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प्रयागराज के जसरा ब्लॉक में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट की बंदरबांट और अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जसरा में गोवंश आश्रय केंद्र सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में भरे पड़े हैं, जबकि असलियत में सैकड़ों आवारा गाय और बैल रेलवे स्टेशन, बाजारों, तहसील परिसरों और खेतों में घूमकर किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक ही सीमित रखे हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जसरा ब्लॉक में कुल 4 गोवंश आश्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1000 से ज्यादा गोवंश को संरक्षित दिखाया जा रहा है। हालांकि, मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई। रेरा गौशाला में एक केंद्र पर ताला लटका मिला, जबकि दूसरे केंद्र में केवल 30-40 पशु बहुत खराब हालत में मिले, जिन्हें न चारा, न पानी और न ही डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध थी। इतना ही नहीं, वहां पांच मवेशी मृत भी पाए गए। दूसरी ओर, जसरा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और गांवों के खेतों में 200 से अधिक आवारा गोवंश दिन-रात खुलेआम घूम रहे हैं। इस बदहाली से बबुरी, चिल्ला, जसरा, पचखरा और तातारगंज के किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय 10-15 गोवंश का झुंड खेतों में घुसकर धान और सब्जियों की खड़ी फसल को चट कर जाता है। पीड़ित किसान रामलाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को गोवंश उनकी पूरी फसल खा जाते हैं। जब पुलिस से शिकायत की जाती है तो वे पशुओं को खुद पकड़वाने की बात कहते हैं, जबकि आश्रय केंद्र वाले जगह की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रखने से मना कर देते हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खेल कागजों पर खेला जा रहा है, जहां हर महीने "सभी गोवंश सुरक्षित और चारा-पानी उपलब्ध" होने की झूठी रिपोर्ट और पुरानी तस्वीरें अधिकारियों को भेज दी जाती हैं। पशु चिकित्साधिकारी के दौरे भी केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। एक गौ-पालक ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है और बजट आने के बावजूद उसे पशुओं पर खर्च नहीं किया जाता है। जसरा में सरकार की अच्छी मंशा वाली यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पीड़ित जनता अब बजट के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रही है।

1 hr ago
user_राकेश पटेल सी न्यूज़
राकेश पटेल सी न्यूज़
बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

प्रयागराज के जसरा ब्लॉक में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट की बंदरबांट और अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जसरा में गोवंश आश्रय केंद्र सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में भरे पड़े हैं, जबकि असलियत में सैकड़ों आवारा गाय और बैल रेलवे स्टेशन, बाजारों, तहसील परिसरों और खेतों में घूमकर किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक ही सीमित रखे हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जसरा ब्लॉक में कुल 4 गोवंश आश्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1000 से ज्यादा गोवंश को संरक्षित दिखाया जा रहा है। हालांकि, मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई। रेरा गौशाला में एक केंद्र पर ताला लटका मिला, जबकि दूसरे केंद्र में केवल 30-40 पशु बहुत खराब हालत में मिले, जिन्हें न चारा, न पानी और न ही डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध थी। इतना ही नहीं, वहां पांच मवेशी मृत भी पाए गए। दूसरी ओर, जसरा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और गांवों के खेतों में 200 से अधिक आवारा गोवंश दिन-रात खुलेआम घूम रहे हैं। इस बदहाली से बबुरी, चिल्ला, जसरा, पचखरा और तातारगंज के किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय 10-15 गोवंश का झुंड खेतों में घुसकर धान और सब्जियों की खड़ी फसल को चट कर जाता है। पीड़ित किसान रामलाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को गोवंश उनकी पूरी फसल खा जाते हैं। जब पुलिस से शिकायत की जाती है तो वे पशुओं को खुद पकड़वाने की बात कहते हैं, जबकि आश्रय केंद्र वाले जगह की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रखने से मना कर देते हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खेल कागजों पर खेला जा रहा है, जहां हर महीने "सभी गोवंश सुरक्षित और चारा-पानी उपलब्ध" होने की झूठी रिपोर्ट और पुरानी तस्वीरें अधिकारियों को भेज दी जाती हैं। पशु चिकित्साधिकारी के दौरे भी केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। एक गौ-पालक ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है और बजट आने के बावजूद उसे पशुओं पर खर्च नहीं किया जाता है। जसरा में सरकार की अच्छी मंशा वाली यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पीड़ित जनता अब बजट के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रही है।

