भभुआ स्थित जिला परिषद कैमूर कार्यालय में विकास योजनाओं के संचालन, वित्तीय व्यय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में जिला पदाधिकारी कैमूर को एक विस्तृत आवेदन सौंपा गया है, जिसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ-साथ जिला परिषद की विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की गई है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जिला परिषद में योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है। कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को पूरक (सप्लीमेंट्री) सूची में डालकर उनकी जगह ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें वित्तीय गड़बड़ी की संभावना अधिक है। स्ट्रीट लाइट (हाई मोस्ट लाइट) लगाने और मिट्टी कार्य जैसी योजनाओं में मनमाने तरीके से काम कराए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 15वीं और षष्ठम वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य जिले का समग्र विकास करना है, लेकिन इसके बावजूद कुछ चुनिंदा कार्यों को प्राथमिकता देकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में अनिवार्य रूप से होने वाली जिला परिषद की सामान्य बैठकें पिछले छह माह से लेकर एक वर्ष तक नहीं बुलाई गई हैं, जिससे विकास कार्यों की समीक्षा और संभावित अनियमितताओं पर चर्चा बाधित हो रही है। इस मामले को लेकर मुखर हुए जिला परिषद सदस्यों में विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, अखिलेश कुमार चौरसिया, राजकुमार सिंह, बुल्लू राम, शत्रुंजय कुमार सिंह उर्फ छोटन सिंह, गीता देवी, समदेइया देवी, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि अश्विनी कुमार चौबे उर्फ झबलू चौबे और जिप प्रतिनिधि भोला बिंद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सदस्यों ने बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा 72 (1) के तहत विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा और जिला परिषद की नियमित बैठक सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से पहुंच सके और पारदर्शिता बनी रहे।
भभुआ स्थित जिला परिषद कैमूर कार्यालय में विकास योजनाओं के संचालन, वित्तीय व्यय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में जिला पदाधिकारी कैमूर को एक विस्तृत आवेदन सौंपा गया है, जिसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ-साथ जिला परिषद की विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की गई है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जिला परिषद में योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है। कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को पूरक (सप्लीमेंट्री) सूची में डालकर उनकी जगह ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें वित्तीय गड़बड़ी की संभावना अधिक है। स्ट्रीट लाइट (हाई मोस्ट लाइट) लगाने और मिट्टी कार्य जैसी योजनाओं में मनमाने तरीके से काम कराए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 15वीं और षष्ठम वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य जिले का समग्र विकास करना है, लेकिन इसके बावजूद कुछ चुनिंदा कार्यों को प्राथमिकता देकर सरकारी
धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में अनिवार्य रूप से होने वाली जिला परिषद की सामान्य बैठकें पिछले छह माह से लेकर एक वर्ष तक नहीं बुलाई गई हैं, जिससे विकास कार्यों की समीक्षा और संभावित अनियमितताओं पर चर्चा बाधित हो रही है। इस मामले को लेकर मुखर हुए जिला परिषद सदस्यों में विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, अखिलेश कुमार चौरसिया, राजकुमार सिंह, बुल्लू राम, शत्रुंजय कुमार सिंह उर्फ छोटन सिंह, गीता देवी, समदेइया देवी, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि अश्विनी कुमार चौबे उर्फ झबलू चौबे और जिप प्रतिनिधि भोला बिंद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सदस्यों ने बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा 72 (1) के तहत विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा और जिला परिषद की नियमित बैठक सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से पहुंच सके और पारदर्शिता बनी रहे।
- मोहनिया, कैमूर से वाराणसी दाह संस्कार के लिए जा रहे एक शव वाहन की चंदौली में सोमवार, 25 मई को एक ट्रक से भीषण टक्कर हो गई। यह शव वाहन नगर पंचायत हाटा के अवखंरा गांव निवासी कालिका गोंड के पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जा रहा था। इस दर्दनाक हादसे में शव वाहन में सवार कुल 17 लोग घायल हो गए। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि शव वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पहुंचकर पुलिस को सूचित किया। सभी घायलों को तत्काल चंदौली जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद, गंभीर रूप से घायल हुए 4 लोगों को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज चंदौली में ही जारी है। घटना की सूचना मिलते ही नगर पंचायत हाटा के चेयरमैन रमेश जायसवाल चंदौली अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और आश्वस्त किया कि सरकार से मिलने वाली सभी सहायता और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कराने के लिए जिला पदाधिकारियों से फोन पर बात की गई है।2
