हरितालिका तीज पर रामपुर-रंदल में महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सुहाग रामपुर बुशहर, 16 सितंबर मीनाक्षी हरितालिका तीज के पावन अवसर पर रामपुर और रंदल क्षेत्र में महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखा और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा की। हरितालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख धार्मिक व्रतों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा या मिट्टी से बनाई गई प्रतिमाओं की स्थापना करती हैं। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप-दीप, नैवेद्य तथा सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर अन्न और जल का त्याग करती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद हरितालिका व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद आरती कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किए। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी प्रसंग से हरितालिका व्रत का संबंध माना जाता है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती के त्याग, तपस्या और समर्पण को याद करते हुए अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए पूजा करती हैं। रामपुर और रंदल क्षेत्र में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सज-धजकर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। कई महिलाओं ने मेहंदी लगाई और सुहाग की चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि धारण कर तीज की रस्में निभाईं। एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देने के साथ महिलाओं ने परिवार और समाज में सुख-शांति की कामना की। हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि महिलाओं के आपसी मेल-जोल और पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने का अवसर भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की पूजा और कथा का आयोजन कर लोक परंपराओं को आगे बढ़ा रही हैं। हरितालिका तीज पर रामपुर-रंदल में महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सुहाग रामपुर बुशहर, 16 सितंबर मीनाक्षी हरितालिका तीज के पावन अवसर पर रामपुर और रंदल क्षेत्र में महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखा और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा की। हरितालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख धार्मिक व्रतों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा या मिट्टी से बनाई गई प्रतिमाओं की स्थापना करती हैं। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप-दीप, नैवेद्य तथा सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर अन्न और जल का त्याग करती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद हरितालिका व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद आरती कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किए। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी प्रसंग से हरितालिका व्रत का संबंध माना जाता है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती के त्याग, तपस्या और समर्पण को याद करते हुए अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए पूजा करती हैं। रामपुर और रंदल क्षेत्र में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सज-धजकर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। कई महिलाओं ने मेहंदी लगाई और सुहाग की चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि धारण कर तीज की रस्में निभाईं। एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देने के साथ महिलाओं ने परिवार और समाज में सुख-शांति की कामना की। हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि महिलाओं के आपसी मेल-जोल और पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने का अवसर भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की पूजा और कथा का आयोजन कर लोक परंपराओं को आगे बढ़ा रही हैं।
हरितालिका तीज पर रामपुर-रंदल में महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सुहाग रामपुर बुशहर, 16 सितंबर मीनाक्षी हरितालिका तीज के पावन अवसर पर रामपुर और रंदल क्षेत्र में महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखा और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा की। हरितालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख धार्मिक व्रतों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा या मिट्टी से बनाई गई प्रतिमाओं की स्थापना करती हैं। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप-दीप, नैवेद्य तथा सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर अन्न और जल का त्याग करती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद हरितालिका व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद आरती कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किए। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी प्रसंग से हरितालिका व्रत का संबंध माना जाता है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती के त्याग, तपस्या और समर्पण को याद करते हुए अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए पूजा करती हैं। रामपुर और रंदल क्षेत्र में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सज-धजकर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। कई महिलाओं ने मेहंदी लगाई और सुहाग की चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि धारण कर तीज की रस्में निभाईं। एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देने के साथ महिलाओं ने परिवार और समाज में सुख-शांति की कामना की। हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि महिलाओं के आपसी मेल-जोल और पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने का अवसर भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की पूजा और कथा का आयोजन कर लोक परंपराओं को आगे बढ़ा रही हैं। हरितालिका तीज पर रामपुर-रंदल में महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सुहाग रामपुर बुशहर, 16 सितंबर मीनाक्षी हरितालिका तीज के पावन अवसर पर रामपुर और रंदल क्षेत्र में महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ व्रत रखा और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा की। हरितालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख धार्मिक व्रतों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा या मिट्टी से बनाई गई प्रतिमाओं की स्थापना करती हैं। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप-दीप, नैवेद्य तथा सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर अन्न और जल का त्याग करती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद हरितालिका व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद आरती कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किए। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी प्रसंग से हरितालिका व्रत का संबंध माना जाता है। महिलाएं इस दिन माता पार्वती के त्याग, तपस्या और समर्पण को याद करते हुए अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए पूजा करती हैं। रामपुर और रंदल क्षेत्र में भी तीज को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सज-धजकर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। कई महिलाओं ने मेहंदी लगाई और सुहाग की चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि धारण कर तीज की रस्में निभाईं। एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देने के साथ महिलाओं ने परिवार और समाज में सुख-शांति की कामना की। हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि महिलाओं के आपसी मेल-जोल और पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने का अवसर भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की पूजा और कथा का आयोजन कर लोक परंपराओं को आगे बढ़ा रही हैं।
- वीबी जी राम जी योजना का दायरा बढ़ाने की मांग, नीतिगत संशोधन की जरूरत भौगोलिक वास्तविकताओं को अनदेखा करने से विकास कार्य प्रभावित; संगड़ाह में केंद्र के समक्ष मामला उठाने की अपील। पहाड़ी राज्यों में ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण मैदानी इलाकों से भिन्न होता है। संगड़ाह विकास खंड में वीबी जी राम जी योजना के तहत पक्के रास्ते, डंगे और सिंचाई टैंक जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के शामिल न होने से नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पंचायत परिषद संगड़ाह ने इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधान परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने खंड विकास अधिकारी संगड़ाह को सौंपे ज्ञापन के जरिए यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा दीवारें और पक्के संपर्क मार्ग पहाड़ी क्षेत्रों की मूलभूत आवश्यकता हैं। इन मदों को योजना में जगह न मिलने के कारण हाल ही में जारी किए गए अधिकांश वर्क ऑर्डर रद्द करने पड़े हैं। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि पंचायतों को आवंटित धन का सही उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। परिषद ने राज्य सरकार से केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर नीतिगत सुधार की वकालत की है। ओपी ठाकुर, अध्यक्ष, प्रधान परिषद संगड़ाह : "योजना में सुरक्षा दीवारों और सिंचाई टैंकों जैसे कार्यों का शामिल न होना जनहित के खिलाफ है। राज्य सरकार को यह विषय केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखना चाहिए।" बीएस पाल, खंड विकास अधिकारी (BDO), संगड़ाह : "प्राप्त ज्ञापन को उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रेषित किया जा रहा है। योजना के दिशानिर्देशों के तहत संबंधित कार्यों को लेकर विभागीय स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।" विकसित भारत जी राम जी योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाना है, लेकिन क्षेत्रीय आवश्यकताओं की अनदेखी से इसके क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार को पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजना के नियमों में लचीलापन लाना होगा ताकि विकास की गति बनी रहे। हरिपुरधार से दीपांशु शर्मा की रिपोर्ट2
