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लोकेशन मैहर मैहर में मैनेजमेंट राज? ओवरलोड के पहियों तले कानून, अफसरों–जनप्रतिनिधियों की नींद अल्ट्राटेक के विश्रामगृह में! मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए? वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर? बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है? इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है: मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।

2 hrs ago
user_रोहित कुमार पाठक
रोहित कुमार पाठक
Lawyer अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

लोकेशन मैहर मैहर में मैनेजमेंट राज? ओवरलोड के पहियों तले कानून, अफसरों–जनप्रतिनिधियों की नींद अल्ट्राटेक के विश्रामगृह में! मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए? वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर? बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है? इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है: मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।

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    मैहर में मैनेजमेंट राज? ओवरलोड के पहियों तले कानून, अफसरों–जनप्रतिनिधियों की नींद अल्ट्राटेक के विश्रामगृह में!
मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए?
वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर?
बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है?
इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है:
मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।
    user_रोहित कुमार पाठक
    रोहित कुमार पाठक
    Lawyer अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सतना में UGC बिल के समर्थन में उतरा OBC ST SC बहुजन समाज, दिखा जनसैलाब....
    1
    सतना में UGC बिल के समर्थन में उतरा OBC ST SC बहुजन समाज, दिखा जनसैलाब....
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • पूज्य गुरुदेव महाराज स्वामी सच्चिदानन्द महाराज जी का समाधि लीन हुए देखें वीडियो
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    पूज्य गुरुदेव महाराज स्वामी सच्चिदानन्द महाराज जी का समाधि लीन हुए देखें वीडियो
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Jagtapal Yadav g
    1
    Post by Jagtapal Yadav g
    user_Jagtapal Yadav g
    Jagtapal Yadav g
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Lavkush yadav
    1
    Post by Lavkush yadav
    user_Lavkush yadav
    Lavkush yadav
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • बिहार के दरभंगा में छह साल की बच्ची के साथ हुए भयानक रेप और मर्डर की डिटेल्स डरावनी और दिल दहला देने वाली हैं। राक्षस रेपिस्ट ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। #JusticeForDarbhangaGirl
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    बिहार के दरभंगा में छह साल की बच्ची के साथ हुए
भयानक रेप और मर्डर की डिटेल्स डरावनी और दिल दहला देने वाली हैं।
राक्षस रेपिस्ट ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। #JusticeForDarbhangaGirl
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter Maihar, Satna•
    4 hrs ago
  • मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए? वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर? बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है? इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है: मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।
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    मैहर। PWD मार्ग को निपटाने का बीड़ा उठाने का ढोल पीटने वाला अल्ट्राटेक प्रबंधन स्थानीय लोगों के पत्रों पर भी बेखबर बना रहा—या यूँ कहें, जानबूझकर अंधा! सूत्रों के मुताबिक उद्योग प्रबंधन के कुछ तथाकथित जिम्मेदार खुलेआम दंभ भरते फिर रहे हैं कि जिले के हर प्रशासनिक अधिकारी की निजी व्यवस्था हमारी है, महीना वेतन की तरह जाता है—तो ओवरलोड पत्थर परिवहन कैसे रोका जाए?
वाह! कानून से ऊपर बैठा यह आत्मविश्वास किसकी शह पर?
बताया जा रहा है कि पत्थर परिवहन करने वाली संस्था का सीधा रिश्ता अल्ट्राटेक से है। सवाल यह नहीं कि सड़कें टूट रहीं—सवाल यह है कि किसके संरक्षण में टूट रहीं। PWD मार्गों पर ओवरलोड ट्रकों का तांडव जारी है, और जिम्मेदारों की आंखों पर जैसे सीमेंट की परत जम गई हो।स्थानीय लोगों ने मैहर के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से साफ अपील की है—अधिकारियों को वेतन और सुविधाएं सरकार देती है, किसी सीमेंट प्लांट का विश्रामगृह नहीं! जनता की सेवा की कसम खाई है तो कम से कम 50% तो निभा दीजिए। क्या इतना भी भारी है?
इधर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम स्तर से लेकर बड़े मंचों तक—एक जैसी चुप्पी! क्या यह मौन सहमति है या सुविधाजनक विवशता?उधर उद्योग प्रबंधन के कुछ लोग अकड़ में कहते फिरते हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि हमारी उंगलियों पर नाचते हैं। अगर यह झूठ है तो खंडन क्यों नहीं? और अगर सच है तो शर्म किसे आनी चाहिए?जनहित की मांगें—सड़क सुरक्षा, ओवरलोड पर रोक, जवाबदेही—सब मैहर की धरती में ही दफन होती दिख रही हैं। अब सवाल सीधा है:
मैहर प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोकने जाएगा या संरक्षण की हदें और बढ़ेंगी? कानून चलेगा या मैनेजमेंट? जनता देख रही है, इतिहास लिख रहा है—और जवाबदेही दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।
    user_Deepak Tiwari (Sonu)
    Deepak Tiwari (Sonu)
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बीच शहर में नो एंट्री में डंके की चोट पर खड़े हैं कई ट्रक
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    बीच शहर में नो एंट्री में डंके की चोट पर खड़े हैं कई ट्रक
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
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