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मुंबई पुलिस विरोध कर रहे छात्रों को खुलेआम धमका रही है और उन्हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रही है। छात्रों को साफ तौर पर कहा गया है कि "अगर दोबारा विरोध प्रदर्शन किया तो मैं तुम सबको ड्रग्स केस में फंसा दूंगा और तुम पूरी जिंदगी जेल में बिताओगे।" इसके साथ ही यह धमकी भी दी गई है कि "मैं बहुत खतरनाक आदमी हूं, मुझे चुनौती मत दो, मैं तुम सबको जेल में डाल दूंगा।" पुलिस के इस रवैये पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "संघी वर्दीधारी गुंडे" करार दिया गया है। पूरे मामले पर देश का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा गया है कि उम्मीद है पूरा देश पुलिस की इस करतूत को देख रहा होगा।
Journalist Sonu Pal
मुंबई पुलिस विरोध कर रहे छात्रों को खुलेआम धमका रही है और उन्हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रही है। छात्रों को साफ तौर पर कहा गया है कि "अगर दोबारा विरोध प्रदर्शन किया तो मैं तुम सबको ड्रग्स केस में फंसा दूंगा और तुम पूरी जिंदगी जेल में बिताओगे।" इसके साथ ही यह धमकी भी दी गई है कि "मैं बहुत खतरनाक आदमी हूं, मुझे चुनौती मत दो, मैं तुम सबको जेल में डाल दूंगा।" पुलिस के इस रवैये पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "संघी वर्दीधारी गुंडे" करार दिया गया है। पूरे मामले पर देश का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा गया है कि उम्मीद है पूरा देश पुलिस की इस करतूत को देख रहा होगा।
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- शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार के साथ लंबी बातचीत और देश में संभावित तनाव की स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी छात्रों और युवाओं से शांति बनाए रखने तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील भी की। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि केंद्र सरकार परीक्षा में होने वाले पेपर लीक और नकल माफिया पर कड़ी कार्रवाई के लिए और अधिक सख्त कानून लाने जा रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा जाएगा, जिसमें दोषियों के लिए कठोर दंड और मामलों के त्वरित निस्तारण के प्रावधान शामिल होंगे। हालांकि, वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बावजूद छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक और स्थायी सुधार भी बेहद जरूरी हैं।1
- भारत में गहराते जल संकट के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समस्या से निपटने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सूखे का पूर्वानुमान लगाने से लेकर पानी के वितरण को बेहतर बनाने और रियल-टाइम में लीक का पता लगाने तक, AI से संचालित समाधान एक नई उम्मीद दे रहे हैं। विशाल डेटासेट का विश्लेषण करके AI सरकारों और एजेंसियों को जल संसाधनों का अधिक कुशलता से प्रबंधन करने, पानी की बर्बादी घटाने और भविष्य के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसे लागू करने, बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।1
- लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का जीवन संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत है और उनके विचार आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। समारोह को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज से ऊंच-नीच, जात-पात और भेदभाव के कुचक्र को समाप्त करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने हमेशा प्रेम, करुणा और सामाजिक समरसता की बात कही। उन्होंने बताया कि संत रविदास जी ने सिखाया कि कोई भी व्यक्ति अपने जन्म या जाति से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। संत रविदास जी की अमर पंक्तियों 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मन की शुद्धता और सेवा भाव ही सच्चा धर्म है। उन्होंने 'बेगमपुरा' का सपना देखते हुए एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहाँ कोई दुःखी या पीड़ित न हो और सभी को समानता व न्याय का अधिकार मिले। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन और उनकी वाणी मानवता की सेवा तथा समाज में एकता बनाए रखने का मार्ग दिखाती है और उनके बताए रास्तों को अपनाकर ही एक सशक्त व समरस समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और उपस्थित जनसमूह से संत रविदास जी की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि संत रविदास जी के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।1
- लखनऊ के इंदिरा नगर सेक्टर-25 पावर हाउस क्षेत्र अंतर्गत बी ब्लॉक स्थित साईं मंदिर के सामने ट्रांसफार्मर पर पेड़ की हरी टहनियां और डालियां बुरी तरह फैल चुकी हैं। ये डालियां बिजली की लाइनों और उपकरणों को छू रही हैं, जिससे इलाके में करंट फैलने, शॉर्ट सर्किट और किसी बड़े हादसे की गंभीर आशंका बनी हुई है। विद्युत विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय लोगों ने पूछा है कि क्या अधिकारी शिकायत मिलने या किसी दुर्घटना के होने के बाद ही जागेंगे। नागरिकों ने मांग की है कि ट्रांसफार्मर के आसपास फैली टहनियों की तत्काल छंटाई कराई जाए और क्षेत्र का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।1
- सोनम वांगचुक ने दो केंद्रीय मंत्रियों और अपनी पत्नी की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म होने के बाद अब इस आंदोलन के लिए कल का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे आंदोलन की आगे की लाइन-लेंथ और दिशा तय होगी।1
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाते हुए यह कार्रवाई की गई है, जिसके तहत संबंधित सात शिक्षकों को सेवा से हटा दिया गया है।1
- दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और अधिकारियों को तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अब किसी भी प्रकार की देरी या बहानेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और इसे तर्कों या बहानों से नहीं सुलझाया जा सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान स्थिति में कागजी सफाई के बजाय जमीन पर वास्तविक और ठोस कार्रवाई की सख्त जरूरत है।1
- जंतर मंतर पर जारी शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा पूरे दिन प्रयास किए गए। प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट सपोर्टर्स के साथ बेहद बदसलूकी की गई और उन पर बिना किसी वजह के दबाव बनाया गया। पुलिस ने जगह-जगह बैरीकेडिंग लगाकर साथियों को रोकने की कोशिश की, जिससे कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मासूम छात्रों पर किए गए इस जुल्म और अन्याय से साफ जाहिर होता है कि सरकार उनकी आवाज से डरी हुई है। आंदोलन को खराब करने और भड़काने की कोशिशों के बावजूद छात्र समर्थकों ने समझदारी और हिम्मत से काम लिया। इतने अत्याचार के बाद भी कोई साथी पीछे नहीं हटा है और वे अपनी मांगों व हक की लड़ाई के लिए जंतर मंतर पर डटे हुए हैं। 'विद्यार्थी शक्ति जिंदाबाद' और 'इनकलाब जिंदाबाद' के नारों के साथ आंदोलन को आगे भी जारी रखने का ऐलान किया गया है।1