- सोनभद्र के राजकीय मेडिकल कॉलेज लोढ़ी में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने अचानक औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान डीएम ने अस्पताल की साफ-सफाई, इलाज व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया और खामियां मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए डीएम ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल परिसर में साफ-सफाई किसी भी हाल में बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमित निगरानी अनिवार्य होगी। साथ ही मरीजों को समय से दवा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए बिजली व्यवस्था पर खास फोकस निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्युत आपूर्ति को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। अधिशासी अभियंता को निर्देश दिया गया कि मेडिकल कॉलेज में बिजली आपूर्ति हर हाल में निर्बाध रहे। किसी भी तरह की समस्या आने पर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, वरना कार्रवाई तय मानी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल के लिए नया फीडर तैयार हो चुका है, जो जल्द चालू होगा। स्टाफ की कमी बनी चिंता निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों की कमी की समस्या रखी। इस पर डीएम ने भरोसा दिलाया कि उच्च स्तर पर पत्राचार कर जल्द समाधान कराया जाएगा। मरीज से फोन पर ली फीडबैक डीएम ने पूजा यादव नामक मरीज के परिजन से सीधे मोबाइल पर बात कर ब्लड जांच रिपोर्ट समय से मिलने की जानकारी ली। परिजनों ने संतोष जताते हुए बताया कि रिपोर्ट समय पर मिली है। ऑक्सीजन प्लांट का भी लिया जायजा निरीक्षण के दौरान डीएम ने ऑक्सीजन प्लांट का भी निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज राय सहित मेडिकल कॉलेज के कई वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी मौजूद रहे।1
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