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उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर अब 'शूरू ऐप' पर उपलब्ध है। दर्शकों से अपील की गई है कि वे सभी महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए लगातार ऐप पर बने रहें।
Rahul katheriya
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर अब 'शूरू ऐप' पर उपलब्ध है। दर्शकों से अपील की गई है कि वे सभी महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए लगातार ऐप पर बने रहें।
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- उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर अब 'शूरू ऐप' पर उपलब्ध है। दर्शकों से अपील की गई है कि वे सभी महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए लगातार ऐप पर बने रहें।1
- फर्रुखाबाद जिले के अम्रतपुर कस्बा बाजार में रविवार रात करीब 8 बजे दो दुकानदारों के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। इस वारदात के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद यूपी-112 पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अम्रतपुर बाजार में विकास अपनी फिंगर की दुकान चलाते हैं, जबकि पारस पापड़ी की दुकान लगाते हैं। रविवार शाम कुछ युवकों और इन दोनों दुकानदारों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। यह शुरुआती कहासुनी धीरे-धीरे बढ़ती गई और जल्द ही विवाद मारपीट में बदल गया। घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिसमें कुछ लोग विवाद की वजह पारस पापड़ी बता रहे हैं, वहीं पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कुछ युवकों ने उन पर हमला कर मारपीट की। सूचना मिलते ही यूपी-112 पुलिस के साथ चौकी प्रभारी राहुल कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले का निरीक्षण किया। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर पूरी घटना की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस विवाद की वास्तविक वजह और मारपीट की परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है, क्योंकि घटना के कारणों को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि शिकायत और जांच के आधार पर तथ्य स्पष्ट होने के बाद नियमानुसार उचित विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद बाजार में तनाव का माहौल खत्म हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है। यह घटना एक बार फिर स्थानीय बाजार में व्यापारियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है, और सभी की निगाहें पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।2
- फर्रुखाबाद में आम जनता के साथ भाईचारा कायम करने और सीधा समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने 'ऑपरेशन ग्राम संवाद' का शुभारंभ किया है। इस पहल के तहत जिले के सभी थाना क्षेत्रों में 'ग्राम संवाद' की शुरुआत की गई है। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देशानुसार, यह संवाद कार्यक्रम थाना क्षेत्रों के ग्राम अपराध रजिस्टर और अन्य अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए भी है। इसका एक प्रमुख लक्ष्य बीट सिस्टम को सुचारू ढंग से चलाना है। इसके अतिरिक्त, कस्बों और मोहल्लों में होने वाले छोटे-छोटे विवादों की गोपनीय जानकारी हासिल कर उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित करना भी इस ऑपरेशन का हिस्सा है। 'ग्राम संवाद' की शुरुआत का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य जुआ, सट्टा, ड्रग्स और अन्य अवैध कारोबार जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों पर शिकंजा कसना है। फर्रुखाबाद के सभी थाना क्षेत्रों में इस 'ग्राम संवाद' का आयोजन किया जा रहा है, ताकि जनमानस से सीधा जुड़ाव स्थापित हो सके।4
- फर्रुखाबाद स्थित पांचाल घाट के दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत श्री ईश्वर दास महाराज ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़ी सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर उनके चुनाव लड़ने को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से भ्रामक और निराधार हैं। महंत श्री ईश्वर दास महाराज ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कुछ लोग यह गलत जानकारी फैला रहे हैं कि वह आगामी चुनाव में प्रत्याशी होंगे। इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक संत हैं और उनका जीवन संतों तथा समाज की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने यह भी कहा कि एक संत होने के नाते उनका सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलना-जुलना लगा रहता है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह चुनाव लड़ने जा रहे हैं या राजनीति में कदम रख रहे हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए महाराज जी ने आम जनमानस से विशेष अपील की है कि वे ऐसी किसी भी गलत अफवाह पर ध्यान न दें और न ही उसे आगे फैलाने में मदद करें। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है और वे भविष्य में भी संत की भांति ही अपना जीवन व्यतीत करते रहेंगे।4
- Post by Rajkumar Rajkumar1
