अब नए सिरे से होगी एलियंस की तलाश , क्या चकमा देने में माहिर होते हैं एलियंस अथक प्रयासों के बावजूद ब्रह्मांड में एलियन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। हो सकता है कि एलियंस चकमा देने में माहिर हो। मगर अब जो शोध आया है वह कहता है कि इनकी तलाश जीवनयोग्य ग्रहों से परे करनी होगी और खोज का दायरा भी बढ़ाना होगा। ग्रहों की जलवायु को लेकर नया शोध आया है, हेबरेव यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूशलम के वैज्ञानिकों ने एलियंस की तलाश में नई राह सुझाई है। एलियंस के अस्तित्व को लेकर किस्से कहानियां आम हैं। भारत में भी इनका जिक्र उड़नतश्तरियों के रूप में किया जाता रहा है। मगर कोई सबूत न होने के कारण इनके अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह आज भी लगा हुआ है। इनकी तलाश में नासा जैसी स्पेस एजेंसी की विंग सेटी जैसी संस्था कई दशकों से अध्ययनरत है, जबकि केप्लर जैसा अंतरिक्ष यान इनकी तलाश में ब्रह्मांड की खाक छानने में जुटा हुआ है। एलियंस की तलाश में अभी तक हजारों ग्रहों को खोज हो चुकी है। मगर एलियन की तलाश आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इस दिशा में हेबरेव यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूशलम के वैज्ञानिकों का शोध सामने आया है। यह जलवायु पर आधारित है, जो बताता है कि दूसरे ग्रहों के प्राणी यानी एलियंस किसी भी अवस्था में जी सकते हैं। जरूरी नहीं है कि उनके लिए पृथ्वी जैसे वातावरण की जरूरत है। अभी तक की खोज में उन्हीं ग्रहों पर अध्ययन हुए हैं, जो पृथ्वी के समान जीवनयोग्य हों। मगर एलियंस की तलाश में यह धारणा नहीं की जा सकती है। वह जीवनयोग्य जोन से बाहर कंही भी जी सकते हैं। इसलिए अब उनकी तलाश का दायरा हमें बढ़ाना होगा। वह बर्फ के भीतर भी हो सकते हैं या फिर गर्म क्षेत्र में भी हो सकते हैं। लिहाजा अब वैज्ञानिकों को उन ग्रहों पर भी तलाश करनी होगी, जिन्हें नजरअंदाज कर चुके हैं। एलियंस को लेकर एक धारणा रही है कि वह हमसे कहीं अधिक बुद्धिमान हैं। इसके पीछे कारण बताए जाते हैं कि वह पलक झपकते ही मीलों सफ़र तय कर जाते हैं। आँखों को चौंधिया देने वाली रोशनी के साथ आते हैं। वह इतने बलशाली हैं कि पृथ्वी से किसीको भी उठाकर अपने साथ ले जा सकते हैं। इन तथ्यों की वास्तविकता अभी भी रहस्य बनी हुई है।
अब नए सिरे से होगी एलियंस की तलाश , क्या चकमा देने में माहिर होते हैं एलियंस अथक प्रयासों के बावजूद ब्रह्मांड में एलियन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। हो सकता है कि एलियंस चकमा देने में माहिर हो। मगर अब जो शोध आया है वह कहता है कि इनकी तलाश जीवनयोग्य ग्रहों से परे करनी होगी और खोज का दायरा भी बढ़ाना होगा। ग्रहों की जलवायु को लेकर नया शोध आया है, हेबरेव यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूशलम के वैज्ञानिकों ने एलियंस की तलाश में नई राह सुझाई है। एलियंस के अस्तित्व को लेकर किस्से कहानियां आम हैं। भारत में भी इनका जिक्र उड़नतश्तरियों के रूप में किया जाता रहा है। मगर कोई सबूत न होने के कारण इनके अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह आज भी लगा हुआ है। इनकी तलाश में नासा जैसी स्पेस एजेंसी की विंग सेटी जैसी संस्था कई दशकों से अध्ययनरत है, जबकि केप्लर जैसा अंतरिक्ष यान इनकी तलाश में ब्रह्मांड की खाक छानने में जुटा हुआ है। एलियंस की तलाश में अभी तक हजारों ग्रहों को खोज हो चुकी है। मगर एलियन की तलाश आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इस दिशा में हेबरेव यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूशलम के वैज्ञानिकों का शोध सामने आया है। यह जलवायु पर आधारित है, जो बताता है कि दूसरे ग्रहों के प्राणी यानी एलियंस किसी भी अवस्था में जी सकते हैं। जरूरी नहीं है कि उनके लिए पृथ्वी जैसे वातावरण की जरूरत है। अभी तक की खोज में उन्हीं ग्रहों पर अध्ययन हुए हैं, जो पृथ्वी के समान जीवनयोग्य हों। मगर एलियंस की तलाश में यह धारणा नहीं की जा सकती है। वह जीवनयोग्य जोन से बाहर कंही भी जी सकते हैं। इसलिए अब उनकी तलाश का दायरा हमें बढ़ाना होगा। वह बर्फ के भीतर भी हो सकते हैं या फिर गर्म क्षेत्र में भी हो सकते हैं। लिहाजा अब वैज्ञानिकों को उन ग्रहों पर भी तलाश करनी होगी, जिन्हें नजरअंदाज कर चुके हैं। एलियंस को लेकर एक धारणा रही है कि वह हमसे कहीं अधिक बुद्धिमान हैं। इसके पीछे कारण बताए जाते हैं कि वह पलक झपकते ही मीलों सफ़र तय कर जाते हैं। आँखों को चौंधिया देने वाली रोशनी के साथ आते हैं। वह इतने बलशाली हैं कि पृथ्वी से किसीको भी उठाकर अपने साथ ले जा सकते हैं। इन तथ्यों की वास्तविकता अभी भी रहस्य बनी हुई है।
- विडियो देखें- हरिद्वार (उत्तराखंड) ज्वालापुर पुलिस का “ऑपरेशन प्रहार” के तहत बड़ा एक्शन देखने को मिला। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले 39 लोगों पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। रेलवे रोड समेत कई इलाकों में छापेमारी कर आरोपियों को हिरासत में लिया गया। साथ ही रेट्रो साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगी बुलेट मोटरसाइकिल भी सीज की गई। पुलिस ने साफ चेतावनी दी—खुले में जाम छलकाया तो अब बख्शा नहीं जाएगा।1
