*भक्त की निष्काम भक्ति और बाबा की दिव्य हाजिरी* 🌸🙏 एक बार एक वृद्ध माताजी पुट्टपर्थी नहीं जा पाती थीं। वृद्धावस्था और बीमारी के कारण चलना-फिरना भी कठिन था, लेकिन उनका हृदय हर पल स्वामी के चरणों में ही लगा रहता था। वे रोज़ नियम से अपनी टूटी झोपड़ी में स्वामी के चित्र के आगे एक दीपक जलातीं और बड़े प्रेम से जो भी रुखा-सूखा भोजन बनता, उसका भोग लगाती थीं। गाँव के लोग अक्सर उनसे कहते, _"माताजी, पुट्टपर्थी जाए बिना, बाबा के साक्षात दर्शन किए बिना क्या तुम्हारी पूजा उन तक पहुँचेगी?"_ माताजी केवल मुस्कुराकर कहतीं— _"मेरे स्वामी तो घट-घट वासी हैं। यदि मेरा प्रेम सच्चा है, तो वे यहीं दर्शन देंगे।"_ एक दिन माताजी बहुत बीमार हो गईं। उनसे बिस्तर से उठकर दीपक जलाना भी संभव नहीं हो रहा था। उन्होंने अश्रुपूर्ण नेत्रों से मन ही मन पुकारा— _"स्वामी, आज यह दासी आपकी सेवा नहीं कर पा रही, क्षमा करना।"_ उसी क्षण उनकी बंद झोपड़ी के भीतर एक दिव्य सुगंध फैल गई। उन्होंने आँखें खोलकर देखा तो साक्षात लाल वस्त्र पहने स्वामी उनके सिरहाने खड़े मुस्कुरा रहे थे! बाबा ने अपने वरदहस्त से उन्हें उठाया, हवा से दिव्य विभूति प्रकट करके उनके माथे पर लगाई और कहा— _"मेरी बच्ची! मुझे ढूंढने के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं। जहां सच्चा प्रेम और पुकार होती है, मैं वहां खिंचा चला आता हूँ।"_ बाबा का स्पर्श पाते ही माताजी का सारा कष्ट दूर हो गया और वे पूर्ण स्वस्थ हो गईं। स्वामी हमेशा कहते हैं: *"प्रेम ही मेरा रूप है, और प्रेम ही मेरी भाषा है। निष्काम प्रेम से मुझे पुकारो, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"* प्रेम से बोलिए— ॐ साईं राम! 🙏🌸 _(यदि आप भी बाबा के अनन्य भक्त हैं, तो कमेंट में 'साईं राम' लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और बाबा के पावन संदेशों के लिए हमारे पेज को फॉलो जरूर करें)_आपका साई सेवक प्रमोद जी 🙏 #SaiRam #SathyaSaiBaba #SaiKatha #SaiLeela #OmSaiRam #PrasanthiNilayam *भक्त की निष्काम भक्ति और बाबा की दिव्य हाजिरी* 🌸🙏 एक बार एक वृद्ध माताजी पुट्टपर्थी नहीं जा पाती थीं। वृद्धावस्था और बीमारी के कारण चलना-फिरना भी कठिन था, लेकिन उनका हृदय हर पल स्वामी के चरणों में ही लगा रहता था। वे रोज़ नियम से अपनी टूटी झोपड़ी में स्वामी के चित्र के आगे एक दीपक जलातीं और बड़े प्रेम से जो भी रुखा-सूखा भोजन बनता, उसका भोग लगाती थीं। गाँव के लोग अक्सर उनसे कहते, _"माताजी, पुट्टपर्थी जाए बिना, बाबा के साक्षात दर्शन किए बिना क्या तुम्हारी पूजा उन तक पहुँचेगी?"_ माताजी केवल मुस्कुराकर कहतीं— _"मेरे स्वामी तो घट-घट वासी हैं। यदि मेरा प्रेम सच्चा है, तो वे यहीं दर्शन देंगे।"