ऋषिऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर बड़ी अपडेट उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉड गेज रेल लाइन ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी, जिससे चारधाम यात्रा और पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत अधिकांश सुरंगों और पुलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तथा कई स्थानों पर ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अनुसार परियोजना में 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। यह रेल लाइन पहाड़ों के बीच अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण मानी जा रही है, जिसमें लंबी सुरंगें और बड़े रेलवे पुल शामिल हैं। देवप्रयाग और जनासू के बीच लगभग 14.58 किलोमीटर लंबी सुरंग को भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंगों में गिना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से कई घंटे लगते हैं, जबकि रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल रेलवे ट्रैक बिछाने और शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने का काम जारी है। अधिकारियों का लक्ष्य जल्द से जल्द इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जनता के लिए समर्पित करना है। #केदारनाथ #uttrakhand #foryou | Aap Tak India
ऋषिऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर बड़ी अपडेट उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉड गेज रेल लाइन ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी, जिससे चारधाम यात्रा और पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत अधिकांश सुरंगों और पुलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तथा कई स्थानों पर ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अनुसार परियोजना में 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। यह रेल लाइन पहाड़ों के बीच अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण मानी जा रही है, जिसमें लंबी सुरंगें और बड़े रेलवे पुल शामिल हैं। देवप्रयाग और जनासू के बीच लगभग 14.58 किलोमीटर लंबी सुरंग को भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंगों में गिना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से कई घंटे लगते हैं, जबकि रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल रेलवे ट्रैक बिछाने और शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने का काम जारी है। अधिकारियों का लक्ष्य जल्द से जल्द इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जनता के लिए समर्पित करना है। #केदारनाथ #uttrakhand #foryou | Aap Tak India
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- जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं: पीएम मोदी *अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा है। अगस्त 01, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि समाज में व्याप्त आक्रोश को वह समझते हैं, लेकिन यह समय गुमराह बच्चों को अपनाने और उनका मार्गदर्शन करने का है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती बच्चों ने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है और गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की भी चिंता है कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे सांस्कृतिक दृष्टि से चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि लोगों से गलतियां हो जाती हैं और बचपन में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे बच्चों को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दांत गलती से जीभ को काट ले, तो दांत नहीं तोड़ा जाता क्योंकि दोनों अपने ही हैं। उन्होंने कहा कि उसी तरह बच्चे भी समाज के अपने हैं और उन्हें छोड़ना नहीं, बल्कि संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सजा देने या अदालतों के चक्कर कटवाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज को क्षमा और सुधार के रास्ते पर चलना चाहिए। युवा प्रदर्शनकारियों से प्रधानमंत्री ने देश के विकास में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वे नई बातें सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। आप भी आगे बढ़ें, आप भी उन्नति करें। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।1
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