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  • प्रयागराज के जसरा ब्लॉक में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट की बंदरबांट और अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जसरा में गोवंश आश्रय केंद्र सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में भरे पड़े हैं, जबकि असलियत में सैकड़ों आवारा गाय और बैल रेलवे स्टेशन, बाजारों, तहसील परिसरों और खेतों में घूमकर किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक ही सीमित रखे हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जसरा ब्लॉक में कुल 4 गोवंश आश्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1000 से ज्यादा गोवंश को संरक्षित दिखाया जा रहा है। हालांकि, मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई। रेरा गौशाला में एक केंद्र पर ताला लटका मिला, जबकि दूसरे केंद्र में केवल 30-40 पशु बहुत खराब हालत में मिले, जिन्हें न चारा, न पानी और न ही डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध थी। इतना ही नहीं, वहां पांच मवेशी मृत भी पाए गए। दूसरी ओर, जसरा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और गांवों के खेतों में 200 से अधिक आवारा गोवंश दिन-रात खुलेआम घूम रहे हैं। इस बदहाली से बबुरी, चिल्ला, जसरा, पचखरा और तातारगंज के किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय 10-15 गोवंश का झुंड खेतों में घुसकर धान और सब्जियों की खड़ी फसल को चट कर जाता है। पीड़ित किसान रामलाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को गोवंश उनकी पूरी फसल खा जाते हैं। जब पुलिस से शिकायत की जाती है तो वे पशुओं को खुद पकड़वाने की बात कहते हैं, जबकि आश्रय केंद्र वाले जगह की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रखने से मना कर देते हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खेल कागजों पर खेला जा रहा है, जहां हर महीने "सभी गोवंश सुरक्षित और चारा-पानी उपलब्ध" होने की झूठी रिपोर्ट और पुरानी तस्वीरें अधिकारियों को भेज दी जाती हैं। पशु चिकित्साधिकारी के दौरे भी केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। एक गौ-पालक ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है और बजट आने के बावजूद उसे पशुओं पर खर्च नहीं किया जाता है। जसरा में सरकार की अच्छी मंशा वाली यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पीड़ित जनता अब बजट के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रही है।
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    प्रयागराज के जसरा ब्लॉक में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट की बंदरबांट और अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जसरा में गोवंश आश्रय केंद्र सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में भरे पड़े हैं, जबकि असलियत में सैकड़ों आवारा गाय और बैल रेलवे स्टेशन, बाजारों, तहसील परिसरों और खेतों में घूमकर किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक ही सीमित रखे हुए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जसरा ब्लॉक में कुल 4 गोवंश आश्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1000 से ज्यादा गोवंश को संरक्षित दिखाया जा रहा है। हालांकि, मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई। रेरा गौशाला में एक केंद्र पर ताला लटका मिला, जबकि दूसरे केंद्र में केवल 30-40 पशु बहुत खराब हालत में मिले, जिन्हें न चारा, न पानी और न ही डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध थी। इतना ही नहीं, वहां पांच मवेशी मृत भी पाए गए। दूसरी ओर, जसरा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और गांवों के खेतों में 200 से अधिक आवारा गोवंश दिन-रात खुलेआम घूम रहे हैं।

