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"सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के चमकते सितारे: हिंदू नव वर्ष की रैली में उमड़े ज्ञान के दीपक" "सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के चमकते सितारे: हिंदू नव वर्ष की रैली में उमड़े ज्ञान के दीपक"
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"सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के चमकते सितारे: हिंदू नव वर्ष की रैली में उमड़े ज्ञान के दीपक" "सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के चमकते सितारे: हिंदू नव वर्ष की रैली में उमड़े ज्ञान के दीपक"
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- बेतिया से इस वक्त एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंची एक बाघिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने वन विभाग के साथ-साथ पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। गौनाहा के मंगूरहा वनक्षेत्र अंतर्गत पंडई नदी के किनारे इस बाघिन का शव मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ साल की यह मादा बाघिन बीते एक सप्ताह से वीटीआर के जंगलों से निकलकर गौनाहा के सिसई और मनीटोला इलाके में लगातार देखी जा रही थी। ग्रामीणों और किसानों ने कई बार इसकी मौजूदगी की सूचना दी थी, जिससे इलाके में भय का माहौल था। बाघिन अपने परिवार से बिछड़ चुकी थी और लगातार भटकते हुए रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच गई थी, मानो वह अपने कुनबे को तलाश रही हो। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम अलर्ट मोड में थी। पिछले दो-तीन दिनों से इस बाघिन की हर गतिविधि पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही थी और उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने की कोशिशें भी जारी थीं। ड्रोन में उसका लोकेशन पंडई नदी के आसपास ट्रेस किया गया, जिसके बाद बुधवार को टीम रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंची। लेकिन जैसे ही वनकर्मियों ने नदी के पास पहुंचकर तलाशी शुरू की, वहां का मंजर देखकर सभी सन्न रह गए। बाघिन का शव नदी में उपलाता हुआ मिला। हालत इतनी खराब थी कि उसका शरीर लगभग हड्डियों के ढांचे में तब्दील हो चुका था। प्रारंभिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने के कारण वह बेहद कमजोर हो गई थी और भूख ही उसकी मौत की बड़ी वजह बन सकती है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी हरकत में आ गए। सीएफ गौरव ओझा ने खुद इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघिन का शव मंगूरहा वनक्षेत्र में बरामद किया गया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और विशेषज्ञों की टीम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक मौत के असली कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाघिन की मौत सिर्फ भूख से हुई या इसके पीछे कोई और वजह भी है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या जंगलों में बाघों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं? क्या भटकते वन्यजीवों को समय पर सुरक्षित रेस्क्यू नहीं किया जा पा रहा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या इंसान और जंगल के बीच बढ़ती दूरी वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रही है? फिलहाल वन विभाग इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटा हुआ है, लेकिन पंडई नदी में मिली इस बाघिन की मौत ने वन्यजीव संरक्षण की हकीकत पर एक गहरा सवालिया निशान जरूर खड़ा कर दिया है।1
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