भाजपा सरकार में गरीब से ₹5 हजार? उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली ने खोली व्यवस्था की पोल । यूपी, उन्नाव। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे खूब किए जाते हैं। नेता मंचों से सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था की बातें करते हैं। लेकिन उन्नाव के जिला पोस्टमार्टम हाउस से सामने आया ₹5 हजार मांगने का कथित मामला अब इन्हीं दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आरोप है कि एक गरीब परिवार से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के नाम पर ₹5 हजार मांगे गए। सवाल सीधा है—अगर सरकारी व्यवस्था इतनी पारदर्शी है तो गरीब की मजबूरी देखकर पैसे मांगने की हिम्मत आखिर किसके भरोसे हुई? भाजपा नेताओं से सीधा सवाल—आपकी नाक के नीचे यह सब कैसे? उन्नाव में सत्ता पक्ष के नेता और जनप्रतिनिधि लगातार जनता के बीच विकास और सुशासन का दावा करते हैं। तो फिर सवाल है— सरकारी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली की शिकायतें सत्ता के जिम्मेदार लोगों तक क्यों नहीं पहुंचतीं? क्या भाजपा के स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर शिकायत सामने आने के बाद मामला खुला, तो अब तक ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता यह जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण देने वाले भाजपा नेता अब इस मामले पर क्या बोलेंगे? एक महिला नेत्री ने आवाज उठाई, सत्ता पक्ष कहां था? सबसे चुभने वाला सवाल यही है। एक गरीब परिवार से कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत सामने आई तो समाजवादी पार्टी की नेत्री आंचल वर्मा ने मामले को उठाया, गरीब परिवार के साथ खड़ी हुईं और कथित रूप से पैसे मांगने वाले व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाई। मामला सामने आने के बाद रकम वापस कराने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई। अब सवाल भाजपा के स्थानीय नेताओं से है— जिस काम को सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों को खुद देखना चाहिए था, उसमें विपक्ष की एक महिला नेत्री को गरीब की आवाज क्यों बनना पड़ा? अगर किसी गरीब परिवार से वास्तव में अवैध रूप से पैसा मांगा गया था, तो सरकार के प्रतिनिधि कहां थे? भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे की भी परीक्षा भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है। लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि— क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ भाषणों तक है? क्या गरीब परिवार को अपने मृत परिजन के पोस्टमार्टम के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे? क्या सरकारी परिसर में कथित वसूली करने वालों को प्रशासन का डर नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल— अगर एक गरीब परिवार से ₹5 हजार मांगे जा सकते हैं, तो ऐसे कितने परिवार होंगे जो पैसे देकर चुपचाप लौट गए होंगे? इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा। सिर्फ पैसे वापस कराना काफी नहीं अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सिर्फ ₹5 हजार वापस करा देना इस मामले का अंत नहीं होना चाहिए। यह पता लगना चाहिए कि पैसे किसने मांगे, किसके कहने पर मांगे, क्या पहले भी किसी से ऐसी रकम ली गई और इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कौन करता है। क्योंकि मामला सिर्फ ₹5 हजार का नहीं है। मामला उस भरोसे का है जो जनता सरकारी व्यवस्था पर करती है। और भाजपा नेताओं से जनता का सवाल बिल्कुल साफ है— “जब आपकी सरकार है, आपके अधिकारी हैं और आपके जनप्रतिनिधि हैं, तो फिर गरीब की मजबूरी पर कथित वसूली का खेल आपकी नाक के नीचे कैसे चल रहा था?” अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष इस सवाल का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह जिम्मेदारी अधिकारियों के सिर डालकर राजनीतिक रूप से किनारा कर लिया जाएगा। नोट: ₹5 हजार मांगने और रकम वापस कराने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित अधिकारी/विभाग और अन्य पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