_ एक दिन माताजी बहुत बीमार हो गईं। उनसे बिस्तर से उठकर दीपक जलाना भी संभव नहीं हो रहा था। उन्होंने अश्रुपूर्ण नेत्रों से मन ही मन पुकारा— _"स्वामी, आज यह दासी आपकी सेवा नहीं कर पा रही, क्षमा करना।"_ उसी क्षण उनकी बंद झोपड़ी के भीतर एक दिव्य सुगंध फैल गई। उन्होंने आँखें खोलकर देखा तो साक्षात लाल वस्त्र पहने स्वामी उनके सिरहाने खड़े मुस्कुरा रहे थे! बाबा ने अपने वरदहस्त से उन्हें उठाया, हवा से दिव्य विभूति प्रकट करके उनके माथे पर लगाई और कहा— _"मेरी बच्ची! मुझे ढूंढने के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं। जहां सच्चा प्रेम और पुकार होती है, मैं वहां खिंचा चला आता हूँ।"_ बाबा का स्पर्श पाते ही माताजी का सारा कष्ट दूर हो गया और वे पूर्ण स्वस्थ हो गईं। स्वामी हमेशा कहते हैं: *"प्रेम ही मेरा रूप है, और प्रेम ही मेरी भाषा है। निष्काम प्रेम से मुझे पुकारो, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"* प्रेम से बोलिए— ॐ साईं राम! 🙏🌸 _(यदि आप भी बाबा के अनन्य भक्त हैं, तो कमेंट में 'साईं राम' लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और बाबा के पावन संदेशों के लिए हमारे पेज को फॉलो जरूर करें)_आपका साई सेवक प्रमोद जी 🙏 #SaiRam #SathyaSaiBaba #SaiKatha #SaiLeela #OmSaiRam #PrasanthiNilayam
*भक्त की निष्काम भक्ति और बाबा की दिव्य हाजिरी* 🌸🙏 एक बार एक वृद्ध माताजी पुट्टपर्थी नहीं जा पाती थीं। वृद्धावस्था और बीमारी के कारण चलना-फिरना भी कठिन था, लेकिन उनका हृदय हर पल स्वामी के चरणों में ही लगा रहता था। वे रोज़ नियम से अपनी टूटी झोपड़ी में स्वामी के चित्र के आगे एक दीपक जलातीं और बड़े प्रेम से जो भी रुखा-सूखा भोजन बनता, उसका भोग लगाती थीं। गाँव के लोग अक्सर उनसे कहते, _"माताजी, पुट्टपर्थी जाए बिना, बाबा के साक्षात दर्शन किए बिना क्या तुम्हारी पूजा उन तक पहुँचेगी?"_ माताजी केवल मुस्कुराकर कहतीं— _"मेरे स्वामी तो घट-घट वासी हैं। यदि मेरा प्रेम सच्चा है, तो वे यहीं दर्शन देंगे।"_ एक दिन माताजी बहुत बीमार हो गईं। उनसे बिस्तर से उठकर दीपक जलाना भी संभव नहीं हो रहा था। उन्होंने अश्रुपूर्ण नेत्रों से मन ही मन पुकारा— _"स्वामी, आज यह दासी आपकी सेवा नहीं कर पा रही, क्षमा करना।"_ उसी क्षण उनकी बंद झोपड़ी के भीतर एक दिव्य सुगंध फैल गई। उन्होंने आँखें खोलकर देखा तो साक्षात लाल वस्त्र पहने स्वामी उनके सिरहाने खड़े मुस्कुरा रहे थे! बाबा ने अपने वरदहस्त से उन्हें उठाया, हवा से दिव्य विभूति प्रकट करके उनके माथे पर लगाई और कहा— _"मेरी बच्ची! मुझे ढूंढने के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं। जहां सच्चा प्रेम और पुकार होती है, मैं वहां खिंचा चला आता हूँ।"