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जनपद अयोध्या में आयोजित हुआ वृहद लोक अदालत। अयोध्या। वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। माॅं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के समय अपर जिला जज/नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रतिभा नारायण, इन्द्रजीत सिंह, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0) पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय, महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या प्रिया सक्सेना द्वारा अपने उद्बोधन में कथन किया गया कि लोक अदालत की मूल भावना शोषितों वंचितों को न्याय सुलभ कराने की है जो श्री रामचरित मानस की इस चैपाई ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को आत्मसात ् करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। उन्होंनें आगे बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये। दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 121980954 रू0 है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है। पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833ध्- रू0 सेटेलमेंट किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।

2 hrs ago
user_अयोध्या वार्ता
अयोध्या वार्ता
Photographer फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago
2b7f389f-277b-4aed-9834-57073900fe1b

जनपद अयोध्या में आयोजित हुआ वृहद लोक अदालत। अयोध्या। वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। माॅं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के समय अपर जिला जज/नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रतिभा नारायण, इन्द्रजीत सिंह, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0) पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय, महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक

परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या प्रिया सक्सेना द्वारा अपने उद्बोधन में कथन किया गया कि लोक अदालत की मूल भावना शोषितों वंचितों को न्याय सुलभ कराने की है जो श्री रामचरित मानस की इस चैपाई ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को आत्मसात ् करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त

कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। उन्होंनें आगे बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये। दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 121980954 रू0 है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है। पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833ध्- रू0 सेटेलमेंट किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।

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  • अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में दो अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज की और आरोपियों को हिरासत में लिया।
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    अयोध्या के पूराकलंदर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में दो अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज की और आरोपियों को हिरासत में लिया।
    user_अयोध्या वार्ता
    अयोध्या वार्ता
    Photographer फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • विरोध प्रदर्शन को लेकर उठे सवाल, महिलाओं की मौजूदगी पर चर्चा समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, (#अयोध्या) जब प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं को कार्यक्रम के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी ही नहीं थी। जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में बड़ी संख्या में महिलाओं को एकत्र किया गया था। इस दौरान कुछ महिला कार्यकर्ताओं से बातचीत में सामने आया कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं था कि वे किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं। जब उनसे उनके विधायक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नीलम गुप्ता का नाम लिया। वहीं प्रदर्शन में शामिल होने के उद्देश्य पर उन्होंने “दफ्तर देखने” जैसी बातें कही साथ ही साथ तख्तियों पर लिखे नारों की जानकारी भी कई महिलाओं को नहीं थी। हालांकि, इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने अभी तक नहीं आई है। वही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम संगठनों की तैयारियों और जमीनी स्तर की समझ को लेकर सवाल खड़े करते हैं। ब्यूरो रिपोर्ट
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    विरोध प्रदर्शन को लेकर उठे सवाल, महिलाओं की मौजूदगी पर चर्चा
समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, 
(#अयोध्या) 
जब प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं को कार्यक्रम के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी ही नहीं थी।
जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में बड़ी संख्या में महिलाओं को एकत्र किया गया था। 
इस दौरान कुछ महिला कार्यकर्ताओं से बातचीत में सामने आया कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं था कि वे किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं।
जब उनसे उनके विधायक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नीलम गुप्ता का नाम लिया। 
वहीं प्रदर्शन में शामिल होने के उद्देश्य पर उन्होंने “दफ्तर देखने” जैसी बातें कही साथ ही साथ तख्तियों पर लिखे नारों की जानकारी भी कई महिलाओं को नहीं थी।
हालांकि, इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने अभी तक नहीं आई है। 