भाजपा सरकार में गरीब से ₹5 हजार? उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली ने खोली व्यवस्था की पोल । यूपी, उन्नाव। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे खूब किए जाते हैं। नेता मंचों से सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था की बातें करते हैं। लेकिन उन्नाव के जिला पोस्टमार्टम हाउस से सामने आया ₹5 हजार मांगने का कथित मामला अब इन्हीं दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आरोप है कि एक गरीब परिवार से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के नाम पर ₹5 हजार मांगे गए। सवाल सीधा है—अगर सरकारी व्यवस्था इतनी पारदर्शी है तो गरीब की मजबूरी देखकर पैसे मांगने की हिम्मत आखिर किसके भरोसे हुई? भाजपा नेताओं से सीधा सवाल—आपकी नाक के नीचे यह सब कैसे? उन्नाव में सत्ता पक्ष के नेता और जनप्रतिनिधि लगातार जनता के बीच विकास और सुशासन का दावा करते हैं। तो फिर सवाल है— सरकारी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली की शिकायतें सत्ता के जिम्मेदार लोगों तक क्यों नहीं पहुंचतीं? क्या भाजपा के स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर शिकायत सामने आने के बाद मामला खुला, तो अब तक ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता यह जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण देने वाले भाजपा नेता अब इस मामले पर क्या बोलेंगे? एक महिला नेत्री ने आवाज उठाई, सत्ता पक्ष कहां था? सबसे चुभने वाला सवाल यही है। एक गरीब परिवार से कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत सामने आई तो समाजवादी पार्टी की नेत्री आंचल वर्मा ने मामले को उठाया, गरीब परिवार के साथ खड़ी हुईं और कथित रूप से पैसे मांगने वाले व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाई। मामला सामने आने के बाद रकम वापस कराने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई। अब सवाल भाजपा के स्थानीय नेताओं से है— जिस काम को सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों को खुद देखना चाहिए था, उसमें विपक्ष की एक महिला नेत्री को गरीब की आवाज क्यों बनना पड़ा? अगर किसी गरीब परिवार से वास्तव में अवैध रूप से पैसा मांगा गया था, तो सरकार के प्रतिनिधि कहां थे? भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे की भी परीक्षा भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है। लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि— क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ भाषणों तक है? क्या गरीब परिवार को अपने मृत परिजन के पोस्टमार्टम के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे? क्या सरकारी परिसर में कथित वसूली करने वालों को प्रशासन का डर नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल— अगर एक गरीब परिवार से ₹5 हजार मांगे जा सकते हैं, तो ऐसे कितने परिवार होंगे जो पैसे देकर चुपचाप लौट गए होंगे? इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा। सिर्फ पैसे वापस कराना काफी नहीं अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सिर्फ ₹5 हजार वापस करा देना इस मामले का अंत नहीं होना चाहिए। यह पता लगना चाहिए कि पैसे किसने मांगे, किसके कहने पर मांगे, क्या पहले भी किसी से ऐसी रकम ली गई और इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कौन करता है। क्योंकि मामला सिर्फ ₹5 हजार का नहीं है। मामला उस भरोसे का है जो जनता सरकारी व्यवस्था पर करती है। और भाजपा नेताओं से जनता का सवाल बिल्कुल साफ है— “जब आपकी सरकार है, आपके अधिकारी हैं और आपके जनप्रतिनिधि हैं, तो फिर गरीब की मजबूरी पर कथित वसूली का खेल आपकी नाक के नीचे कैसे चल रहा था?” अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष इस सवाल का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह जिम्मेदारी अधिकारियों के सिर डालकर राजनीतिक रूप से किनारा कर लिया जाएगा। नोट: ₹5 हजार मांगने और रकम वापस कराने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित अधिकारी/विभाग और अन्य पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
