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कर्णपुरा पंचायत के सरपंच सह सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर कर्णपुरा पंचायत के सरपंच सह सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह का पीजीआई लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। जिससे क्षेत्र के शोक की लहर दौड़ गई। वहीं उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का जन्म सैलाब उमर पड़ा।

8 hrs ago
user_Pintutiwari Pintutiwari
Pintutiwari Pintutiwari
Local News Reporter दुर्गावती, कैमूर (भभुआ), बिहार•
8 hrs ago

कर्णपुरा पंचायत के सरपंच सह सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर कर्णपुरा पंचायत के सरपंच सह सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह का पीजीआई लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। जिससे क्षेत्र के शोक की लहर दौड़ गई। वहीं उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का जन्म सैलाब उमर पड़ा।

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  • डुमरांव (Buxar) : क्षेत्र के चौगाईं प्रखंड के ठोरी पांडेयपुर गांव में चार दिवसीय रामकथा कथा का आयोजन किया गया. जिसको लेकर ग्रामीण जोर-शोर से जुटे हुए थे. इसकी जानकारी देते हुए पुजारी सोनू पाण्डेय तथा श्याम प्रकाश सिंह यादव ने बताया कि 10 फरवरी से ठोरी पांडेयपुर गांव में चार दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य पंडित श्री मधुसूदन तिवारी के मुखारविंद से प्रभु श्री राम के विवाह के साथ ही सम्पन्न हुआ जो 10 से 14 फरवरी तक चला। साथ ही साथ 15 फरवरी को भव्य झांकी व भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारी अंतिम चरण में है, इसको लेकर चारों तरफ साफ-सफाई, पंडाल, लाइट, वाहन स्टैंड सहित सभी व्यवस्था था ताकि श्रीराम कथा में आने वाले किसी भी श्रोता भक्तों को किसी तरह की परेशानी ना हो. वहीं इस चार दिवसीय श्रीराम कथा को लेकर आसपास सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी बन गयी है.यह कथा दोपहर 01 बजे से संध्या 05 बजे तक चला। अंत में कथा समापन के बाद आरती किया गया उसके बाद सभी भक्त को प्रसाद दिया गया। कथा में हजारों महिला तथा पुरुष पर भक्त मौजूद होकर रसास्वादन किया।
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    डुमरांव (Buxar) : क्षेत्र के चौगाईं प्रखंड के ठोरी पांडेयपुर गांव में चार दिवसीय रामकथा कथा का आयोजन किया गया. जिसको लेकर ग्रामीण जोर-शोर से जुटे हुए थे. इसकी जानकारी देते हुए पुजारी सोनू पाण्डेय तथा श्याम प्रकाश सिंह यादव ने बताया कि 10 फरवरी से ठोरी पांडेयपुर गांव में चार दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य पंडित श्री मधुसूदन तिवारी के मुखारविंद से प्रभु श्री राम के विवाह के साथ ही सम्पन्न हुआ जो 10 से 14 फरवरी तक चला। साथ ही साथ 15 फरवरी को भव्य झांकी व भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारी अंतिम चरण में है, इसको लेकर चारों तरफ साफ-सफाई, पंडाल, लाइट, वाहन स्टैंड सहित सभी व्यवस्था था ताकि श्रीराम कथा में आने वाले किसी भी श्रोता भक्तों को किसी तरह की परेशानी ना हो. वहीं इस चार दिवसीय श्रीराम कथा को लेकर आसपास सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी बन गयी है.यह कथा दोपहर 01 बजे से संध्या 05 बजे तक चला। अंत में कथा समापन के बाद आरती किया गया उसके बाद सभी भक्त को प्रसाद दिया गया। कथा में हजारों महिला तथा पुरुष  पर भक्त मौजूद होकर रसास्वादन किया।
    user_डॉ संजय कुमार सिंह
    डॉ संजय कुमार सिंह
    Yoga instructor डुमरांव, बक्सर, बिहार•
    2 hrs ago
