दुधवा के ईको-सेंसिटिव जोन में अब नहीं चलेंगे ईंट-भट्ठे और फैक्ट्री, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित हुआ 1 किमी का दायरा पलिया कलां खीरी ।विश्व प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव-विविधता को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों के कुनबे को मानवीय दखल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व,किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार की सीमाओं से सटे एक किलोमीटर के क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर ईको-सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब जंगल के मुहाने पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। नई अधिसूचना के लागू होने के बाद रिजर्व की परिधि से एक किलोमीटर के दायरे में नए ईंट-भट्ठे, क्रशर, आरा मशीनें और किसी भी प्रकार के भारी उद्योगों की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक होटलों और रिसॉर्ट्स के निर्माण के लिए अब कड़े मानकों का पालन करना होगा और इसके लिए विशेष अनुमति अनिवार्य होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बाघ, हाथियों और गैंडों के प्राकृतिक गलियारों में इंसानी दखल कम होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, पाबंदियों के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं भी तैयार की गई हैं। दुधवा से सटे थारू बाहुल्य क्षेत्रों, विशेषकर चंदन चौकी के आसपास, थारू जनजाति की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे पर्यटकों को न केवल जंगल की सफारी का आनंद मिलेगा, बल्कि वे स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प से भी रूबरू हो सकेंगे। दुधवा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा के बाद अब निगरानी और बढ़ा दी गई है। जंगल के किनारे चल रही पुरानी इकाइयों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पर्यावरण नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रही हैं। वन संरक्षक ने बताया कि इस क्षेत्र में केवल पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को ही अनुमति दी जाएगी, ताकि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बना रहे। बाक्स "ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य दुधवा के प्राकृतिक परिवेश को शोर-शराबे और प्रदूषण से मुक्त रखना है। एक किलोमीटर के दायरे में भारी मशीनों और फैक्ट्रियों पर रोक लगने से जानवरों के गलियारे (कॉरिडोर) सुरक्षित होंगे। हम विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।" — जगदीश आर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
दुधवा के ईको-सेंसिटिव जोन में अब नहीं चलेंगे ईंट-भट्ठे और फैक्ट्री, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित हुआ 1 किमी का दायरा पलिया कलां खीरी ।विश्व प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव-विविधता को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों के कुनबे को मानवीय दखल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व,किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार की सीमाओं से सटे एक किलोमीटर के क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर ईको-सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब जंगल के मुहाने पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। नई अधिसूचना के लागू होने के बाद रिजर्व की परिधि से एक किलोमीटर के दायरे में नए ईंट-भट्ठे, क्रशर, आरा मशीनें और किसी भी प्रकार के भारी उद्योगों की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक होटलों और
रिसॉर्ट्स के निर्माण के लिए अब कड़े मानकों का पालन करना होगा और इसके लिए विशेष अनुमति अनिवार्य होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बाघ, हाथियों और गैंडों के प्राकृतिक गलियारों में इंसानी दखल कम होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, पाबंदियों के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं भी तैयार की गई हैं। दुधवा से सटे थारू बाहुल्य क्षेत्रों, विशेषकर चंदन चौकी के आसपास, थारू जनजाति की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे पर्यटकों को न केवल जंगल की सफारी का आनंद मिलेगा, बल्कि वे स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प से भी रूबरू हो सकेंगे। दुधवा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा के बाद अब
निगरानी और बढ़ा दी गई है। जंगल के किनारे चल रही पुरानी इकाइयों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पर्यावरण नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रही हैं। वन संरक्षक ने बताया कि इस क्षेत्र में केवल पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को ही अनुमति दी जाएगी, ताकि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बना रहे। बाक्स "ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य दुधवा के प्राकृतिक परिवेश को शोर-शराबे और प्रदूषण से मुक्त रखना है। एक किलोमीटर के दायरे में भारी मशीनों और फैक्ट्रियों पर रोक लगने से जानवरों के गलियारे (कॉरिडोर) सुरक्षित होंगे। हम विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।" — जगदीश आर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