_ बाबा का स्पर्श पाते ही माताजी का सारा कष्ट दूर हो गया और वे पूर्ण स्वस्थ हो गईं। स्वामी हमेशा कहते हैं: *"प्रेम ही मेरा रूप है, और प्रेम ही मेरी भाषा है। निष्काम प्रेम से मुझे पुकारो, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"* प्रेम से बोलिए— ॐ साईं राम! 🙏🌸 _(यदि आप भी बाबा के अनन्य भक्त हैं, तो कमेंट में 'साईं राम' लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और बाबा के पावन संदेशों के लिए हमारे पेज को फॉलो जरूर करें)_आपका साई सेवक प्रमोद जी 🙏 #SaiRam #SathyaSaiBaba #SaiKatha #SaiLeela #OmSaiRam #PrasanthiNilayam *भक्त की निष्काम भक्ति और बाबा की दिव्य हाजिरी* 🌸🙏 एक बार एक वृद्ध माताजी पुट्टपर्थी नहीं जा पाती थीं। वृद्धावस्था और बीमारी के कारण चलना-फिरना भी कठिन था, लेकिन उनका हृदय हर पल स्वामी के चरणों में ही लगा रहता था। वे रोज़ नियम से अपनी टूटी झोपड़ी में स्वामी के चित्र के आगे एक दीपक जलातीं और बड़े प्रेम से जो भी रुखा-सूखा भोजन बनता, उसका भोग लगाती थीं। गाँव के लोग अक्सर उनसे कहते, _"माताजी, पुट्टपर्थी जाए बिना, बाबा के साक्षात दर्शन किए बिना क्या तुम्हारी पूजा उन तक पहुँचेगी?"_ माताजी केवल मुस्कुराकर कहतीं— _"मेरे स्वामी तो घट-घट वासी हैं। यदि मेरा प्रेम सच्चा है, तो वे यहीं दर्शन देंगे।"_ एक दिन माताजी बहुत बीमार हो गईं। उनसे बिस्तर से उठकर दीपक जलाना भी संभव नहीं हो रहा था। उन्होंने अश्रुपूर्ण नेत्रों से मन ही मन पुकारा— _"स्वामी, आज यह दासी आपकी सेवा नहीं कर पा रही, क्षमा करना।"_ उसी क्षण उनकी बंद झोपड़ी के भीतर एक दिव्य सुगंध फैल गई। उन्होंने आँखें खोलकर देखा तो साक्षात लाल वस्त्र पहने स्वामी उनके सिरहाने खड़े मुस्कुरा रहे थे! बाबा ने अपने वरदहस्त से उन्हें उठाया, हवा से दिव्य विभूति प्रकट करके उनके माथे पर लगाई और कहा— _"मेरी बच्ची! मुझे ढूंढने के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं। जहां सच्चा प्रेम और पुकार होती है, मैं वहां खिंचा चला आता हूँ।"_ बाबा का स्पर्श पाते ही माताजी का सारा कष्ट दूर हो गया और वे पूर्ण स्वस्थ हो गईं। स्वामी हमेशा कहते हैं: *"प्रेम ही मेरा रूप है, और प्रेम ही मेरी भाषा है। निष्काम प्रेम से मुझे पुकारो, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"* प्रेम से बोलिए— ॐ साईं राम! 🙏🌸 _(यदि आप भी बाबा के अनन्य भक्त हैं, तो कमेंट में 'साईं राम' लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और बाबा के पावन संदेशों के लिए हमारे पेज को फॉलो जरूर करें)_आपका साई सेवक प्रमोद जी 🙏 #SaiRam #SathyaSaiBaba #SaiKatha #SaiLeela #OmSaiRam #PrasanthiNilayam
