दुनिया भर में पशुओं की देखभाल युद्ध स्तर पर होती है, लेकिन बिहार के दरभंगा स्थित लहेरियासराय में बेसहारा पशुओं के नसीब में सड़कों पर पड़ा कचरा और उसमें लिपटा प्लास्टिक ही है। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार बेसहारा पशुओं के लिए आवंटन करती है, और इसके लिए एक अलग सरकारी विभाग के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संस्थाएं भी कार्यरत हैं। आरोप है कि पशुपालन विभाग और इन संस्थाओं द्वारा पशुओं के चारे की राशि की आपस में "बन्दर बांट" की जा रही है, और इन बेजुबान पशुओं को प्लास्टिक खिलाकर उनकी संख्या कम करने की एक "तकनीक" अपना ली गई है। यहाँ नगर निगम रास्ते पर ही कचरा डम्प करवाता है, जिसे ये मवेशी खाकर "साफ" कर देते हैं, जिससे निगम कर्मियों का काम आसान हो जाता है। इस पूरी स्थिति को "गजब का भ्रष्टाचार" बताया गया है, जिसके प्रति ज़िला प्रशासन की आँखें मूँद लेने का आरोप है। इसके परिणामस्वरूप, कमजोर और बेसुध पशु अक्सर सड़कों पर पड़े रहते हैं और गाड़ियों से टकराकर घायल हो जाते हैं। एक बड़ा सवाल उठाया गया है कि क्या ज़िला प्रशासन को ये सब सड़क पर नहीं दिखता। लोगों से अपील की गई है कि यदि वे पशुओं से सहानुभूति रखते हैं, तो इस जानकारी को साझा करें ताकि यह ज़िला प्रशासन तक पहुँचे और तत्काल संज्ञान लिया जा सके। आरोप है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारी बेसहारा पशुओं के चारा की राशि को केवल "फाइलों में" ही खर्च कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है।
दुनिया भर में पशुओं की देखभाल युद्ध स्तर पर होती है, लेकिन बिहार के दरभंगा स्थित लहेरियासराय में बेसहारा पशुओं के नसीब में सड़कों पर पड़ा कचरा और उसमें लिपटा प्लास्टिक ही है। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार बेसहारा पशुओं के लिए आवंटन करती है, और इसके लिए एक अलग सरकारी विभाग के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संस्थाएं भी कार्यरत हैं। आरोप है कि पशुपालन विभाग और इन संस्थाओं द्वारा पशुओं के चारे की राशि की आपस में "बन्दर बांट" की जा रही है, और इन बेजुबान पशुओं को प्लास्टिक खिलाकर उनकी संख्या कम करने की एक "तकनीक" अपना ली गई है। यहाँ नगर निगम रास्ते पर ही कचरा डम्प करवाता है, जिसे ये मवेशी खाकर "साफ" कर देते हैं, जिससे निगम कर्मियों का काम आसान हो जाता है। इस पूरी स्थिति को "गजब का भ्रष्टाचार" बताया गया है, जिसके प्रति ज़िला प्रशासन की आँखें मूँद लेने का आरोप है। इसके परिणामस्वरूप, कमजोर और बेसुध पशु अक्सर सड़कों पर पड़े रहते हैं और गाड़ियों से टकराकर घायल हो जाते हैं। एक बड़ा सवाल उठाया गया है कि क्या ज़िला प्रशासन को ये सब सड़क पर नहीं दिखता। लोगों से अपील की गई है कि यदि वे पशुओं से सहानुभूति रखते हैं, तो इस जानकारी को साझा करें ताकि यह ज़िला प्रशासन तक पहुँचे और तत्काल संज्ञान लिया जा सके। आरोप है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारी बेसहारा पशुओं के चारा की राशि को केवल "फाइलों में" ही खर्च कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है।
- Janpad Bihar24Darbhanga, Biharभ्रष्टाचार में लिप्त पशुपालन विभाग और नजरअंदाज करता जिला प्रशासन।6 hrs ago
- दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहाँ ओझौल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार पर वाहन छीनने और रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है, क्योंकि खुद ओझौल पंचायत की मुखिया निक्की कुमारी इन आरोपों के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं। उन्होंने बहादुरपुर थाने में एक लिखित आवेदन देकर विरोधी पक्ष के सभी दावों को झूठा, बेबुनियाद और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है, आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण उनके पति की छवि खराब करने और उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है। मुखिया निक्की कुमारी ने पुलिस को दिए आवेदन में अपनी तरफ से पूरी कहानी बताई है। उनके अनुसार, हकीकत यह है कि आरोप लगाने वाले आनंद कुमार ने मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार से ₹7 लाख का कर्ज लिया था। आनंद कुमार ने फोनपे और अन्य डिजिटल माध्यमों से किस्तों में कुछ पैसे तो लौटाए, लेकिन पूरी रकम वापस नहीं की। जब बचे हुए पैसों की मांग की गई, तो आनंद कुमार ने अपनी चार पहिया गाड़ी खुद मुखिया के घर भिजवाई और कहा कि पैसे लौटाकर वह गाड़ी वापस ले जाएंगे। मुखिया निक्की कुमारी का तर्क है कि गाड़ी घर पर खड़ी होने के बाद भी आनंद