जौनपुर के मीरगंज क्षेत्र स्थित अदारी गांव के निवासी ऋषभ गिरी ने भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) प्रतियोगिताओं में अपने गांव, जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता राधा कृष्ण गिरी की प्रेरणा और चाचा चंद्रसेन गिरी का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है, जिन्होंने उन्हें बचपन से ही खेलों के प्रति रुचि रखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया और प्रशिक्षण प्रदान किया। ऋषभ को भारत खेल विभाग द्वारा 'लक्ष्य ओलंपिक' में भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। चंद्रसेन गिरी ने बताया कि ऋषभ ने वर्ष 2022 से खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए, वर्ष 2023 में मुंबई स्थित रिलायंस जियो ने उनसे अनुबंध किया, जिससे उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिले। वर्ष 2024 में, ऋषभ ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित भाला फेंक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और एशियाई स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित की। चाचा चंद्रसेन गिरी ने यह भी बताया कि 8 मई 2026 को ऋषभ का नाम भारत खेल विभाग द्वारा लक्ष्य ओलंपिक के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। ऋषभ का कहना है कि परिवार से मिले उत्साह, सहयोग और मार्गदर्शन के कारण ही वह लगातार आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियां क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं, यह संदेश देते हुए कि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। क्षेत्र के लोगों ने उनकी उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
जौनपुर के मीरगंज क्षेत्र स्थित अदारी गांव के निवासी ऋषभ गिरी ने भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) प्रतियोगिताओं में अपने गांव, जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता राधा कृष्ण गिरी की प्रेरणा और चाचा चंद्रसेन गिरी का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है, जिन्होंने उन्हें बचपन से ही खेलों के प्रति रुचि रखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया और प्रशिक्षण प्रदान किया। ऋषभ को भारत खेल विभाग द्वारा 'लक्ष्य ओलंपिक' में भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। चंद्रसेन गिरी ने बताया कि ऋषभ ने वर्ष 2022 से खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए, वर्ष 2023 में मुंबई स्थित रिलायंस जियो ने उनसे अनुबंध किया, जिससे उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिले। वर्ष 2024 में, ऋषभ ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित भाला फेंक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और एशियाई स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित की। चाचा चंद्रसेन गिरी ने यह भी बताया कि 8 मई 2026 को ऋषभ का नाम भारत खेल विभाग द्वारा लक्ष्य ओलंपिक के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। ऋषभ का कहना है कि परिवार से मिले उत्साह, सहयोग और मार्गदर्शन के कारण ही वह लगातार आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियां क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं, यह संदेश देते हुए कि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। क्षेत्र के लोगों ने उनकी उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
- सूर्य प्रकाश पाण्डेय और मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दिए गए एक संदेश में बताया गया है कि "विनाश काले विपरीत बुद्धि" केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का एक अटल सत्य है। जब मनुष्य पर अहंकार हावी हो जाता है, तब उसकी बुद्धि सही और गलत का अंतर समझने की क्षमता खो देती है। इतिहास और वर्तमान दोनों ही इस बात के गवाह हैं कि अहंकार ने बड़े-बड़े राजाओं, नेताओं, धनवानों और शक्तिशाली व्यक्तियों को पतन की ओर धकेला है। अहंकार मनुष्य को यह भ्रम देता है कि वह सबसे श्रेष्ठ है, उसे किसी की सलाह की आवश्यकता नहीं है, और उसकी हर बात सही है। यही सोच धीरे-धीरे उसके विवेक को नष्ट कर देती है। जब बुद्धि पर अहंकार का पर्दा पड़ जाता है, तब व्यक्ति अपने शुभचिंतकों की बात सुनना भी बंद कर देता है और गलत निर्णय लेने लगता है। रामायण में रावण और महाभारत में दुर्योधन इसके सबसे बड़े उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार ने उनकी बुद्धि को भ्रमित कर दिया और अंततः उनका सर्वनाश हुआ। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि आज के समय में भी जब व्यक्ति धन, पद या प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेता है, तो कई बार वह दूसरों को तुच्छ समझने लगता है और यह भूल जाता है कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। जीवन में सफलता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है विनम्र बने रहना। विनम्रता मनुष्य को महान बनाती है, जबकि अहंकार उसे अकेला और कमजोर कर देता है। जो व्यक्ति दूसरों का सम्मान करता है, वह समाज में सम्मान पाता है, लेकिन जो अहंकार में डूब जाता है, वह धीरे-धीरे अपने रिश्ते, मित्र और सम्मान सब कुछ खो देता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सफलता मिलने पर भी अपने संस्कार, विनम्रता और मानवता को न भूलें, क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान यही है कि अहंकार का अंत विनाश है और विनम्रता का परिणाम सम्मान है। संदेश में जोर दिया गया है कि "जब मनुष्य के भीतर अहंकार बढ़ता है, तब उसका पतन शुरू हो जाता है। इसलिए जीवन में हमेशा विनम्र रहें, क्योंकि झुकने वाला वृक्ष ही फल देता है और अकड़ने वाला वृक्ष सबसे पहले टूटता है।"1
