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जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरा माली,इलाज के दौरान मौत ग्वालियर जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरने से एक माली गंभीर रूप से घायल हो गया.माली को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां इलाज के दौरान माली की मौत हो गई. बताया जा रहा हैँ कि तबादले से नाराज था माली.पुलिस ने माली के शव को पीएम के लिए भिजवा दिया हैँ. मामले में पुलिस विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पूछताछ करेगी.
कृष्ण कांत शर्मा
जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरा माली,इलाज के दौरान मौत ग्वालियर जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरने से एक माली गंभीर रूप से घायल हो गया.माली को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां इलाज के दौरान माली की मौत हो गई. बताया जा रहा हैँ कि तबादले से नाराज था माली.पुलिस ने माली के शव को पीएम के लिए भिजवा दिया हैँ. मामले में पुलिस विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पूछताछ करेगी.
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- भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मणी महारानी जी जन्म स्थान कुदरकोट ( कुन्दनपुर ) बिधूना की याद में रुक्मिणी धाम चौरासी कोसी परिक्रमा महन्त छविराम दास, महन्त श्री शिवराज दास के नेतृत्व महामंडलेश्वर धनश्याम दास त्यागी, श्री अमरदास जी त्यागी के साथ सैकड़ों साधु-संत श्रृद्धालु भजन कीर्तन कर पैदल यात्रा निकाली जो कई क्षेत्रों से होकर निकाली गई जहां जगह-जगह भक्तों ने पुष्प वर्षा कर इनका भव्य स्वागत किया गया। यह चौरासी कोर्स परिक्रमा यात्रा 1 मार्च को पुनः कुदरकोट में समाप्त होगी। इन साधु-संतो का शासन से मांग है माता रुक्मणी महारानी का यहां एक भव्य मंदिर पर्टयक स्थल होना चाहिए। इतिहासकारों का कहना है जनपद इटावा से 30 किमी दूरी पर स्थित कस्बा कुदरकोट में माता रुक्मणी महारानी का जन्म हुआ था पहले इस स्थान का कुन्दनपुर था जहां मुगल सम्राटों ने मंदिर व जन्म स्थल को समाप्त करके इस जगह का नाम कुदरकोट रख दिया था। इन साधु-संतो का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दलों ने इस मंदिर क्षेत्र में कभी ध्यान नहीं दिया जहां महाभारत में भगवान कृष्ण की पत्नी महारानी माता रुक्मणी जी की भी पूजा की जाती है। इस अस्तित्व को बचाने के लिए यह चौरासी कोर्स परिक्रमा यात्रा निकाली गई।1
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- *नगर निगम के वार्ड बाराकला में गन्दा पानी भरने से सड़क बनी नहर, ग्रामीणों में आक्रोश।* *#जिला कलेक्टर को 8 दिन पहले जनसुनवाई में दिए आवेदन पर नहीं हुई कार्यवाही, किसान की 2 बीघा गेंहू की फसल हुई नष्ट।* भिण्ड, भिण्ड विधानसभा का बाराकला गांव परिसीमन की बलि चढ़ गया है, गांव के सभी विकास कार्य या तो ठप्प पड़े हैं या फिर कागज़ी घोड़ों पर चढ़कर खयाली रूप से पूर्ण दर्शा दिए गए हैं जिसका खामियाजा ग्रामवासियों को भुगतना पड़ रहा है, जिसका हालिया प्रमाण गांव के बीच रास्ते से गुजरने वाली सड़क है जिस पर उचित निकास न होने की वजह से गांव का गंदा पानी नालियों से बहकर सड़क पर जमा हो गया है, जिसकी वजह से उक्त सड़क नहर सदृश दिखाई देती है। ग्रामवासी रामनरेश ओझा ने बताया कि उक्त सड़क से ही हम सभी लोग गांव आ पाते हैं, अन्यत्र कोई रास्ता नहीं है, गांव के ही अन्य मजरे टोले भी इसी सड़क पर पड़ते हैं, शासकीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का स्कूल आना जाना बंद है। ग्रामीण रामनरेश ने बताया कि हालात इस प्रकार भयावह हैं कि महिलाएं, बच्चे सब घरों में कैद हैं, अगर कोई बीमार हो जाये तो अस्पताल तक पहुंचना दूभर है, मेरी 2 बीघा गेंहू की फसल गन्दा पानी भरने की वजह से नष्ट हो गयी है, जिला कलेक्टर को पिछले मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान आवेदन भी दिया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। अधिकारियों को भी हम लोगों की पीड़ा समझनी चाहिए, प्रशासन की उदासीनता एवं घोर अनदेखी की वजह से सभी ग्रामीणजन नारकीय जीवन जीने पर विवश हैं। ग्रामीणों से मीडिया के माध्यम से गुहार लगाई है कि उनकी विकट समस्या का निराकरण हो और किसान की नष्ट हुई फसल का पूर्ण जांच कर उचित मुआवजा दिया जाए।1