- डिलीवरी में देरी पर बलिंकइट राइडर से मारपीट, रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी का आरोप सोलन, 16 सितंबर सोलन शहर में डिलीवरी में मामूली देरी को लेकर एक डिलीवरी राइडर के साथ मारपीट करने और कथित तौर पर रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। घटना की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में डिलीवरी राइडर पुलिस के पास पहुंचे और मामले में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता अनूप चौहान के अनुसार वह सामान की डिलीवरी करने के लिए ठोड़ो मैदान के समीप गया था। इलाके के दो आर्डर उसके पास थे। एक आर्डर की डिलीवरी पहुंचाने में थोड़ी देरी होने पर संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर उससे उलझ गया। आरोप है कि पहले उसके साथ हाथापाई की गई और बाद में उसे रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद शहर के डिलीवरी राइडर पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाने पहुंचे। राइडरों ने घटना को लेकर अपनी चिंता पुलिस के समक्ष रखी और सुरक्षा की मांग की। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। एएसपी सोलन रमेश शर्मा ने कहा कि शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को किसी भी व्यक्ति को अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मारपीट की बात सामने आई है और रिवाल्वर दिखाने के आप की अभी जांच हो रही है जांच के बाद ही पता चलेगा की रिवाल्वर दिखाई गई है या नहीं।1
- रैगिंग के मामले की जांच करने पहुंची शिक्षा विभाग की टीम सोलन के एक निजी स्कूलों में सामने आए रैगिंग के मामले की जांच शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है तीन सदस्य टीम ने स्कूल में जाकर पीड़ित छात्रों व उनके अभिभावकों के बयान दर्ज किया. इसके बाद मामले में आगामी कार्रवाई होगी1
- सोलन में BLUNKIT डिलीवरी बॉय के साथ मारपीट शिकायतकर्ता ने लगाया रिवाल्वर दिखाने का आरोप. जांच कर रही है पुलिस1
- जिला सिरमौर के पांवटा साहिब में दा साईं कॉपरेटिव सोसाइटी ब्रांच भूपुर में 700 खाताधारकों का पैसा अटका जिला सिरमौर के पांवटा साहिब में दा साईं कॉपरेटिव सोसाइटी ब्रांच भूपुर में 700 खाताधारकों का पैसा अटका, करीब 3 करोड़ रुपये जमा होने का दावा....पुलिस स्टेशन के बाहर लोगों का हंगामा, शिकायतकर्ता...बीरबल, राशिद, नासिर, अभिधा, समीना, असलम, सोनू, राकेश, माया देवी1
- घुमारवीं में FIR दर्ज न होने के विरोध में भाजपा का प्रदर्शन, बिलासपुर में निकाली रैली भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने घुमारवीं में चल रहे आंदोलन के समर्थन में पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। भाजपा का आरोप है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर पुलिस द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर घुमारवीं में पिछले कई दिनों से भाजपा का क्रमिक धरना और अनशन भी चल रहा है।1
- चंबाघाट में मेयर सुषमा शर्मा का औचक निरीक्षण, सफाई व्यवस्था का लिया जायजा सोलन नगर निगम की मेयर सुषमा शर्मा ने आज चंबाघाट क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चंबाघाट में बने सार्वजनिक शौचालयों सहित आसपास के विभिन्न स्थानों पर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। मेयर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के आगामी आदेश दिए।1
- देवभूमि की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक बिरसू और पहाड़ी नाटी का अद्भुत संगम, महासू महाराज के जागरण की एक सुंदर झलक! सिरमौर जिला के गिरिपार इलाके में ऋषि पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के आयोजन को लेकर लोगो में खूब उत्साह देखा जा रहा है। जिला के सभी उन स्थानों पर ऋषि पंचमी का आयोजन किया जाता है जहाँ पर महासू देवता के मन्दिर मोजूद है। देर रात गिरिपार क्षेत्र के बियोंग, गताधार, डाहर व द्राबिल,टटियाना आदि क्षेत्रों में ऋषि पंचमी पर्व की खूब धूम देखने को मिली। ऋषि पंचमी पर्व की पूर्व संध्या पर महासू देवता के जागरण का आयोजन होता है। ।महासू देवता से लोगों की गहरी आस्थाएं जुड़ी होती है जागरण के दौरान रात को महासू भक्त अग्नि परीक्षा भी देते है भक्त आग के दहकते अंगारों पर कूदते है। अंगारों पर कूदने के बावजूद महासू भक्तों को आंच तक नही आती है। पूजन के दौरान महासू भक्तों द्वारा क्षेत्र की सुख समृधि की कामना भी की जाती है। गिरिपार के गताधार में ऋषि पंचमी की खूब धूम देखने को मिली बड़ी संख्या में लोग महासू महाराज मंदिर के प्रांगण में पहुंचे और रात भर आयोजित होने वाली जागरण का हिस्सा बने। इस दौरान पारंपरिक लोक संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलती है। महासू भक्तों ने बताया की इस पर्व का उनका बेसब्री से इन्तजार रहता है जिसको लेकर तैयारियां डेढ़ दो माह पहले ही शुरू हो जाती है। क्षेत्र में यह पर्व दो दिनों तक मनाया जाता है पहले दिन देर सायं महासू महाराज को पवित्र स्नान करवाया जाता है और उसके बाद रात भर महासू देवता का जागरण किया जाता है जबकि अगले दिन नाच गानों का दौर चला रहता है। सदियों से चली आ रही से परंपरा को लोगों द्वारा आज भी बखूबी निभाया जाता है और ऋषि पंचमी के दौरान कहीं ऐसी परंपराएं हैं जो यहां के लोगों द्वारा सदियों से निभाई जा रही है कई क्षेत्र में यह पर्व 2 से 3 दिनों तक मनाया जाता है संस्कृति की इस अनूठी झलक को देखने के लिए दूर-दराज से भी लोग इन गांव में पहुंचते है।4
- डिलीवरी में देरी पर बलिंकइट राइडर से मारपीट, रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी का आरोप डिलीवरी में देरी पर बलिंकइट राइडर से मारपीट, रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी का आरोप1