  • 52 थाल चढ़ावा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन; नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी श्रृंगार, बांसफाटक से टेढ़ीनीम तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’ वाराणसी। विजया एकादशी की संध्या काशी के लिए केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि लोकआस्था, परंपरा और उल्लास का विराट उत्सव बन गई। सगुन की पीली-पीली हल्दी ने जब भोलेनाथ को दूल्हे के रूप में सजा दिया, तो पूरी नगरी शिवमय हो उठी। बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिवप्रसाद पाण्डेय) के आवास ‘धर्म निवास’ से निकली भव्य शोभायात्रा ने टेढ़ीनीम तक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य रचा, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। डमरुओं की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं और युवा शिवभक्ति में झूमते नजर आए। जब यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पहुंची, तब वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य काशी विश्वनाथ मंदिर की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से सगुन की हल्दी अर्पित की गई। हल्दी लगते ही बाबा का स्वरूप दूल्हे के तेज में आलोकित हो उठा। दीपों की आभा, धूप-चंदन की सुवास और मंत्रों की गंभीर ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। लोकगीतों में झूमी काशी, परंपरा ने लिया भावनात्मक रूप हल्दी अनुष्ठान के दौरान महिलाओं के कंठ से निकले मंगलस्वर पूरे परिसर में गूंजते रहे— “पीली-पीली हल्दी भोला के लगावा सखी, जल्दी-जल्दी अड़भंगी के भस्म छुड़ावा सखी…” इसके साथ ही और भी लोकगीत गूंजे— “हल्दी के रंग में रंगलें महादेव, गौरा के संग सजे आज देवाधिदेव…” “भोला के अंगेना सजी आज बारात, हल्दी लगावें सखियन, गावे मंगल गात…” इन गीतों ने स्पष्ट कर दिया कि काशी में शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि घर के दूल्हे हैं। यहां हर रस्म में परिवार जैसा अपनापन झलकता है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, ससुराल से निभी परंपरा शोभायात्रा की विशेषता रही 52 थालों में सजा चढ़ावा। इन थालों में हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री सजाई गई थी। श्रद्धालुओं ने इन्हें सिर पर धारण कर बाबा के विवाहोत्सव में अपनी सहभागिता निभाई। बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ मंदिर से पगड़ी बांधे ससुरालीजन हल्दी लेकर पहुंचे। यह दृश्य किसी पारंपरिक विवाह से कम नहीं था। श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में ससुराली परंपरा निभाई गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष किया, बच्चों ने डमरू बजाया और महिलाओं ने मंगलगीतों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। 11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार से संपन्न हुआ पूजन टेढ़ीनीम पहुंचने पर 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। मंत्रों की गूंज और घी के दीपों की रोशनी के बीच बाबा की पंचबदन प्रतिमा पर हल्दी अर्पित की गई। यह क्षण शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत मंगलकारी माना और बाबा के दूल्हा स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य समझा। नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी स्वरूप सायंकाल आयोजन से जुड़े संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का भव्य श्रृंगार किया। पारंपरिक आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित बाबा का स्वरूप देखते ही बन रहा था। इसी क्रम में महंत वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में नवरत्न जड़ित छत्र का विधिवत पूजन किया गया। छत्र के नीचे विराजमान बाबा का स्वरूप राजसी और अलौकिक प्रतीत हुआ—मानो स्वयं कैलाशपति विवाहोत्सव के लिए काशी के आंगन में विराजे हों। श्रद्धालु देर रात तक दर्शन करते रहे और वातावरण में भक्ति की अविरल धारा बहती रही। धर्म निवास से टेढ़ीनीम तक उमड़ा आस्था का सैलाब बांसफाटक स्थित धर्म निवास से लेकर टेढ़ीनीम तक का मार्ग केवल शोभायात्रा का रास्ता नहीं रहा, बल्कि आस्था की जीवंत धारा बन गया। हर गली-चौराहे पर श्रद्धालु खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत करते रहे। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। युवाओं की टोली डमरू बजाती आगे बढ़ी तो महिलाएं थाल सजाकर मंगलगीत गाती रहीं। शिव विवाह की पहली आहट, महाशिवरात्रि की ओर बढ़ते कदम विजया एकादशी पर चढ़ी यह सगुन की हल्दी शिव विवाह की रस्मों की पहली आहट है। अब महाशिवरात्रि तक काशी में विवाहोत्सव की तैयारियां और तेज होंगी। हल्दी की यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यहां परंपरा केवल निभाई नहीं जाती—उसे जिया जाता है, संजोया जाता है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया जाता है। आस्था, उल्लास और लोकसंस्कृति का संगम पीली-पीली हल्दी के रंग में रची यह शाम एक बार फिर साबित कर गई कि काशी की पहचान उसकी जीवंत लोकपरंपराओं में बसती है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन, वैदिक मंत्रों की गूंज और नवरत्न जड़ित छत्र के नीचे सजा दूल्हा स्वरूप—इन सबने मिलकर एक ऐसा दृश्य रचा, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्र बन गया। विजया एकादशी की यह संध्या शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत के रूप में याद रखी जाएगी। अब पूरा शहर अपने दूल्हे बाबा की बारात के इंतजार में है—और काशी, एक बार फिर, शिवभक्ति की अनुपम छटा में डूबी हुई है।
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    52 थाल चढ़ावा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन; नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी श्रृंगार, बांसफाटक से टेढ़ीनीम तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’
वाराणसी। विजया एकादशी की संध्या काशी के लिए केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि लोकआस्था, परंपरा और उल्लास का विराट उत्सव बन गई। सगुन की पीली-पीली हल्दी ने जब भोलेनाथ को दूल्हे के रूप में सजा दिया, तो पूरी नगरी शिवमय हो उठी। बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिवप्रसाद पाण्डेय) के आवास ‘धर्म निवास’ से निकली भव्य शोभायात्रा ने टेढ़ीनीम तक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य रचा, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
डमरुओं की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं और युवा शिवभक्ति में झूमते नजर आए। जब यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पहुंची, तब वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य काशी विश्वनाथ मंदिर की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से सगुन की हल्दी अर्पित की गई।
हल्दी लगते ही बाबा का स्वरूप दूल्हे के तेज में आलोकित हो उठा। दीपों की आभा, धूप-चंदन की सुवास और मंत्रों की गंभीर ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
लोकगीतों में झूमी काशी, परंपरा ने लिया भावनात्मक रूप
हल्दी अनुष्ठान के दौरान महिलाओं के कंठ से निकले मंगलस्वर पूरे परिसर में गूंजते रहे—
“पीली-पीली हल्दी भोला के लगावा सखी,
जल्दी-जल्दी अड़भंगी के भस्म छुड़ावा सखी…”
इसके साथ ही और भी लोकगीत गूंजे—
“हल्दी के रंग में रंगलें महादेव,
गौरा के संग सजे आज देवाधिदेव…”
“भोला के अंगेना सजी आज बारात,
हल्दी लगावें सखियन, गावे मंगल गात…”
इन गीतों ने स्पष्ट कर दिया कि काशी में शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि घर के दूल्हे हैं। यहां हर रस्म में परिवार जैसा अपनापन झलकता है।
52 थालों में सजी श्रद्धा, ससुराल से निभी परंपरा
शोभायात्रा की विशेषता रही 52 थालों में सजा चढ़ावा। इन थालों में हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री सजाई गई थी। श्रद्धालुओं ने इन्हें सिर पर धारण कर बाबा के विवाहोत्सव में अपनी सहभागिता निभाई।
बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ मंदिर से पगड़ी बांधे ससुरालीजन हल्दी लेकर पहुंचे। यह दृश्य किसी पारंपरिक विवाह से कम नहीं था। श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में ससुराली परंपरा निभाई गई।
मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष किया, बच्चों ने डमरू बजाया और महिलाओं ने मंगलगीतों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार से संपन्न हुआ पूजन
