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दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल से एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ एक 15 साल की मासूम बच्ची के साथ कुकर्म किया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, तत्काल कार्रवाई की गई है और अस्पताल से जुड़े कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

3 days ago
user_RAJA KUMAR
RAJA KUMAR
पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
3 days ago

दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल से एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ एक 15 साल की मासूम बच्ची के साथ कुकर्म किया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, तत्काल कार्रवाई की गई है और अस्पताल से जुड़े कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

  • user_Ranjeet kumar Thakur
    Ranjeet kumar Thakur
    कांति, मुजफ्फरपुर, बिहार
    बहुत दुखद घटना
    3 days ago
  • user_Akash kumar
    Akash kumar
    हरसिद्धि, पूर्वी चंपारण, बिहार
    🙏
    3 days ago
More news from बिहार and nearby areas
  • बिहार के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। इस आरोप के साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या राज्य के मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
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    बिहार के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। इस आरोप के साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या राज्य के मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
    user_Talk On Chair
    Talk On Chair
    Media company मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    8 hrs ago
  • Post by RAJA KUMAR
    1
    Post by RAJA KUMAR
    user_RAJA KUMAR
    RAJA KUMAR
    पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    10 hrs ago
  • पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली में जिलाधिकारी के आदेश पर खंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के नेतृत्व में एक टीम ने स्टेशन रोड स्थित फैजुल ओलूम लाल मदरसा का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान, टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक जानकारी जुटाई।
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    पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली में जिलाधिकारी के आदेश पर खंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के नेतृत्व में एक टीम ने स्टेशन रोड स्थित फैजुल ओलूम लाल मदरसा का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान, टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक जानकारी जुटाई।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • जनसुराज पार्टी के जिला महासचिव और लौरिया विधानसभा संयोजक अजय ठाकुर ने शुक्रवार को लौरिया प्रखंड के ठाकुर टोला स्थित अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने रोजगार, पलायन, किसानों की समस्याओं और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सरकार की आलोचना की। ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनाव पूर्व किए गए कई वादे आज भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पाँच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का सरकार का वादा पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि राज्य में सीमित लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं और छात्रों को रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन सरकार गठन के महीनों बाद भी कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे, बढ़ते कर्ज और परिवारवाद के मुद्दे भी उठाए। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हर साल यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान रहते हैं और आंदोलन करने को विवश होते हैं, लेकिन समाधान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाता है। अजय ठाकुर ने जोर देकर कहा कि बिहार में रोजगार की कमी, युवाओं का पलायन, किसानों की खाद समस्या और अधूरे चुनावी वादे आज सबसे बड़े जनसरोकार के मुद्दे हैं। उन्होंने घोषणा की कि जनसुराज पार्टी इन सवालों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जून से जनसुराज पार्टी बिहार नवनिर्माण अभियान के एक नए चरण की शुरुआत करेगी, जिसके तहत जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहटा स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहकर लोगों के बीच कार्य करेंगे और संगठन को गाँव-गाँव तक मजबूत बनाने का अभियान चलाएंगे। इस प्रेस वार्ता में पिंटू ठाकुर, अनमोल कुमार, विनय माझी, कौशल्या देवी, नितेश राणा, अबीता ठाकुर, अरविंद राम, जय सिंधु, हैप्पी कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    जनसुराज पार्टी के जिला महासचिव और लौरिया विधानसभा संयोजक अजय ठाकुर ने शुक्रवार को लौरिया प्रखंड के ठाकुर टोला स्थित अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने रोजगार, पलायन, किसानों की समस्याओं और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सरकार की आलोचना की।

ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनाव पूर्व किए गए कई वादे आज भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पाँच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का सरकार का वादा पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि राज्य में सीमित लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं और छात्रों को रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन सरकार गठन के महीनों बाद भी कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे, बढ़ते कर्ज और परिवारवाद के मुद्दे भी उठाए। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हर साल यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान रहते हैं और आंदोलन करने को विवश होते हैं, लेकिन समाधान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाता है।

