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आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। किसी भी विभाग द्वारा इतनी बड़ी संख्या में अनुकंपा नियुक्तियां प्रदान करना, लंबित प्रकरणों के निराकरण के प्रति हमारी सरकार की गंभीरता, तत्परता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अवसर पर हमने अपेक्षा व्यक्त की है कि अनुकंपा नियुक्ति के शेष लगभग 300 लंबित प्रकरणों का निराकरण भी इसी वर्ष के अंत तक कर दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया जारी है। पदोन्नति के कारण रिक्त होने वाले पदों पर नियुक्तियां देकर इन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में 369 विद्यालय भवनों का निर्माण एवं लोकार्पण किया गया है। इसके साथ ही आज 200 नए विद्यालय भवनों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत भी 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा। हमारी सरकार द्वारा अब तक विभिन्न विभागों में की गई नियुक्तियों में से 15,000 नियुक्तियां स्कूल शिक्षा विभाग में हुई हैं। इसके अतिरिक्त, 20,000 पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए भी नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्कूल शिक्षा विभाग का बजट लगभग ₹400 करोड़ तक सीमित था, जबकि हमारी सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए ₹38,000 करोड़ का बजट दिया है। यह केवल बजट की राशि नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के हमारे संकल्प का प्रतीक है। इससे शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्राथमिकता और कार्य करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब तक 1 लाख 45 हजार से अधिक लैपटॉप वितरित किए गए हैं। स्कूटी वितरण से लेकर किताबों और कॉपियों की उपलब्धता तक, विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए। हम सभी अपनी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कदम से कदम मिलाकर मध्यप्रदेश को विकास के हर क्षेत्र में अग्रणी बनाएं और प्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प को साकार करें। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*

57 min ago
user_शेखर तिवारी
शेखर तिवारी
Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
57 min ago

आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। किसी भी विभाग द्वारा इतनी बड़ी संख्या में अनुकंपा नियुक्तियां प्रदान करना, लंबित प्रकरणों के निराकरण के प्रति हमारी सरकार की गंभीरता, तत्परता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अवसर पर हमने अपेक्षा व्यक्त की है कि अनुकंपा नियुक्ति के शेष लगभग 300 लंबित प्रकरणों का निराकरण भी इसी वर्ष के अंत तक कर दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया जारी है। पदोन्नति के कारण रिक्त होने वाले पदों पर नियुक्तियां देकर इन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में 369 विद्यालय भवनों का निर्माण एवं लोकार्पण किया गया है। इसके साथ ही आज 200 नए विद्यालय भवनों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत भी 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा। हमारी सरकार द्वारा अब तक विभिन्न विभागों में की गई नियुक्तियों में से 15,000 नियुक्तियां स्कूल शिक्षा विभाग में हुई हैं। इसके अतिरिक्त, 20,000 पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए भी नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्कूल शिक्षा विभाग का बजट लगभग ₹400 करोड़ तक सीमित था, जबकि हमारी सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए ₹38,000 करोड़ का बजट दिया है। यह केवल बजट की राशि नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के हमारे संकल्प का प्रतीक है। इससे शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्राथमिकता और कार्य करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब तक 1 लाख 45 हजार से अधिक लैपटॉप वितरित किए गए हैं। स्कूटी वितरण से लेकर किताबों और कॉपियों की उपलब्धता तक, विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए। हम सभी अपनी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कदम से कदम मिलाकर मध्यप्रदेश को विकास के हर क्षेत्र में अग्रणी बनाएं और प्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प को साकार करें। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*