वही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम संगठनों की तैयारियों और जमीनी स्तर की समझ को लेकर सवाल खड़े करते हैं। 
ब्यूरो रिपोर्ट
    user_Sarveshpandey
    Sarveshpandey
    Faizabad, Ayodhya•
    1 hr ago
  • अयोध्या खजुरहट उत्सव भवन शिलान्यास से ही पैसे बचाने का खेल शुरू अयोध्या खजुरहट में हुआ उत्सव भवन शिलान्यास किया गया भाजपा विधायक बीकापुर अमित सिंह चौहान द्वारा। शिलान्यास पत्थर कुर्सी के सहारे खड़ा किया ,और सैकड़ों लोगों कार्यक्रम में उपस्थित रहे जिनके बैठने व्यवस्था में भी कमी दिखाई और साउंड सर्विस व्यवस्था भी टांय-टांय फिस हो गयी ।
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    अयोध्या खजुरहट उत्सव भवन शिलान्यास से ही पैसे बचाने का खेल शुरू 
अयोध्या खजुरहट में हुआ उत्सव भवन शिलान्यास किया गया भाजपा विधायक बीकापुर अमित सिंह चौहान द्वारा। शिलान्यास पत्थर कुर्सी के सहारे खड़ा किया ,और सैकड़ों लोगों कार्यक्रम में उपस्थित रहे जिनके बैठने व्यवस्था में भी कमी दिखाई और साउंड सर्विस व्यवस्था भी टांय-टांय फिस हो गयी ।
    user_राहुल जायसवाल रिपोर्टर
    राहुल जायसवाल रिपोर्टर
    Local News Reporter फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़। लूट के आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में हुई फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों को लूट के जेवर और अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया; वे बिजलीकर्मी बनकर घर में घुसे और बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर लूटपाट की थी।
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    उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़। लूट के आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में हुई फायरिंग में एक बदमाश के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों को लूट के जेवर और अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया; वे बिजलीकर्मी बनकर घर में घुसे और बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर लूटपाट की थी।
    user_Awadh Speed news
    Awadh Speed news
    Faizabad, Ayodhya•
    6 hrs ago
  • अयोध्या सिविल कोर्ट परिसर में जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया। इसमें कुल 85,350 वादों का निस्तारण किया गया और 12 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की समझौता राशि तय हुई। विशेष रूप से, परिवार न्यायालय की पहल पर 12 बिछड़े जोड़े फिर एक साथ घर बसाने को तैयार हुए।
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    अयोध्या सिविल कोर्ट परिसर में जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया। इसमें कुल 85,350 वादों का निस्तारण किया गया और 12 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की समझौता राशि तय हुई। विशेष रूप से, परिवार न्यायालय की पहल पर 12 बिछड़े जोड़े फिर एक साथ घर बसाने को तैयार हुए।
    user_हलचल अयोध्या समाचार
    हलचल अयोध्या समाचार
    Actor फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • भारत में 2026-27 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें सभी देशवासियों से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की जा रही है। यह हर दस साल में एक बार होने वाली प्रक्रिया देश के संसाधनों को मजबूत बनाने और सटीक जानकारी इकट्ठा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारी कर्मचारियों को सही सूचना देकर देश के भविष्य को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
    1
    भारत में 2026-27 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें सभी देशवासियों से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की जा रही है। यह हर दस साल में एक बार होने वाली प्रक्रिया देश के संसाधनों को मजबूत बनाने और सटीक जानकारी इकट्ठा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारी कर्मचारियों को सही सूचना देकर देश के भविष्य को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
    user_Aaj Subah Times
    Aaj Subah Times
    पत्रकार Ayodhya, Uttar Pradesh•
    9 hrs ago
  • “महिला आरक्षण का विरोध पड़ा भारी!” अवधेश प्रसाद के आवास पर फूटा महिलाओं का गुस्सा, ‘मुर्दाबाद’ के नारों से दहला सहादतगंज नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सड़कों पर उतरीं महिलाएं, सांसद आवास का घेराव कर किया उग्र प्रदर्शन अयोध्या। महिला आरक्षण को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब खुलकर सड़क पर उतर आई है। केंद्र सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के विरोध में समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के कथित रुख के खिलाफ रविवार को महिलाओं का गुस्सा विस्फोट बनकर फूट पड़ा। अयोध्या शहर के सहादतगंज स्थित सांसद आवास के बाहर सैकड़ों महिलाओं ने जोरदार घेराव कर प्रदर्शन किया और सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन इतना उग्र था कि पूरा सहादतगंज क्षेत्र “अवधेश प्रसाद मुर्दाबाद”, “महिला विरोधी सोच नहीं चलेगी”, “33 प्रतिशत आरक्षण हमारा अधिकार” और “नारी शक्ति का अपमान बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा। महिलाओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर महिला आरक्षण के समर्थन में तीखे संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप था कि महिला आरक्षण का विरोध कर महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन का नेतृत्व नारी शक्ति वंदन अभियान के जिला संयोजक एवं जिला उपाध्यक्ष अखण्ड सिंह डिम्पल के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और यह आंदोलन महिलाओं के सम्मान एवं राजनीतिक अधिकारों की निर्णायक लड़ाई