*यूपी |मेरठ की प्रमुख सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व अब नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यहां 44 बिल्डिंग गिराई जानी हैं।* इन बिल्डिंगों में कई सौ दुकानें हैं। दरअसल, वर्ष 1978 में आवास विकास ने यहां रेजिडेंशियल प्लॉट काटे थे। लोगों ने प्लॉट मर्ज करके बड़े–बड़े कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिए। 1990 में जब एक अधिकारी ने निर्माण रुकवाने का प्रयास किया तो व्यापारियों ने उसे थप्पड़ मार दिया। अधिकारी को ये थप्पड़ इतना चुभा कि वो इस केस को अदालत तक ले गया। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। SC ने 17 सितंबर 2025 को सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश कर दिए। सेंट्रल मार्केट BJP का गढ़ है। BJP नेताओं ने कुछ महीनों पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर मेरठ कमिश्नर से ये आदेश करवा लिया कि अब ध्वस्तीकरण नहीं होगा। SC को ये बात पता चली तो कमिश्नर को भी फटकार मिली। स्थिति ये है कि SC के सामने सब बेबस हो गए हैं। न अधिकारी मदद कर पा रहे, न सरकार। 40 साल पहले जिन सैकड़ों लोगों ने सेंट्रल मार्केट में काम–धंधे शुरू किए थे, वो आज उसे खाली करके जाने मजबूर हैं। एक ही झटके में सैकड़ों व्यापारी सड़क पर आकर शून्य हो गए हैं। व्यापारी रो रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। उम्मीद न के बराबर है कि उन्हें कोई राहत मिलेगी।
*यूपी |मेरठ की प्रमुख सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व अब नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यहां 44 बिल्डिंग गिराई जानी हैं।* इन बिल्डिंगों में कई सौ दुकानें हैं। दरअसल, वर्ष 1978 में आवास विकास ने यहां रेजिडेंशियल प्लॉट काटे थे। लोगों ने प्लॉट मर्ज करके बड़े–बड़े कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिए। 1990 में जब एक अधिकारी ने निर्माण रुकवाने का प्रयास किया तो व्यापारियों ने उसे थप्पड़ मार दिया। अधिकारी को ये थप्पड़ इतना चुभा कि वो इस केस को अदालत तक ले गया। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। SC ने 17 सितंबर 2025 को सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश कर दिए। सेंट्रल मार्केट BJP का गढ़ है। BJP नेताओं ने कुछ महीनों पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर मेरठ कमिश्नर से ये आदेश करवा लिया कि अब ध्वस्तीकरण नहीं होगा। SC को ये बात पता चली तो कमिश्नर को भी फटकार मिली। स्थिति ये है कि SC के सामने सब बेबस हो गए हैं। न अधिकारी मदद कर पा रहे, न सरकार। 40 साल पहले जिन सैकड़ों लोगों ने सेंट्रल मार्केट में काम–धंधे शुरू किए थे, वो आज उसे खाली करके जाने मजबूर हैं। एक ही झटके में सैकड़ों व्यापारी सड़क पर आकर शून्य हो गए हैं। व्यापारी रो रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। उम्मीद न के बराबर है कि उन्हें कोई राहत मिलेगी।
- इन बिल्डिंगों में कई सौ दुकानें हैं। दरअसल, वर्ष 1978 में आवास विकास ने यहां रेजिडेंशियल प्लॉट काटे थे। लोगों ने प्लॉट मर्ज करके बड़े–बड़े कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिए। 1990 में जब एक अधिकारी ने निर्माण रुकवाने का प्रयास किया तो व्यापारियों ने उसे थप्पड़ मार दिया। अधिकारी को ये थप्पड़ इतना चुभा कि वो इस केस को अदालत तक ले गया। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। SC ने 17 सितंबर 2025 को सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश कर दिए। सेंट्रल मार्केट BJP का गढ़ है। BJP नेताओं ने कुछ महीनों पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर मेरठ कमिश्नर से ये आदेश करवा लिया कि अब ध्वस्तीकरण नहीं होगा। SC को ये बात पता चली तो कमिश्नर को भी फटकार मिली। स्थिति ये है कि SC के सामने सब बेबस हो गए हैं। न अधिकारी मदद कर पा रहे, न सरकार। 40 साल पहले जिन सैकड़ों लोगों ने सेंट्रल मार्केट में काम–धंधे शुरू किए थे, वो आज उसे खाली करके जाने मजबूर हैं। एक ही झटके में सैकड़ों व्यापारी सड़क पर आकर शून्य हो गए हैं। व्यापारी रो रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। उम्मीद न के बराबर है कि उन्हें कोई राहत मिलेगी।1
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