टेढ़ीनीम पहुंचने पर 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। मंत्रों की गूंज और घी के दीपों की रोशनी के बीच बाबा की पंचबदन प्रतिमा पर हल्दी अर्पित की गई।
यह क्षण शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत मंगलकारी माना और बाबा के दूल्हा स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य समझा।
नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी स्वरूप
सायंकाल आयोजन से जुड़े संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का भव्य श्रृंगार किया। पारंपरिक आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित बाबा का स्वरूप देखते ही बन रहा था।
इसी क्रम में महंत वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में नवरत्न जड़ित छत्र का विधिवत पूजन किया गया। छत्र के नीचे विराजमान बाबा का स्वरूप राजसी और अलौकिक प्रतीत हुआ—मानो स्वयं कैलाशपति विवाहोत्सव के लिए काशी के आंगन में विराजे हों।
श्रद्धालु देर रात तक दर्शन करते रहे और वातावरण में भक्ति की अविरल धारा बहती रही।
धर्म निवास से टेढ़ीनीम तक उमड़ा आस्था का सैलाब
बांसफाटक स्थित धर्म निवास से लेकर टेढ़ीनीम तक का मार्ग केवल शोभायात्रा का रास्ता नहीं रहा, बल्कि आस्था की जीवंत धारा बन गया। हर गली-चौराहे पर श्रद्धालु खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत करते रहे।
“हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। युवाओं की टोली डमरू बजाती आगे बढ़ी तो महिलाएं थाल सजाकर मंगलगीत गाती रहीं।
शिव विवाह की पहली आहट, महाशिवरात्रि की ओर बढ़ते कदम
विजया एकादशी पर चढ़ी यह सगुन की हल्दी शिव विवाह की रस्मों की पहली आहट है। अब महाशिवरात्रि तक काशी में विवाहोत्सव की तैयारियां और तेज होंगी।
हल्दी की यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यहां परंपरा केवल निभाई नहीं जाती—उसे जिया जाता है, संजोया जाता है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया जाता है।
आस्था, उल्लास और लोकसंस्कृति का संगम
पीली-पीली हल्दी के रंग में रची यह शाम एक बार फिर साबित कर गई कि काशी की पहचान उसकी जीवंत लोकपरंपराओं में बसती है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन, वैदिक मंत्रों की गूंज और नवरत्न जड़ित छत्र के नीचे सजा दूल्हा स्वरूप—इन सबने मिलकर एक ऐसा दृश्य रचा, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्र बन गया।
विजया एकादशी की यह संध्या शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत के रूप में याद रखी जाएगी। अब पूरा शहर अपने दूल्हे बाबा की बारात के इंतजार में है—और काशी, एक बार फिर, शिवभक्ति की अनुपम छटा में डूबी हुई है।
    user_Anurag Kashyap
    Anurag Kashyap
    Sadar, Varanasi•
    7 hrs ago
  • varanasi news banaras news
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    varanasi news 
banaras news
    user_आवाज News
    आवाज News
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • 🚨 ब्रेकिंग: वाराणसी जिला कोर्ट बम से उड़ाने की धमकी! पूरा परिसर खाली, बम निरोधक दस्ता तैनात! 😰 #KachahariBlastAlert #वाराणसी #कचहरी_धमकी #बम_धमकी #वाराणसी_ब्रेकिंग #VaranasiCourt #BombThreatVaranasi #KachahariVaranasi #UPPolice #वाराणसी_न्यूज #ViralVaranasi #BanarasNews #YogiAdityanath #UPNewsLive #वाराणसी_कोर्ट #PoliceAction
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    🚨 ब्रेकिंग: वाराणसी जिला कोर्ट बम से उड़ाने की धमकी! पूरा परिसर खाली, बम निरोधक दस्ता तैनात! 😰 #KachahariBlastAlert #वाराणसी #कचहरी_धमकी #बम_धमकी #वाराणसी_ब्रेकिंग #VaranasiCourt #BombThreatVaranasi #KachahariVaranasi #UPPolice #वाराणसी_न्यूज #ViralVaranasi #BanarasNews #YogiAdityanath #UPNewsLive #वाराणसी_कोर्ट #PoliceAction
    user_Rishu Pathak
    Rishu Pathak
