कानपुर में लेम्बोर्गिनी हादसे केस में नया मोड़: कानपुर मामले मे कथित ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर किया, दावा- गाड़ी मैं चला रहा था; पुलिस का पुख्ता दावा- शिवम मिश्रा ही असली ड्राइवर कानपुर। VIP रोड पर हुए उस भीषण हादसे में, जिसमें एक लग्जरी लेम्बोर्गिनी कार ने कई लोगों को कुचल दिया था, अब नया ट्विस्ट आ गया है। बुधवार को कथित ड्राइवर मोहन ने ACJM-7 कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वकील के साथ कोर्ट पहुंचे मोहन ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि हादसे के समय लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। उसने दावा किया कि कार मालिक शिवम मिश्रा को दौरा पड़ गया था, जिससे वह घबरा गया और हादसा हो गया। मोहन ने आगे बताया कि हादसे के बाद वह घबरा कर कार से निकल गया था, जबकि बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला और दूसरी गाड़ी से अस्पताल ले गए। यह हादसा रविवार को हुआ था, जब लेम्बोर्गिनी ने फुटपाथ पर खड़े और गुजर रहे लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में कुल 6 लोग घायल हुए थे, जिसमें एक बुलेट सवार भी शामिल था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और जांच शुरू की। पुलिस कमिश्नर ने जांच के आधार पर दावा किया था कि कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ही चला रहे थे। इसी आधार पर शिवम का नाम FIR में जोड़ा गया। मंगलवार को मामले में पहला बड़ा ट्विस्ट आया, जब कारोबारी केके मिश्रा खुद ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के समय उनका बेटा शिवम कार नहीं चला रहा था, बल्कि ड्राइवर मोहन ही ड्राइविंग कर रहा था। पिता का दावा था कि शिवम उस वक्त सो रहा था या उसकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि शिवम बेहोश होकर दिल्ली में भर्ती है। कारोबारी के वकील ने भी यही बात दोहराई। लेकिन पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जांच रिपोर्ट में पुलिस ने 5 बड़े सबूत पेश किए हैं, जो साफ बताते हैं कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था और गाड़ी में कोई दूसरा ड्राइवर मौजूद नहीं था। पहला सबूत: हादसे के बाद का वीडियो, जिसमें दिखता है कि बाउंसर ने लेम्बोर्गिनी का शीशा ईंट से तोड़कर ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकाला। इससे साफ है कि कार में सिर्फ एक ही व्यक्ति था और दरवाजा लॉक होने की वजह से बाहर निकालना पड़ा। दूसरा: 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए हैं। सभी ने एकमत होकर कहा कि कार शिवम ही चला रहा था, गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था। हादसे के बाद बाउंसर ने शिवम को कार से निकालकर ले गए। तीसरा: शिवम की मोबाइल लोकेशन हादसे वाली जगह पर ही मिली, जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर मजबूत है। चौथा: स्मार्ट सिटी के CCTV फुटेज में पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज से साफ दिखता है कि कार में सिर्फ एक व्यक्ति था, कोई अलग ड्राइवर नहीं। पांचवां: FIR दर्ज कराने वाले घायल वादी मो. तौफीक ने बयान में शिवम को ही ड्राइवर बताया और वीडियो देखकर पहचान की। वादी का बयान किसी केस में सबसे महत्वपूर्ण होता है। बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां शिवम के वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी को रिलीज कराने की अर्जी दी, जबकि मोहन ने सरेंडर याचिका दाखिल की। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें साफ कहा गया कि शिवम ही ड्राइवर था। DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पर्याप्त सबूत और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के आधार पर शिवम पर कार्रवाई हुई है। FIR जमानतीय धाराओं में है, लेकिन पुलिस का स्टैंड क्लियर है। यह मामला अब कोर्ट में है, जहां सबूतों के आधार पर फैसला होगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी है और कानून सबके लिए बराबर है। हादसे ने एक बार फिर लग्जरी वाहनों की तेज रफ्तार और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं।