कुमार ने सूरज कुमार के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए। उनका सवाल है कि अगर गाड़ी छीनी गई होती, तो कोई खाते में पैसे क्यों भेजता? इसी सबूत के आधार पर मुखिया का कहना है कि यह मामला 'वाहन छीनने' या 'रंगदारी' का नहीं, बल्कि आपसी लेन-देन का है, जिसे अब राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। मुखिया ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके। फिलहाल, बहादुरपुर थाना पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है, जिसमें दोनों पक्षों के दावों और बैंक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिसिया जांच के नतीजे का इंतजार है।1
- दरभंगा के लहेरियासराय चट्टी चौक के पास बिजली विभाग की लापरवाही उम्मीद से कहीं ज़्यादा बढ़कर सामने आई है। यहाँ सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें तो लगी हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द पेड़-पौधे, लताएँ और झाड़ियाँ इतनी बढ़ गई हैं कि रोशनी सड़क पर पड़ने के बजाय घने जंगलों के झुरमुट को ही जालनुमा दिखा रही है। इस स्थिति पर गहरी हैरत जताई गई है, क्योंकि बारिश होने पर इन्हीं बढ़े हुए जंगल के साथ बिजली का करंट भी नीचे तक पहुँचने का ख़तरा बना रहता है। आरोप है कि लापरवाह बिजली विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही इस समस्या को ठीक करने के लिए सक्रिय होगा। बिजली विभाग के कर्मियों पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया गया है, जिसके कारण वे बेख़ौफ़ होकर जनता के लिए नुकसान का न्योता दे रहे हैं।1
- दरभंगा नगर निगम के वार्ड 32 में कचरा उठाव पूरी तरह से ठप हो गया है। इस समस्या के विरोध में, स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि ने सड़क पर कचरा डालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।1
- दुनिया भर में पशुओं की देखभाल युद्ध स्तर पर होती है, लेकिन बिहार के दरभंगा स्थित लहेरियासराय में बेसहारा पशुओं के नसीब में सड़कों पर पड़ा कचरा और उसमें लिपटा प्लास्टिक ही है। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार बेसहारा पशुओं के लिए आवंटन करती है, और इसके लिए एक अलग सरकारी विभाग के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संस्थाएं भी कार्यरत हैं। आरोप है कि पशुपालन विभाग और इन संस्थाओं द्वारा पशुओं के चारे की राशि की आपस में "बन्दर बांट" की जा रही है, और इन बेजुबान पशुओं को प्लास्टिक खिलाकर उनकी संख्या कम करने की एक "तकनीक" अपना ली गई है। यहाँ नगर निगम रास्ते पर ही कचरा डम्प करवाता है, जिसे ये मवेशी खाकर "साफ" कर देते हैं, जिससे निगम कर्मियों का काम आसान हो जाता है। इस पूरी स्थिति को "गजब का भ्रष्टाचार" बताया गया है, जिसके प्रति ज़िला प्रशासन की आँखें मूँद लेने का आरोप है। इसके परिणामस्वरूप, कमजोर और बेसुध पशु अक्सर सड़कों पर पड़े रहते हैं और गाड़ियों से टकराकर घायल हो जाते हैं। एक बड़ा सवाल उठाया गया है कि क्या ज़िला प्रशासन को ये सब सड़क पर नहीं दिखता। लोगों से अपील की गई है कि यदि वे पशुओं से सहानुभूति रखते हैं, तो इस जानकारी को साझा करें ताकि यह ज़िला प्रशासन तक पहुँचे और तत्काल संज्ञान लिया जा सके। आरोप है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारी बेसहारा पशुओं के चारा की राशि को केवल "फाइलों में" ही खर्च कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है।1
- कुवैत में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। चाइना हाईवे इंजीनियरिंग कंपनी 5 जुलाई को दरभंगा में नौकरी के लिए इंटरव्यू आयोजित करने जा रही है। यह इंटरव्यू कुवैत में रोजगार प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण मौका प्रदान करेगा।1
- एक विचारोत्तेजक प्रश्न में युद्ध के वास्तविक कारणों की पड़ताल की गई है। इस प्रश्न के अनुसार, 'वोट वापसी', 'पासबुक', 'जूरी कोर्ट', और 'खनिज मुनाफा बटवारा' ही युद्ध के असली कारण हो सकते हैं।1
- ओझौल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार पर आनंद कुमार ने एक गंभीर आरोप लगाया है। आनंद कुमार का दावा है कि मुखिया प्रतिनिधि ने उनका चार चक्का वाहन छीन लिया है। हालांकि, मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा है और इसके संबंध में उनके खिलाफ अब एक षड्यंत्र रचा जा रहा है।1
- बिहार में रबड़ी आवास के बाहर एक बेहद भावुक नजारा देखने को मिला, जहाँ एक समर्थक फूट-फूट कर रो पड़ा। इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जो बिहार में ऐसे समर्पित समर्थकों की उपस्थिति को दर्शाता है।1