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हरैया नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसा, युवक की दर्दनाक मौत एक गंभीर रूप से घायल, क्षेत्र में मचा हड़कंप बस्ती जनपद के हरैया नेशनल हाईवे पर सोमवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर आगे चल रही पिकअप वाहन के पीछे जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक काफी तेज गति में थी, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और सीधे पिकअप के पीछे जा टकराया। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है तथा मृतक और घायल युवक की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है।

2 hrs ago
user_आनंद धर द्विवेदी
आनंद धर द्विवेदी
Court reporter हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago
9d4045e3-6abe-4739-ad24-dd092e7d4856

हरैया नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसा, युवक की दर्दनाक मौत एक गंभीर रूप से घायल, क्षेत्र में मचा हड़कंप बस्ती जनपद के हरैया नेशनल हाईवे पर सोमवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर आगे चल रही पिकअप वाहन के पीछे जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। वहीं मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक काफी तेज गति में थी, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और सीधे पिकअप के पीछे जा टकराया। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है तथा मृतक और घायल युवक की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • बस्ती जिले के हर्रैया में सुनील शुक्ला की माता के घर रात 1 बजे पुलिस ने दबिश दी। नोटिस के नाम पर हुई इस कार्रवाई को लेकर सुनील शुक्ला ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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    बस्ती जिले के हर्रैया में सुनील शुक्ला की माता के घर रात 1 बजे पुलिस ने दबिश दी। नोटिस के नाम पर हुई इस कार्रवाई को लेकर सुनील शुक्ला ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
    user_Shivaji Sonkar
    Shivaji Sonkar
    Social Media Manager हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • बस्ती के रूधौली में बीआरसी एकेडमी ने रोबोटिक्स प्रदर्शनी का आयोजन किया। छात्रों ने ब्लाइंड स्टिक, स्मार्ट ट्रैफिक लाइट जैसे कई अभिनव प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना है।
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    बस्ती के रूधौली में बीआरसी एकेडमी ने रोबोटिक्स प्रदर्शनी का आयोजन किया। छात्रों ने ब्लाइंड स्टिक, स्मार्ट ट्रैफिक लाइट जैसे कई अभिनव प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना है।
    user_आनंद धर द्विवेदी
    आनंद धर द्विवेदी
    Court reporter हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! अजीत मिश्रा (खोजी) खाकी और खादी के संरक्षण में 'हरा शिकार', लालगंज में कानून को ठेंगा दिखा रहे वन माफिया! ​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश लालगंज में बेखौफ कुल्हाड़ी: खाकी और खादी के संरक्षण में फल-फूल रहे वन माफिया, कौन है इनका आका? क्या विभाग की 'सेटिंग' से कट रहे हैं हरे पेड़? सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार? कागजों पर पौधारोपण, जमीन पर उजाड़ रहे बाग; आखिर माफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक है प्रशासन? पसड़ा गांव में सरेआम कटा आम का पेड़; डीएम साहब! इन बेखौफ लकड़कट्टों पर कब कसेगा कानूनी शिकंजा? लालगंज में हरियाली का विनाश, ग्रामीणों में उबाल, कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात! बेखौफ माफिया, लाचार प्रशासन और कटती हरियाली; पसड़ा गांव से ग्राउंड रिपोर्ट। लालगंज में माफियाओं का तांडव, सरेआम काटा हरा पेड़, मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज। बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! वाह रे प्रशासन! माफिया काट ले गए हरा पेड़ और जिम्मेदार कर्मचारी अब तक देख रहे हैं 'मुहूर्त'। ​बस्ती। एक तरफ सरकार 'हरिशंकरी' और 'अमृत वन' के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर पौधारोपण का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का पसड़ा गांव वन माफियाओं की क्रूरता का गवाह बन रहा है। यहाँ माफियाओं की कुल्हाड़ी सिर्फ पेड़ पर नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के 'ग्रीन यूपी' के सपनों पर चल रही है। ​दिनदहाड़े 'हरियाली का कत्ल', जिम्मेदार बने तमाशबीन ​पसड़ा गांव में माफियाओं ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए सरेआम हरे आम के पेड़ पर आरा चला दिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह कत्लेआम किसी अंधेरी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे हुआ। बिना किसी विभागीय अनुमति के फलदार पेड़ों को काट दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के कारिंदों ने अपनी आँखें बेच दी हैं या फिर माफियाओं के नोटों की खनक ने उनकी ज़मीर को खामोश कर दिया है? ​सत्ता की हनक या विभाग की मिलीभगत? ​सूचना मिलने के घंटों बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी का मौके पर न पहुंचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर ये कौन से 'सफेदपोश' हैं जिनके संरक्षण में ये माफिया इतने बेखौफ हैं? ​क्या विभाग की मिलीभगत से हो रहा है हरियाली का विनाश? ​आखिर क्यों इन लकड़कट्टों पर नहीं कसा जा रहा कानूनी शिकंजा? ​ग्रामीणों का आक्रोश: "कागजों पर हरियाली, जमीन पर खाली" ​प्रशासन की इस लचर कार्यशैली से पसड़ा गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी को अपनी सूखी लकड़ी काटने के लिए भी सौ चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं माफिया बेधड़क होकर हरे बाग उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ​DM साहब! अब तो फाइल छोड़िए, संज्ञान लीजिए! ​बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से जनता यह पूछ रही है कि क्या इन माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा? क्या ये माफिया सलाखों के पीछे जाएंगे, या फिर एक और 'जांच' का कोरम पूरा करके फाइल दबा दी जाएगी? ​निष्कर्ष: अगर समय रहते इन वन माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्ती मंडल की पहचान सिर्फ 'सूखे जंगलों' के रूप में होगी। दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी समय की मांग है। ​बस्ती की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं!
