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उन वीरों को शत-शत नमन भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌹🌹 जो रक्षा करते-करते शहीद हो गए
Mamta chaurasiya
उन वीरों को शत-शत नमन भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌹🌹 जो रक्षा करते-करते शहीद हो गए
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- #Apkiawajdigital गोरखपुर | सोमवार, 23 मार्च 2026 भूमिका: उत्तर प्रदेश की सियासत में कल एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने समर्थकों को हैरान और विरोधियों को हमलावर कर दिया है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में, जहाँ 'सुशासन' का डंका बजता है, वहाँ कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद भरे मंच पर बच्चों की तरह फूट-फूटकर रो पड़े। उनके शब्द और उनके आंसू सीधे तौर पर व्यवस्था की विफलता की ओर इशारा कर रहे थे। मंच पर छलका दर्द: रविवार की दोपहर जब जनसभा को संबोधित करने की बारी आई, तो मंत्री जी का गला रुंध गया। उन्होंने भरी महफ़िल में कहा— "हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है, हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है।" एक कैबिनेट मंत्री का यह बयान केवल एक भावुक भाषण नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार के तंत्र पर एक 'अविश्वास प्रस्ताव' जैसा प्रतीत हुआ। जनता का सवाल: संवेदना या असक्षमता? एक तरफ जहाँ निषाद समाज के लोग अपने नेता के आंसुओं से आहत हैं, वहीं दूसरी ओर जागरूक जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि: "अगर सरकार का एक कैबिनेट मंत्री, जिसके पास शक्ति और संसाधन हैं, वह न्याय के लिए रोएगा, तो आम जनता किसके पास जाएगी? यदि आप व्यवस्था सुधारने में असक्षम हैं, तो मंच पर रोने के बजाय 'इस्तीफा' देकर संघर्ष की राह क्यों नहीं चुनते?" निष्कर्ष: मंत्री के आंसुओं ने जनता को 'हतोत्साहित' किया है। सत्ता की कुर्सी पर बैठकर रोना सहानुभूति तो दिला सकता है, लेकिन समाधान नहीं। अब देखना यह है कि इन आंसुओं के बाद व्यवस्था में कोई बदलाव आता है या यह केवल चुनावी राजनीति का एक और भावुक अध्याय बनकर रह जाएगा।1
- Post by Mamta chaurasiya1
- बांदा के ग्राम लौमर में निःशुल्क विशाल नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया,जिसका शुभारंभ प्रदेश के मंत्री रामकेश निषाद ने किया।1
- उज्जैन में वेदविद्या बटुक की क्रूर पिटाई वजह जानकर रह जायेंगे दंग1
- बांदा। पुलिस लाइन बांदा में आज दिनांक 22 मार्च 2026 से 29वीं प्रयागराज जोन स्तरीय 03 दिवसीय अन्तर्जनपदीय पुलिस बास्केटबॉल एवं हैंडबॉल प्रतियोगिता का भव्य शुभारम्भ किया गया। प्रतियोगिता का उद्घाटन अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज द्वारा खिलाड़ियों से मान-प्रणाम ग्रहण कर किया गया।इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक ने सभी खिलाड़ियों को खेल भावना, अनुशासन एवं उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि टीम भावना और अनुशासन भी सिखाते हैं।तीन दिनों तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में प्रयागराज जोन के सात जनपदों—बांदा, महोबा, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर एवं प्रतापगढ़ की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं, जिससे मुकाबले रोमांचक होने की उम्मीद है।प्रतियोगिता के शुभारम्भ अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी लाइन मेविस टॉक, क्षेत्राधिकारी बबेरू सौरभ सिंह, क्षेत्राधिकारी यातायात प्रतिज्ञा सिंह, क्षेत्राधिकारी कार्यालय अखिलेश राजन तथा प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन बांदा श्री बेलास यादव सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।1
- बांदा। जनपद में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के चलते अब लोग पुराने विकल्प की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। यही वजह है कि बांदा में लकड़ी से चलने वाली भट्ठियों (चूल्हों) की मांग अचानक बढ़ गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक होटल, ढाबा संचालक और आम परिवार गैस की जगह लकड़ी भट्ठियों का इस्तेमाल करने लगे हैं। स्थानीय कारीगरों के अनुसार पिछले कुछ समय में भट्ठियों के ऑर्डर में काफी इजाफा हुआ है। जहां पहले कभी-कभार लोग भट्ठी बनवाते थे, वहीं अब रोजाना कई लोग इसके लिए संपर्क कर रहे हैं। ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा था, ऐसे में लकड़ी भट्ठी उनके लिए सस्ता और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई है। वहीं, आम लोगों का भी कहना है कि जब गैस समय पर नहीं मिल रही, तो लकड़ी चूल्हा ही सहारा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि लकड़ी भट्ठियों के बढ़ते उपयोग से धुआं और प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, गैस संकट के बीच बांदा में एक बार फिर पारंपरिक चूल्हों की वापसी हो रही है, जो लोगों की मजबूरी के साथ-साथ बदलते हालात की तस्वीर भी बयां कर रही है।1
