क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी? क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी?
क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी? क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी?
- सासनी में दो पक्षों के बीच विवाद, फायरिंग और सीसीटीवी फुटेज आया सामने सासनी के गांव बसगोई में मंगलवार देर रात दो पक्षों में विवाद और फायरिंग हुई। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। घटना की शिकायत बसगोई निवासी पार्वती पत्नी अजय चैहान ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि कुछ लोग थार गाड़ी से उनके घर आए और तमंचे-पिस्तौल से गोलियां चलाईं। पार्वती ने आरोप लगाया कि उनके बेटों अविलाश और अवतार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई, जिसमें वे बाल-बाल बचे। घर के बाहर कारतूस और दीवारों पर गोली के निशान भी मिले थे। वहीं, दूसरे पक्ष के ग्राम लालगढ़ी निवासी जय प्रताप ने भी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह अपनी थार गाड़ी से जा रहे थे, तब बसगोई के पास कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रोककर फायरिंग की और उनका पीछा किया। बुधवार देर रात करीब 9.30 बजे सीओ सिटी हिमांशु मथुरा ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसपी के निर्देश पर एसओजी टीम और थाना सासनी पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की। पुलिस ने इस घटना का खुलासा करते हुए चार आरोपियों मोहित, अभय, सुधीर उर्फ सिद्धू और जयप्रकाश को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल की गई थार गाड़ी, दो तमंचे 315 बोर, 10 जिंदा कारतूस और दो खाली खोखे बरामद किए हैं। सीओ सिटी हिमांशु माथुर ने बताया कि पुलिस पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है।4
- अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में DM की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कार्रवाई का पूरा ब्यौरा जारी अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में DM की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कार्रवाई का पूरा ब्यौरा जारी कौशाम्बी। जनपद में बीते सोमवार दोपहर करीब 11 बजे पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर जिला प्रशासन ने अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सामने रखा है। मामले को लेकर जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना के बाद प्रशासन और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी। डीएम ने बताया कि हादसे के बाद राहत-बचाव कार्य के साथ ही मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके के बाद प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। फैक्ट्री संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका, लाइसेंस और सुरक्षा मानकों समेत तमाम बिंदुओं की जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही और अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाइट = जिलाधिकारी कौशांबी अमित पाल शर्मा1
- क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी? क्या भाजपा सरकार इस बिटिया के आंसू भी नहीं देख पा रही? बलिया की 7 साल की रागिनी आज भी एक पैर से कूदते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। 6 महीने की उम्र में हादसे में उसका एक पैर टूट गया था। आज 7 साल की हो गई, लेकिन हालात नहीं बदले। घर से स्कूल महज 400 मीटर दूर है, मगर यह दूरी रागिनी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। परिवार झोंपड़ी में रहने को मजबूर है। 7 साल पहले इलाज के लिए पैसे नहीं थे, आज भी नहीं हैं। एक ट्राइसाइकिल मिल जाए तो यह बच्ची बिना इस कष्ट के स्कूल जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल है—प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? भाजपा सरकार की संवेदनाएं कब जागेंगी? जब एक मासूम बच्ची पढ़ने के लिए हर दिन दर्द सहकर स्कूल जा रही है, तब सरकार और प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहे हैं? रागिनी हार नहीं मानेगी… लेकिन क्या सरकार उसकी मदद करने की जिम्मेदारी निभाएगी?1
- जहां कृष्ण का नाम होता है, वहां हर मुश्किल का समाधान होता है।” नाम है जिनके बड़े निराले माखन चोर जगत के रखवाले वो है कृष्ण बंसी वाले जे पी सिंह पत्रकार एम डी न्यूज़ अलीगढ की तरफ से समस्त क्षेत्र वासियों व नगर वासियों एवं देशवासियों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं1
- हाथरस/सहपऊ:मकान में चल रहा था जुए का अड्डा, पांच अंतरजनपदीय जुआरी गिरफ्तार1