- भभुआ स्थित जिला परिषद कैमूर कार्यालय में विकास योजनाओं के संचालन, वित्तीय व्यय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में जिला पदाधिकारी कैमूर को एक विस्तृत आवेदन सौंपा गया है, जिसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ-साथ जिला परिषद की विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की गई है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जिला परिषद में योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है। कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को पूरक (सप्लीमेंट्री) सूची में डालकर उनकी जगह ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनमें वित्तीय गड़बड़ी की संभावना अधिक है। स्ट्रीट लाइट (हाई मोस्ट लाइट) लगाने और मिट्टी कार्य जैसी योजनाओं में मनमाने तरीके से काम कराए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 15वीं और षष्ठम वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य जिले का समग्र विकास करना है, लेकिन इसके बावजूद कुछ चुनिंदा कार्यों को प्राथमिकता देकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में अनिवार्य रूप से होने वाली जिला परिषद की सामान्य बैठकें पिछले छह माह से लेकर एक वर्ष तक नहीं बुलाई गई हैं, जिससे विकास कार्यों की समीक्षा और संभावित अनियमितताओं पर चर्चा बाधित हो रही है। इस मामले को लेकर मुखर हुए जिला परिषद सदस्यों में विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल, अखिलेश कुमार चौरसिया, राजकुमार सिंह, बुल्लू राम, शत्रुंजय कुमार सिंह उर्फ छोटन सिंह, गीता देवी, समदेइया देवी, उपाध्यक्ष प्रतिनिधि अश्विनी कुमार चौबे उर्फ झबलू चौबे और जिप प्रतिनिधि भोला बिंद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सदस्यों ने बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा 72 (1) के तहत विशेष बैठक बुलाने की भी मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा और जिला परिषद की नियमित बैठक सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों में समान रूप से पहुंच सके और पारदर्शिता बनी रहे।2
- चंदौली में दाह संस्कार के लिए जा रहे एक शव वाहन की ट्रक से भीषण टक्कर हो गई, जिसमें 17 लोग घायल हो गए। इस हादसे में घायल हुए लोगों में से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही चेयरमैन रमेश जयसवाल मौके पर पहुंचे।1
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- चंदौली के सकलडीहा स्थित जमुनीपुर सभा के नरौजा गांव में ग्रामीणों ने सफाईकर्मियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार सालों से गांव में कोई सफाईकर्मी नहीं आया है। उन्होंने यह भी बताया कि आज तक उन्होंने किसी भी सफाईकर्मी को अपने गांव में कभी देखा ही नहीं है।1
- एक व्यक्ति ने अपने शहर के प्रति गहरा प्रेम व्यक्त करते हुए एक भावनात्मक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने अपने शहर के लिए अत्यधिक लगाव जाहिर किया और फिर अपने दर्शकों से पूछा कि क्या वे भी अपने शहरों से उतना ही प्यार करते हैं।1
- मंगलवार को धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब गंगा घाटों पर उमड़ पड़ा। भीषण गर्मी के बावजूद, दशाश्वमेध, अस्सी और राजेंद्र प्रसाद जैसे प्रमुख घाटों पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां उन्होंने आस्था की डुबकी लगाकर मां गंगा की पूजा-अर्चना की। प्रशासन ने इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। कई घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल और जल पुलिस की तैनाती की गई थी। इसके साथ ही, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा आरती और अन्य विशेष पूजन कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। यह पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने और दान-पुण्य के कार्य करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।2
- जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान "जनभागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले" की समीक्षा बैठक रविवार को कैमूर जिला मुख्यालय भभुआ में संपन्न हुई। जिला पदाधिकारी कैमूर नितिन कुमार सिंह ने इस बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर के अधिकारी व कर्मी शामिल हुए। बैठक के दौरान अभियान की सफलता और उसकी डाटा रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की गई। अभियान के तहत, कैमूर जिले के अधौरा, चांद, भगवानपुर, चैनपुर, रामगढ़ और रामपुर प्रखंडों के 62 अनुसूचित जनजाति और PVTG बहुल गांवों में विशेष शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में कुल 2729 ग्रामीणों ने भागीदारी की। मौके पर ही कई महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान की गईं, जिनमें 284 लोगों की सिकल सेल एनीमिया जांच, 220 लोगों की टीबी जांच और 85 लोगों के नए आयुष्मान कार्ड बनाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, 54 लोगों को पेंशन योजना से जोड़ा गया, जबकि 26 महिलाओं को पीएम उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिए गए। वहीं, मौके पर ही 48 राशन कार्ड और 17 जाति प्रमाण-पत्र भी जारी किए गए। प्रशासन के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना और इन क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना है।1