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  • आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। किसी भी विभाग द्वारा इतनी बड़ी संख्या में अनुकंपा नियुक्तियां प्रदान करना, लंबित प्रकरणों के निराकरण के प्रति हमारी सरकार की गंभीरता, तत्परता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अवसर पर हमने अपेक्षा व्यक्त की है कि अनुकंपा नियुक्ति के शेष लगभग 300 लंबित प्रकरणों का निराकरण भी इसी वर्ष के अंत तक कर दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया जारी है। पदोन्नति के कारण रिक्त होने वाले पदों पर नियुक्तियां देकर इन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में 369 विद्यालय भवनों का निर्माण एवं लोकार्पण किया गया है। इसके साथ ही आज 200 नए विद्यालय भवनों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत भी 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा। हमारी सरकार द्वारा अब तक विभिन्न विभागों में की गई नियुक्तियों में से 15,000 नियुक्तियां स्कूल शिक्षा विभाग में हुई हैं। इसके अतिरिक्त, 20,000 पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए भी नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्कूल शिक्षा विभाग का बजट लगभग ₹400 करोड़ तक सीमित था, जबकि हमारी सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए ₹38,000 करोड़ का बजट दिया है। यह केवल बजट की राशि नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के हमारे संकल्प का प्रतीक है। इससे शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्राथमिकता और कार्य करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब तक 1 लाख 45 हजार से अधिक लैपटॉप वितरित किए गए हैं। स्कूटी वितरण से लेकर किताबों और कॉपियों की उपलब्धता तक, विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए। हम सभी अपनी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कदम से कदम मिलाकर मध्यप्रदेश को विकास के हर क्षेत्र में अग्रणी बनाएं और प्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प को साकार करें। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*
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    आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया।
आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 950 से अधिक अनुकंपा नियुक्ति पत्रों का वितरण किया गया। किसी भी विभाग द्वारा इतनी बड़ी संख्या में अनुकंपा नियुक्तियां प्रदान करना, लंबित प्रकरणों के निराकरण के प्रति हमारी सरकार की गंभीरता, तत्परता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस अवसर पर हमने अपेक्षा व्यक्त की है कि अनुकंपा नियुक्ति के शेष लगभग 300 लंबित प्रकरणों का निराकरण भी इसी वर्ष के अंत तक कर दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया जारी है। पदोन्नति के कारण रिक्त होने वाले पदों पर नियुक्तियां देकर इन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में 369 विद्यालय भवनों का निर्माण एवं लोकार्पण किया गया है। इसके साथ ही आज 200 नए विद्यालय भवनों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत भी 200 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाएगा।
हमारी सरकार द्वारा अब तक विभिन्न विभागों में की गई नियुक्तियों में से 15,000 नियुक्तियां स्कूल शिक्षा विभाग में हुई हैं। इसके अतिरिक्त, 20,000 पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए भी नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्कूल शिक्षा विभाग का बजट लगभग ₹400 करोड़ तक सीमित था, जबकि हमारी सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए ₹38,000 करोड़ का बजट दिया है। यह केवल बजट की राशि नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के हमारे संकल्प का प्रतीक है। इससे शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्राथमिकता और कार्य करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब तक 1 लाख 45 हजार से अधिक लैपटॉप वितरित किए गए हैं। स्कूटी वितरण से लेकर किताबों और कॉपियों की उपलब्धता तक, विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए।
हम सभी अपनी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कदम से कदम मिलाकर मध्यप्रदेश को विकास के हर क्षेत्र में अग्रणी बनाएं और प्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प को साकार करें।
