मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर 'ट्रांसफर इंडस्ट्री' को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। हाल ही में मीडिया में सामने आए एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित तबादला सौदों के खुलासे के बाद, पटवारी ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर सरकार की कार्यप्रणाली और पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया कि जिस मुद्दे को भाजपा अब तक विपक्ष का राजनीतिक आरोप कहकर खारिज करती रही, वही अब मीडिया के कैमरों के माध्यम से उजागर हो चुका है। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में सरकारें कानून से और प्रशासन नियमों से चलता है, जबकि तबादले आवश्यकता के आधार पर होते हैं। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में पदस्थापनाएं योग्यता के बजाय बोली से तय होती हैं, फाइलें नियमों के बजाय 'रेट-लिस्ट' से चलती हैं, और तबादले प्रशासनिक आदेश न रहकर 'व्यापारिक अनुबंध' में बदल गए हैं। पटवारी ने कहा कि जब उन्होंने पहले इस कथित ट्रांसफर इंडस्ट्री का मुद्दा उठाया था, तो भाजपा नेताओं ने इसे राजनीति करार दिया था, लेकिन अब मीडिया स्टिंग ने इन आरोपों को नई विश्वसनीयता दी है और जनता के मन में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी ने स्टिंग ऑपरेशन के कथित दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एक नर्स के तबादले की कीमत पांच लाख रुपये और एक एसडीओ के तबादले की कीमत पंद्रह लाख रुपये बताई जा रही है, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा कि मध्य प्रदेश में सरकार चल रही है या नीलामी, फाइल चल रही है या बोली, और प्रशासन काम कर रहा है या कारोबार। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब पदस्थापनाओं को लेकर ऐसी चर्चाएं सार्वजनिक होती हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर जनता का विश्वास सबसे अधिक प्रभावित होता है। अपने पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री सचिवालय में लगातार हुए तबादलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के ढाई वर्ष के कार्यकाल में सचिवालय में लगभग 35 से 40 अधिकारियों के तबादले हुए हैं, जिसमें औसतन एक अधिकारी को केवल 23 से 26 दिनों का ही स्थायित्व मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतनी तेजी से तो मौसम नहीं बदलते, जितनी तेजी से सरकार में जिम्मेदार अधिकारी बदल दिए जाते हैं। पटवारी ने प्रश्न किया कि क्या ये तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के कारण हुए या किसी अदृश्य 'रेट कार्ड' के अनुसार लिए गए फैसले थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से तीन सीधे प्रश्न पूछे हैं: पहला, क्या मध्य प्रदेश में ट्रांसफर इंडस्ट्री चल रही है? दूसरा, यदि नहीं चल रही है तो स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए दावों की न्यायिक जांच कब कराई जाएगी? और तीसरा, यदि चल रही है तो उसका वास्तविक संचालक कौन है? पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर विभिन्न मुद्दों पर बयान देते हैं, इसलिए प्रदेश की जनता इस बार इन तीन प्रश्नों पर उनका स्पष्ट उत्तर सुनना चाहती है। जीतू पटवारी ने चिंता व्यक्त की कि मध्य प्रदेश की पहचान अब निवेश, रोजगार, शिक्षा और विकास से कम तथा ट्रांसफर इंडस्ट्री की चर्चाओं से अधिक होने लगी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण पर पर्दा डालने के बजाय निष्पक्ष जांच कराने और जनता को यह बताने का आग्रह किया है कि क्या राज्य में शासन चल रहा है या तबादलों का कॉर्पोरेट कारोबार। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देकर सरकार से जवाब मांगने का अभियान चलाएगी।