- Tick the good habits & Cross the bad habits. bachho ke liye asa tarika Q3: Tick the good habits & Cross the bad habits1
- कानपुर में अटेवा की तिरंगा यात्रा, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को मिला व्यापक समर्थन। ऑल टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (ATEWA) के आह्वान पर कानपुर नगर में पुरानी पेंशन (ओपीएस) की बहाली, कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और निजीकरण का विरोध करने के लिए एक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। यह आयोजन प्रदेश स्तर पर निर्धारित कार्यक्रम के तहत किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों एवं संगठनों के कर्मचारियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । *विभिन्न संगठनों का रहा साथ* यात्रा का नेतृत्व अटेवा के जिलाध्यक्ष नीरज तिवारी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न सहयोगी संगठन भी एकजुट हुए। रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के नेतृत्व में मोहित सचान (लेननपाल संघ), सुनील कत्रो (TSCT संघ), रमेश पाल (NMOPS के सहसंयोजक) और बलबीर सिंह यादव रहे। वहीं, सिंचाई विभाग से अटेवा संरक्षक शिवनारायण साहू, फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र पटेल, नर्सेस संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना पाण्डेय और आईटीआई, PWD, दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ, सेल टैक्स, उद्योग निदेशालय, सेवायोजन कार्यालय, उच्चतर, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक-कर्मचारी भी इस यात्रा में शामिल हुए । *प्रमुख मांगें और मार्ग* जी.एन.के. इण्टर कॉलेज से शुरू होकर यह यात्रा जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया । यात्रा के दौरान वक्ताओं ने पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी अनिवार्यता का विरोध और निजीकरण रोकने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया। *वक्ताओं ने भरा जोश* अटेवा जिलाध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि वर्षों से पुरानी पेंशन की मांग की जा रही है और यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो 25 सितंबर को लखनऊ में विशाल महारैली की जाएगी । महामंत्री सुनील बाजपेई ने टीईटी अनिवार्यता को अनुचित बताते हुए कहा कि यदि शिक्षकों के लिए यह अनिवार्य है तो सांसदों और विधायकों की भी योग्यता की जांच होनी चाहिए। मण्डलीय मंत्री डॉ. यतीन्द्र शर्मा ने निजीकरण को गरीब एवं मध्यम वर्ग के विरुद्ध 'अमीरों का षड्यंत्र' करार दिया। एनएमओपीएस डिफेंस के राष्ट्रीय सचिव रमेश पाल ने एनपीएस या यूपीएस को 'बिल्कुल स्वीकार नहीं' बताते हुए कहा कि यदि यह अच्छी है तो सरकार इसे स्वयं के सांसदों-मंत्रियों को दे। आदर्श माध्यमिक शिक्षक संघ के कुलदीप यादव ने सभी संगठनों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के राजेन्द्र पटेल ने पुरानी पेंशन को 'बुढ़ापे की लाठी' बताते हुए इसके लिए लोकतांत्रिक संघर्ष की चेतावनी दी ।2
- भाजपा सरकार में गरीब से ₹5 हजार? उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली ने खोली व्यवस्था की पोल । यूपी, उन्नाव। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे खूब किए जाते हैं। नेता मंचों से सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था की बातें करते हैं। लेकिन उन्नाव के जिला पोस्टमार्टम हाउस से सामने आया ₹5 हजार मांगने का कथित मामला अब इन्हीं दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आरोप है कि एक गरीब परिवार से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के नाम पर ₹5 हजार मांगे गए। सवाल सीधा है—अगर सरकारी व्यवस्था इतनी पारदर्शी है तो गरीब की मजबूरी देखकर पैसे मांगने की हिम्मत आखिर किसके भरोसे हुई? भाजपा नेताओं