- *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    57 min ago
  • धरना प्रदर्शन राम बहादुर शर्मा द्वारा किया गया देवतालाब विधानसभा क्षेत्र में
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    धरना प्रदर्शन राम बहादुर शर्मा द्वारा किया गया देवतालाब विधानसभा क्षेत्र में
    user_Avi Standing with the truth
    Avi Standing with the truth
    Yoga instructor मंगवां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • मध्य प्रदेश जिला रीवा ग्राउंड जिरो से रिपोर्ट साथियो ये नहर की हालात देखिए ठेकेदार की घोर लापरवाही से रीवा एंव मऊगंज के किसान बेहाल साथियो ये नहर वाडसागर नहर परियोजना राज्य सरकार एंव केन्द्र सरकार की मिली जुली योजना है यह नहर बन जाने से रीवा और मऊगंज के किसानो के लिये जीवन दान सावित होगी लेकिन ठेकेदार के घोर लापरवाही 15/20 वर्षो से टूटी फूटी पडी है इसका जबाब ना ठेकेदार के पास है और ना ही शासन प्रशासन के पास और किसान परेशान है
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    मध्य प्रदेश जिला रीवा ग्राउंड जिरो से रिपोर्ट साथियो ये नहर की हालात देखिए ठेकेदार की घोर लापरवाही से रीवा एंव मऊगंज के किसान बेहाल 
साथियो ये नहर वाडसागर नहर परियोजना राज्य सरकार एंव केन्द्र सरकार की मिली जुली योजना है यह नहर बन जाने से रीवा और मऊगंज के किसानो के लिये जीवन दान सावित होगी लेकिन ठेकेदार के घोर लापरवाही 15/20 वर्षो से टूटी फूटी पडी है इसका जबाब ना ठेकेदार के पास है और ना ही शासन प्रशासन के पास और किसान परेशान है
    user_Praveen Shukla
    Praveen Shukla
    Insurance Agent हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • रीवा पुलिस लाइन में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने किया शस्त्र पूजन, बोले—सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है विजयादशमी धर्म, मर्यादा और न्याय के मार्ग पर चलने का दिया संदेश गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ गरिमामय आयोजन, उप मुख्यमंत्री ने जिलेवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाए रीवा। विजयादशमी के पावन पर्व पर पुलिस लाइन रीवा में शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन कर परंपरा का निर्वहन किया और जिलेवासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सशस्त्र बल के जवानों ने उप मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुलिस विभाग ने गरिमामय वातावरण में विजयादशमी का पर्व मनाया। समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन में सत्य, न्याय और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन हमारी गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा है, जो समाज में अराजक शक्तियों के अंत और रचनात्मक शक्तियों को मजबूत करने का संदेश देती है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार को समाप्त कर मर्यादा और सदाचार को अपनाने का संकल्प लेने का दिन भी है। उन्होंने भगवान श्रीराम और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण अहंकार का प्रतीक थे, जबकि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में धर्म, सत्य और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। विजयादशमी का पर्व इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाता है। पुलिस लाइन में आयोजित इस समारोह में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस बल की परंपरा और अनुशासन की झलक देखने को मिली। आयोजन में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता, कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी सहित पुलिस विभाग के अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। ब्यूरो चीफ रीवा अभिषेक पांडे
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    रीवा पुलिस लाइन में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने किया शस्त्र पूजन, बोले—सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है विजयादशमी धर्म, मर्यादा और न्याय के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ गरिमामय आयोजन, उप मुख्यमंत्री ने जिलेवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाए

रीवा। विजयादशमी के पावन पर्व पर पुलिस लाइन रीवा में शस्त्र पूजन समारोह का आयोजन किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन कर परंपरा का निर्वहन किया और जिलेवासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सशस्त्र बल के जवानों ने उप मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुलिस विभाग ने गरिमामय वातावरण में विजयादशमी का पर्व मनाया।

समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन में सत्य, न्याय और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन हमारी गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा है, जो समाज में अराजक शक्तियों के अंत और रचनात्मक शक्तियों को मजबूत करने का संदेश देती है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार को समाप्त कर मर्यादा और सदाचार को अपनाने का संकल्प लेने का दिन भी है। उन्होंने भगवान श्रीराम और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण अहंकार का प्रतीक थे, जबकि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में धर्म, सत्य और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। विजयादशमी का पर्व इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाता है।

पुलिस लाइन में आयोजित इस समारोह में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस बल की परंपरा और अनुशासन की झलक देखने को मिली। आयोजन में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता, कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी सहित पुलिस विभाग के अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
ब्यूरो चीफ रीवा 
अभिषेक पांडे
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Artist हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • सरकारीअस्पताल में नौकरी, निजी क्लिनिक में मरीजों की कतार! 500 रुपये फीस वसूली का आरोप, रसीद कहां? संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे डॉ. अनूप मिश्रा के निजी क्लिनिक को लेकर उठे गंभीर सवाल मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल सरकारी सेवा की शर्तें क्या कहती हैं? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब खोलेंगे जांच की फाइल? पत्रकार कुंदन सिंह रीवा सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के सामने जब सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े सवाल खड़े होते हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना लाजिमी है। रीवा में संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे चर्म एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित निजी क्लिनिक को लेकर ऐसे ही गंभीर सवाल सामने आए हैं। क्लिनिक में मरीजों की भारी भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि यहां मरीजों से परामर्श के नाम पर 500 रुपये तक लिए जाते हैं, लेकिन फीस की रसीद नहीं दी जाती। अब सवाल यह है कि क्या सरकारी सेवा में पदस्थ चिकित्सक की निजी प्रैक्टिस नियमानुसार है? मरीजों से ली जा रही फीस का रिकॉर्ड क्या है? और इन आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? 500 रुपये फीस का आरोप,मरीजों को रसीद क्यों नहीं? न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित कथित निजी क्लिनिक में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ जुटने की बात सामने आई है। आरोप है कि मरीजों से परामर्श के लिए 500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। यदि फीस वसूली के बावजूद रसीद नहीं दी जा रही है, तो यह जांच का विषय है कि क्लिनिक में शुल्क संग्रह की व्यवस्था क्या है और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क का हिसाब-किताब क्या है? क्या क्लिनिक में निर्धारित नियमों के अनुसार रसीद जारी की जाती है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। एक ही जगह जांच, दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल क्लिनिक को लेकर लगाए गए आरोपों में जांच की सुविधा और दवाइयों की खरीद से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। दावा है कि मरीजों को कथित तौर पर एक निर्धारित मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मरीजों को अपनी पसंद के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की स्वतंत्रता मिल रही है? क्या किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है? क्या जांच और दवाइयों से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं? इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग को क्लिनिक की कार्यप्रणाली की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस पर सबसे बड़ा सवाल इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सक की सरकारी सेवा से जुड़ी शर्तें हैं। डॉ. अनूप मिश्रा की निजी प्रैक्टिस की वैधता का सवाल उनकी नियुक्ति, लागू सेवा नियमों और किसी अनुमति अथवा प्रतिबंध की स्थिति की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि संबंधित चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति है, तो उसके नियमों और शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि अनुमति नहीं है या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। सरकारी पद पर रहते हुए निजी क्लिनिक का संचालन नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह स्पष्ट करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। वीडियो सामने आने के दावे के बाद विभाग की निगरानी पर सवाल निजी क्लिनिक में मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने के दावे ने मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, केवल वीडियो में भीड़ दिखाई देने से किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए क्लिनिक के पंजीयन, फीस की रसीदों, चिकित्सक की सेवा शर्तों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। सवाल यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों में पदस्थ चिकित्सकों की गतिविधियों की निगरानी किस तरह करते हैं? क्या निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होती है? यदि शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच की समय-सीमा क्या है? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब सामने आना चाहिए। प्रशासन से मांग सिर्फ शिकायत नहीं,दस्तावेजों के आधार पर हो जांच मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निम्न बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए— संबंधित निजी क्लिनिक के पंजीयन और संचालन की वैधानिक स्थिति। डॉ. अनूप मिश्रा की सेवा शर्तें तथा निजी प्रैक्टिस की अनुमति से संबंधित दस्तावेज। मरीजों से लिए जा रहे परामर्श शुल्क और रसीद व्यवस्था की जांच। जांच सुविधाओं तथा दवाइयों की खरीद से जुड़े आरोपों की पड़ताल। यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई। बड़ा सवाल: सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी या निजी क्लिनिक की कमाई? यह मामला किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नियमों की पारदर्शी जांच और मरीजों के हितों की रक्षा का है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए। लेकिन गंभीर सवाल सामने आने के बाद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी अपने आप में जवाबदेही का विषय बन सकती है। क्या जिला प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित चिकित्सक की सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा? और क्या मरीजों से ली जा रही फीस तथा रसीद व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाई जाएगी? अब निगाहें प्रशासन पर हैं। जरूरत केवल औपचारिक बयान की नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की है। फोटो वाला डेमो बनाओ सरकारीअस्पताल में नौकरी, निजी क्लिनिक में मरीजों की कतार! 500 रुपये फीस वसूली का आरोप, रसीद कहां? संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे डॉ. अनूप मिश्रा के निजी क्लिनिक को लेकर उठे गंभीर सवाल मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल सरकारी सेवा की शर्तें क्या कहती हैं? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब खोलेंगे जांच की फाइल? पत्रकार कुंदन सिंह रीवा सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के सामने जब सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े सवाल खड़े होते हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना लाजिमी है। रीवा में संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे चर्म एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित निजी क्लिनिक को लेकर ऐसे ही गंभीर सवाल सामने आए हैं। क्लिनिक में मरीजों की भारी भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि यहां मरीजों से परामर्श के नाम पर 500 रुपये तक लिए जाते हैं, लेकिन फीस की रसीद नहीं दी जाती। अब सवाल यह है कि क्या सरकारी सेवा में पदस्थ चिकित्सक की निजी प्रैक्टिस नियमानुसार है? मरीजों से ली जा रही फीस का रिकॉर्ड क्या है? और इन आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? 500 रुपये फीस का आरोप,मरीजों को रसीद क्यों नहीं? न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित कथित निजी क्लिनिक में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ जुटने की बात सामने आई है। आरोप है कि मरीजों से परामर्श के लिए 500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। यदि फीस वसूली के बावजूद रसीद नहीं दी जा रही है, तो यह जांच का विषय है कि क्लिनिक में शुल्क संग्रह की व्यवस्था क्या है और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क का हिसाब-किताब क्या है? क्या क्लिनिक में निर्धारित नियमों के अनुसार रसीद जारी की जाती है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। एक ही जगह जांच, दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल क्लिनिक को लेकर लगाए गए आरोपों में जांच की सुविधा और दवाइयों की खरीद से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। दावा है कि मरीजों को कथित तौर पर एक निर्धारित मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मरीजों को अपनी पसंद के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की स्वतंत्रता मिल रही है? क्या किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है? क्या जांच और दवाइयों से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं? इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग को क्लिनिक की कार्यप्रणाली की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस पर सबसे बड़ा सवाल इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सक की सरकारी सेवा से जुड़ी शर्तें हैं। डॉ. अनूप मिश्रा की निजी प्रैक्टिस की वैधता का सवाल उनकी नियुक्ति, लागू सेवा नियमों और किसी अनुमति अथवा प्रतिबंध की स्थिति की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि संबंधित चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति है, तो उसके नियमों और शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि अनुमति नहीं है या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। सरकारी पद पर रहते हुए निजी क्लिनिक का संचालन नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह स्पष्ट करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। वीडियो सामने आने के दावे के बाद विभाग की निगरानी पर सवाल निजी क्लिनिक में मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने के दावे ने मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, केवल वीडियो में भीड़ दिखाई देने से किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए क्लिनिक के पंजीयन, फीस की रसीदों, चिकित्सक की सेवा शर्तों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। सवाल यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों में पदस्थ चिकित्सकों की गतिविधियों की निगरानी किस तरह करते हैं? क्या निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होती है? यदि शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच की समय-सीमा क्या है? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब सामने आना चाहिए। प्रशासन से मांग सिर्फ शिकायत नहीं,दस्तावेजों के आधार पर हो जांच मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निम्न बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए— संबंधित निजी क्लिनिक के पंजीयन और संचालन की वैधानिक स्थिति। डॉ. अनूप मिश्रा की सेवा शर्तें तथा निजी प्रैक्टिस की अनुमति से संबंधित दस्तावेज। मरीजों से लिए जा रहे परामर्श शुल्क और रसीद व्यवस्था की जांच। जांच सुविधाओं तथा दवाइयों की खरीद से जुड़े आरोपों की पड़ताल। यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई। बड़ा सवाल: सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी या निजी क्लिनिक की कमाई? यह मामला किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नियमों की पारदर्शी जांच और मरीजों के हितों की रक्षा का है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए। लेकिन गंभीर सवाल सामने आने के बाद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी अपने आप में जवाबदेही का विषय बन सकती है। क्या जिला प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित चिकित्सक की सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा? और क्या मरीजों से ली जा रही फीस तथा रसीद व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाई जाएगी? अब निगाहें प्रशासन पर हैं। जरूरत केवल औपचारिक बयान की नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की है। फोटो वाला डेमो बनाओ
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    सरकारीअस्पताल में नौकरी, निजी क्लिनिक में मरीजों की कतार! 500 रुपये फीस वसूली का आरोप, रसीद कहां?
संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे डॉ. अनूप मिश्रा के निजी क्लिनिक को लेकर उठे गंभीर सवाल
मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल
सरकारी सेवा की शर्तें क्या कहती हैं? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब खोलेंगे जांच की फाइल?
पत्रकार कुंदन सिंह
रीवा सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के सामने जब सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े सवाल खड़े होते हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना लाजिमी है। रीवा में संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे चर्म एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित निजी क्लिनिक को लेकर ऐसे ही गंभीर सवाल सामने आए हैं। क्लिनिक में मरीजों की भारी भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि यहां मरीजों से परामर्श के नाम पर 500 रुपये तक लिए जाते हैं, लेकिन फीस की रसीद नहीं दी जाती।
अब सवाल यह है कि क्या सरकारी सेवा में पदस्थ चिकित्सक की निजी प्रैक्टिस नियमानुसार है? मरीजों से ली जा रही फीस का रिकॉर्ड क्या है? और इन आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
500 रुपये फीस का आरोप,मरीजों को रसीद क्यों नहीं?
न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित कथित निजी क्लिनिक में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ जुटने की बात सामने आई है। आरोप है कि मरीजों से परामर्श के लिए 500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। यदि फीस वसूली के बावजूद रसीद नहीं दी जा रही है, तो यह जांच का विषय है कि क्लिनिक में शुल्क संग्रह की व्यवस्था क्या है और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं।
बड़ा सवाल यह है कि मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क का हिसाब-किताब क्या है? क्या क्लिनिक में निर्धारित नियमों के अनुसार रसीद जारी की जाती है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
एक ही जगह जांच, दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल
क्लिनिक को लेकर लगाए गए आरोपों में जांच की सुविधा और दवाइयों की खरीद से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। दावा है कि मरीजों को कथित तौर पर एक निर्धारित मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है।
यदि ऐसा हो रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मरीजों को अपनी पसंद के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की स्वतंत्रता मिल रही है? क्या किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है? क्या जांच और दवाइयों से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं?
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग को क्लिनिक की कार्यप्रणाली की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस पर सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सक की सरकारी सेवा से जुड़ी शर्तें हैं। डॉ. अनूप मिश्रा की निजी प्रैक्टिस की वैधता का सवाल उनकी नियुक्ति, लागू सेवा नियमों और किसी अनुमति अथवा प्रतिबंध की स्थिति की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि संबंधित चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति है, तो उसके नियमों और शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि अनुमति नहीं है या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
सरकारी पद पर रहते हुए निजी क्लिनिक का संचालन नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह स्पष्ट करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
वीडियो सामने आने के दावे के बाद विभाग की निगरानी पर सवाल
निजी क्लिनिक में मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने के दावे ने मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, केवल वीडियो में भीड़ दिखाई देने से किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए क्लिनिक के पंजीयन, फीस की रसीदों, चिकित्सक की सेवा शर्तों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
सवाल यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों में पदस्थ चिकित्सकों की गतिविधियों की निगरानी किस तरह करते हैं? क्या निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होती है? यदि शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच की समय-सीमा क्या है?
इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब सामने आना चाहिए।
प्रशासन से मांग सिर्फ शिकायत नहीं,दस्तावेजों के आधार पर हो जांच
मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निम्न बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए—