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर 'ट्रांसफर इंडस्ट्री' को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। हाल ही में मीडिया में सामने आए एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित तबादला सौदों के खुलासे के बाद, पटवारी ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर सरकार की कार्यप्रणाली और पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया कि जिस मुद्दे को भाजपा अब तक विपक्ष का राजनीतिक आरोप कहकर खारिज करती रही, वही अब मीडिया के कैमरों के माध्यम से उजागर हो चुका है। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में सरकारें कानून से और प्रशासन नियमों से चलता है, जबकि तबादले आवश्यकता के आधार पर होते हैं। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में पदस्थापनाएं योग्यता के बजाय बोली से तय होती हैं, फाइलें नियमों के बजाय 'रेट-लिस्ट' से चलती हैं, और तबादले प्रशासनिक आदेश न रहकर 'व्यापारिक अनुबंध' में बदल गए हैं। पटवारी ने कहा कि जब उन्होंने पहले इस कथित ट्रांसफर इंडस्ट्री का मुद्दा उठाया था, तो भाजपा नेताओं ने इसे राजनीति करार दिया था, लेकिन अब मीडिया स्टिंग ने इन आरोपों को नई विश्वसनीयता दी है और जनता के मन में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी ने स्टिंग ऑपरेशन के कथित दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एक नर्स के तबादले की कीमत पांच लाख रुपये और एक एसडीओ के तबादले की कीमत पंद्रह लाख रुपये बताई जा रही है, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा कि मध्य प्रदेश में सरकार चल रही है या नीलामी, फाइल चल रही है या बोली, और प्रशासन काम कर रहा है या कारोबार। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब पदस्थापनाओं को लेकर ऐसी चर्चाएं सार्वजनिक होती हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर जनता का विश्वास सबसे अधिक प्रभावित होता है। अपने पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री सचिवालय में लगातार हुए तबादलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के ढाई वर्ष के कार्यकाल में सचिवालय में लगभग 35 से 40 अधिकारियों के तबादले हुए हैं, जिसमें औसतन एक अधिकारी को केवल 23 से 26 दिनों का ही स्थायित्व मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतनी तेजी से तो मौसम नहीं बदलते, जितनी तेजी से सरकार में जिम्मेदार अधिकारी बदल दिए जाते हैं। पटवारी ने प्रश्न किया कि क्या ये तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के कारण हुए या किसी अदृश्य 'रेट कार्ड' के अनुसार लिए गए फैसले थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से तीन सीधे प्रश्न पूछे हैं: पहला, क्या मध्य प्रदेश में ट्रांसफर इंडस्ट्री चल रही है? दूसरा, यदि नहीं चल रही है तो स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए दावों की न्यायिक जांच कब कराई जाएगी? और तीसरा, यदि चल रही है तो उसका वास्तविक संचालक कौन है? पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर विभिन्न मुद्दों पर बयान देते हैं, इसलिए प्रदेश की जनता इस बार इन तीन प्रश्नों पर उनका स्पष्ट उत्तर सुनना चाहती है। जीतू पटवारी ने चिंता व्यक्त की कि मध्य प्रदेश की पहचान अब निवेश, रोजगार, शिक्षा और विकास से कम तथा ट्रांसफर इंडस्ट्री की चर्चाओं से अधिक होने लगी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण पर पर्दा डालने के बजाय निष्पक्ष जांच कराने और जनता को यह बताने का आग्रह किया है कि क्या राज्य में शासन चल रहा है या तबादलों का कॉर्पोरेट कारोबार। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देकर सरकार से जवाब मांगने का अभियान चलाएगी।
- भोपाल के चूना भट्टी इलाके में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस पर एक युवक के साथ अभद्रता करने का आरोप लगा है। वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि चेकिंग के समय पुलिसकर्मियों ने युवक का हाथ पकड़ा, जिसके बाद कथित तौर पर बदसलूकी हुई। इस घटना को लेकर भोपाल पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।1