इस बदहाली से बबुरी, चिल्ला, जसरा, पचखरा और तातारगंज के किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय 10-15 गोवंश का झुंड खेतों में घुसकर धान और सब्जियों की खड़ी फसल को चट कर जाता है। पीड़ित किसान रामलाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को गोवंश उनकी पूरी फसल खा जाते हैं। जब पुलिस से शिकायत की जाती है तो वे पशुओं को खुद पकड़वाने की बात कहते हैं, जबकि आश्रय केंद्र वाले जगह की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रखने से मना कर देते हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खेल कागजों पर खेला जा रहा है, जहां हर महीने "सभी गोवंश सुरक्षित और चारा-पानी उपलब्ध" होने की झूठी रिपोर्ट और पुरानी तस्वीरें अधिकारियों को भेज दी जाती हैं। पशु चिकित्साधिकारी के दौरे भी केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। एक गौ-पालक ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है और बजट आने के बावजूद उसे पशुओं पर खर्च नहीं किया जाता है। जसरा में सरकार की अच्छी मंशा वाली यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पीड़ित जनता अब बजट के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रही है।
    user_राकेश पटेल सी न्यूज़
    राकेश पटेल सी न्यूज़
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • प्रयागराज के बारा विधानसभा क्षेत्र में 'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' के तहत रविवार को बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जसरा, शंकरगढ़ और कौंधियारा ब्लॉक की विभिन्न ग्राम पंचायतों में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत पौधे रोपे गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस पौधरोपण कार्यक्रम का नेतृत्व बारा विधायक डॉ. वाचस्पति और उत्तर प्रदेश शासन के सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव अजय कुमार शुक्ला ने किया। अभियान के तहत विकास खंड जसरा की ग्राम पंचायत संडवा खुर्द, विकास खंड शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत भेलाव, गाढ़ा कटरा व लखनपुर, और विकास खंड कौंधियारा की ग्राम पंचायत आंबा में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा पौधारोपण किया गया। अतिथियों ने इस अभियान को जन-जन का अभियान बनाने पर जोर देते हुए कहा कि वृक्षारोपण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, डीसी मनरेगा, उपजिलाधिकारी बारा गणेश कन्नौजिया, ब्लॉक प्रमुख इन्द्रनाथ मिश्रा, निर्मला देवी, खंड विकास अधिकारी जसरा समा सिंह, डॉ. कंचन यादव, सुनील सिंह, वन रेंजर अजय कुमार, विधायक प्रतिनिधि विजय कुमार निषाद 'श्यामू', मीडिया प्रभारी नीरज केसरवानी, ई. प्रकाश सिंह, जगत नारायण शुक्ला और दिलीप निषाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने रोपे गए पौधों की देखभाल व संरक्षण करने और हरित वातावरण के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
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    प्रयागराज के बारा विधानसभा क्षेत्र में 'वृक्षारोपण महायज्ञ-2026' के तहत रविवार को बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महाअभियान के अंतर्गत जसरा, शंकरगढ़ और कौंधियारा ब्लॉक की विभिन्न ग्राम पंचायतों में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत पौधे रोपे गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

इस पौधरोपण कार्यक्रम का नेतृत्व बारा विधायक डॉ. वाचस्पति और उत्तर प्रदेश शासन के सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव अजय कुमार शुक्ला ने किया। अभियान के तहत विकास खंड जसरा की ग्राम पंचायत संडवा खुर्द, विकास खंड शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत भेलाव, गाढ़ा कटरा व लखनपुर, और विकास खंड कौंधियारा की ग्राम पंचायत आंबा में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा पौधारोपण किया गया। अतिथियों ने इस अभियान को जन-जन का अभियान बनाने पर जोर देते हुए कहा कि वृक्षारोपण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।

इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, डीसी मनरेगा, उपजिलाधिकारी बारा गणेश कन्नौजिया, ब्लॉक प्रमुख इन्द्रनाथ मिश्रा, निर्मला देवी, खंड विकास अधिकारी जसरा समा सिंह, डॉ. कंचन यादव, सुनील सिंह, वन रेंजर अजय कुमार, विधायक प्रतिनिधि विजय कुमार निषाद 'श्यामू', मीडिया प्रभारी नीरज केसरवानी, ई. प्रकाश सिंह, जगत नारायण शुक्ला और दिलीप निषाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने रोपे गए पौधों की देखभाल व संरक्षण करने और हरित वातावरण के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
    user_नावेद खान पत्रकार
    नावेद खान पत्रकार
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रयागराज के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत सरस्वती हाईटेक सिटी में पुलिस, नारकोटिक्स टास्क फोर्स और अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए तस्कर के पास से 515 ग्राम अवैध स्मैक पाउडर बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 3 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने उसके पास से 7060 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन और एक राउटर भी बरामद किया है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान 42 वर्षीय आलोक त्रिपाठी के रूप में हुई है, जो बांदा जिले के नरैनी थाना क्षेत्र के किदवई नगर का निवासी है। पुलिस टीम ने उसे सरस्वती हाईटेक सिटी में यूनिवर्सिटी के पीछे वाली रोड से गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र थाने में मुकदमा अपराध संख्या 108/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पूछताछ के दौरान अभियुक्त आलोक त्रिपाठी ने बताया कि वह मणिपुर के इम्फाल से आने-जाने वाले ट्रकों के माध्यम से स्मैक मंगवाता था और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपर्क स्थापित कर उसे बेचता था। पकड़े जाने के डर से वह अपने मोबाइल फोन में सिम कार्ड नहीं डालता था, बल्कि राउटर के माध्यम से इंटरनेट चलाकर केवल व्हाट्सएप पर ही बात करता था। बरामद की गई नकदी भी स्मैक की बिक्री की ही है। आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी है; साल 2020 में दिल्ली की रोहिणी थाना पुलिस ने उसे 3 किलो स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा प्रयागराज के धूमनगंज और दारागंज थानों में भी उसके खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज हैं। इस सफल संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में औद्योगिक क्षेत्र थाना के थानाध्यक्ष कमलेश कुमार पटेल, उपनिरीक्षक अफजल सिद्दीकी, उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह यादव और कांस्टेबल रामआधार चौहान, विवेक यादव, प्रेमचन्द्र व रमेश यादव शामिल थे। वहीं नारकोटिक्स टास्क फोर्स की तरफ से प्रभारी उपनिरीक्षक सुरेश गिरी, कांस्टेबल विशाल सिंह, नंदलाल, कुलदीप सिंह और पुष्पेंद्र तेबतिया ने इस अभियान में मुख्य भूमिका निभाई।
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    प्रयागराज के औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत सरस्वती हाईटेक सिटी में पुलिस, नारकोटिक्स टास्क फोर्स और अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए तस्कर के पास से 515 ग्राम अवैध स्मैक पाउडर बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 3 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने उसके पास से 7060 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन और एक राउटर भी बरामद किया है।

गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान 42 वर्षीय आलोक त्रिपाठी के रूप में हुई है, जो बांदा जिले के नरैनी थाना क्षेत्र के किदवई नगर का निवासी है। पुलिस टीम ने उसे सरस्वती हाईटेक सिटी में यूनिवर्सिटी के पीछे वाली रोड से गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र थाने में मुकदमा अपराध संख्या 108/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त आलोक त्रिपाठी ने बताया कि वह मणिपुर के इम्फाल से आने-जाने वाले ट्रकों के माध्यम से स्मैक मंगवाता था और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपर्क स्थापित कर उसे बेचता था। पकड़े जाने के डर से वह अपने मोबाइल फोन में सिम कार्ड नहीं डालता था, बल्कि राउटर के माध्यम से इंटरनेट चलाकर केवल व्हाट्सएप पर ही बात करता था। बरामद की गई नकदी भी स्मैक की बिक्री की ही है। आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी है; साल 2020 में दिल्ली की रोहिणी थाना पुलिस ने उसे 3 किलो स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा प्रयागराज के धूमनगंज और दारागंज थानों में भी उसके खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के मामले दर्ज हैं।