से सीधा सवाल—आपकी नाक के नीचे यह सब कैसे? उन्नाव में सत्ता पक्ष के नेता और जनप्रतिनिधि लगातार जनता के बीच विकास और सुशासन का दावा करते हैं। तो फिर सवाल है— सरकारी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस में कथित वसूली की शिकायतें सत्ता के जिम्मेदार लोगों तक क्यों नहीं पहुंचतीं? क्या भाजपा के स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी नहीं थी? अगर जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? और अगर शिकायत सामने आने के बाद मामला खुला, तो अब तक ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता यह जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण देने वाले भाजपा नेता अब इस मामले पर क्या बोलेंगे? एक महिला नेत्री ने आवाज उठाई, सत्ता पक्ष कहां था? सबसे चुभने वाला सवाल यही है। एक गरीब परिवार से कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत सामने आई तो समाजवादी पार्टी की नेत्री आंचल वर्मा ने मामले को उठाया, गरीब परिवार के साथ खड़ी हुईं और कथित रूप से पैसे मांगने वाले व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाई। मामला सामने आने के बाद रकम वापस कराने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई। अब सवाल भाजपा के स्थानीय नेताओं से है— जिस काम को सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों को खुद देखना चाहिए था, उसमें विपक्ष की एक महिला नेत्री को गरीब की आवाज क्यों बनना पड़ा? अगर किसी गरीब परिवार से वास्तव में अवैध रूप से पैसा मांगा गया था, तो सरकार के प्रतिनिधि कहां थे? भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे की भी परीक्षा भाजपा सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है। लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि— क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ भाषणों तक है? क्या गरीब परिवार को अपने मृत परिजन के पोस्टमार्टम के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे? क्या सरकारी परिसर में कथित वसूली करने वालों को प्रशासन का डर नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल— अगर एक गरीब परिवार से ₹5 हजार मांगे जा सकते हैं, तो ऐसे कितने परिवार होंगे जो पैसे देकर चुपचाप लौट गए होंगे? इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा। सिर्फ पैसे वापस कराना काफी नहीं अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सिर्फ ₹5 हजार वापस करा देना इस मामले का अंत नहीं होना चाहिए। यह पता लगना चाहिए कि पैसे किसने मांगे, किसके कहने पर मांगे, क्या पहले भी किसी से ऐसी रकम ली गई और इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कौन करता है। क्योंकि मामला सिर्फ ₹5 हजार का नहीं है। मामला उस भरोसे का है जो जनता सरकारी व्यवस्था पर करती है। और भाजपा नेताओं से जनता का सवाल बिल्कुल साफ है— “जब आपकी सरकार है, आपके अधिकारी हैं और आपके जनप्रतिनिधि हैं, तो फिर गरीब की मजबूरी पर कथित वसूली का खेल आपकी नाक के नीचे कैसे चल रहा था?” अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष इस सवाल का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह जिम्मेदारी अधिकारियों के सिर डालकर राजनीतिक रूप से किनारा कर लिया जाएगा। नोट: ₹5 हजार मांगने और रकम वापस कराने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित अधिकारी/विभाग और अन्य पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।1