- राष्ट्रपति के मध्य प्रदेश दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल देखी जा रही है। इसी संदर्भ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति के इस मध्य प्रदेश दौरे के संबंध में अपना बयान दिया है।1
- लोगों में प्राकृतिक सुंदरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया गया है, जिसमें सभी से पेड़ लगाने का आह्वान किया गया है। यह पहल देश को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में एक कदम है। विशेष रूप से, यह संदेश लोगों से अपने माता-पिता के नाम पर एक पेड़ लगाने का आग्रह करता है, साथ ही बुजुर्गों के नाम पर भी पेड़ लगाने की बात कही गई है। इसका लक्ष्य एक ऐसी परंपरा स्थापित करना है जहाँ हर व्यक्ति अपने प्रियजनों की स्मृति में पौधे रोपे। इस मुहिम का मुख्य ध्येय देश को हरा-भरा बनाना, स्वच्छ मध्य प्रदेश का निर्माण करना और स्वच्छ भोपाल बनाना है। यह लोगों से इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने प्रयासों से देश को स्वच्छ और सुंदर बनाने का आह्वान करता है।1
- विश्व संगीत दिवस के अवसर पर, भोपाल की गुंजन फाउंडेशन म्यूजिक एकेडमी ने महान गायिका आशा भोंसले को एक अनोखी संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस विशेष सम्मान के तहत, 21 गायकों ने मिलकर एक ट्रिब्यूट गीत रिकॉर्ड किया है। इस वीडियो का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत से जोड़ना है। यह ट्रिब्यूट वीडियो 21 जून को यूट्यूब पर रिलीज किया जाएगा।1
- मध्य प्रदेश के सीहोर में एक अवैध कॉलोनी के खिलाफ बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की गई है। इस दौरान मौके पर तमाम अधिकारी मौजूद रहे। अब यह देखना बाकी है कि यह कार्यवाही केवल सीहोर जिले तक सीमित रहेगी, या फिर जिले के अन्य शहरों में भी अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलेगा।1
- भोपाल क्राइम ब्रांच ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए लगभग ₹1.33 करोड़ रुपये से अधिक का मादक पदार्थ और अन्य सामान जब्त किया है। इस कार्रवाई में 170 किलो 090 ग्राम अवैध गांजा, एक आइशर ट्रक और 396 एल्यूमीनियम सिल्लियाँ बरामद की गई हैं, और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। यह बड़ी सफलता गृहमंत्रालय की गाइडलाइन के तहत चलाए जा रहे नशे के खिलाफ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत क्राइम ब्रांच ने भोपाल में बड़ी मात्रा में गांजा खपाने की साजिश को समय रहते विफल कर दिया। शहर में अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त भोपाल श्री संजय कुमार और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भोपाल श्रीमती मोनिका शुक्ला के निर्देशों पर, पुलिस उपायुक्त अपराध श्री अखिल पटेल, अति पुलिस उपायुक्त अपराध श्री शैलेन्द्र सिंह चौहान, सहायक पुलिस आयुक्त श्री चंद्रभान सिंह चढार और सहायक पुलिस आयुक्त श्री अनिल वर्मा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी क्राइम ब्रांच अशोक मरावी और उनकी टीम को अवैध मादक पदार्थ तस्करों की तलाश में लगाया गया था। दिनांक 18.06.2026 को एक विश्वसनीय मुखबिर ने थाना परिसर में सूचना दी कि कोलार, भोपाल में गोल जोड़ तिराहे के पास सड़क किनारे एक आइशर गाड़ी (मिनी ट्रक) खड़ी है, जिसमें भारी मात्रा में गांजा रखा है और ड्राइवर डिलीवरी के लिए इंतजार कर रहा है। मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के अनुसार बैंगनी टी-शर्ट और हल्के ग्रे पैंट पहने दुबले-पतले व्यक्ति को आइशर ट्रक क्रमांक CG04 PE9434 की ड्राइवर सीट पर बैठे देखा गया। क्राइम ब्रांच टीम ने हमराह स्टाफ और गवाहों के साथ गोल जोड़ तिराहा, कोलार रोड, थाना कजलीखेड़ा, भोपाल पहुंचकर घेराबंदी कर आरोपी आनंद