है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं डॉ. अंजू पांडेय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक हिस्सेदारी देने वाले ऐतिहासिक कानून का विरोध करना महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से जिन नेताओं की राजनीति खतरे में पड़ रही है, वही लोग महिला आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब महिलाएं चुप बैठने वाली नहीं हैं और विरोध करने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब दिया जाएगा। घेराव के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि सांसद अवधेश प्रसाद ने सहादतगंज स्थित आवास का गेट अंदर से बंद करा लिया और महिलाओं से मिलने तक बाहर नहीं आए। इससे नाराज महिलाओं का आक्रोश और भड़क उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जनता के वोट से संसद पहुंचने वाले नेता अब महिलाओं के सवालों से डरकर दरवाजे बंद कर रहे हैं। महिलाओं ने सांसद पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। सुमन पासवान ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और हिस्सेदारी की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर महिलाओं का यह जनाक्रोश आने वाले समय में और बड़ा आंदोलन बन सकता है। मीडिया प्रभारी सुशील मिश्रा ने आरोप लगाया कि जो नेता महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का विरोध करेंगे, उन्हें जनता के बीच जाकर जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करने को तैयार हैं। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को शांत कराने और स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया,लेकिन महिलाएं लंबे समय तक सांसद आवास के बाहर डटी रहीं। प्रदर्शन में सरोज मिश्रा, सुमन पासवान,बिनीता मोदनवाल,माधुरी सिंह, नीलम गुप्ता,ममता सिंह, संगीता मिश्रा,रानी सिंह,उषा चौहान और सीमा यादव सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
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    “महिला आरक्षण का विरोध पड़ा भारी!” अवधेश प्रसाद के आवास पर फूटा महिलाओं का गुस्सा, ‘मुर्दाबाद’ के नारों से दहला सहादतगंज
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सड़कों पर उतरीं महिलाएं, सांसद आवास का घेराव कर किया उग्र प्रदर्शन
अयोध्या। महिला आरक्षण को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब खुलकर सड़क पर उतर आई है। केंद्र सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के विरोध में समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के कथित रुख के खिलाफ रविवार को महिलाओं का गुस्सा विस्फोट बनकर फूट पड़ा। अयोध्या शहर के सहादतगंज स्थित सांसद आवास के बाहर सैकड़ों महिलाओं ने जोरदार घेराव कर प्रदर्शन किया और सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन इतना उग्र था कि पूरा सहादतगंज क्षेत्र “अवधेश प्रसाद मुर्दाबाद”, “महिला विरोधी सोच नहीं चलेगी”, “33 प्रतिशत आरक्षण हमारा अधिकार” और “नारी शक्ति का अपमान बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा। महिलाओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर महिला आरक्षण के समर्थन में तीखे संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप था कि महिला आरक्षण का विरोध कर महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शन का नेतृत्व नारी शक्ति वंदन अभियान के जिला संयोजक एवं जिला उपाध्यक्ष अखण्ड सिंह डिम्पल के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और यह आंदोलन महिलाओं के सम्मान एवं राजनीतिक अधिकारों की निर्णायक लड़ाई है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं डॉ. अंजू पांडेय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक हिस्सेदारी देने वाले ऐतिहासिक कानून का विरोध करना महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से जिन नेताओं की राजनीति खतरे में पड़ रही है, वही लोग महिला आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब महिलाएं चुप बैठने वाली नहीं हैं और विरोध करने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब दिया जाएगा।
घेराव के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि सांसद अवधेश प्रसाद ने सहादतगंज स्थित आवास का गेट अंदर से बंद करा लिया और महिलाओं से मिलने तक बाहर नहीं आए। इससे नाराज महिलाओं का आक्रोश और भड़क उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जनता के वोट से संसद पहुंचने वाले नेता अब महिलाओं के सवालों से डरकर दरवाजे बंद कर रहे हैं। महिलाओं ने सांसद पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
सुमन पासवान ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और हिस्सेदारी की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर महिलाओं का यह जनाक्रोश आने वाले समय में और बड़ा आंदोलन बन सकता है। मीडिया प्रभारी सुशील मिश्रा ने आरोप लगाया कि जो नेता महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का विरोध करेंगे, उन्हें जनता के बीच जाकर जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को शांत कराने और स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया,लेकिन महिलाएं लंबे समय तक सांसद आवास के बाहर डटी रहीं।
प्रदर्शन में सरोज मिश्रा, सुमन पासवान,बिनीता मोदनवाल,माधुरी सिंह, नीलम गुप्ता,ममता सिंह, संगीता मिश्रा,रानी सिंह,उषा चौहान और सीमा यादव सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
    user_शिव नारायण मिश्र उर्फ मोनू
    शिव नारायण मिश्र उर्फ मोनू
