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एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है। सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।

14 hrs ago
user_ऋषभ तिवारी
ऋषभ तिवारी
पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
14 hrs ago

एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है,

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जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है। सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।

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  • एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है। सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।
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    एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है।

इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है।

सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।
    user_ऋषभ तिवारी
    ऋषभ तिवारी
    पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
    14 hrs ago
  • रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
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    रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    Korba, Chhattisgarh•
    1 hr ago
  • छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में जनसुनवाई के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
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    छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में जनसुनवाई के दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
    user_Suraj Gupta
    Suraj Gupta
    सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • कोरबा की नगर कोतवाली में थाना प्रभारी का पदभार महज 24 घंटे के भीतर बदल जाने से शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दरअसल, 30 जून को निरीक्षक डीएन तिवारी ने नगर कोतवाली का प्रभार संभाला था, लेकिन अगले ही दिन जारी आदेश में उन्हें रक्षित केंद्र भेज दिया गया। उनकी जगह, हरदी बाजार थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना को नगर कोतवाली की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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    कोरबा की नगर कोतवाली में थाना प्रभारी का पदभार महज 24 घंटे के भीतर बदल जाने से शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दरअसल, 30 जून को निरीक्षक डीएन तिवारी ने नगर कोतवाली का प्रभार संभाला था, लेकिन अगले ही दिन जारी आदेश में उन्हें रक्षित केंद्र भेज दिया गया। उनकी जगह, हरदी बाजार थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना को नगर कोतवाली की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    user_Kaniya Soni
    Kaniya Soni
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • कोरबा जिले में एक घर के सामने भारी मात्रा में बारिश का पानी जमा हो गया है, जिससे वहां आवाजाही में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है। यह पानी ऊपर से आकर घर के सामने एक बड़ा तालाब बना दे रहा है, जिसके कारण लोगों का घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है। इलाके में नाली की सुविधा न होने से इस पानी को निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है और वह लगातार जमा होता जा रहा है। इस गंभीर जलजमाव की समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की गई है।
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    कोरबा जिले में एक घर के सामने भारी मात्रा में बारिश का पानी जमा हो गया है, जिससे वहां आवाजाही में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है। यह पानी ऊपर से आकर घर के सामने एक बड़ा तालाब बना दे रहा है, जिसके कारण लोगों का घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है।

इलाके में नाली की सुविधा न होने से इस पानी को निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है और वह लगातार जमा होता जा रहा है। इस गंभीर जलजमाव की समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की गई है।
    user_Om Sen
    Om Sen
    Computer Programmer कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    16 hrs ago
  • जिले में डीजल आपूर्ति को लेकर एक विरोधाभासी स्थिति सामने आई है। जहाँ एक ओर किसानों को डीजल की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर रात के समय ट्रेलर चालकों को लगातार डीजल की आपूर्ति की जा रही है।
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    जिले में डीजल आपूर्ति को लेकर एक विरोधाभासी स्थिति सामने आई है। जहाँ एक ओर किसानों को डीजल की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर रात के समय ट्रेलर चालकों को लगातार डीजल की आपूर्ति की जा रही है।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
  • कोटा पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, पुलिस ने 284 ग्राम गांजे के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।
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    कोटा पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, पुलिस ने 284 ग्राम गांजे के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    Korba, Chhattisgarh•
    1 hr ago
  • सुरु ऐप के उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वे ऐप पर खबरें तो पोस्ट कर सकते हैं, लेकिन इससे पैसा नहीं कमा सकते। उपयोगकर्ताओं से ऐप में अपना सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।
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    सुरु ऐप के उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वे ऐप पर खबरें तो पोस्ट कर सकते हैं, लेकिन इससे पैसा नहीं कमा सकते। उपयोगकर्ताओं से ऐप में अपना सहयोग बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।
    user_Rajesh Kumar Yadav
    Rajesh Kumar Yadav
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
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