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- समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस को नशा मुक्ति अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिला पुलिस कप्तान के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के अंतर्गत, रोसड़ा थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 425 ग्राम गांजा बरामद किया और एक तस्कर को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को रविवार, 31 मई 2026 को यह सूचना मिली थी कि रोसड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम-जरही चोरवा पोखर के पास मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री चल रही है। इस सूचना पर रोसड़ा पुलिस और एक स्थानीय दंडाधिकारी की संयुक्त टीम ने चोरवा पोखर के पास स्थित एक गुमटीनुमा पान दुकान की सघन तलाशी ली, जिसके परिणामस्वरूप गांजे की यह बड़ी खेप बरामद हुई। गिरफ्तार किए गए तस्कर की पहचान रामकुमार पासवान उर्फ छोटू के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-5, रोसड़ा का निवासी है। इस मामले में आरोपी रामकुमार पासवान उर्फ छोटू के खिलाफ रोसड़ा थाना में कांड संख्या-203/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा-20 (II) (A) के तहत मामला पंजीकृत किया है और अब इस अवैध धंधे से जुड़े अन्य व्यक्तियों की तलाश में जुट गई है।1
- समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र में सोमवार को एक बड़ी दुर्घटना हो गई, जहाँ आरा मिल के समीप अचानक एक विशाल पीपल का पेड़ मुख्य सड़क पर गिर पड़ा। यह घटना मुसरीघरारी थाना से लगभग 200 मीटर आगे और मुसरीघरारी चौराहा से करीब 100 मीटर पीछे हुई। बताया जा रहा है कि यह पेड़ पटोरी थाना की एक पुलिस गाड़ी के ऊपर गिरा, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में पुलिस वाहन का चालक घायल हो गया, जिसे स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से इलाज के लिए मुसरीघरारी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पेड़ गिरने के कारण मुख्य सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और गिरे हुए पेड़ को हटाने का काम शुरू कर दिया।1
- बिहार में 31 मई को आयोजित होने वाली बिहार कृषि विज्ञान परीक्षा बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक रद्द कर दी गई है, जिससे सैकड़ों परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम को लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की गुहार लगाई है। बिहार सरकार द्वारा दो दिवसीय कृषि विज्ञान परीक्षा 30 मई से 31 मई तक पूरे राज्य में आयोजित की जानी थी, लेकिन दरभंगा के राज हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर 31 मई को होने वाली परीक्षा को अचानक रद्द कर दिया गया। परीक्षार्थियों को यह जानकारी तब मिली जब वे दूसरे दिन परीक्षा देने केंद्र पर पहुंचे और दरवाजे पर ताला लटका पाया, जिससे सैकड़ों छात्र अचंभित रह गए। कई परीक्षार्थियों ने स्थानीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षक कर्मियों से फोन के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन किसी भी अधिकारी या प्रशासन ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। समस्तीपुर जिले के पटोरी अनुमंडल के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र के रहने वाले परीक्षार्थी शुभम कुमार ने बताया कि ऐसी परिस्थितियां क्यों और कैसे उत्पन्न हुईं, इसकी सही जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हो पाई है। शुभम कुमार ने इस गंभीर समस्या को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से दोषियों पर अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है। अब यह सवाल उठ रहा है कि इस तरह की परिस्थिति उत्पन्न होने से हजारों की संख्या में आए परीक्षार्थियों के भविष्य का क्या होगा और यह परीक्षा किन कारणों से रद्द की गई। इसके साथ ही, यह भी देखना होगा कि ऐसी स्थिति में बिहार सरकार कोई नई गाइडलाइन जारी करती है या नहीं।1
- सिंघिया में एक डिग्री कॉलेज से संबंधित जांच के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता और एसडीओ संदीप कुमार मौके पर पहुंचे। इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी विवेक रंजन, अंचल अधिकारी कुमारी सरिता रानी, और प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी कृष्ण कुमार के साथ-साथ कई अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।1
- समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड के दिनमनपुर उत्तरी पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-189 की वर्ष 2018 की सेविका बहाली का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। समाहर्ता न्यायालय, समस्तीपुर के आदेश पर आयोजित आमसभा विवादों के बीच रद्द हो गई, जिसके बाद ग्रामीणों और आवेदिका पक्ष ने महिला पर्यवेक्षिका पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना और आमसभा प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। दरअसल, वर्ष 2018 में हुई सेविका चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए आवेदिका दीपा कुमारी ने न्यायालय में अपील दायर की थी। उनका आरोप है कि तत्कालीन महिला पर्यवेक्षिका और संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर गलत अभ्यर्थी का चयन किया था। इस मामले में दीपा कुमारी पिछले सात से आठ वर्षों से विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों, दस्तावेजों और आमसभा के वीडियो फुटेज के अवलोकन के बाद समाहर्ता न्यायालय ने पाया कि 2018 की आमसभा में विवाद हुआ था और कार्यवाही पर प्रश्नचिन्ह लगे थे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चयन मार्गदर्शिका-2016 की कंडिका-10 का पालन नहीं किया गया और तत्कालीन महिला पर्यवेक्षिका ने नियमों के विपरीत चयन पत्र जारी किया था। इसके बाद न्यायालय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुनः आमसभा आयोजित कर ग्रामीणों की राय लेने का निर्देश दिया था। न्यायालय के आदेश के आलोक में राजकीय प्राथमिक विद्यालय, मोदी टोल में आमसभा आयोजित की गई, लेकिन आरोप है कि महिला पर्यवेक्षिका सुमन कुमारी ने सभा की शुरुआत और उद्देश्य बताए बिना ही उपस्थित लोगों से उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर कराना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और मांग की कि पहले आमसभा की कार्यवाही शुरू की जाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 की टीम भी मौके पर मौजूद रही। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षर न किए जाने के बाद महिला पर्यवेक्षिका ने उपस्थिति पंजी में कोरम पूरा न होने का हवाला देकर आमसभा स्थगित कर दी। इससे आवेदिका पक्ष और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई, जिन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई ताकि सभा आयोजित ही न हो सके। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, खानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 की आमसभा में खुशबू कुमारी और ममता कुमारी की उपस्थिति दर्ज थी, और उसी आधार पर खुशबू कुमारी का चयन सेविका पद के लिए किया गया था, जबकि दीपा कुमारी अनुपस्थित बताई गई थीं। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि वीडियो साक्ष्य और अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि 2018 की आमसभा के दौरान विवाद के बाद कार्यवाही पंजी फाड़ दी गई थी, फिर भी तत्कालीन महिला पर्यवेक्षिका ने कोई सूचना या सनहा दर्ज कराए बिना उसी दिन चयन प्रक्रिया पूरी कर चयन पत्र जारी कर दिया, जिसे न्यायालय ने चयन मार्गदर्शिका-2016 की कंडिका-10 का उल्लंघन और पर्यवेक्षिका की भूमिका पर सवाल उठाया। आवेदिका दीपा कुमारी का कहना है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई और सभी साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद भी गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थी को चयनमुक्त नहीं किया गया है, जिससे उन्हें लगातार न्याय मिलने में देरी हो रही है। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब न्यायालय ने अनियमितता स्वीकार कर पुनः आमसभा का निर्देश दिया था, तब भी यह प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो पाई। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित इस विवाद का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान कब तक निकल पाता है।1
- समस्तीपुर के दलसिंहसराय में नगर निगम सशक्त स्थाई समिति के नव निर्वाचित सदस्यों के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, सभी सदस्यों ने निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का संकल्प लिया।1
- आज हुई पहली बारिश ने दरभंगा नगर निगम के विकास के दावों की पूरी तरह पोल खोल दी है, जिससे दरभंगा और लहेरियासराय की जनता सीधे सवाल पूछ रही है कि क्या शहर का विकास केवल कागजों पर ही हो रहा है या फिर यह नगर निगम की वातानुकूलित कमरों वाली बैठकों तक ही सीमित है। स्थिति यह है कि लहेरियासराय से लेकर पूरे दरभंगा की मुख्य सड़कें टापू में बदल गई हैं और घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे लोग बेहाल हैं। हद तो तब हो गई जब बच्चों के खेलने वाले पार्क भी पूरी तरह जलमग्न हो गए, जहाँ बच्चों को होना चाहिए था, वहाँ आज नगर निगम की नाकामी का पानी तैर रहा है। इस नारकीय स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि जनता को कब तक इस समस्या से निजात मिलेगी, या हर बारिश में दरभंगा इसी तरह डूबता रहेगा। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या नगर निगम की बड़ी-बड़ी बैठकें केवल चाय-समोसे खाने और कागज़ी कोरम पूरा करने के लिए ही होती हैं।1