इस सफल संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में औद्योगिक क्षेत्र थाना के थानाध्यक्ष कमलेश कुमार पटेल, उपनिरीक्षक अफजल सिद्दीकी, उपनिरीक्षक वीरेंद्र सिंह यादव और कांस्टेबल रामआधार चौहान, विवेक यादव, प्रेमचन्द्र व रमेश यादव शामिल थे। वहीं नारकोटिक्स टास्क फोर्स की तरफ से प्रभारी उपनिरीक्षक सुरेश गिरी, कांस्टेबल विशाल सिंह, नंदलाल, कुलदीप सिंह और पुष्पेंद्र तेबतिया ने इस अभियान में मुख्य भूमिका निभाई।
    user_BST news prayagraj
    BST news prayagraj
    Lawyer Bara, Prayagraj•
    6 hrs ago
  • प्रयागराज को हरित बनाने के लिए इस साल जिले में 90 लाख पौधे रोपे जाएंगे। इस वृहद वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने के लिए प्रयागराज के जिला अधिकारी मनीष वर्मा ने आम जनता से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। इस अभियान के तहत पूरे जिले में फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यह रोपण सरकारी जमीनों, स्कूल-कॉलेजों, पंचायत भवनों, सड़क किनारे, नदी-तालाब के किनारों और निजी संस्थानों में किया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग, राजस्व, ग्राम पंचायत, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर एक साझा प्रयास करेंगे। जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए वृक्षारोपण को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल पौधा लगाना नहीं, बल्कि हर पौधे को बचाना भी है। उन्होंने हर व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी तीन साल तक देखभाल करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को समय से गड्ढे खोदने और पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में "एक छात्र-एक पौधा" कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। अभियान से जुड़ने के इच्छुक नागरिक और संस्थाएं वन विभाग या तहसील कार्यालय से संपर्क कर निशुल्क पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
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    प्रयागराज को हरित बनाने के लिए इस साल जिले में 90 लाख पौधे रोपे जाएंगे। इस वृहद वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने के लिए प्रयागराज के जिला अधिकारी मनीष वर्मा ने आम जनता से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

इस अभियान के तहत पूरे जिले में फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यह रोपण सरकारी जमीनों, स्कूल-कॉलेजों, पंचायत भवनों, सड़क किनारे, नदी-तालाब के किनारों और निजी संस्थानों में किया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग, राजस्व, ग्राम पंचायत, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर एक साझा प्रयास करेंगे।

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए वृक्षारोपण को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल पौधा लगाना नहीं, बल्कि हर पौधे को बचाना भी है। उन्होंने हर व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी तीन साल तक देखभाल करने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को समय से गड्ढे खोदने और पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में "एक छात्र-एक पौधा" कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। अभियान से जुड़ने के इच्छुक नागरिक और संस्थाएं वन विभाग या तहसील कार्यालय से संपर्क कर निशुल्क पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
    user_राम सिंह कबीर
    राम सिंह कबीर
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • प्रयागराज के घूरपुर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं लोकप्रिय जननेता नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' का पुनर्प्राप्ति जन्मोत्सव अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। इस भव्य समारोह में क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा निरंतर जनसेवा की कामना की। ज्ञात हो कि वर्षों पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' पर एक जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एक लंबे उपचार और जीवन-मृत्यु के बीच कड़े संघर्ष के बाद स्वस्थ होकर उनके सार्वजनिक जीवन में लौटने को समर्थक ईश्वर की विशेष कृपा मानते हैं। यही कारण है कि उनके प्रशंसक और समर्थक हर वर्ष इस दिन को 'पुनर्प्राप्ति जन्मोत्सव' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। घूरपुर में आयोजित इस भव्य समारोह का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के जिला संयोजक मिश्रीलाल ने किया। कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और सफल संचालन में उनकी सक्रिय भूमिका की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है। इस दौरान उपस्थित लोगों के स्वागत-सत्कार के साथ भोजन, पेयजल और बैठने की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी, जिसकी लोगों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। स्थानीय समाजसेवियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समरसता और जनसेवा का एक सुंदर संदेश भी दिया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनिल केशरवानी, पप्पू सम्राट केशरवानी, शिवलाल केशरवानी, कमल केशरवानी, राममिलन केशरवानी, भगवान दास केशरवानी, राजेश केशरवानी, चंद्रप्रकाश केशरवानी, पवन केशरवानी, दशरथ केशरवानी सहित कई गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह आयोजन न केवल मंत्री नंदी के प्रति जनविश्वास का प्रतीक बना, बल्कि भाजपा जिला संयोजक मिश्रीलाल के कुशल नेतृत्व और संगठन क्षमता की भी एक प्रभावशाली मिसाल साबित हुआ।
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    प्रयागराज के घूरपुर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं लोकप्रिय जननेता नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' का पुनर्प्राप्ति जन्मोत्सव अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। इस भव्य समारोह में क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा निरंतर जनसेवा की कामना की।