बैरागी, पिता वंशीदास बैगारी (उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम हथवास, तहसील सतवास, जिला देवास) को पकड़ा। ट्रक से नीचे उतारने के बाद आरोपी से पूछताछ की गई और उसके कीपैड जियो भारत कंपनी के मोबाइल तथा रेडमी गो एंड्रॉयड मोबाइल को कब्जे में लिया गया। आइशर ट्रक क्रमांक CG04 PE9434 की तलाशी लेने पर केबिन में खाना बनाने का सामान, टूलबॉक्स, कंबल और तकिया मिला। ट्रक के पिछले हिस्से में नीले रंग की तिरपाल और एक सफेद पन्नी हटाने पर 6 प्लास्टिक की बोरियाँ मिलीं, जिनमें गांजा भरा हुआ था। आरोपी ने बोरियों में गांजा होने की बात स्वीकार की। इन बोरियों में कुल 170 किलो 90 ग्राम अवैध गांजा पाया गया। इसके अतिरिक्त ट्रक से 396 एल्यूमीनियम सिल्लियाँ भी बरामद हुईं, जिन पर हिंदी और अंग्रेजी में "NALCO" अंकित था। जब्त किए गए आइशर ट्रक की अनुमानित कीमत लगभग ₹30 लाख है। आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है और उससे गांजा सप्लायर, डिलीवरी नेटवर्क तथा अन्य संलिप्त व्यक्तियों के संबंध में पूछताछ जारी है, जिससे अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। भोपाल पुलिस अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के विरुद्ध लगातार सख्त कार्यवाही कर रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नशे से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस सफल अभियान में निरीक्षक राजकुमार कुंसारिया, उनि जसवंत सिंह, प्रआर कैलाश जाट सहित पूरी टीम की सराहनीय भूमिका रही।1
- मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल ने एक बयान दिया है। दर्शकों और पाठकों से इस संबंध में पूरी खबर देखने या पढ़ने का आग्रह किया गया है।1
- मध्य प्रदेश क बोर्ड चेयरमैन सनोवर पटेल साहब ने वनारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति का साथ देने का आह्वान किया, यह संदेश देते हुए कि भले ही हम रहें या ना रहें, पेड़ और उनकी छाँव हमेशा बनी रहेगी। पटेल साहब ने लोगों को फलदार पेड़ लगाने और ऑक्सीजन बनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों और सभी लोगों के काम आ सकें।4
- भोपाल में नगर निगम के अतिक्रमण स्टोर के एक कर्मचारी यासिर के साथ न्यू मार्केट स्थित दशहरा मैदान पर ड्यूटी के दौरान देर रात (लगभग 12:00 से 12:30 बजे के बीच) कुछ असामाजिक तत्वों ने बेरहमी से मारपीट की, जिसके बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस हमले में यासिर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है और हमीदिया अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। इस घटना के विरोध में, नगर निगम अतिक्रमण शाखा के ड्राइवरों और कर्मचारियों ने फतेहगढ़ फायर ब्रिगेड के पास स्थित अंबेडकर पुस्तकालय के सामने अपने वाहन खड़े कर कार्य का बहिष्कार करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक दोषियों के विरुद्ध कड़ी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वाहन संचालन और कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय सफाई मज़दूर ट्रेड यूनियन 7262 के अतिक्रमण अध्यक्ष फैज़ान उल हक ने इस बेवजह मारपीट की घटना को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम कर्मचारी अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे थे और उन पर हमला करना कानून व्यवस्था को सीधे तौर पर चुनौती देने जैसा है। उन्होंने शासन एवं प्रशासन से तत्काल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घायल कर्मचारी यासिर को मारपीट के दौरान पैर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं, साथ ही फ्रैक्चर होने की भी सूचना है। इसके अतिरिक्त, उनके सिर में गंभीर चोट लगने के कारण पांच टांके भी लगाए गए हैं। संगठन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो उनका आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।1