Shuru
Apke Nagar Ki App…
नोटिस के नाम पर रात्रि 1:00 बजे 6-7 पुलिस कर्मियों के द्वारा दबिश डाल कर मेरी माता जी को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है l सुनील शुक्ला प्रशासन के ऊपर काफी बड़ा सवाल
Shivaji Sonkar
नोटिस के नाम पर रात्रि 1:00 बजे 6-7 पुलिस कर्मियों के द्वारा दबिश डाल कर मेरी माता जी को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है l सुनील शुक्ला प्रशासन के ऊपर काफी बड़ा सवाल
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- नोटिस के नाम पर रात्रि 1:00 बजे 6-7 पुलिस कर्मियों के द्वारा दबिश डाल कर मेरी माता जी को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है l सुनील शुक्ला प्रशासन के ऊपर काफी बड़ा सवाल1
- बस्ती के रूधौली में बीआरसी एकेडमी ने रोबोटिक्स प्रदर्शनी का आयोजन किया। छात्रों ने ब्लाइंड स्टिक, स्मार्ट ट्रैफिक लाइट जैसे कई अभिनव प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना है।4
- Pramod Kumar Goswami. 10/05/20261
- सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ में खनन माफिया खुलेआम अवैध मिट्टी खनन कर रहे हैं, जिससे किसानों की जमीनें बर्बाद हो रही हैं। दिन-रात धड़ल्ले से चल रहे इस खेल पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।2
- विरोध प्रदर्शन को लेकर उठे सवाल, महिलाओं की मौजूदगी पर चर्चा समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, (#अयोध्या) जब प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं को कार्यक्रम के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी ही नहीं थी। जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में बड़ी संख्या में महिलाओं को एकत्र किया गया था। इस दौरान कुछ महिला कार्यकर्ताओं से बातचीत में सामने आया कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं था कि वे किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं। जब उनसे उनके विधायक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नीलम गुप्ता का नाम लिया। वहीं प्रदर्शन में शामिल होने के उद्देश्य पर उन्होंने “दफ्तर देखने” जैसी बातें कही साथ ही साथ तख्तियों पर लिखे नारों की जानकारी भी कई महिलाओं को नहीं थी। हालांकि, इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने अभी तक नहीं आई है। वही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम संगठनों की तैयारियों और जमीनी स्तर की समझ को लेकर सवाल खड़े करते हैं। ब्यूरो रिपोर्ट1
- जनपद अयोध्या में आयोजित हुआ वृहद लोक अदालत। अयोध्या। वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। माॅं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के समय अपर जिला जज/नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रतिभा नारायण, इन्द्रजीत सिंह, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0) पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय, महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या प्रिया सक्सेना द्वारा अपने उद्बोधन में कथन किया गया कि लोक अदालत की मूल भावना शोषितों वंचितों को न्याय सुलभ कराने की है जो श्री रामचरित मानस की इस चैपाई ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को आत्मसात ् करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। उन्होंनें आगे बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये। दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 121980954 रू0 है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है। पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833ध्- रू0 सेटेलमेंट किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।3
- अयोध्या खजुरहट उत्सव भवन शिलान्यास से ही पैसे बचाने का खेल शुरू अयोध्या खजुरहट में हुआ उत्सव भवन शिलान्यास किया गया भाजपा विधायक बीकापुर अमित सिंह चौहान द्वारा। शिलान्यास पत्थर कुर्सी के सहारे खड़ा किया ,और सैकड़ों लोगों कार्यक्रम में उपस्थित रहे जिनके बैठने व्यवस्था में भी कमी दिखाई और साउंड सर्विस व्यवस्था भी टांय-टांय फिस हो गयी ।1
- बस्ती के कलवारी थाना क्षेत्र में अवैध खनन जोरों पर है, जिससे योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और खनन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उपजाऊ खेत गड्ढों में बदल रहे हैं, राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है और सड़कों पर मौत दौड़ रही है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।2