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    बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग!
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी और खादी के संरक्षण में 'हरा शिकार', लालगंज में कानून को ठेंगा दिखा रहे वन माफिया!
​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
लालगंज में बेखौफ कुल्हाड़ी: खाकी और खादी के संरक्षण में फल-फूल रहे वन माफिया, कौन है इनका आका?
क्या विभाग की 'सेटिंग' से कट रहे हैं हरे पेड़? सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार? कागजों पर पौधारोपण, जमीन पर उजाड़ रहे बाग; आखिर माफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक है प्रशासन?
पसड़ा गांव में सरेआम कटा आम का पेड़; डीएम साहब! इन बेखौफ लकड़कट्टों पर कब कसेगा कानूनी शिकंजा? लालगंज में हरियाली का विनाश, ग्रामीणों में उबाल, कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात!
बेखौफ माफिया, लाचार प्रशासन और कटती हरियाली; पसड़ा गांव से ग्राउंड रिपोर्ट। लालगंज में माफियाओं का तांडव, सरेआम काटा हरा पेड़, मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज।
बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! वाह रे प्रशासन! माफिया काट ले गए हरा पेड़ और जिम्मेदार कर्मचारी अब तक देख रहे हैं 'मुहूर्त'।
​बस्ती। एक तरफ सरकार 'हरिशंकरी' और 'अमृत वन' के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर पौधारोपण का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का पसड़ा गांव वन माफियाओं की क्रूरता का गवाह बन रहा है। यहाँ माफियाओं की कुल्हाड़ी सिर्फ पेड़ पर नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के 'ग्रीन यूपी' के सपनों पर चल रही है।
​दिनदहाड़े 'हरियाली का कत्ल', जिम्मेदार बने तमाशबीन
​पसड़ा गांव में माफियाओं ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए सरेआम हरे आम के पेड़ पर आरा चला दिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह कत्लेआम किसी अंधेरी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे हुआ। बिना किसी विभागीय अनुमति के फलदार पेड़ों को काट दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के कारिंदों ने अपनी आँखें बेच दी हैं या फिर माफियाओं के नोटों की खनक ने उनकी ज़मीर को खामोश कर दिया है?
​सत्ता की हनक या विभाग की मिलीभगत?
​सूचना मिलने के घंटों बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी का मौके पर न पहुंचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर ये कौन से 'सफेदपोश' हैं जिनके संरक्षण में ये माफिया इतने बेखौफ हैं?
​क्या विभाग की मिलीभगत से हो रहा है हरियाली का विनाश?
​आखिर क्यों इन लकड़कट्टों पर नहीं कसा जा रहा कानूनी शिकंजा?
​ग्रामीणों का आक्रोश: "कागजों पर हरियाली, जमीन पर खाली"
​प्रशासन की इस लचर कार्यशैली से पसड़ा गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी को अपनी सूखी लकड़ी काटने के लिए भी सौ चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं माफिया बेधड़क होकर हरे बाग उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​DM साहब! अब तो फाइल छोड़िए, संज्ञान लीजिए!
​बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से जनता यह पूछ रही है कि क्या इन माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा? क्या ये माफिया सलाखों के पीछे जाएंगे, या फिर एक और 'जांच' का कोरम पूरा करके फाइल दबा दी जाएगी?
​निष्कर्ष: अगर समय रहते इन वन माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्ती मंडल की पहचान सिर्फ 'सूखे जंगलों' के रूप में होगी। दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी समय की मांग है।
​बस्ती की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं!