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • *हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता.. हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर के जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता.. उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा, और अगर वह शंकराचार्य थे तो क्यों आप लोगों ने लाठीचार्ज किया था वाराणसी में?* क्यों FIR लॉज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं? साढे चार करोड़ श्रद्धालु जहां पर आए हों, वहां पर जो एग्जिट गेट है जहां से श्रद्धालु बाहर निकल रहा है स्नान करके, उस द्वार से उस पांटून से उस मार्ग से किसी को बाहर निकलने का कोई वह नहीं, क्योंकि उससे अंदर जाने का कोई प्रयास करता है तो एक नए स्टैम्पेड को जन्म देता है, वहां पर नई भगदड़ को जन्म देता है, श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है...एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता, कभी नहीं कर सकता...आपको पूजना है सपा के लोग तो पूजें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं...कानून का शासन पालन करना भी जानते हैं,
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    *हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता.. हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर के जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता.. उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा, और अगर वह शंकराचार्य थे तो क्यों आप लोगों ने लाठीचार्ज किया था वाराणसी में?*
क्यों FIR लॉज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं? साढे चार करोड़ श्रद्धालु जहां पर आए हों, वहां पर जो एग्जिट गेट है जहां से श्रद्धालु बाहर निकल रहा है स्नान करके, उस द्वार से उस पांटून से उस मार्ग से किसी को बाहर निकलने का कोई वह नहीं, क्योंकि उससे अंदर जाने का कोई प्रयास करता है तो एक नए स्टैम्पेड को जन्म देता है, वहां पर नई भगदड़ को जन्म देता है, श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है...एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता, कभी नहीं कर सकता...आपको पूजना है सपा के लोग तो पूजें, लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून का शासन पर विश्वास करते हैं...कानून का शासन पालन करना भी जानते हैं,
    user_अचूक रणनीति अख़बार
    अचूक रणनीति अख़बार
    Newspaper publisher सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • चौबेपुर थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े महिला से लूट, बदमाश फरार
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    चौबेपुर थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े महिला से लूट, बदमाश फरार
    user_जनता न्यूज टीवी
    जनता न्यूज टीवी
    Local News Reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • इस विडियो मे आवाज न्यूज आप को बनारस के उमरहा गांव के लोगो के जीवन की दुश्वारियों से रुबरु करवा रहे हैं।
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    इस विडियो मे आवाज न्यूज आप को बनारस के उमरहा गांव के लोगो के जीवन की दुश्वारियों से रुबरु करवा रहे हैं।
    user_आवाज News
    आवाज News
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • यूपी - बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान आज वृंदावन में किया।
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    यूपी - बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान आज वृंदावन में किया।
    user_अचूक रणनीति अख़बार
    अचूक रणनीति अख़बार
    Newspaper publisher सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • गौ माता के घायल होने की सूचना पर तुरंत पहुंची पशु चिकित्सक टीम, उमरहां बाजार में कराया गया इलाज
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    गौ माता के घायल होने की सूचना पर तुरंत पहुंची पशु चिकित्सक टीम, उमरहां बाजार में कराया गया इलाज
    user_जनता न्यूज टीवी
    जनता न्यूज टीवी
    Local News Reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
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