ज्ञात हो कि वर्षों पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' पर एक जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एक लंबे उपचार और जीवन-मृत्यु के बीच कड़े संघर्ष के बाद स्वस्थ होकर उनके सार्वजनिक जीवन में लौटने को समर्थक ईश्वर की विशेष कृपा मानते हैं। यही कारण है कि उनके प्रशंसक और समर्थक हर वर्ष इस दिन को 'पुनर्प्राप्ति जन्मोत्सव' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

घूरपुर में आयोजित इस भव्य समारोह का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के जिला संयोजक मिश्रीलाल ने किया। कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और सफल संचालन में उनकी सक्रिय भूमिका की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है। इस दौरान उपस्थित लोगों के स्वागत-सत्कार के साथ भोजन, पेयजल और बैठने की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी, जिसकी लोगों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। स्थानीय समाजसेवियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समरसता और जनसेवा का एक सुंदर संदेश भी दिया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनिल केशरवानी, पप्पू सम्राट केशरवानी, शिवलाल केशरवानी, कमल केशरवानी, राममिलन केशरवानी, भगवान दास केशरवानी, राजेश केशरवानी, चंद्रप्रकाश केशरवानी, पवन केशरवानी, दशरथ केशरवानी सहित कई गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह आयोजन न केवल मंत्री नंदी के प्रति जनविश्वास का प्रतीक बना, बल्कि भाजपा जिला संयोजक मिश्रीलाल के कुशल नेतृत्व और संगठन क्षमता की भी एक प्रभावशाली मिसाल साबित हुआ।
    user_Mohd Kamar
    Mohd Kamar
    Financial Advisor बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के जनवा गांव में कोर्ट का आदेश होने के बाद भी पीड़िता को अपनी जमीन का कब्जा नहीं मिल पा रहा है। यह मामला सीमा देवी पत्नी राज बिहारी सिंह और रामप्रताप सिंह व अन्य से जुड़ा है। सीमा देवी का आरोप है कि विपक्षियों ने उनकी जमीन पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा लिया था, जिसके बाद मामला न्यायालय गया और कोर्ट ने सीमा देवी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कब्जा दिलाने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश के बावजूद कब्जा दिलाने की कार्रवाई फाइलों में ही बंद है। पीड़िता का आरोप है कि आदेश के बाद 3 बार पुलिस, लेखपाल और राजस्व की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हर बार तहसील से "रोक दो" का फोन आते ही टीम वापस लौट गई। इस तरह बार-बार कार्रवाई रुकने के कारण अब गांव में दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों को कभी भी स्थिति बिगड़ने की आशंका सता रही है। इस पूरे मामले पर सिस्टम की लाचारी भी सामने आई है, जहाँ शंकरगढ़ पुलिस का कहना है कि वे कोर्ट का आदेश मानने को तैयार हैं लेकिन उन्हें तहसील से हरी झंडी का इंतजार है। वहीं, तहसील प्रशासन और एसडीएम बारा की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं मिला है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई रोकना सीधे तौर पर अवमानना है। इस स्थिति से परेशान होकर पीड़ित पक्ष ने अब डीएम और कमिश्नर से मिलकर मजिस्ट्रियल जांच कराने और आदेश का तत्काल अनुपालन कराने की मांग की है।
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    प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के जनवा गांव में कोर्ट का आदेश होने के बाद भी पीड़िता को अपनी जमीन का कब्जा नहीं मिल पा रहा है। यह मामला सीमा देवी पत्नी राज बिहारी सिंह और रामप्रताप सिंह व अन्य से जुड़ा है। सीमा देवी का आरोप है कि विपक्षियों ने उनकी जमीन पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा लिया था, जिसके बाद मामला न्यायालय गया और कोर्ट ने सीमा देवी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कब्जा दिलाने का आदेश दिया।

न्यायालय के आदेश के बावजूद कब्जा दिलाने की कार्रवाई फाइलों में ही बंद है। पीड़िता का आरोप है कि आदेश के बाद 3 बार पुलिस, लेखपाल और राजस्व की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हर बार तहसील से "रोक दो" का फोन आते ही टीम वापस लौट गई। इस तरह बार-बार कार्रवाई रुकने के कारण अब गांव में दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों को कभी भी स्थिति बिगड़ने की आशंका सता रही है।