अजय ठाकुर ने जोर देकर कहा कि बिहार में रोजगार की कमी, युवाओं का पलायन, किसानों की खाद समस्या और अधूरे चुनावी वादे आज सबसे बड़े जनसरोकार के मुद्दे हैं। उन्होंने घोषणा की कि जनसुराज पार्टी इन सवालों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जून से जनसुराज पार्टी बिहार नवनिर्माण अभियान के एक नए चरण की शुरुआत करेगी, जिसके तहत जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहटा स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहकर लोगों के बीच कार्य करेंगे और संगठन को गाँव-गाँव तक मजबूत बनाने का अभियान चलाएंगे।

इस प्रेस वार्ता में पिंटू ठाकुर, अनमोल कुमार, विनय माझी, कौशल्या देवी, नितेश राणा, अबीता ठाकुर, अरविंद राम, जय सिंधु, हैप्पी कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    7 hrs ago
  • कई वर्षों से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी सेब की पहचान अब बदल रही है, क्योंकि बिहार की धरती पर भी लाल सेबों की बंपर पैदावार हो रही है। पश्चिम चम्पारण के किसान इस बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे बिहार अब सेब उत्पादन की दिशा में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पश्चिम चम्पारण के साथ-साथ गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे ने दो साल पहले करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हुए हैं। प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब का उत्पादन हो रहा है, जिनकी गुणवत्ता, मिठास, रंग और आकार किसी भी पहाड़ी प्रदेश में उगने वाले सेब से कम नहीं है। शिशिर दूबे के अनुसार, शुरुआत में बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन अब दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने और खेती की तकनीक जानने आ रहे हैं। इस अभियान में बेतिया शहर के व्यवसायी मेराजुल हक भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने पर्यावरण प्रेम के चलते अपने आवास और परिसर में सेब के कई पौधे लगाए, जो अब फल दे रहे हैं। उनका मानना है कि फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। पश्चिम चम्पारण में मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे अन्य किसान भी सेब की खेती में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनके बागानों में दर्जनों पौधे लगातार फल दे रहे हैं। बिहार में उगाए जा रहे सेब की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय से पहले उपलब्धता है। जहां हिमाचल और कश्मीर में सेब की कटाई सितंबर और अक्टूबर में होती है, वहीं बिहार में जून और जुलाई तक इसकी तुड़ाई पूरी हो जाती है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है क्योंकि उनका उत्पाद बाजार में दो महीने पहले पहुंच जाता है और उन्हें बेहतर कीमतें मिलती हैं। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में ये सेब ₹200 प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि कई जगहों पर इसकी कीमत ₹250 प्रति किलो तक पहुंच रही है। यह सेब बेहद मीठा, रसीला और आकर्षक लाल रंग का होता है, जो पकने पर पूरी तरह लाल हो जाता है। किसानों द्वारा उगाई जा रही सेब की यह विशेष किस्म HRMN-99 (हरमन-99) है, जिसे विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किस्म 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी आसानी से विकसित होती है और पौधारोपण के एक से दो वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर लाभ देने की क्षमता रखती है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो, तो बिहार भविष्य में सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। पश्चिम चम्पारण में सेब के पौधे खेती में नवाचार और नई सोच से असंभव को संभव बनाने का प्रमाण हैं, जो बिहार में सेब उत्पादन की एक नई कहानी लिख रहे हैं। कभी पहाड़ों की पहचान माना जाने वाला सेब अब बिहार की मिट्टी में भी सफलता की नई फसल बन चुका है और यह बिहार का लाल सेब अब देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
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    कई वर्षों से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी सेब की पहचान अब बदल रही है, क्योंकि बिहार की धरती पर भी लाल सेबों की बंपर पैदावार हो रही है। पश्चिम चम्पारण के किसान इस बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे बिहार अब सेब उत्पादन की दिशा में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पश्चिम चम्पारण के साथ-साथ गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं।

पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे ने दो साल पहले करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हुए हैं। प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब का उत्पादन हो रहा है, जिनकी गुणवत्ता, मिठास, रंग और आकार किसी भी पहाड़ी प्रदेश में उगने वाले सेब से कम नहीं है। शिशिर दूबे के अनुसार, शुरुआत में बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन अब दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने और खेती की तकनीक जानने आ रहे हैं। इस अभियान में बेतिया शहर के व्यवसायी मेराजुल हक भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने पर्यावरण प्रेम के चलते अपने आवास और परिसर में सेब के कई पौधे लगाए, जो अब फल दे रहे हैं। उनका मानना है कि फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। पश्चिम चम्पारण में मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे अन्य किसान भी सेब की खेती में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनके बागानों में दर्जनों पौधे लगातार फल दे रहे हैं।

बिहार में उगाए जा रहे सेब की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय से पहले उपलब्धता है। जहां हिमाचल और कश्मीर में सेब की कटाई सितंबर और अक्टूबर में होती है, वहीं बिहार में जून और जुलाई तक इसकी तुड़ाई पूरी हो जाती है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है क्योंकि उनका उत्पाद बाजार में दो महीने पहले पहुंच जाता है और उन्हें बेहतर कीमतें मिलती हैं। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में ये सेब ₹200 प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि कई जगहों पर इसकी कीमत ₹250 प्रति किलो तक पहुंच रही है। यह सेब बेहद मीठा, रसीला और आकर्षक लाल रंग का होता है, जो पकने पर पूरी तरह लाल हो जाता है।

किसानों द्वारा उगाई जा रही सेब की यह विशेष किस्म HRMN-99 (हरमन-99) है, जिसे विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किस्म 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी आसानी से विकसित होती है और पौधारोपण के एक से दो वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर लाभ देने की क्षमता रखती है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो, तो बिहार भविष्य में सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। पश्चिम चम्पारण में सेब के पौधे खेती में नवाचार और नई सोच से असंभव को संभव बनाने का प्रमाण हैं, जो बिहार में सेब उत्पादन की एक नई कहानी लिख रहे हैं। कभी पहाड़ों की पहचान माना जाने वाला सेब अब बिहार की मिट्टी में भी सफलता की नई फसल बन चुका है और यह बिहार का लाल सेब अब देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    20 hrs ago
  • पूर्बी चंपारण जिले के घोड़ासहन क्षेत्र में, एक 'गाय का नाला' है। जानकारी के अनुसार, इस नाले के 'पास' होने के लिए जो 'बख़ूड' आवश्यक है, वह अभी तक नहीं बन पाया है।
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    पूर्बी चंपारण जिले के घोड़ासहन क्षेत्र में, एक 'गाय का नाला' है। जानकारी के अनुसार, इस नाले के 'पास' होने के लिए जो 'बख़ूड' आवश्यक है, वह अभी तक नहीं बन पाया है।
    user_Rajkishor Sharma
    Rajkishor Sharma
    घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    23 hrs ago
  • गोपालगंज प्रशासन को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उचकागाँव पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रक को जब्त किया है। यह कार्रवाई संत मोड़ नामक स्थान पर की गई, जिसे पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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    गोपालगंज प्रशासन को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उचकागाँव पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रक को जब्त किया है। यह कार्रवाई संत मोड़ नामक स्थान पर की गई, जिसे पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
    user_गोपालगंज की जनता
    गोपालगंज की जनता
    Local News Reporter Gopalganj, Bihar•
    1 hr ago
  • पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में एक वृद्धाश्रम बंद हो गया है। इस घटना के संबंध में उप महापौर की क्या प्रतिक्रिया या बयान रहा, यह एक प्रश्न बना हुआ है।
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    पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में एक वृद्धाश्रम बंद हो गया है। इस घटना के संबंध में उप महापौर की क्या प्रतिक्रिया या बयान रहा, यह एक प्रश्न बना हुआ है।
    user_Talk On Chair
    Talk On Chair
    Media company मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    21 hrs ago
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