- "सर, गंदी गंदी वीडियो दिखाते हैं"इन बच्चियों का आरोप है कि अध्यापक उन्हें कॉपी चेक करने के बहाने बुलाता है और उनके साथ गंदी हरकतें करता है ll ये यूपी के लखीमपुर के एक सरकारी स्कूल की छात्राएं हैं, जो कह रही कि सर गंदी गंदी बातें करते हैं ll यूपी,लखीमपुर पलिया क्षेत्र के एक कंपोजिट विद्यालय का है। छात्राओं ने सहायक अध्यापक सुनील कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: आरोप: कक्षा 6, 7 और 8 की छात्राओं का आरोप है कि शिक्षक कॉपी जांचने के बहाने उन्हें अपने पास बुलाता था और गलत तरीके से छूता (Bad Touch) था। अश्लील हरकतें: छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षक उन्हें मोबाइल पर अश्लील तस्वीरें और वीडियो दिखाता था और विरोध करने पर मारपीट या जान से मारने की धमकी देता था। प्रशासनिक कार्रवाई: बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया है। पुलिस कार्रवाई: चंदनचौकी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह मामला तब सामने आया जब छात्राओं के परिजनों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया और शिक्षक की करतूतों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। थाना चंदन चौकी क्षेत्रान्तर्गत विद्यालय में शिक्षक द्वारा छात्रा से अश्लील हरकत करने की घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी पलिया, श्री जितेन्द्र सिंह परिहार की बाइट1
- Post by Farookh houssain1
- Post by Sanjay Kumar1
- गोला गोकर्णनाथ, खीरी। तहसील मुख्यालय के गोला थाना क्षेत्र में समाचार संकलन कर रहे एक पत्रकार पर बाइक सवार दबंगों ने जानलेवा हमला कर सनसनी फैला दी। हमले के दौरान हमलावरों ने पत्रकार की आंख फोड़ने की कोशिश की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल लखीमपुर के लिए रेफर कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो नामजद अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 'उजाला शिखर' हिंदी समाचार पत्र के संवाददाता पंकज मिश्रा गोला क्षेत्र में अपनी खबरों के संकलन में व्यस्त थे। इसी दौरान खुटार रोड स्थित लांबा नगर निवासी राकेश शुक्ला और अशोक दीक्षित ने बाइक से आकर उन पर अचानक हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमला इतना हिंसक था कि पंकज मिश्रा की बाईं आंख पर गंभीर चोट आई और वह फूटते-फूटते बची। शरीर के अन्य हिस्सों में भी उन्हें काफी चोटें आई हैं। आनन-फानन में घायल पत्रकार को सीएचसी गोला ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जिला मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाल अम्बर सिंह ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर बिना किसी विलंब के दोनों नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। कोतवाल ने आश्वस्त किया है कि हमलावरों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।1
- पलिया तहसील के संपूर्ण नगर में होली के त्यौहार के नजदीक आते ही सीओ पलिया की अगुवाई में संपूर्ण नगर पुलिस ने कस्बे में पैदल गस्त करते हुए , शराब की दुकानों का निरीक्षण किया और स्टॉक रजिस्टर सीसीटीवी कैमरे इत्यादि चेक किया3
- *थाना फरधान क्षेत्रान्तर्गत गुमशुदा महिला का शव बरामद होने के संबंध में सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी सदर, श्री विवेक तिवारी की बाइट*2
- थाना चंदन चौकी क्षेत्रान्तर्गत विद्यालय में शिक्षक द्वारा छात्रा से अश्लील हरकत करने की घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी पलिया, श्री जितेन्द्र सिंह परिहार1
- पलिया कलां खीरी ।विश्व प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव-विविधता को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों के कुनबे को मानवीय दखल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व,किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार की सीमाओं से सटे एक किलोमीटर के क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर ईको-सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब जंगल के मुहाने पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। नई अधिसूचना के लागू होने के बाद रिजर्व की परिधि से एक किलोमीटर के दायरे में नए ईंट-भट्ठे, क्रशर, आरा मशीनें और किसी भी प्रकार के भारी उद्योगों की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक होटलों और रिसॉर्ट्स के निर्माण के लिए अब कड़े मानकों का पालन करना होगा और इसके लिए विशेष अनुमति अनिवार्य होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बाघ, हाथियों और गैंडों के प्राकृतिक गलियारों में इंसानी दखल कम होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, पाबंदियों के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं भी तैयार की गई हैं। दुधवा से सटे थारू बाहुल्य क्षेत्रों, विशेषकर चंदन चौकी के आसपास, थारू जनजाति की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे पर्यटकों को न केवल जंगल की सफारी का आनंद मिलेगा, बल्कि वे स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प से भी रूबरू हो सकेंगे। दुधवा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा के बाद अब निगरानी और बढ़ा दी गई है। जंगल के किनारे चल रही पुरानी इकाइयों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे पर्यावरण नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रही हैं। वन संरक्षक ने बताया कि इस क्षेत्र में केवल पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को ही अनुमति दी जाएगी, ताकि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बना रहे। बाक्स "ईको-सेंसिटिव जोन की घोषणा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य दुधवा के प्राकृतिक परिवेश को शोर-शराबे और प्रदूषण से मुक्त रखना है। एक किलोमीटर के दायरे में भारी मशीनों और फैक्ट्रियों पर रोक लगने से जानवरों के गलियारे (कॉरिडोर) सुरक्षित होंगे। हम विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।" — जगदीश आर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व3