- *हल्द्वानी- जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हरिपुरा तुलाराम राजस्व गांव में की रबी फसल की क्रॉप कटिंग* *क्रॉप कटिंग के प्रयोग के आधार पर ही जिले में फसलों की औसत उपज, उत्पादन, उत्पादकता के आंकड़े किए जाते हैं तैयार-जिलाधिकारी* हल्द्वानी 4 अप्रैल 2026 सूवि। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने शनिवार को हल्द्वानी तहसील के ग्राम हरिपुरा तुलाराम राजस्व गांव में रबी की फसल में क्रॉप कटिंग प्रयोग कराया संपन्न जिलाधिकारी द्वारा किसान नागेंद्र सिंह पुत्र गोपाल सिंह के खेत में 43.3 वर्ग मीटर के प्लाट पर जाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत रबी पर फसल कटाई प्रयोग किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों द्वारा उत्पादित की जा रही फसलों के बारे में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने स्थानीय कृषकों को फसल क्षति से होने वाली हानि से बचने के लिए फसल बीमा कराने हेतु परामर्श दिया। *मौके पर जिलाधिकारी द्वारा फसल कटाई की प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि क्रॉप कटिंग कार्य पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संपादित किया जाए, जिससे फसल उत्पादन का सही आकलन सुनिश्चित हो सके।* जिलाधिकारी ने कहा कि क्रॉप कटिंग कृषि क्षेत्र में फसल उत्पादन के वैज्ञानिक एवं वास्तविक आकलन का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से प्रति हेक्टेयर उपज का सटीक आंकलन प्राप्त होता है, जो शासन द्वारा समर्थन मूल्य निर्धारण, खाद्यान्न खरीद एवं विभिन्न कृषि योजनाओं के संचालन में सहायक होता है। साथ ही, यह प्रक्रिया Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana के अंतर्गत किसानों को क्षतिपूर्ति (बीमा दावा) प्रदान करने का आधार भी बनती है। इस दौरान तहसीलदार कुलदीप पाण्डे, कानूनगो बृजेश कुमार, राजस्व उप निरीक्षक अरुण वर्मा, अपर सांख्यिकी अधिकारी महेन्द्र सिंह डांगी एवं मीना नेगी तथा बीमा कंपनी एजेंट हेम सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- ऋषिकेश में हुई यह शर्मनाक घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है।1
- Post by Jagdish Ballabh Sharma1
- अल्मोड़ा। कचहरी बाजार स्थित स्व. जनरल बीसी जोशी सभागार में रेड क्रॉस सोसाइटी अल्मोड़ा की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनहित से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। शुक्रवार को आयोजित बैठक की शुरुआत पूर्व में जिलाधिकारी अंशुल सिंह के साथ हुई बैठक की समीक्षा से हुई और उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। बैठक में रेड क्रॉस की गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने और टैक्सी चालकों को सीपीआर प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया। साथ ही 15 स्ट्रेचर, दो व्हीलचेयर और सीपीआर प्रशिक्षण के लिए एक डमी खरीदने पर सहमति बनी। नगर में शव वाहन की कमी को देखते हुए रेड क्रॉस द्वारा शव वाहन खरीदने और इसके लिए बैंक व दानदाताओं से संपर्क करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा स्कूलों में रेड क्रॉस गतिविधियों को बढ़ाने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिलने की बात कही गई। प्रत्येक विकासखंड में रेड क्रॉस स्वयंसेवकों की आपदा टीम गठित करने का निर्णय लिया गया, जो आपदा प्रबंधन टीम के साथ समन्वय कर कार्य करेगी। मेडिकल कॉलेज में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट से मरीजों को सहायता पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में भविष्य में रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया गया। साथ ही दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले सहायता प्रस्तावों पर प्रभावी तरीके से कार्य करने की रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में जिला रेड क्रॉस चेयरमैन आशीष वर्मा, राज्य उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, कोषाध्यक्ष दीप जोशी, पार्षद अमित साह मोनू, मनोज भंडारी, अर्जुन सिंह बिष्ट, अभिषेक जोशी, डॉ. जेसी दुर्गापाल, ललित मोहन जोशी, मोहन चंद्र कांडपाल, आनंद सिंह बगड़वाल, कृष्ण बहादुर सिंह और अनूप साह सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।1
- यह कहानी है अटूट साहस, आधुनिक चिकित्सा की सर्वोच्च निपुणता और भगवान के रूप में धरती पर मौजूद एक डॉक्टर के जादुई हाथों की।1
- इस बच्चे को फ़ौजी ललित मोहन जोशी का पूरा गीत याद... एक्टिंग भी एक दम बिंदास...1
- विडियो देखें- बिहार बेगुसराय में 30 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख। किसानों में मचा हाहाकार, पल भर में लहलहाती गेहूं की फसल को राख के ढेर।1