- हाथरस में शर्मनाक तस्वीर: मथु के सरकारी स्कूल तक रास्ता नहीं, कीचड़-दलदल से जूझकर प्लॉटों से स्कूल पहुंच रहे बच्चे-शिक्षक - ADHR ने SDM सदर से मिलकर चकरोड पैमाइश की मांग की जनपद हाथरस के विकास खण्ड मुरसान स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय, मथु की बदहाल स्थिति को लेकर एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (ADHR) की टीम ने राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण वार्ष्णेय के नेतृत्व में स्थलीय निरीक्षण किया। A d h r का निरीक्षण, विद्यालय का मुख्य मार्ग कीचड़, दलदल और जलभराव से पूरी तरह अटा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बच्चे, शिक्षक और स्टाफ मुख्य मार्ग के बजाय बराबर स्थित निजी प्लॉटों से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं। जबकि स्कूल अंदर से व्यवस्थित और सही पाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी निकासी के पुराने रास्ते को आगे अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे जलभराव स्थायी हो गया है। *ADHR का बयान:* राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण वार्ष्णेय ने कहा - "80 वर्ष की आजादी के बाद भी बच्चों को सुरक्षित स्कूल मार्ग न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह संविधान के अनुच्छेद 21-क के तहत शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। गांव की राजनीति से ऊपर उठकर बच्चों की सुरक्षा पहले सुनिश्चित हो।"जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने कहा - "जब बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच ही नहीं सकते, तो शिक्षा का अधिकार अधूरा है।" प्रशासन से मागें निरीक्षण के बाद टीम ने SDM सदर राज बहादुर से मिलकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। ADHR ने मांग की कि - 1. SDM के नेतृत्व में राजस्व टीम द्वारा चकरोड की विधिवत पैमाइश कराई जाए 2. विकास खण्ड स्तर से मार्ग सुचारु कराया जाए 3. जलभराव के लिए स्थायी नाली/निकासी व्यवस्था बनाई जाए बताया गया कि BDO मुरसान द्वारा भी SDM को पैमाइश के लिए पत्र लिखा गया है। इसके बाद टीम खण्ड विकास कार्यालय मुरसान भी पहुंची और अधिकारियों से वार्ता की। प्रवीण वार्ष्णेय ने चेतावनी दी - "ADHR तब तक शांत नहीं बैठेगा जब तक स्थायी समाधान नहीं होता। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों के अधिकारों के लिए आंदोलन करेंगे। यह राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य का सवाल है।" *ADHR का स्पष्ट संदेश - "बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। स्कूल तक सुरक्षित रास्ता प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।"निरीक्षण में रवि गुप्ता, बाल प्रकाश वार्ष्णेय आदि उपस्थित रहे।4
- मथुरा बरेली नेशनल हाईवे पर बाइकों से खतरनाक स्टंट करने वाले दो अभियुक्तों को पुलिस ने हिरासत में लेकर अपाचे बाइक की सीज जनपद हाथरस की हाथरस गेट कोतवाली क्षेत्र के मथुरा बरेली नेशनल हाईवे पर खतरनाक स्टंट करते हुए दो अभियुक्तों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में कोतवाली हाथरस गेट पुलिस ने जांच कर मथुरा बरेली नेशनल हाईवे पर खतरनाक स्टंट के वीडियो में दिख रहे दो अभियुक्तों को हिरासत में लिया है। साथ ही स्टंट के दौरान उपयोग की गई अपाचे बाइक को पुलिस ने सीज किया है। इस संबंध में क्षेत्राधिकारी नगर हिमांशु माथुर ने जानकारी दी है।1
- सासनी के नगला सिंह प्राथमिक विद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न, बच्चों ने दिखाई प्रतिभा सासनी के नगला सिंह प्राथमिक विद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिता संपन्न, बच्चों ने दिखाई प्रतिभा सासनी (हाथरस)। जनपद हाथरस के बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार मंगलवार को विकास क्षेत्र सासनी के अंतर्गत आने वाले परिषदीय विद्यालय नगला सिंह में खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें खेल भावना, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा। कार्यक्रम की जानकारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय द्वारा दी गई, जिसमें ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रतियोगिता का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके उपरांत बच्चों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दौड़, कबड्डी, खो-खो और लंबी कूद जैसी स्पर्धाओं में छात्र-छात्राओं ने अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। खेल के मैदान में बच्चों का जोश और उनका आपसी तालमेल देखते ही बनता था, जिसने यह साबित कर दिया कि आज के नौनिहाल पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद के क्षेत्र में भी पीछे नहीं हैं। इस अवसर पर शिक्षकों ने उपस्थित बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा का एक अभिन्न अंग हैं। विद्यालयों में खेलकूद बच्चों को स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाते हैं। खेल भावना के माध्यम से बच्चों में टीमवर्क, नेतृत्व और जीवन की कठिन चुनौतियों का डटकर सामना करने की क्षमता विकसित होती है। विभाग की मंशा है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ खेलने का भरपूर अवसर मिले, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें। प्रतियोगिता के अंत में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस दौरान विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और इस आयोजन की सराहना की।1