    Local Politician बीकापुर, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जनपद अयोध्या में आयोजित हुआ वृहद लोक अदालत। अयोध्या। वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। माॅं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के समय अपर जिला जज/नोडल अधिकारी दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रतिभा नारायण, इन्द्रजीत सिंह, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0) पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय, महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या प्रिया सक्सेना द्वारा अपने उद्बोधन में कथन किया गया कि लोक अदालत की मूल भावना शोषितों वंचितों को न्याय सुलभ कराने की है जो श्री रामचरित मानस की इस चैपाई ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को आत्मसात ् करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। उन्होंनें आगे बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये। दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 121980954 रू0 है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है। पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833ध्- रू0 सेटेलमेंट किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।
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    जनपद अयोध्या में आयोजित हुआ वृहद लोक अदालत।
अयोध्या। 
वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ  जनपद न्यायाधीश  रणंजय कुमार वर्मा ने माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। माॅं सरस्वती  के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के समय अपर जिला जज/नोडल अधिकारी  दीपक यादव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  प्रिया सक्सेना, रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0,  वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय,  राहुल कात्यान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय,  सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम,  निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम,  रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत,  प्रतिभा नारायण,  इन्द्रजीत सिंह,  अर्चना तिवारी,  प्रदीप कुमार सिंह,  रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट  सुधांशु शेखर उपाध्याय, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम  सतीश कुमार मगन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय  रंजिनी शुक्ला तथा सिविल जज(सी0डि0)  पीयूष त्रिपाठी व अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट- द्वितीय,  महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया। जनपद न्यायाधीश  रणंजय कुमार वर्मा  द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है। इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह-समझौता के माध्यम से समाज के गणमान्य व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं। इसी को देखते हुए सुलह-समझौता कराते थे और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़तें थे। सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश, मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी। लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को  उच्चतम न्यायालय,  उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है। उन्होंने आगे कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए। यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए।  जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा। इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या  प्रिया सक्सेना द्वारा अपने उद्बोधन में कथन किया गया कि लोक अदालत की मूल भावना शोषितों वंचितों को न्याय सुलभ कराने की है जो श्री रामचरित मानस की इस चैपाई ‘‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई को आत्मसात	् करती है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके। उन्होंनें आगे बताया की धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये।  दीपक यादव, अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं  प्रिया सक्सेना सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय अयोध्या ने बताया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 85350 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 121980954 रू0 है। जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट)  निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 35459 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है।  रविकांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 105 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 85 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 6,51,19,807/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी। बैंक रिकवरी से संबन्धित 683 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 4,64,21,488/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है। पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 57 मुकदमों को निस्तारित किया गया है, जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये। वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 02 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833ध्- रू0 सेटेलमेंट किया गया।	मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4510 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2086 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है। राजस्व मामलों से संबन्धित 30996 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये।
    user_अयोध्या वार्ता
    अयोध्या वार्ता
    Photographer फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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