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न्याय धारा के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस विशेष आयोजन के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200 वर्ष पूर्ण होने का भी समारोहपूर्वक उत्सव मनाया गया।
संजय कुमार मिश्र
न्याय धारा के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस विशेष आयोजन के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200 वर्ष पूर्ण होने का भी समारोहपूर्वक उत्सव मनाया गया।
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- कानपुर नगर के थाना चमनगंज क्षेत्र से एक नया घटनाक्रम सामने आया है। बीते दिनों हलीम ग्राउंड में पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और वफ़ा अब्बास के बीच हुए विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया है। इस समझौते की जानकारी सोशल मीडिया पर सीसामऊ की विधायिका नसीम सोलंकी के एक वायरल वीडियो के माध्यम से मिली है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया है कि यह विवाद अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है।1
- न्याय धारा के 23वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस विशेष आयोजन के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200 वर्ष पूर्ण होने का भी समारोहपूर्वक उत्सव मनाया गया।1
- कानपुर में हलीम कॉलेज ग्राउंड में लगने वाली बकरा मंडी को लेकर बीते दिनों उपजा विवाद अब आपसी सहमति से समाप्त हो गया है। पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और अब्बास से जुड़े इस मामले का निस्तारण सीसामऊ की विधायिका नसीम सोलंकी की मौजूदगी में हुआ। बताया जाता है कि बकरा मंडी के आयोजन को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए थे, जिसके चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। बीते दिनों हुए एक घमासान विवाद के बाद, दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते के लिए कई दौर की बातचीत हुई। इसमें स्थानीय संभ्रांत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की, जिसके बाद गिले-शिकवे मिटाए गए। इस बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी भाईचारे और क्षेत्र की शांति को सर्वोपरि मानते हुए सहमति जताई। इसके बाद, विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई और मामला शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया। समझौते के बाद, दोनों पक्षों ने भविष्य में भी आपसी संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाया।1
- कानपुर में मंधना से बिठूर मार्ग पर चल रहे पुलिया निर्माण के दौरान ठेकेदार की घोर लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही के कारण किसी भी समय एक बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।1
- कानपुर नगर के पनकी कला गाँव में जल निकासी की व्यवस्था बेहद ख़राब स्थिति में है। गाँव में एक भी नाला सही ढंग से काम नहीं कर रहा है और सभी पूरी तरह से टूटे हुए हैं, जिसका सीधा परिणाम यह है कि नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। इस गंभीर समस्या के कारण गाँव की इंटरलॉकिंग सड़कें भी धँस चुकी हैं और सभी साइड की सड़कों पर पानी जमा होने की परेशानी बनी हुई है।1
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पर पहुंचाया गया। नोटिस मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को उन्हें नोटिस देना था तो सीधे उनके पास आना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों को उनका आवास का पता नहीं मिल पाया था और वे कहीं और चले गए थे, जिसके बाद उन्हें सही स्थान पर बुलाया गया। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर अभिषेक बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले केवल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उनके पीछे लगी थीं, लेकिन अब बंगाल पुलिस, कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम जैसी अन्य एजेंसियां भी लगा दी गई हैं। टीएमसी सांसद ने दो टूक कहा कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि कई जांच एजेंसियां लगाकर उन्हें डराया या झुकाया जा सकता है, लेकिन यह संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे कितनी भी एजेंसियां लगा दी जाएं, वे किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं। अभिषेक बनर्जी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस मामले में सीआईडी की अगली कार्रवाई और राजनीतिक गलियारों से आने वाली प्रतिक्रियाओं पर टिकी हुई हैं।1
- देश में बलात्कार के मामलों में फांसी की सज़ा का बिल पारित नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि बलात्कारी तत्वों के समर्थन में लोग खुलेआम रैलियां निकाल रहे हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण कानून के बनने में बाधा आ रही है।1
- पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में 30 मई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर स्थानीय भीड़ ने हमला कर दिया। यह घटना उस वक्त हुई जब अभिषेक बनर्जी चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। इस दौरान गुस्साई भीड़ ने उन्हें घेर लिया, उन पर पत्थर, ईंट, अंडे, जूते और लाठियां फेंकीं। भीड़ ने उनके साथ हाथापाई भी की, उनके कपड़े फाड़ दिए और उनके खिलाफ “चोर-चोर” के नारे लगाए। इस हाथापाई में अभिषेक बनर्जी का चश्मा टूट गया और उनकी आंख के पास चोट आई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सुरक्षाकर्मियों और पुलिस को हेलमेट पहनाकर उन्हें वहां से सुरक्षित निकालना पड़ा। घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने इसे “बीजेपी द्वारा प्रायोजित और पूर्व-नियोजित जानलेवा हमला” बताया, जिसका मकसद उनकी जान लेना था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके आने की अग्रिम सूचना होने के बावजूद मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। अभिषेक बनर्जी ने इस मामले को लेकर हाई कोर्ट और राज्यपाल से संपर्क करने की बात कही है।1