- कानपुर ब्रेकिंग न्यूज सुसाइड नोट में बहन पर प्रताड़ना का आरोप, प्रॉपर्टी विवाद में युवक ने दी जान कानपुर ब्रेकिंग न्यूज सुसाइड नोट में बहन पर प्रताड़ना का आरोप, प्रॉपर्टी विवाद में युवक ने दी जान जिला रिपोर्टर अनूप कुमार निषाद कानपुर। चकेरी थाना क्षेत्र के कृष्णापुरम में प्रॉपर्टी विवाद के चलते आईटी सेक्टर में काम करने वाले रवि दीक्षित ने शुक्रवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि रवि ने कथित सुसाइड नोट में अपनी बहन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मृतक की पत्नी ज्योति दीक्षित के अनुसार, रवि की बड़ी बहन छवि मिश्रा पिछले काफी समय से प्रॉपर्टी, ज्वेलरी और खेती-बाड़ी में बंटवारे की मांग कर रही थीं। पत्नी का आरोप है कि इसी विवाद को लेकर रवि को करीब एक साल से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। ज्योति ने बताया कि शुक्रवार सुबह रवि ने घर के बाहर बने कमरे में फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची चकेरी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रवि आईटी सेक्टर में कार्यरत थे और वर्क फ्रॉम होम कर #news #kanpur #kanpurnews #kanpurpolice #HindiNews1
- नगर निगम कर्मचारियों के द्वारा बरसात के समय स्थानीय लोगों को नगर निगम के कर्मचारियों के द्वारा तोहफा दिया जाएगा जिसमें बरसात के समय जो रोड पर गड्ढे बने होते हैं उसने उसमें दुर्घटना होने पर जिम्मेदार कोई नहीं आखिर क्यों कानपुर ब्रेकिंग न्यूज़, बरसात के मौसम में सड़क पर रोड पर गलियों में जल निकासी न होने के कारण नगर निगम के कर्मचारियों की खुली पोल पार्षद मौन नमस्कार आप देख रहे हैं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ एवं समृद्धि भारत समाचार पत्र की रिपोर्ट जैसा कि आज दिनांक 21 अगस्त दिन शुक्रवार समय लगभग 1 बजकर 46 मिनट पर आपके कानपुर नगर थाना रामादेवी चौकी सांगवा स्थानीय लोगों के द्वारा और राहगीरो के द्वारा वार्ड 31 का क्षेत्र रोड पर बरसात का पानी भर जाने के कारण स्कूल जाने आने में बच्चों और बच्चों के संरक्षक और बुजुर्गों को हो रही है समस्या बरसात का पानी रोड पर भर जाने के कारण जल निकासी की सुविधा न होने के कारण खुली नगर निगम के कर्मचारियों की पोल यह कोई नई और आम बात नहीं है हर गली क्षेत्र में बरसात का पानी आपको भरा हुआ मिल जाएगा गर्मी का फुल इंजॉय लीजिए रोड पर स्विमिंग पूल की पूर्ण व्यवस्था किसी साथ अगर दुर्घटना हो जाती है या कोई समस्या आती है तो इसका जिम्मेदार कोई नहीं होगा क्योंकि बरसात में पानी रोड पर भर जाने के कारण रोड के ऊपर जो मैन होल के ढक्कन खुले रहते हैं सबको मैं बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं जिसका भुगतान पब्लिक को करना पड़ता है दुर्घटना होने पर बड़े-बड़े गड्ढे रोड पर पानी भर जाने का के कारण छुप जाते हैं इससे रोड पर चलने वाले आम जनमानस का हो जाती है समस्या घटनाएं इसका जिम्मेदार कौन होगा जैसा का जैसा की वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोड पर पानी भर जाने के कारण पैदल चलने वाले और क्षेत्र के लोगों को हो रही है स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर और सूत्रों के हवाले से वीडियो प्रकाशित करने पर समस्या का समाधान किया जाए कानपुर से वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ एवं समृद्धि भारत समाचार पत्र की रिपोर्ट न्यूज़ विज्ञापन खोया पाया के लिए संपर्क करें1
- सेंट्रल स्टेशन पर आरपीएफ की कार्रवाई, संदिग्ध अवस्था में घूम रहे 2 किन्नर गिरफ्तार। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आरपीएफ की कार्रवाई, संदिग्ध अवस्था में घूम रहे 2 किन्नर गिरफ्तार। प्लेटफॉर्म नंबर 6 और 7 पर गश्त के दौरान आरपीएफ टीम ने की कार्रवाई। पूछताछ करने पर यात्रियों के सामने हंगामा और न्यूसेंस करने का आरोप। आरपीएफ ने दोनों आरोपियों के खिलाफ रेलवे एक्ट की धारा 145/146 के तहत केस दर्ज कर जेल भेजा।1
- 49 रुपये में छात्राएं देखेंगी यूपी टी-20 का रोमांच, 28 अगस्त से ग्रीनपार्क में क्रिकेट का महासंग्राम,, कानपुर का ऐतिहासिक ग्रीनपार्क स्टेडियम एक बार फिर क्रिकेट के रोमांच से सराबोर होने जा रहा है। आगामी 28 अगस्त से 6 सितंबर तक यहां यूपी टी-20 लीग और प्लेऑफ मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा। लीग को लेकर शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में यूपी टी-20 लीग की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने तैयारियों और टिकटों की जानकारी साझा की। उन्होंने देशभर के क्रिकेट प्रेमियों से कानपुर पहुंचकर लीग के मुकाबलों का आनंद लेने का आह्वान किया। डॉ. संजय कपूर ने