कानपुर में लेम्बोर्गिनी हादसे केस में नया मोड़: कानपुर मामले मे कथित ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर किया, दावा- गाड़ी मैं चला रहा था; पुलिस का पुख्ता दावा- शिवम मिश्रा ही असली ड्राइवर कानपुर। VIP रोड पर हुए उस भीषण हादसे में, जिसमें एक लग्जरी लेम्बोर्गिनी कार ने कई लोगों को कुचल दिया था, अब नया ट्विस्ट आ गया है। बुधवार को कथित ड्राइवर मोहन ने ACJM-7 कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वकील के साथ कोर्ट पहुंचे मोहन ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि हादसे के समय लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। उसने दावा किया कि कार मालिक शिवम मिश्रा को दौरा पड़ गया था, जिससे वह घबरा गया और हादसा हो गया। मोहन ने आगे बताया कि हादसे के बाद वह घबरा कर कार से निकल गया था, जबकि बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला और दूसरी गाड़ी से अस्पताल ले गए। यह हादसा रविवार को हुआ था, जब लेम्बोर्गिनी ने फुटपाथ पर खड़े और गुजर रहे लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में कुल 6 लोग घायल हुए थे, जिसमें एक बुलेट सवार भी शामिल था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और जांच शुरू की। पुलिस कमिश्नर ने जांच के आधार पर दावा किया था कि कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ही चला रहे थे। इसी आधार पर शिवम का नाम FIR में जोड़ा गया। मंगलवार को मामले में पहला बड़ा ट्विस्ट आया, जब कारोबारी केके मिश्रा खुद ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के समय उनका बेटा शिवम कार नहीं चला रहा था, बल्कि ड्राइवर मोहन ही ड्राइविंग कर रहा था। पिता का दावा था कि शिवम उस वक्त सो रहा था या उसकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि शिवम बेहोश होकर दिल्ली में भर्ती है। कारोबारी के वकील ने भी यही बात दोहराई। लेकिन पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जांच रिपोर्ट में पुलिस ने 5 बड़े सबूत पेश किए हैं, जो साफ बताते हैं कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था और गाड़ी में कोई दूसरा ड्राइवर मौजूद नहीं था। पहला सबूत: हादसे के बाद का वीडियो, जिसमें दिखता है कि बाउंसर ने लेम्बोर्गिनी का शीशा ईंट से तोड़कर ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकाला। इससे साफ है कि कार में सिर्फ एक ही व्यक्ति था और दरवाजा लॉक होने की वजह से बाहर निकालना पड़ा। दूसरा: 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए हैं। सभी ने एकमत होकर कहा कि कार शिवम ही चला रहा था, गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था। हादसे के बाद बाउंसर ने शिवम को कार से निकालकर ले गए। तीसरा: शिवम की मोबाइल लोकेशन हादसे वाली जगह पर ही मिली, जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर मजबूत है। चौथा: स्मार्ट सिटी के CCTV फुटेज में पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज से साफ दिखता है कि कार में सिर्फ एक व्यक्ति था, कोई अलग ड्राइवर नहीं। पांचवां: FIR दर्ज कराने वाले घायल वादी मो. तौफीक ने बयान में शिवम को ही ड्राइवर बताया और वीडियो देखकर पहचान की। वादी का बयान किसी केस में सबसे महत्वपूर्ण होता है। बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां शिवम के वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी को रिलीज कराने की अर्जी दी, जबकि मोहन ने सरेंडर याचिका दाखिल की। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें साफ कहा गया कि शिवम ही ड्राइवर था। DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पर्याप्त सबूत और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के आधार पर शिवम पर कार्रवाई हुई है। FIR जमानतीय धाराओं में है, लेकिन पुलिस का स्टैंड क्लियर है। यह मामला अब कोर्ट में है, जहां सबूतों के आधार पर फैसला होगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी है और कानून सबके लिए बराबर है। हादसे ने एक बार फिर लग्जरी वाहनों की तेज रफ्तार और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं।
- जौनपुर में दो पुलिसकर्मियों पर मोबाइल बदलने का आरोप, निलंबित यूपी के जौनपुर जिले में दो पुलिसकर्मियों पर मोबाइल शॉप से आईफोन बदलकर ले जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि दोनों शॉप पर पहुंचे, आईफोन देखने के दौरान एक फोन डिब्बे से निकालकर लैपटॉप स्क्रीन के पीछे रख दिया और अपना पुराना मोबाइल रखकर कथित रूप से बदल दिया। घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला सामने आने के बाद आरोपी पुलिसकर्मी धनंजय बिंद और मिथिलेश यादव को सस्पेंड कर दिया गया है। विभागीय जांच जारी है। (इस खबर की स्वतंत्र पुष्टि हम नहीं करते हैं।)1
- विजनौर के अफजलगढ़ में पुलिस ने हाई टेंशन विद्युत लाइन काटकर चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, करीब 7 कुंतल विद्युत तार, छोटा हाथी वाहन और औजार बरामद किए। उत्तर प्रदेश की छोटी-बड़ी खबरों के लिए चैनल को लाइक, शेयर व सब्सक्राइब करें — जनपद न्यूज 24 यूपी1
