बिहार के नालंदा जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी राजगीर में प्रसिद्ध मलमास मेला 2026 इस वर्ष भी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और मनोरंजन प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रत्येक तीन वर्ष पर लगने वाला यह मेला अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक मेले की भव्यता का आनंद लेने पहुँच रहे हैं। मेले का शुभारंभ 17 मई 2026 को राज्य सरकार के वरिष्ठ नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान दिल्ली से स्वतंत्र विचारक एवं समाजसेवी विजय प्रधान अपने परिवार के साथ राजगीर मलमास मेला देखने पहुँचे। उन्होंने बताया कि वर्षों से इस मेले को देखने की उनकी इच्छा इस बार पूरी हुई। विजय प्रधान ने अपने परिवार के साथ पूरे मेले का भ्रमण किया और वहाँ के धार्मिक व सांस्कृतिक वातावरण का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने यह भी बताया कि राजगीर के चर्चित समाजसेवी मुन्ना लाल उनके साढ़ू हैं और उनकी पत्नी नूतन देवी जिला परिषद प्रतिनिधि हैं, जिनके मार्गदर्शन और आतिथ्य में उनके पूरे परिवार को मेले का भ्रमण करने का अवसर मिला। विजय प्रधान ने राजगीर की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक महत्व और मेले की शानदार व्यवस्था की सराहना की। मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मनोरंजन के विविध साधन भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। शाम होते ही पूरा मेला रंग-बिरंगी रोशनी और लोगों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है। यहाँ लगे झूले, सर्कस, जादूघर, थिएटर और विशेष रूप से 'मौत का कुआं' मुख्य आकर्षण बने हुए हैं, जहाँ बाइक और कार चालकों के रोमांचक करतब दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। जादूघर में जादूगरों के अद्भुत प्रदर्शन बच्चों और बड़ों को समान रूप से पसंद आ रहे हैं, वहीं थिएटर में प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खिलौनों की दुकानें, खानपान के स्टॉल और विभिन्न मनोरंजन साधन भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। मेले में परिवार और दोस्तों के साथ पहुँचे लोग उत्साहपूर्वक आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं, खासकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु एवं पर्यटक सुरक्षित वातावरण में मेले का लुत्फ उठा सकें। कुल मिलाकर, राजगीर मलमास मेला 2026 आस्था, संस्कृति, पर्यटन और मनोरंजन का एक अद्भुत संगम बनकर लोगों को अपनी ओर खींच रहा है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।
बिहार के नालंदा जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी राजगीर में प्रसिद्ध मलमास मेला 2026 इस वर्ष भी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और मनोरंजन प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रत्येक तीन वर्ष पर लगने वाला यह मेला अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक मेले की भव्यता का आनंद लेने पहुँच रहे हैं। मेले का शुभारंभ 17 मई 2026 को राज्य सरकार के वरिष्ठ नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान दिल्ली से स्वतंत्र विचारक एवं समाजसेवी विजय प्रधान अपने परिवार के साथ राजगीर मलमास मेला देखने पहुँचे। उन्होंने बताया कि वर्षों से इस मेले को देखने की उनकी इच्छा इस बार पूरी हुई। विजय प्रधान ने अपने परिवार के साथ पूरे मेले का भ्रमण किया और वहाँ के धार्मिक व सांस्कृतिक वातावरण का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने यह भी बताया कि राजगीर के चर्चित समाजसेवी मुन्ना लाल उनके साढ़ू हैं और उनकी पत्नी नूतन देवी जिला परिषद प्रतिनिधि हैं, जिनके मार्गदर्शन और आतिथ्य में उनके पूरे परिवार को मेले का भ्रमण करने का अवसर मिला। विजय प्रधान ने राजगीर की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक महत्व और मेले की शानदार व्यवस्था की सराहना की। मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मनोरंजन के विविध साधन भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। शाम होते ही पूरा मेला रंग-बिरंगी रोशनी और लोगों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है। यहाँ लगे झूले, सर्कस, जादूघर, थिएटर और विशेष रूप से 'मौत का कुआं' मुख्य आकर्षण बने हुए हैं, जहाँ बाइक और कार चालकों के रोमांचक करतब दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। जादूघर में जादूगरों के अद्भुत प्रदर्शन बच्चों और बड़ों को समान रूप से पसंद आ रहे हैं, वहीं थिएटर में प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खिलौनों की दुकानें, खानपान के स्टॉल और विभिन्न मनोरंजन साधन भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। मेले में परिवार और दोस्तों के साथ पहुँचे लोग उत्साहपूर्वक आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं, खासकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु एवं पर्यटक सुरक्षित वातावरण में मेले का लुत्फ उठा सकें। कुल मिलाकर, राजगीर मलमास मेला 2026 आस्था, संस्कृति, पर्यटन और मनोरंजन का एक अद्भुत संगम बनकर लोगों को अपनी ओर खींच रहा है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।