इस पूरे मामले पर सिस्टम की लाचारी भी सामने आई है, जहाँ शंकरगढ़ पुलिस का कहना है कि वे कोर्ट का आदेश मानने को तैयार हैं लेकिन उन्हें तहसील से हरी झंडी का इंतजार है। वहीं, तहसील प्रशासन और एसडीएम बारा की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं मिला है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई रोकना सीधे तौर पर अवमानना है। इस स्थिति से परेशान होकर पीड़ित पक्ष ने अब डीएम और कमिश्नर से मिलकर मजिस्ट्रियल जांच कराने और आदेश का तत्काल अनुपालन कराने की मांग की है।
    user_Rohit Sharma
    Rohit Sharma
    निष्पक्षता से खबर को प्रकाशित करना मेरा बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • प्रयागराज के कोरावं में पिछले 70 सालों से सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि न तो प्रधानमंत्री और न ही मुख्यमंत्री की ओर से इस दिशा में कोई ध्यान दिया गया है, और न ही विधायक या प्रधान ही उनकी समस्या सुनने का कोई प्रयास कर रहे हैं। इस जर्जर मार्ग के कारण लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे उन्हें अपने घर आने-जाने में बेहद गंभीर परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। दशकों पुरानी इस समस्या पर किसी भी स्तर पर कोई सुनवाई न होने से जनता में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
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    प्रयागराज के कोरावं में पिछले 70 सालों से सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि न तो प्रधानमंत्री और न ही मुख्यमंत्री की ओर से इस दिशा में कोई ध्यान दिया गया है, और न ही विधायक या प्रधान ही उनकी समस्या सुनने का कोई प्रयास कर रहे हैं। इस जर्जर मार्ग के कारण लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे उन्हें अपने घर आने-जाने में बेहद गंभीर परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। दशकों पुरानी इस समस्या पर किसी भी स्तर पर कोई सुनवाई न होने से जनता में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
    user_Ambuj Kumar
    Ambuj Kumar
    कोरांव, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • प्रयागराज के शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क परिसर में 12 जुलाई को पर्यावरण संरक्षण के लिए "एक पेड़ माँ के नाम" वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष वृक्षारोपण मुहिम की शुरुआत माननीय मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी जी द्वारा त्रिदेव यानी पीपल, पाकड़ और बरगद के तीन पेड़ लगाकर की गई। इस वृहद कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री मनीष वर्मा जी, उपनियंत्रक श्री नीरज मिश्रा जी और वरिष्ठ ए डी सी श्री राकेश कुमार तिवारी जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ ही राजेंद्र कुमार तिवारी दुकानजी, रवि द्विवेदी जी, आशीष बाजपेई जी, सुरेंद्र कुमार यादव, कृष्ण कुमार तिवारी जी, पूनम गुप्ता जी, अजय कुमार, रेनू श्रीवास्तव, अंजय कुशवाहा, शिशिर श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूली बच्चों, पुलिस और सेना के जवानों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस मुहिम में अपना योगदान दिया।
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    प्रयागराज के शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क परिसर में 12 जुलाई को पर्यावरण संरक्षण के लिए "एक पेड़ माँ के नाम" वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष वृक्षारोपण मुहिम की शुरुआत माननीय मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी जी द्वारा त्रिदेव यानी पीपल, पाकड़ और बरगद के तीन पेड़ लगाकर की गई।

इस वृहद कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री मनीष वर्मा जी, उपनियंत्रक श्री नीरज मिश्रा जी और वरिष्ठ ए डी सी श्री राकेश कुमार तिवारी जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ ही राजेंद्र कुमार तिवारी दुकानजी, रवि द्विवेदी जी, आशीष बाजपेई जी, सुरेंद्र कुमार यादव, कृष्ण कुमार तिवारी जी, पूनम गुप्ता जी, अजय कुमार, रेनू श्रीवास्तव, अंजय कुशवाहा, शिशिर श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूली बच्चों, पुलिस और सेना के जवानों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस मुहिम में अपना योगदान दिया।
    user_नावेद खान पत्रकार
    नावेद खान पत्रकार
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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