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- *करैरा में पटवारी–राजस्व निरीक्षक पर गंभीर आरोप, सर्वे नंबर 1898–1899 में फर्जी हेराफेरी का मामला उजागर* *संवाददाता*हेमंत भार्गव** करैरा जनसुनवाई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें करैरा तहसील में पदस्थ पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में करैरा निवासी पंकज पाठक द्वारा अनुविभागीय अधिकारी करैरा को लिखित आवेदन देकर सर्वे नंबर 1898 व 1899 में कथित फर्जी हेराफेरी की शिकायत की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि करैरा तहसील के अंतर्गत स्थित आराजी सर्वे नंबर 1898 के नामांतरण के दौरान नियमों की अनदेखी कर सर्वे नंबर 1899 का लाभ गलत तरीके से कुछ व्यक्तियों को पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा कार्य पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक की मिलीभगत से किया गया है, जिससे सरकारी अभिलेखों में गंभीर गड़बड़ी हुई है।शिकायत में यह भी बताया गया है कि जब तक संबंधित पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक करैरा तहसील में पदस्थ रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इसलिए दोनों अधिकारियों को करैरा से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग की गई है, ताकि मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हो सके मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने बताया कि नवीन अनुविभागीय कार्यालय के पास स्थित लगभग 19 बीघा शासकीय भूमि, जिसका आज दिनांक तक विधिवत नामांतरण नहीं हुआ है, उस पर भी जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना बाद में हटाया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।आवेदन में यह भी कहा गया है कि एक ही दिन में बिना मौके की वास्तविक जांच के कार्रवाई दर्शाई गई, जबकि मौके पर कोई स्पष्ट परिवर्तन या पहाड़ हटाने जैसी स्थिति नहीं पाई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक को पहले से थी, इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया सबसे गंभीर आरोप यह है कि सर्वे नंबर 1898 में कहीं भी पटवारी के रिश्तेदारों के नाम दर्ज नहीं हैं, इसके बावजूद अभिलेखों में हेरफेर कर लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। इससे यह संदेह और गहरा जाता है कि मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित अनियमितता का है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सर्वे नंबर 1898 एवं 1899 की संपूर्ण जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं यह मामला सामने आने के बाद करैरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।3
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- *करैरा में शराब ठेकेदार की मनमानी चरम पर* *₹75 का क्वार्टर ₹90 में बिक रहा, आबकारी नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां* करैरा : मध्य प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित शराब बिक्री दरों और समय-सीमा की करैरा में खुलेआम अनदेखी की जा रही है यहां शराब ठेकेदार शासन से ऊपर अपने नियम लागू करता नजर आ रहा है हालात यह हैं कि शासन द्वारा ₹75 निर्धारित मूल्य वाले ‘सफेद शराब’ के क्वार्टर को ₹90 में बेचा जा रहा है, जब क्वार्टर पर भी स्पष्ट रूप से अधिकतम विक्रय मूल्य ₹75 अंकित है यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से ओवररेट में शराब बिक्री का खेल चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग और प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए है *ग्राहक बोला –रेट नहीं, सेठ का हुक्म चलता है* आज सुबह एक ग्राहक शराब दुकान से सफेद शराब का क्वार्टर लेकर बाहर आया जब उससे खरीदी कीमत पूछी गई तो उसने बताया कि उसे ₹90 में क्वार्टर दिया गया जब उसे बताया गया कि शासन द्वारा इसकी कीमत ₹75 तय है और क्वार्टर पर भी यही लिखा है, तो ग्राहक ने जो बताया वह और भी गंभीर है ग्राहक के अनुसार, जब वह ठेके पर बैठे सेल्समैन से रेट को लेकर सवाल करता है तो जवाब मिलता है रेट हमारा सेठ तय करता है, सरकार नहीं लेना है तो लो, नहीं तो जाओ इतना ही नहीं, कई बार ग्राहकों को धमकाया भी जाता है *सुबह 5 बजे से शराब की सप्लाई, गांव-गांव कमीशन की दुकानें* नियमों के मुताबिक शराब दुकान खोलने और बंद करने का समय शासन द्वारा तय है, लेकिन करैरा में ठेकेदार की मर्जी ही कानून बन गई है सुबह 5 बजे से चार पहिया वाहनों में शराब भरकर क्षेत्र में सप्लाई की जाती है ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी भयावह है ऐसा कोई गांव नहीं बचा जहां कमीशन पर अवैध शराब बिक्री केंद्र न खुलवाया गया हो *प्रशासन की चुप्पी पर सवाल* सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता या फिर सब कुछ दिखने के बावजूद अनदेखा किया जा रहा है *खरीद कर जांच क्यों नहीं करता आबकारी विभाग* यदि प्रशासन वास्तव में सच्चाई जानना चाहता है तो उसे चाहिए कि शराब दुकानों पर गोपनीय खरीदी (डमी कस्टमर) कराई जाए रेट, समय और सप्लाई चेन की जमीनी जांच की जाए दोषी ठेकेदार व सेल्समैन पर कड़ी कार्रवाई हो *जनता का सवाल – कानून किसके लिए* अब जनता पूछ रही है कि क्या करैरा में मध्य प्रदेश शासन के नियम लागू नहीं होते या फिर शराब ठेकेदार ही यहां की सरकार है.!!1