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    28 min ago
  • थाना अखण्डनगर, जनपद सुल्तानपुर क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। सरैया मुबारकपुर निवासी दो सगे भाई, अनिल व प्रदीप, ऑटो के पास खड़े थे, तभी एक अज्ञात बोलेरो ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई घटना के बाद पुलिस ने शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा विधिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं, आरोपी बोलेरो वाहन की तलाश जारी है, उक्त घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी कादीपुर विनय गौतम ने बताया कि पुलिस टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही आरोपी वाहन को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ब्यूरो रिपोर्ट
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    थाना अखण्डनगर, जनपद सुल्तानपुर क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। 
सरैया मुबारकपुर निवासी दो सगे भाई, अनिल व प्रदीप, ऑटो के पास खड़े थे, तभी एक अज्ञात बोलेरो ने उन्हें टक्कर मार दी। 
हादसे में दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई घटना के बाद पुलिस ने शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा विधिक कार्रवाई की जा रही है। 
वहीं, आरोपी बोलेरो वाहन की तलाश जारी है, उक्त घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी कादीपुर विनय गौतम ने बताया कि पुलिस टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही आरोपी वाहन को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी 
ब्यूरो रिपोर्ट
    user_Sarveshpandey
    Sarveshpandey
    Faizabad, Ayodhya•
    2 hrs ago
  • All world my best faimly its you envroment save and grow more one tree save great work Grean city grean life Save earth Save life save invriement ,,, ।।। reporting,,Lal Chand So ।।। aaj subah times ।।आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करें और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकारों से कंट्स कंधा मिलाकर पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। ।। Aaj subah times।। ।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,, All world my best faimly its you envroment save and grow more one tree save great work Grean city grean life Save earth Save life save invriement ,,, ।।। reporting,,Lal Chand So ।।। aaj subah times ।।आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करें और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकारों से कंट्स कंधा मिलाकर पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। ।। Aaj subah times।। ।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,,
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    All world my best faimly its you envroment save and grow more one tree save great work Grean city grean life Save earth Save life save invriement ,,,
।।। reporting,,Lal Chand So
।।। aaj subah times ।।आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करें और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकारों से कंट्स कंधा मिलाकर पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए।
।। Aaj subah times।।
।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,,
All world my best faimly its you envroment save and grow more one tree save great work Grean city grean life Save earth Save life save invriement ,,,
।।। reporting,,Lal Chand So
।।। aaj subah times ।।आओ हम सब मिलकर अपने देश को स्वच्छ सुंदर बनाए पर्यावरण संरक्षण करें जीवन अनमोल बने सभी का ख्याल करें और शुद्ध हवाओं के साथ योग करें और पर्यावरण स्वच्छ सुंदर बनाएं भारत सरकार राज्यों की सरकारों से कंट्स कंधा मिलाकर पेड़ पौधे लगाने के लिए एनवायरनमेंट सेव करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए।
।। Aaj subah times।।
।। रिपोर्टिंग Lal Chand Soni,,
    user_Aaj Subah Times
    Aaj Subah Times
    पत्रकार Ayodhya, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • मंदिर जीर्णोद्धार का उठाया जिम्मा चंदा मांगकर बनेगा मौदिर अयोध्या एक मंदिर का जीर्णोद्धार होना है जिसकी जिम्मेदारी जय मां फाउण्डेशन ट्रस्ट ने उठायी है और लोगों से सहयोग की अपील की है
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    मंदिर जीर्णोद्धार का उठाया जिम्मा चंदा मांगकर बनेगा मौदिर
अयोध्या एक मंदिर का जीर्णोद्धार होना है जिसकी जिम्मेदारी जय मां फाउण्डेशन ट्रस्ट ने उठायी है और लोगों से सहयोग की अपील की है
    user_राहुल जायसवाल रिपोर्टर
    राहुल जायसवाल रिपोर्टर
    Local News Reporter फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अयोध्या जिले में ब्लाक बीकापुर अंतर्गत गांवसभा खजुराहट में 1करोड़ 41लाख रुपए की लागत से बनने वाले जिले में पहले उत्सव भवन का बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान द्वारा पूजा पाठ कर आधार शिला रखी गई कार्यक्रम के बारे में विधायक बीकापुर अमित सिंह चौहान द्वारा मीडिया को जानकारी देते हुए बताया गया।
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    अयोध्या जिले में ब्लाक बीकापुर अंतर्गत गांवसभा खजुराहट में 1करोड़ 41लाख रुपए की लागत से बनने वाले जिले में पहले उत्सव भवन का बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान द्वारा पूजा पाठ कर आधार शिला रखी गई कार्यक्रम के बारे में विधायक बीकापुर अमित सिंह चौहान द्वारा मीडिया को जानकारी देते हुए बताया गया।
    user_हलचल अयोध्या समाचार
    हलचल अयोध्या समाचार
    Actor फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज अजीत मिश्रा (खोजी) अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है। नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल' पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है। डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट? हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया? ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा? SARFAESI एक्ट की धज्जियां नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। जनता पूछ रही है सवाल: क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया? 18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है? जांच की मांग तेज अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
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    बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज
अजीत मिश्रा (खोजी)
अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है।
नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल'
पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है।
डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट?
हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया?
ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता
बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा?
SARFAESI एक्ट की धज्जियां
नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया।
जनता पूछ रही है सवाल:
क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया?
18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है?
जांच की मांग तेज
अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी।
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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