- ନୂଆଖାଇ ଉତ୍ସବରେ ଅଘଟଣ, ବାପାଙ୍କ ଆକ୍ରମଣରେ ପୁଅ ଆହତ, ଝରୀଗାଁ ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଛି ନୂଆଖାଇ ଉତ୍ସବରେ ଅଘଟଣ, ବାପାଙ୍କ ଆକ୍ରମଣରେ ପୁଅ ଆହତ1
- ଦେଖନ୍ତୁ 🙏🙏🙏1
- କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜିରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀଙ୍କ ଜନ୍ମଦିନ ପାଳନ ଜଗନ୍ନାଥ ମନ୍ଦିରରେ ପୂଜାର୍ଚ୍ଚନା, ଡାକ୍ତରଖାନାରେ ରୋଗୀଙ୍କୁ ଫଳ ବଣ୍ଟନ ଆଜି ସାରା ଦେଶରେ ପାଳିତ ହେଉଛି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଜନ୍ମଦିନ। ଏହି ଅବସରରେ କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜି ସହରରେ ମଧ୍ୟ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ମାଧ୍ୟମରେ ଜନ୍ମଦିନ ପାଳନ କରାଯାଇଛି। କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜି ବିଧାୟକ ଲକ୍ଷ୍ମଣ ବାଗ ନିଜ ସମର୍ଥକମାନଙ୍କ ସହ କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜି ଜଗନ୍ନାଥ ମନ୍ଦିରରେ ପହଞ୍ଚି ପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ପୂଜାର୍ଚ୍ଚନା କରିଥିଲେ। ଏହାସହ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଦୀର୍ଘାୟୁ ଓ ସୁସ୍ଥ ଜୀବନ କାମନା କରି ଦୀପ ପ୍ରଜ୍ୱଳନ କରିଥିଲେ। ପରେ ବିଧାୟକ ଲକ୍ଷ୍ମଣ ବାଗ କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜି ଡାକ୍ତରଖାନାରେ ପହଞ୍ଚି ଚିକିତ୍ସାଧୀନ ରୋଗୀମାନଙ୍କୁ ଫଳ ବଣ୍ଟନ କରିଥିଲେ। ରୋଗୀ ଓ ସେମାନଙ୍କ ସମ୍ପର୍କୀୟଙ୍କ ସହ ଆଲୋଚନା କରି ସେମାନଙ୍କ ସୁବିଧା-ଅସୁବିଧା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟାବସ୍ଥା ସମ୍ପର୍କରେ ପଚାରି ବୁଝିଥିଲେ। ଏହି ଅବସରରେ ବିଧାୟକଙ୍କ ସହ ବହୁ ସମର୍ଥକ ଓ ଦଳୀୟ କର୍ମୀ ଉପସ୍ଥିତ ଥିଲେ।1
- #କୋଟପାଡ଼_ମେଡିକାଲରେ_ଗାର୍ଡଙ୍କ_ମୃତ୍ୟୁ କୋଟପାଡ଼ ମେଡିକାଲରେ ଡ୍ୟୁଟିରେ ଥିବା ଗାର୍ଡଙ୍କ ମୃତ୍ୟୁ,ସୂଚନା ଅନୁଯାଇ ଗଣେଶ ବିସର୍ଜନ ଚାଲିଥିବା ସମୟରେ ହଠାତ୍ ଟଳିପଡ଼ିଥିଲେ,ମୃତକ ଦଶମନ୍ତପୁର ଅଞ୍ଚଳର ପିଙ୍କୁ ପ୍ରଧାନୀ #kotpad #medicalguarddeath #koraput #sadnews #koraput #fbviralvideo #viralvideo Bdo Kotpad CMO Odisha #nonfollowers #odisha #OdishaNews #kotpadbreakingnews1
- ଅଶୁର୍ଲା ଗାଁରେ ଆମ୍ବେଦକର କ୍ଳବ ପକ୍ଷରୁ ନୂଆଖାଇ ଭେଟଘାଟ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଅନୁଷ୍ଠିତ1
- ଢୋଲ ବାଜା ର ତାଲେ ତାଲେ ନାଚଲେ ଗାୟକ ସର୍ବେଶ୍ଵର ଭୋଇ ଆସା ଦେଖମା ନୂଆ ଖାଇ ଗୀତର ଢୋଲ ବାଜା ତାଳେ ତାଳେ ନାଚଲେ ଗାୟକ ସର୍ବେଶ୍ଵର ଭୋଇ1
- ନୂଆଁଖାଇ ସାରିବା ପରେ ଗାଁରେ ଘରକୁ ଘର ବୁଲି ବଡ଼ ମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ନେଉଛନ୍ତି ଏବଂ ସାନ ମାନଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେଉଛନ୍ତି ବଲାଙ୍ଗୀର କଣ୍ଟାବାଞ୍ଜି ନିର୍ବାଚନ ମଣ୍ଡଳୀର ବିଧାୟକ ଲକ୍ଷ୍ମଣ ବାଗ।1
- ଧର୍ମ ପରିବର୍ତ୍ତନକୁ ନେଇ ଶବକୁ ମିଳିଲାନି ଗାଁ ଶ୍ମଶାନ ୪୫ ଘଣ୍ଟା ପରେ ରାଇଘରରୁ ନବରଙ୍ଗପୁର ନେଇ ଶବ ସତ୍କାର ଧର୍ମ ପରିବର୍ତ୍ତନକୁ ନେଇ ଶବକୁ ମିଳିଲାନି ଗାଁ ଶ୍ମଶାନ ୪୫ ଘଣ୍ଟା ପରେ ରାଇଘରରୁ ନବରଙ୍ଗପୁର ନେଇ ଶବ ସତ୍କାର1