नीट परीक्षा में कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है। इस खुलासे ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए लगभग 10 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था, जिसमें 50 से 70 हजार रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी, जबकि शेष भुगतान मेडिकल कॉलेज आवंटन के बाद किया जाना था। केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र इस मामले में सबसे अधिक चर्चा में है, जहां से सबसे ज्यादा सात 'मुन्नाभाई' पकड़े गए हैं। गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न बताए जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली, रायबरेली, पीएमसीएच और एम्स के इंटर्न शामिल हैं। गिरीडीह की बीएचयू मेडिकल कॉलेज की थर्ड ईयर की इंटर्न छात्रा पूनम कुमारी को भी पकड़ा गया है, जो केंद्रीय विद्यालय में मधुप्रिया नामक परीक्षार्थी के बदले परीक्षा दे रही थी। केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान मशीन को बंद कर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश कराया गया। इस आरोप के बाद बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी भी जांच के दायरे में आ गई है और उसके कुछ कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों को आरोपियों की वास्तविक पहचान सत्यापित करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि वे बार-बार अपना नाम और पहचान बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार सहित कई वरीय पदाधिकारी लगातार छापेमारी और पूछताछ में जुटे हैं। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि पकड़े गए सभी नौ लोग किसी न किसी संस्थान में इंटर्न हैं और इस मामले में अभी किसी का नाम उजागर नहीं किया जा सकता। वरीय अधिकारी खुद सभी से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक जल्द ही प्रेसवार्ता कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देंगे।
नीट परीक्षा में कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है। इस खुलासे ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए लगभग 10 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था, जिसमें 50 से 70 हजार रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी, जबकि शेष भुगतान मेडिकल कॉलेज आवंटन के बाद किया जाना था। केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र इस मामले में सबसे अधिक चर्चा में है, जहां से सबसे ज्यादा सात 'मुन्नाभाई' पकड़े गए हैं। गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न बताए जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली, रायबरेली, पीएमसीएच और एम्स के इंटर्न शामिल हैं। गिरीडीह की बीएचयू मेडिकल कॉलेज की थर्ड ईयर की इंटर्न छात्रा पूनम कुमारी को भी पकड़ा गया है, जो केंद्रीय विद्यालय में मधुप्रिया नामक परीक्षार्थी के बदले परीक्षा दे रही थी। केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान मशीन को बंद कर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश कराया गया। इस आरोप के बाद बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी भी जांच के दायरे में आ गई है और उसके कुछ कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों को आरोपियों की वास्तविक पहचान सत्यापित करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि वे बार-बार अपना नाम और पहचान बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार सहित कई वरीय पदाधिकारी लगातार छापेमारी और पूछताछ में जुटे हैं। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि पकड़े गए सभी नौ लोग किसी न किसी संस्थान में इंटर्न हैं और इस मामले में अभी किसी का नाम उजागर नहीं किया जा सकता। वरीय अधिकारी खुद सभी से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक जल्द ही प्रेसवार्ता कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देंगे।
- नीट परीक्षा में कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है। इस खुलासे ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए लगभग 10 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था, जिसमें 50 से 70 हजार रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी, जबकि शेष भुगतान मेडिकल कॉलेज आवंटन के बाद किया जाना था। केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र इस मामले में सबसे अधिक चर्चा में है, जहां से सबसे ज्यादा सात 'मुन्नाभाई' पकड़े गए हैं। गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न बताए जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली, रायबरेली, पीएमसीएच और एम्स के इंटर्न शामिल हैं। गिरीडीह की बीएचयू मेडिकल कॉलेज की थर्ड ईयर की इंटर्न छात्रा पूनम कुमारी को भी पकड़ा गया है, जो केंद्रीय विद्यालय में मधुप्रिया नामक परीक्षार्थी के बदले परीक्षा दे रही थी। केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान मशीन को बंद कर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश कराया गया। इस आरोप के बाद बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी भी जांच के दायरे में आ गई है और उसके कुछ कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों को आरोपियों की वास्तविक पहचान सत्यापित करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि वे बार-बार अपना नाम और पहचान बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार सहित कई वरीय पदाधिकारी लगातार छापेमारी और पूछताछ में जुटे हैं। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि पकड़े गए सभी नौ लोग किसी न किसी संस्थान में इंटर्न हैं और इस मामले में अभी किसी का नाम उजागर नहीं किया जा सकता। वरीय अधिकारी खुद सभी से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक जल्द ही प्रेसवार्ता कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देंगे।1
- राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने ₹12,000 करोड़ की एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर परियोजना को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य लक्ष्य शहर को कंजेशन-फ्री और सिग्नल-फ्री यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इस परियोजना के तहत यमुना नदी पर दो नए पुलों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मेटकाफ हाउस से डीएनडी फ्लाईवे तक एक सिग्नल-फ्री कॉरिडोर भी विकसित किया जाएगा, जो यातायात को सुगम बनाएगा। पहले चरण में लगभग 25 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण कार्य संपन्न होगा। रैंप और इंटरचेंज सहित इस पूरे नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 80 किलोमीटर होगी, जिससे दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवाजाही और अधिक सुविधाजनक हो सकेगी। वर्तमान में रिंग रोड पर प्रतिदिन पांच लाख से अधिक वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में, यह नई एलिवेटेड रिंग रोड परियोजना ट्रैफिक जाम को कम करने, यात्रा के समय को घटाने और राजधानी की समग्र कनेक्टिविटी को एक नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।1
- यह वीडियो ओडिशा के सत्यवादी निर्वाचन क्षेत्र के एक गाँव से आया है, न कि सूरत या बैंकॉक से, जैसा कि कुछ जगह दावा किया जा रहा था। यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो पुरी जिले के एक गाँव से संबंधित है। पोस्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि वीडियो में प्रदर्शित सामग्री को पुरी के बीच फेस्टिवल में मौका दिया जाना चाहिए।1
- पूर्वी दिल्ली के शकरपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ड्रग पेडलर और एक सप्लायर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से 106.68 ग्राम संदिग्ध हेरोइन/स्मैक बरामद की, जिसे मध्यम मात्रा बताया गया है। इसके अतिरिक्त, ड्रग्स की बिक्री से जुड़ी ₹1,01,732 की संदिग्ध नकदी भी जब्त की गई। पुलिस ने मौके से एक स्कूटी, एक मोबाइल फोन और ईयरफोन भी बरामद किए। यह कार्रवाई NDPS एक्ट की धारा 21 के तहत दर्ज FIR संख्या 144/2026 की जांच के दौरान की गई। नशीले पदार्थ की पहचान सुनिश्चित करने के लिए नारकोटिक ड्रग डिटेक्शन किट और मोबाइल क्राइम फोरेंसिक टीम की मदद ली गई। दोनों गिरफ्तार आरोपियों से आगे की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें पुलिस ड्रग सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है।2
- दिल्ली के द्वारका उत्तम नगर में पार्किंग को लेकर हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया, जहाँ पति-पत्नी पर चाकू से हमला किया गया। इस हमले में पत्नी की मौत हो गई, जबकि पति घायल हो गया। इस वारदात को एक नाबालिग ने अंजाम दिया है। इस घटना ने दिल्ली में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है, और यह शहर में बढ़ते अपराधों के डर को एक बार फिर से उजागर करती है।1