संबंधित निजी क्लिनिक के पंजीयन और संचालन की वैधानिक स्थिति।

डॉ. अनूप मिश्रा की सेवा शर्तें तथा निजी प्रैक्टिस की अनुमति से संबंधित दस्तावेज।

मरीजों से लिए जा रहे परामर्श शुल्क और रसीद व्यवस्था की जांच।

जांच सुविधाओं तथा दवाइयों की खरीद से जुड़े आरोपों की पड़ताल।

यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई।
बड़ा सवाल: सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी या निजी क्लिनिक की कमाई?

यह मामला किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नियमों की पारदर्शी जांच और मरीजों के हितों की रक्षा का है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए। लेकिन गंभीर सवाल सामने आने के बाद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी अपने आप में जवाबदेही का विषय बन सकती है।
क्या जिला प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित चिकित्सक की सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा? और क्या मरीजों से ली जा रही फीस तथा रसीद व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाई जाएगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। जरूरत केवल औपचारिक बयान की नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की है। फोटो वाला डेमो बनाओ


सरकारीअस्पताल में नौकरी, निजी क्लिनिक में मरीजों की कतार! 500 रुपये फीस वसूली का आरोप, रसीद कहां?
संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे डॉ. अनूप मिश्रा के निजी क्लिनिक को लेकर उठे गंभीर सवाल
मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल
सरकारी सेवा की शर्तें क्या कहती हैं? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब खोलेंगे जांच की फाइल?
पत्रकार कुंदन सिंह
रीवा सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के सामने जब सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े सवाल खड़े होते हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना लाजिमी है। रीवा में संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ बताए जा रहे चर्म एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित निजी क्लिनिक को लेकर ऐसे ही गंभीर सवाल सामने आए हैं। क्लिनिक में मरीजों की भारी भीड़ का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि यहां मरीजों से परामर्श के नाम पर 500 रुपये तक लिए जाते हैं, लेकिन फीस की रसीद नहीं दी जाती।
अब सवाल यह है कि क्या सरकारी सेवा में पदस्थ चिकित्सक की निजी प्रैक्टिस नियमानुसार है? मरीजों से ली जा रही फीस का रिकॉर्ड क्या है? और इन आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
500 रुपये फीस का आरोप,मरीजों को रसीद क्यों नहीं?
न्यू बस स्टैंड क्षेत्र स्थित कथित निजी क्लिनिक में सुबह से शाम तक मरीजों की भीड़ जुटने की बात सामने आई है। आरोप है कि मरीजों से परामर्श के लिए 500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। यदि फीस वसूली के बावजूद रसीद नहीं दी जा रही है, तो यह जांच का विषय है कि क्लिनिक में शुल्क संग्रह की व्यवस्था क्या है और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं।
बड़ा सवाल यह है कि मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क का हिसाब-किताब क्या है? क्या क्लिनिक में निर्धारित नियमों के अनुसार रसीद जारी की जाती है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
एक ही जगह जांच, दवाइयों की व्यवस्था पर भी सवाल
क्लिनिक को लेकर लगाए गए आरोपों में जांच की सुविधा और दवाइयों की खरीद से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। दावा है कि मरीजों को कथित तौर पर एक निर्धारित मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए कहा जाता है।
यदि ऐसा हो रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मरीजों को अपनी पसंद के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की स्वतंत्रता मिल रही है? क्या किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेने के लिए दबाव बनाया जाता है? क्या जांच और दवाइयों से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं?
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग को क्लिनिक की कार्यप्रणाली की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस पर सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चिकित्सक की सरकारी सेवा से जुड़ी शर्तें हैं। डॉ. अनूप मिश्रा की निजी प्रैक्टिस की वैधता का सवाल उनकी नियुक्ति, लागू सेवा नियमों और किसी अनुमति अथवा प्रतिबंध की स्थिति की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि संबंधित चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति है, तो उसके नियमों और शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि अनुमति नहीं है या निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
सरकारी पद पर रहते हुए निजी क्लिनिक का संचालन नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह स्पष्ट करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
वीडियो सामने आने के दावे के बाद विभाग की निगरानी पर सवाल
निजी क्लिनिक में मरीजों की भीड़ का वीडियो सामने आने के दावे ने मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, केवल वीडियो में भीड़ दिखाई देने से किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए क्लिनिक के पंजीयन, फीस की रसीदों, चिकित्सक की सेवा शर्तों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
सवाल यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग अपने अधीनस्थ संस्थानों में पदस्थ चिकित्सकों की गतिविधियों की निगरानी किस तरह करते हैं? क्या निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों के पालन की नियमित समीक्षा होती है? यदि शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच की समय-सीमा क्या है?
इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब सामने आना चाहिए।
प्रशासन से मांग सिर्फ शिकायत नहीं,दस्तावेजों के आधार पर हो जांच
मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निम्न बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए—
संबंधित निजी क्लिनिक के पंजीयन और संचालन की वैधानिक स्थिति।
डॉ. अनूप मिश्रा की सेवा शर्तें तथा निजी प्रैक्टिस की अनुमति से संबंधित दस्तावेज।
मरीजों से लिए जा रहे परामर्श शुल्क और रसीद व्यवस्था की जांच।
जांच सुविधाओं तथा दवाइयों की खरीद से जुड़े आरोपों की पड़ताल।
यदि किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई।
बड़ा सवाल: सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी या निजी क्लिनिक की कमाई?
यह मामला किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि नियमों की पारदर्शी जांच और मरीजों के हितों की रक्षा का है। आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए। लेकिन गंभीर सवाल सामने आने के बाद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी अपने आप में जवाबदेही का विषय बन सकती है।
क्या जिला प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित चिकित्सक की सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा? और क्या मरीजों से ली जा रही फीस तथा रसीद व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाई जाएगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। जरूरत केवल औपचारिक बयान की नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की है। फोटो वाला डेमो बनाओ
    user_सोशल मीडिया पंडित विकास पत्रका
    सोशल मीडिया पंडित विकास पत्रका
    हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • रात 11:30 चोरी करते पकड़े गए दो युवक गुरेता के बताए जा रहे हैं अब तक से दक्षिण द्वारा नाम नहीं बताया गया यह बताया गया है कि एक पटेल थे एक ब्राह्मण थे कल 11:30 बजे रात हमारे यहां से भैंस चुरा कर पकड़े गए हैं ग्रामीण खेर करके पकड़ा है जिसकी सूचना मऊगंज थाने को दी गई थी मऊगंज पुलिस आकर के मौके का निरीक्षण करके चोरों को पकड़ ले गई है और साथ में उनके एक अपाचे थी जो छूट गई है और साथ में तलवार बांका लाठी सब लिए थे करने का प्रयास किया ग्रामीणों द्वारा गुहार लगाने पर जान बची तब जाकर चोरों को पकड़ा गया यस न्यूज़ संवाददाता दीनानाथ गुप्ता की खास रिपोर्ट
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    रात 11:30 चोरी करते पकड़े गए दो युवक गुरेता के बताए जा रहे हैं अब तक से दक्षिण द्वारा नाम नहीं बताया गया यह बताया गया है कि एक पटेल थे एक ब्राह्मण थे कल 11:30 बजे रात हमारे यहां से भैंस चुरा कर पकड़े गए हैं ग्रामीण खेर करके पकड़ा है
जिसकी सूचना मऊगंज थाने को दी गई थी मऊगंज पुलिस आकर के मौके का निरीक्षण करके चोरों को पकड़ ले गई है और साथ में उनके एक अपाचे थी जो छूट गई है और साथ में तलवार बांका लाठी सब लिए थे करने का प्रयास किया ग्रामीणों द्वारा गुहार लगाने पर जान बची तब जाकर चोरों को पकड़ा गया यस न्यूज़ संवाददाता दीनानाथ गुप्ता की खास रिपोर्ट
    user_Patrakar Deenan मंगवाविधायक नर
    Patrakar Deenan मंगवाविधायक नर
    मऊगंज, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मंत्री विश्वास सारंग ने विधि विधान से किया शस्त्र पूजन *भोपाल ब्रेकिंग* मंत्री विश्वास सारंग पुलिस लाइन नेहरू नगर भोपाल स्थित ग्राउंड में शस्त्र पूजन में हुए शामिल मंत्री विश्वास सारंग ने विधि विधान से किया शस्त्र पूजन मंत्री सारंग ने कहा कि पूरी दुनिया में बुराई पर अच्छाई के प्रतीक विजयादशमी पर्व मनाया जा रहा है सभी को दशहरे की बहुत बहुत शुभकामनाएं
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    मंत्री विश्वास सारंग ने विधि विधान से किया शस्त्र पूजन
*भोपाल ब्रेकिंग*
मंत्री विश्वास सारंग पुलिस लाइन नेहरू नगर भोपाल स्थित ग्राउंड में शस्त्र पूजन में हुए शामिल 
मंत्री विश्वास सारंग ने विधि विधान से किया शस्त्र पूजन
मंत्री सारंग ने कहा कि पूरी दुनिया में बुराई पर अच्छाई के प्रतीक विजयादशमी पर्व मनाया जा रहा है 
सभी को दशहरे की बहुत बहुत शुभकामनाएं
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • रीवा में चबूतरे पर मिला नवजात का शव, छाती पर छेद मिलने से सनसनी, नरबलि की आशंका पर पुलिस जांच जारी। रीवा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पड़ैन टोला में सन्यासी बाबा के चबूतरे पर नवजात का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि नवजात की नाभि में नाल जुड़ी हुई थी, वहीं छाती के दाहिने हिस्से में छेद भी मिला है। घटना के बाद इलाके में नरबलि और टोना-टोटका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इन आशंकाओं की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मंगलवार शाम बाबू चक्की के पास स्थित सन्यासी बाबा के चबूतरे पर शव मिलने की सूचना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजात का शव यहां कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। रीवा से अशोक मिश्रा।
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    रीवा में चबूतरे पर मिला नवजात का शव, छाती पर छेद मिलने से सनसनी, नरबलि की आशंका पर पुलिस जांच जारी।

रीवा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पड़ैन टोला में सन्यासी बाबा के चबूतरे पर नवजात का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि नवजात की नाभि में नाल जुड़ी हुई थी, वहीं छाती के दाहिने हिस्से में छेद भी मिला है। घटना के बाद इलाके में नरबलि और टोना-टोटका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इन आशंकाओं की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मंगलवार शाम बाबू चक्की के पास स्थित सन्यासी बाबा के चबूतरे पर शव मिलने की सूचना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजात का शव यहां कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

रीवा से अशोक मिश्रा।
    user_उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    सेमरिया, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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