- बदलापुर स्थित पूर्व विधायक ओमप्रकाश बाबा दुबे के आवास 'बाबा कुंज' में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अत्यंत उत्साह के साथ मनाया गया। इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों और युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए योगाभ्यास किया। कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत, योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को गर्दन, कंधों और कमर से संबंधित समस्याओं के निवारण हेतु विभिन्न सरल एवं प्रभावी योगासन जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, उत्तानपादासन, शशकासन, मकरासन तथा भुजंगासन का अभ्यास कराया गया। इसके अतिरिक्त, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी एवं शीतली प्राणायाम के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर, पूर्व विधायक ओमप्रकाश बाबा दुबे ने योग को भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर बताया, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने सभी से नियमित योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ एवं निरोग जीवन के लिए नियमित योगाभ्यास करने का संकल्प लिया। पूरा कार्यक्रम उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता के वातावरण से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस सफल आयोजन का समापन किया गया।1
- मछलीशहर के मदरसा फ़ैज़ानुल में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिक्षकों और बच्चों ने योग किया। इस दौरान बताया गया कि योग न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता भी प्रदान करता है। सभी ने आज योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।1
- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मछलीशहर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय बारहवां योग दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया।1
- उत्तर प्रदेश के मछलीशहर में नगर पंचायत द्वारा एक मंदिर से सटाकर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके कारण स्थानीय भक्त आक्रोशित हो गए हैं। इस निर्माण कार्य के विरोध में बड़ी संख्या में भक्त सड़कों पर उतर आए हैं और नगर पंचायत के इस निर्णय का कड़ा विरोध कर रहे हैं।1
- डोभी मंडल के शक्ति केंद्र हिसामपुर ग्राम पंचायत बोदरी में एक महत्वपूर्ण बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में पंकज सिंह उपस्थित रहे। उनके साथ मंडल उपाध्यक्ष अच्छेलाल राजभर और शक्ति केंद्र संयोजक दशरथ तिवारी भी प्रमुख रूप से मौजूद थे।4
- पितृ दिवस के पावन अवसर पर मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन ने सभी सम्मानित पिताओं को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। इस अवसर पर परिवार और समाज में पिता के महत्व को रेखांकित करते हुए संगठन ने कहा कि "पिता ही जीवन है, पिता ही प्यार है, पिता ही पूरा संसार है। पिता हैं तो परिवार है।" ऑर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पिता परिवार की वह मजबूत नींव होते हैं जो अपने बच्चों के सुखद भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष करते हैं। उनके अनुसार, पिता अपने परिवार की खुशियों, शिक्षा, सुरक्षा और संस्कारों के लिए जीवनभर समर्पित रहते हैं, और उनके त्याग, परिश्रम तथा मार्गदर्शन से ही परिवार व समाज का विकास संभव होता है। इस दौरान, लोगों से आह्वान किया गया कि वे अपने माता-पिता, विशेषकर पिता के प्रति सम्मान, आदर और कृतज्ञता व्यक्त करें। वक्ताओं ने आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी माता-पिता के साथ समय बिताने और उनके योगदान को कभी न भूलने का संदेश दिया। संगठन की ओर से सभी पिताओं के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए पितृ दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की गईं, यह दोहराते हुए कि "पिता का साया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, उनका सम्मान और आशीर्वाद ही परिवार की वास्तविक शक्ति है।" रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने यह जानकारी दी।1
- दैनिक भास्कर पर “बहन जी” को लेकर बार-बार झूठे आरोप लगाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस संबंध में, “दैनिक भास्कर” को चेतावनी दी गई है कि वह अपनी सीमा और मर्यादा में रहे। यह स्पष्ट किया गया है कि “बहन जी” के संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता और लोग उसकी झूठी बातों में आने वाले नहीं हैं। जोर देकर कहा गया है कि लोग हमेशा “बहन जी” के साथ खड़े रहेंगे।1