- बांदा जनपद के बबेरू कस्बे के तिंदवारी रोड स्थिति पैराडाइज मैरिज हाल में आज रविवार की दोपहर 2 बजे से सजल साहित्य अकादमी बबेरू के द्वारा कलम के बोल विशाल प्रतिस्पर्धी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है, कार्यक्रम में सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित का कार्यक्रम की शुरुआत की गई। जिसमें कलम के बोल में नवांकुर कवियों के द्वारा समा बांधी गई, जिसमें कई जनपदों से आए हुए कवियों के द्वारा अपनी अपनी कविताओं के माध्यम से स्वयं इतनी सुंदर मेधा का प्रदर्शन किया। जिसका समस्त साहित्यकारों सहित आम जनमानस भावविभोर होकर तालियां बजा कर कवियों का स्वागत किया। संस्थान साहित्य अकादमी के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा पुरस्कृत डॉक्टर रामकरण साहू सजल ने साहित्य को प्रगति का प्राण बताते सभी उपस्थित साहित्यकारों को अपना अभिनंदन का स्वागत किया है। कवि सम्मेलन के साथ-साथ कवियों और क्रिएटरों का भी ,स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। जिसमें कवि राम अवतार साहू अतर्रा, मूलचंद कुशवाहा, सुभाष चंद्र चौरसिया महोबा ,संतोष द्विवेदी बिगुल महोबा, प्रमोद कुमार सरल मानिकपुर, राकेश गुप्ता, आनंद सिंह आकाश सिंह चौहान, शिशुपाल शिवाधार भारतीय, उमानंद सिंह, प्रदुम्न सिंह ,महेंद्र कुमार गुप्ता,राकेश सोनी फरमान खान सौरभ चक्रवर्ती, नरेंद्र निषाद, सहित अन्य काफी संख्या में साहित्यकारों ने अपने-अपने कवि के माध्यम से लोगों को सुनाया, इस मौके पर बांदा चित्रकूट महोबा हमीरपुर फतेहपुर सहित क्षेत्र के कवि मौजूद रहे।1
- #Apkiawajdigital ● बिना अनुमति बैनर लगाने पर हिरासत, बीच-बचाव करने पहुंचे पत्रकारों से RPF की अभद्रता ! ● महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार ने खड़े किए गंभीर सवाल: क्या RPF भूल गई अपनी मर्यादा ? ● बड़ा सवाल: आधी रात की कार्रवाई में कहाँ थीं महिला पुलिसकर्मी ? नियमों की धज्जियां उड़ीं ! बांदा। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 1-2 बजे बांदा रेलवे स्टेशन परिसर उस समय अखाड़ा बन गया, जब RPF के जवानों ने न केवल युवकों को हिरासत में लिया, बल्कि कवरेज और जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों के साथ भी 'गुंडई' पर उतारू हो गए। आरोप है कि एएसआई संतोष कुमार और उनकी टीम ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की और अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर खाकी की धौंस जमाई। बैनर का बहाना, पत्रकारों पर निशाना! मिली जानकारी के अनुसार, दो युवक स्टेशन परिसर में बिना अनुमति बैनर लगा रहे थे। नियमों के उल्लंघन पर RPF ने उन्हें हिरासत में लिया, जो कानूनी रूप से सही हो सकता है। लेकिन मामला तब बिगड़ा जब युवा जिला अध्यक्ष व पत्रकार नीरज निगम (RPASP) मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वर्दी के नशे में चूर कर्मियों ने उन्हें भी जबरन बैठा लिया और अपमानित किया। मर्यादा तार-तार: महिला पत्रकार के साथ अभद्रता इस पूरे घटनाक्रम का सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार श्रीमति रूपा गोयल जी के साथ बदसलूकी की गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि RPF कर्मियों ने उनके साथ न केवल धक्का-मुक्की की, बल्कि ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो किसी भी सभ्य समाज और अनुशासित बल के लिए कलंक है। सवालों के घेरे में RPF: कहाँ थीं महिला पुलिस ? इस घटना ने रेलवे प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है। कानून कहता है कि किसी भी कार्रवाई या पूछताछ के दौरान, जहाँ महिलाएं शामिल हों या संवेदनशील स्थिति हो, महिला पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य है। बड़ा सवाल यह है कि क्या बांदा RPF में महिला पुलिस की तैनाती नहीं है ? या फिर नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में अपनी मनमानी चलाना ही इनका पेशा बन गया है ? पत्रकार समुदाय में भारी उबाल, जांच की मांग घटना के बाद जिले के पत्रकारों में गहरा रोष है। पत्रकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने दोषी एएसआई और टीम पर तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप लेगा। स्थानीय पत्रकारों ने रेलवे के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सच सामने लाया जाए। आपके सवाल का जवाब: क्या RPF में महिला पुलिस नहीं होती ? जी नहीं, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के नियमों के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती अनिवार्य है। नियम: रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर प्रमुख स्टेशन और RPF पोस्ट पर महिला कांस्टेबल/अधिकारी की उपस्थिति होनी चाहिए, विशेषकर तब जब किसी महिला से पूछताछ करनी हो या रात के समय कोई कार्रवाई हो रही हो। हकीकत: बांदा जैसी महत्वपूर्ण पोस्ट पर महिला पुलिस की गैर-मौजूदगी या उनकी अनुपस्थिति में महिला पत्रकार से अभद्रता करना सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (DK Basu vs State of West Bengal) का भी उल्लंघन है।4