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Ramkishor
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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं, जहाँ कोतवाली हसनगंज क्षेत्र से एक पुलिस सिपाही पर पैसे हड़पने और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोपों के अनुसार, सिपाही ने पहले पैसे लिए और फिर अपनी बात से मुकर गया। यह ब्रेकिंग न्यूज़ 4TV सैटेलाइट चैनल के जिला संवाददाता पत्रकार प्रदीप कुमार तिवारी और सहयोगी क्षेत्रीय संवाददाता पत्रकार अनिल सिंह चौहान द्वारा जनपद उन्नाव के हसनगंज तहसील क्षेत्र से प्रसारित की गई है। चैनल ने इन आरोपों को लेकर लेटेस्ट अपडेट जारी किया है, जिसमें खाकी पर लगे इन गंभीर आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया है।4
- लखनऊ के विकासनगर थाना क्षेत्र में कथित रूप से संचालित हुक्का बारों को लेकर स्थानीय निवासियों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। आरोप है कि रिंग रोड स्थित जगरानी अस्पताल के सामने, यमाहा शोरूम के पास स्थित रेडॉक्स कैफे में देर रात तक हुक्का परोसा जाता है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने तो यह भी आरोप लगाया है कि इस प्रतिष्ठान में कथित तौर पर नाबालिगों को भी हुक्का उपलब्ध कराया जाता है। इन आरोपों के मद्देनजर, स्थानीय लोगों ने विकासनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और पुलिस या प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय निवासियों ने अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।1
- Post by Ramakant1
- अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी (चोरी) का गंभीर मामला सामने आया है, जिसे लेकर 'भारत की सबसे बदनाम तथाकथित गोल्ड डिगर पार्टी' पर उंगलियां उठ रही हैं। आरोपों के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जिसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा हैं, ने दान राशि में जमकर 'चपत' लगाई है और ऐसा कोई नहीं जिसे उन्होंने नहीं लूटा। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की राशि से लगभग ₹7.5 करोड़ का गबन किया गया है। चंपत राय पर ₹7.5 करोड़ की हेराफेरी, घोटाले और पैसे लेकर नौकरी देने के आरोप भी सामने आए हैं। इस मामले में पुलिस ने चंपत राय के करीबी और उनके ड्राइवर/सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल कर मनीष यादव नाम के आरोपी को राम मंदिर के भीतर कैश-काउंटिंग का काम दिलवाया था। मनीष यादव को सीसीटीवी फुटेज में कई बार चढ़ावे की चोरी करते हुए देखा गया है। अब तक की कार्रवाई में मंदिर के कैश-काउंटिंग स्टाफ, गिनती की निगरानी करने वाले एक रिटायर्ड बैंकर और चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है। 'राम जन्मभूमि को दीमक लगाने' के आरोप लगने और फंसते ही, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने 26 जून 2026 को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने विपक्ष के हमलों और देशव्यापी विरोध को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वेच्छा से अपना पद छोड़ने की बात कही। हालाँकि, वर्तमान एफआईआर में सीधे तौर पर चंपत राय का नाम शामिल न होने से विपक्ष और जनता द्वारा जांच की मांग जारी है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि जांच का दायरा केवल गिरफ्तार किए गए 8 लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि चंपत राय की भूमिका की भी पूरी जांच की जानी चाहिए। बीजेपी पर आरोप है कि वह चंपत राय को बचाने की कोशिश कर रही है, और 'क्लीन चिट के कयास' लगने पर उसकी जांच एजेंसियों पर भी उंगली उठ रही है। कुछ जांच सूत्रों का मानना है कि चंपत राय को सीधे वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी और उन्हें केवल प्रशासनिक ढिलाई या नैतिक जिम्मेदारी के दायरे में देखा जा रहा है, लेकिन साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि 'बचाने वाले सत्ता में खास पदों पर हैं' इसलिए निष्पक्षता होना मुश्किल है। जनता ने 'भारत में गोल्ड डिगर पार्टी' का खिताब बीजेपी को दिया है।1
- उत्तर प्रदेश के मेरठ से जुड़ा एक पुराना कथित पुलिस एनकाउंटर मामला एक बार फिर चर्चा में है। बताया गया है कि छह साल पहले हुए इस एनकाउंटर में शेमन खान को कमर में तीन गोलियां लगी थीं। इस घटना के बाद से उनकी शारीरिक स्थिति गंभीर बनी हुई है और वे बिना सहारे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी अधिकांश ज़िंदगी अब एक कमरे और चारपाई तक ही सीमित होकर रह गई है। मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में शेमन खान पर कथित तौर पर लूट की बाइक चलाने का आरोप लगाया था। वहीं, शेमन का दावा है कि उन्होंने बाइक के दस्तावेज़ दिखाए थे, जिसके बाद उन पर लूट में शामिल होने का आरोप लगाया गया। उनका कहना है कि आज तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें गोली क्यों मारी गई। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई है, जहाँ कई लोग निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के साथ-साथ जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उपलब्ध दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यह मामला कानून व्यवस्था, मानवाधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।1