- ग्राम नीमचक के निवासी शंकर कुमार ने मसकौर पंचायत/प्रखंड के मुखिया/प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक पत्र लिखकर नीमचक से पसारही तक जाने वाली सड़क की गंभीर स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया है। इस पत्र में तत्काल सड़क के निर्माण या मरम्मत की मांग की गई है, क्योंकि यह मार्ग अत्यंत जर्जर और कच्चा है। पत्र के अनुसार, बरसात के दिनों में इस सड़क पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। इससे विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों और आम ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, कई स्थानों पर कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। जनहित को ध्यान में रखते हुए, शंकर कुमार ने मुखिया/प्रखंड विकास पदाधिकारी से इस महत्वपूर्ण सड़क का शीघ्र निर्माण या मरम्मत कराने का विनम्र अनुरोध किया है। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि इस कार्य के लिए वे सभी उनके आभारी रहेंगे। यह पत्र 05/06/2026 को लिखा गया है।1
- रजौली थाना अंतर्गत जोगिया मारन गांव में शराब के एक बड़े स्टॉक का भंडाफोड़ हुआ है। उत्पाद विभाग की टीम ने एक घर में छापा मारकर लाखों रुपये की बियर और शराब बरामद की है।1
- राजगीर के ऐतिहासिक मलमास मेले में उस समय हलचल मच गई, जब प्रसिद्ध अजंता सर्कस के संचालकों ने उसे बंद करने की घोषणा कर दी। सर्कस प्रबंधन ने आरोप लगाया था कि प्रतिदिन सैकड़ों पास देने के बावजूद, बड़ी संख्या में लोग जबरन सर्कस में प्रवेश कर रहे थे, जिससे पूरी व्यवस्था बाधित हो रही थी। इस स्थिति से नाराज़ होकर, सर्कस मालिक ने अपना सारा सामान समेटने की तैयारी शुरू कर दी थी और यह भी कहा था कि वे भविष्य में कभी राजगीर नहीं आएंगे। मामले की गंभीरता को समझते हुए, पुलिस प्रशासन और मेला प्रबंधन तुरंत सक्रिय हो उठा। अधिकारियों और मेला ठेकेदार द्वारा दिए गए आश्वासनों के बाद, सर्कस प्रबंधन ने अपना फैसला वापस ले लिया। इसके तुरंत बाद, टिकटों की बिक्री फिर से शुरू हुई और दर्शकों की भारी भीड़ सर्कस देखने के लिए उमड़ने लगी। अजंता सर्कस को राजगीर मलमास मेले का एक प्रमुख आकर्षण माना जाता है, और इसके दोबारा शुरू होने से दर्शकों में खुशी का माहौल लौट आया है, जिससे मेले की रौनक भी वापस आ गई है।1
- 1995 के तारापुर कांड में सम्राट चौधरी का नाम हत्या के एक मामले में आरोपियों के तौर पर सामने आया था। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, उस मामले में उन पर हत्या के आरोप लगाए गए थे और उनका नाम एफआईआर में भी शामिल किया गया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे जेल भी गए। हालांकि, उन्हें उस मामले में अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया था। बाद की जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके चलते उन्हें दोषी करार नहीं दिया गया। इसलिए, यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि उन्होंने किस प्रकार से मर्डर किया था, क्योंकि न्यायालय द्वारा यह सिद्ध नहीं हुआ था। यह मामला आज भी बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- बिहार के शिक्षा मंत्री ने हाल ही में TRE-4 नोटिफिकेशन की घोषणा की है, जिससे BPSC शिक्षक अभ्यर्थियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। इस ऐलान के साथ, आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह है और उन्हें 'दोहरी खुशी' मिलने की उम्मीद है। यह कदम राज्य में रोजगार और सरकारी नौकरियों के अवसर तलाश रहे शिक्षक उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।1
- पत्रकार रवीश कुमार 'काक्रोच जनता पार्टी' के खुले समर्थन में सामने आए हैं।1
- राजगीर में चल रहे मलमास मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, खासकर यहां के कुंडों में। राजगीर में कुल 22 कुंड हैं, जिनमें से 21 कुंडों में गर्म जल प्रवाहित होता है, जबकि गुरु नानक शीतल कुंड एकमात्र ऐसा कुंड है जिसमें ठंडा पानी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिख धर्म के प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी ने अपने शिष्यों की प्यास बुझाने के लिए इसी स्थान पर शीतल जल प्रकट किया था। आज यह गुरु नानक शीतल कुंड श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, और लोग इसके इतिहास, धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी अद्भुत कथा को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।1
- एक अनोखी और हैरतअंगेज़ घटना सामने आई है, जहाँ एक भांजे और उसकी सगी मौसी को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। इस मामले में, नाती के नाना ने ही उन्हें रंगे हाथों पकड़ा। इसके बाद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए, नाना ने अपनी ही बेटी और नाती की शादी करवा दी।1