- फर्रुखाबाद के कस्बा अमृतपुर निवासी सचिन सक्सेना ने एक निजी दुकान से खरीदे गए यिप्पी (YiPPee) नूडल्स के पैकेट में सूड़ी और कीड़े मिलने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि जब वह नूडल्स को पकाने के लिए पानी में उबाल रहे थे, तो कुछ ही देर में सूड़ी और छोटे कीड़े पानी की सतह पर तैरते हुए दिखाई दिए। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी उन्होंने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया है। सचिन सक्सेना के अनुसार, यह घटना केवल एक पैकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पैक्ड खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनके भंडारण की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। उनका कहना है कि इस तरह की अशुद्धियाँ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने भी चेताया है कि कीड़े या सूड़ी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन पेट संबंधी संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी भी पैक्ड खाद्य सामग्री का उपयोग करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट, पैकेजिंग की स्थिति और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खाद्य सुरक्षा से जुड़े जानकारों ने सलाह दी है कि यदि किसी खाद्य उत्पाद में ऐसी गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसकी शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में की जानी चाहिए। इससे उत्पाद की जाँच सुनिश्चित होगी और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।1
- अलीगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने महंगाई के खिलाफ एक जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें यह चेतावनी दी गई कि अब महंगाई की मार और नहीं सही जाएगी। यह प्रदर्शन डॉ. बी. आर. अंबेडकर जी के पार्क में आयोजित किया गया था, जिसमें श्री पूर्व विधायक विवेक बंसल जी, जिलाध्यक्ष ठा. सोमवीर सिंह, और महानगर अध्यक्ष नावेद खान सहित सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ कांग्रेसी और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस का तर्क है कि मध्य एशिया में हुए युद्ध के दौरान कच्चे तेल के मूल्यों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आ चुकी है, ऐसे में देश में भी इन उत्पादों की कीमतों में कमी की जानी चाहिए। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महंगाई के खिलाफ धरना दिया और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, अपनी मांगों को बुलंद करते हुए आक्रोश व्यक्त किया।1
- फर्रुखाबाद जिले के लोहिया अस्पताल में लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं और लचर व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार, 5 जुलाई को कांग्रेस नेता शुभम तिवारी ने अपने निजी आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अस्पताल की खस्ताहाल स्थिति के लिए सत्ताधारी दल बीजेपी के जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला और इसे जनता के साथ धोखा करार दिया। शुभम तिवारी ने बताया कि लोहिया अस्पताल फर्रुखाबाद सहित आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन इसकी व्यवस्थाएं इतनी खराब हैं कि मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तीन दिनों तक खराब पड़ी रही, जिसके कारण गरीब मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर जाकर ₹1000 खर्च करने पड़े। उन्होंने इसे सीधा आर्थिक शोषण बताया, क्योंकि अस्पताल में मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर जांच की सुविधा होनी चाहिए थी। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि गंभीर मरीजों को अक्सर सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी होती है। उन्होंने इस समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर भी सवाल उठाए। शुभम तिवारी ने बताया कि 2 जून को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें अस्पताल की सभी प्रमुख समस्याओं को उजागर किया गया था, लेकिन एक महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने जिले के सभी बीजेपी विधायकों और सांसद पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के सभी पदों पर बीजेपी का कब्जा होने के बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस गंभीर मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई, जिसे उन्होंने जनता के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को भी एक प्रमुख मुद्दा बताया, जिसके कारण मरीजों को समय पर डॉक्टर नहीं मिलते और इलाज में देरी होती है। कांग्रेस नेता ने साफ चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और सरकार ने जल्द ही लोहिया अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर और अधिक उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने जोर दिया कि जनता की स्वास्थ्य समस्याओं को राजनीतिक दलों की चुप्पी नहीं झेलनी पड़ेगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने शुभम तिवारी के आरोपों का समर्थन करते हुए अस्पताल की स्थिति में तुरंत सुधार की मांग की। फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल की यह बदहाल स्थिति लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें बुनियादी सुविधाओं, मशीनों की मरम्मत, डॉक्टरों की उपलब्धता और स्टाफ की कमी जैसे मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।4