बताया कि 11 दिनों के दौरान ग्रीनपार्क में कुल 12 मुकाबले खेले जाएंगे। लीग का आगाज 28 अगस्त की शाम होगा। दर्शकों को अधिक से अधिक संख्या में स्टेडियम तक लाने के लिए टिकटों की दरें किफायती रखी गई हैं। खास बात यह है कि छात्राएं महज 49 रुपये में मैच का रोमांच देख सकेंगी। छात्राओं के लिए बी गर्ल स्टैंड के टिकट केवल ऑफलाइन उपलब्ध होंगे। वहीं अन्य स्टैंडों के टिकटों की कीमत भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। बी जनरल, सी स्टॉल और ई पब्लिक स्टैंड के टिकट 99 रुपये, सी बालकनी 149 रुपये, ए ग्राउंड पवेलियन और पवेलियन ग्राउंड 199 रुपये तथा डी चेयर के टिकट 249 रुपये में मिलेंगे। इसके अलावा न्यू प्लेयर्स पवेलियन सेकेंड फ्लोर, ए बालकनी, पवेलियन बालकनी और वीआईपी पवेलियन के टिकट 349 रुपये में उपलब्ध होंगे। ऑनलाइन टिकट बिक्री शुक्रवार शाम से डिस्ट्रिक्ट-जॉमेटो के माध्यम से शुरू की जाएगी। यूपी टी-20 लीग में क्रिकेट के साथ दर्शकों के मनोरंजन और उन्हें स्टेडियम से जोड़ने के लिए विशेष पुरस्कारों की भी व्यवस्था की गई है। लीग के दौरान प्रतिदिन करीब 100 पुरस्कार दिए जाएंगे। 'कैच ऑफ द मैच' के तहत छक्के की गेंद पकड़ने वाले दर्शक को 5100 रुपये का पुरस्कार मिलेगा। इसके अलावा सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे। फाइनल मुकाबले में मेगा लकी ड्रॉ आयोजित किया जाएगा, जिसमें टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे आकर्षक पुरस्कार जीतने का मौका दर्शकों को मिलेगा। हर मैच में 'फैन ऑफ द मैच' का पुरस्कार भी दिया जाएगा। विजेता प्रशंसक को उस मैच में जीतने वाली टीम के कप्तान के हस्ताक्षर वाली गेंद प्रदान की जाएगी। आयोजकों का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य दर्शकों के लिए क्रिकेट को केवल मुकाबले तक सीमित न रखते हुए उसे एक यादगार मनोरंजन अनुभव बनाना है। यूपीसीए के सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता ने बताया कि यूपी टी-20 लीग के मुकाबलों का प्रसारण 200 से अधिक देशों में किया जाएगा। लीग में क्रिकेट प्रेमियों को रिंकू सिंह, भुवनेश्वर कुमार, समीर रिजवी, आर्यन जुयाल और करन शर्मा समेत कई स्टार खिलाड़ियों को मैदान पर देखने का अवसर मिलेगा। डॉ. संजय कपूर ने कहा कि लीग का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक दर्शकों को ग्रीनपार्क तक लाना और उन्हें शानदार क्रिकेट के साथ मनोरंजन का बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है। उन्होंने देशभर के क्रिकेट प्रेमियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि 28 अगस्त से 6 सितंबर तक कानपुर के ग्रीनपार्क में उम्दा क्रिकेट का रोमांच देखने का यह शानदार अवसर है।2
- लखनऊ में सनसनीखेज वारदात! बैंक अधिकारी दिव्या की गोली मारकर हत्या पति ने बहन को भी मारी गोली, फिर खुदकुशी लखनऊ में बैंक अधिकारी हत्याकांड का खौफनाक खुलासा लखनऊ के गोमती नगर में ICICI बैंक की रिलेशनशिप मैनेजर दिव्या मिश्रा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वारदात को किसी अज्ञात बदमाश ने नहीं, बल्कि दिव्या के पति मानस वाजपेयी ने अंजाम दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानस बैंक के बाहर पहुंचा और दिव्या से बातचीत के दौरान उन पर गोलियां चला दीं। गंभीर हालत में दिव्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी वहां से निकल गया। इसके बाद मामला और भी खौफनाक हो गया। पुलिस के मुताबिक, मानस अपने घर पहुंचा और अपनी बहन को भी गोली मार दी। इसके बाद उसने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस तरह वारदात में तीन लोगों की मौत की बात सामने आई है। घटना से जुड़ा CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बैंक के बाहर हुई वारदात की तस्वीरें सामने आने की रिपोर्ट है। पुलिस अब हत्या के पीछे की पूरी वजह और घटनाक्रम की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद और तलाक से जुड़ा मामला चल रहा था। हालांकि हत्या की वास्तविक वजह को लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है।1