- Post by राजेश कुमार वर्मा1
- बदायूं: पति ने 1000 रुपये में किया पत्नी का सौदा, दो दोस्तों ने किया गैंगरेप उत्तर प्रदेश के बदायूं में एक महिला ने अपने पति पर 1000 रुपये लेकर उसे दोस्तों को सौंपने और उनके द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है. फैजगंज बेहटा क्षेत्र की पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दो आरोपियों, बालकिशन और पप्पू को गिरफ्तार कर लिया है. फरार पति 'छुटन' की तलाश के लिए दो टीमें लगाई गई हैं. एसपी हृदयेश कठेरिया के अनुसार, पीड़िता का मेडिकल कराया गया है और मामले की गहन जांच जारी है.1
- मनमद-काकीनाडा-शिरदी एक्सप्रेस मोहम्मद इमरान ट्रेन से लातूर जा रहे थे। हाफ़िज़पेट स्टेशन के पास, ट्रेन में सवार 20 लोगों ने उनकी धार्मिक पहचान, जिसमें उनकी टोपी और दाढ़ी शामिल थी, को देखकर उनकी पिटाई कर दी। उनके साथी, जो उनकी मदद के लिए आए, उन्हें भी पीटा गया।1
- मेरठ में दो दरोगाओं पर 20 लाख वसूली का आरोप, FIR दर्ज मेरठ में पुलिस विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। दो सब इंस्पेक्टर लोकेंद्र साहू और महेश कुमार पर धागा व्यापारी रासिख पुत्र इदरीश को एनकाउंटर की धमकी देकर 20 लाख रुपये वसूलने का आरोप लगा है। एसएसपी अविनाश पांडेय ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR दर्ज कराते हुए गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की हैं। आरोपी दरोगा मोबाइल बंद कर थाने से फरार बताए जा रहे हैं। मामले में इंस्पेक्टर योगेश चंद्र पर भी कार्रवाई की गई है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।1
- कानपुर मामले मे कथित ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर किया, दावा- गाड़ी मैं चला रहा था; पुलिस का पुख्ता दावा- शिवम मिश्रा ही असली ड्राइवर कानपुर। VIP रोड पर हुए उस भीषण हादसे में, जिसमें एक लग्जरी लेम्बोर्गिनी कार ने कई लोगों को कुचल दिया था, अब नया ट्विस्ट आ गया है। बुधवार को कथित ड्राइवर मोहन ने ACJM-7 कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वकील के साथ कोर्ट पहुंचे मोहन ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि हादसे के समय लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। उसने दावा किया कि कार मालिक शिवम मिश्रा को दौरा पड़ गया था, जिससे वह घबरा गया और हादसा हो गया। मोहन ने आगे बताया कि हादसे के बाद वह घबरा कर कार से निकल गया था, जबकि बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला और दूसरी गाड़ी से अस्पताल ले गए। यह हादसा रविवार को हुआ था, जब लेम्बोर्गिनी ने फुटपाथ पर खड़े और गुजर रहे लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में कुल 6 लोग घायल हुए थे, जिसमें एक बुलेट सवार भी शामिल था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और जांच शुरू की। पुलिस कमिश्नर ने जांच के आधार पर दावा किया था कि कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ही चला रहे थे। इसी आधार पर शिवम का नाम FIR में जोड़ा गया। मंगलवार को मामले में पहला बड़ा ट्विस्ट आया, जब कारोबारी केके मिश्रा खुद ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के समय उनका बेटा शिवम कार नहीं चला रहा था, बल्कि ड्राइवर मोहन ही ड्राइविंग कर रहा था। पिता का दावा था कि शिवम उस वक्त सो रहा था या उसकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि शिवम बेहोश होकर दिल्ली में भर्ती है। कारोबारी के वकील ने भी यही बात दोहराई। लेकिन पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जांच रिपोर्ट में पुलिस ने 5 बड़े सबूत पेश किए हैं, जो साफ बताते हैं कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था और गाड़ी में कोई दूसरा ड्राइवर मौजूद नहीं था। पहला सबूत: हादसे के बाद का वीडियो, जिसमें दिखता है कि बाउंसर ने लेम्बोर्गिनी का शीशा ईंट से तोड़कर ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकाला। इससे साफ है कि कार में सिर्फ एक ही व्यक्ति था और दरवाजा लॉक होने की वजह से बाहर निकालना पड़ा। दूसरा: 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए हैं। सभी ने एकमत होकर कहा कि कार शिवम ही चला रहा था, गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था। हादसे के बाद बाउंसर ने शिवम को कार से निकालकर ले गए। तीसरा: शिवम की मोबाइल लोकेशन हादसे वाली जगह पर ही मिली, जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर मजबूत है। चौथा: स्मार्ट सिटी के CCTV फुटेज में पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज से साफ दिखता है कि कार में सिर्फ एक व्यक्ति था, कोई अलग ड्राइवर नहीं। पांचवां: FIR दर्ज कराने वाले घायल वादी मो. तौफीक ने बयान में शिवम को ही ड्राइवर बताया और वीडियो देखकर पहचान की। वादी का बयान किसी केस में सबसे महत्वपूर्ण होता है। बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां शिवम के वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी को रिलीज कराने की अर्जी दी, जबकि मोहन ने सरेंडर याचिका दाखिल की। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें साफ कहा गया कि शिवम ही ड्राइवर था। DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पर्याप्त सबूत और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के आधार पर शिवम पर कार्रवाई हुई है। FIR जमानतीय धाराओं में है, लेकिन पुलिस का स्टैंड क्लियर है। यह मामला अब कोर्ट में है, जहां सबूतों के आधार पर फैसला होगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी है और कानून सबके लिए बराबर है। हादसे ने एक बार फिर लग्जरी वाहनों की तेज रफ्तार और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं।1
- मैनपुरी में दवा खाने से बिगड़ी दो दर्जन बच्चों की तबीयत, जिला अस्पताल में मची अफरा-तफरी मैनपुरी जनपद से बड़ी खबर सामने आई है। किरतपुर कॉलोनी स्थित एक प्राइमरी स्कूल में पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल खाने के बाद करीब 24 से अधिक बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को तेज पेट दर्द और उल्टियों की शिकायत होने पर हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां आपातकालीन उपचार शुरू किया गया। हालत गंभीर होने पर कुछ बच्चों को सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत? जानकारी के अनुसार, स्कूल में रूटीन अभियान के तहत बच्चों को पेट के कीड़े खत्म करने की दवा दी गई थी। दवा खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों ने पेट में तेज दर्द और उल्टियों की शिकायत शुरू कर दी, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप घटना की खबर मिलते ही परिजन स्कूल पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि दवा देने में लापरवाही बरती गई और दवा वितरण के समय स्वास्थ्य विभाग की निगरानी नहीं थी। परिजनों ने सवाल उठाया कि डॉक्टरों की टीम मौके पर मौजूद क्यों नहीं थी। चिकित्सा विभाग की सफाई मामले की गंभीरता को देखते हुए आर.सी. गुप्ता (सीएमओ) जिला अस्पताल पहुंचे और बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल दवा साल में दो बार नियमित कार्यक्रम के तहत दी जाती है, लेकिन कुछ बच्चों में साइड इफेक्ट के कारण तबीयत बिगड़ी है। सभी बच्चों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा है। उत्तर प्रदेश की छोटी-बड़ी खबरों के लिए चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें — जनपद न्यूज 24 यूपी1
- "रिपोर्ट : आदित्य भारद्वाज" आंवला। भमोरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत डप्टा श्यामपुर निवासी छोटेलाल ने एक युवक व उसके परिजनों पर दहेज की मांग कर शादी से इनकार करने का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने मामले में छह लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित छोटेलाल ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन की शादी शेरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव वर्धन जागीर निवासी सोमपाल के साथ तय की थी। दोनों परिवारों की सहमति से 31 दिसंबर 2025 को इज्जतनगर रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में गोदभराई व तिलक समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें परिजन व रिश्तेदार मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में करीब 21 हजार रुपये खर्च किए गए थे। शादी को लेकर दोनों पक्षों में लगभग चार लाख रुपये खर्च करने पर सहमति बनी थी। इसी बीच सोमपाल की रेलवे में नौकरी लग गई, जिसके बाद लड़के पक्ष के लोगों का रवैया बदल गया। आरोप है कि इसके बाद वे अतिरिक्त दहेज की मांग करने लगे और मांग पूरी न होने पर शादी से इनकार कर दिया। पीड़ित पक्ष ने इसे सामाजिक और मानसिक उत्पीड़न बताते हुए पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। इस संबंध में थाना प्रभारी भमोरा सनी चौधरी ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर छह लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक शैलेंद्र तोमर द्वारा की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1