कैंडी में स्थित अजयपार सरकार का यह दरबार इन दिनों बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहाँ दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं—चाहे वे शारीरिक हों, मानसिक हों या फिर तथाकथित “ऊपरी बाधा”—का समाधान पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। शनिवार को विशेष रूप से भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्तियों से प्रभावित माने जाने वाले लोगों के लिए दरबार लगता है, जबकि रविवार और बुधवार को बीमारियों से पीड़ित लोग अपनी आस्था लेकर यहाँ आते हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक दावा करते हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी उन्हें राहत मिली है। लेकिन सवाल यह उठता है? कि आखिर यह क्या है—आस्था, विश्वास, कोई विशेष कला, या फिर पाखंड? भारतीय समाज में आस्था की जड़ें बहुत गहरी रही हैं। जब आधुनिक चिकित्सा या व्यवस्था से निराशा हाथ लगती है, तब लोग वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख करते हैं। ऐसे दरबार लोगों को एक मानसिक सहारा देते हैं—उम्मीद देते हैं, जो कई बार व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उसे बेहतर महसूस करा सकती है। इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता, क्योंकि मनोवैज्ञानिक प्रभाव का इंसान की सेहत पर गहरा असर होता है। वहीं दूसरी ओर, बिना वैज्ञानिक प्रमाण के गंभीर बीमारियों के ठीक होने के दावे चिंताजनक भी हैं। अगर लोग चिकित्सा उपचार छोड़कर केवल ऐसे दरबारों पर निर्भर हो जाएं, तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। यही वह बिंदु है जहाँ आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। संतुलित दृष्टिकोण यही कहता है कि आस्था व्यक्ति का निजी विषय है—जिससे उसे मानसिक शांति मिलती है, वह महत्वपूर्ण है। लेकिन स्वास्थ्य जैसे गंभीर मामलों में वैज्ञानिक चिकित्सा को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है। अंततः, यह दरबार किसी के लिए आस्था का केंद्र हो सकता है, तो किसी के लिए सवालों का विषय। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है—जहाँ विश्वास भी है, और विवेक की जरूरत भी। #AjaypaarSarkarDarbar #KandyDarbar #AasthaYaAndhvishwas #FaithVsScience #BreakingNews #IndiaNews #PublicReaction #HealthAwareness #ViralNews #GroundReport #SachYaDawa #SocialIssue #JantaKiBaat #RealityCheck
कैंडी में स्थित अजयपार सरकार का यह दरबार इन दिनों बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहाँ दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं—चाहे वे शारीरिक हों, मानसिक हों या फिर तथाकथित “ऊपरी बाधा”—का समाधान पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। शनिवार को विशेष रूप से भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्तियों से प्रभावित माने जाने वाले लोगों के लिए दरबार लगता है, जबकि रविवार और बुधवार को बीमारियों से पीड़ित लोग अपनी आस्था लेकर यहाँ आते हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक दावा करते हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी उन्हें राहत मिली है। लेकिन सवाल यह उठता है? कि आखिर यह क्या है—आस्था, विश्वास, कोई विशेष कला, या फिर पाखंड? भारतीय समाज में आस्था की जड़ें बहुत गहरी रही हैं। जब आधुनिक चिकित्सा या व्यवस्था से निराशा हाथ लगती है, तब लोग वैकल्पिक रास्तों की ओर रुख करते हैं। ऐसे दरबार लोगों को एक मानसिक सहारा देते हैं—उम्मीद देते हैं, जो कई बार व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उसे बेहतर महसूस करा सकती है। इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता, क्योंकि मनोवैज्ञानिक प्रभाव का इंसान की सेहत पर गहरा असर होता है। वहीं दूसरी ओर, बिना वैज्ञानिक प्रमाण के गंभीर बीमारियों के ठीक होने के दावे चिंताजनक भी हैं। अगर लोग चिकित्सा उपचार छोड़कर केवल ऐसे दरबारों पर निर्भर हो जाएं, तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। यही वह बिंदु है जहाँ आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। संतुलित दृष्टिकोण यही कहता है कि आस्था व्यक्ति का निजी विषय है—जिससे उसे मानसिक शांति मिलती है, वह महत्वपूर्ण है। लेकिन स्वास्थ्य जैसे गंभीर मामलों में वैज्ञानिक चिकित्सा को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है। अंततः, यह दरबार किसी के लिए आस्था का केंद्र हो सकता है, तो किसी के लिए सवालों का विषय। सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है—जहाँ विश्वास भी है, और विवेक की जरूरत भी। #AjaypaarSarkarDarbar #KandyDarbar #AasthaYaAndhvishwas #FaithVsScience #BreakingNews #IndiaNews #PublicReaction #HealthAwareness #ViralNews #GroundReport #SachYaDawa #SocialIssue #JantaKiBaat #RealityCheck
- Post by Mukesh Gautam1
- बागेश्वर धाम से दर्शन कर अपने घर लौट रहे टीकमगढ़ जिले के दंपत्ति की बाइक का गाड़ी के पास ई रिक्शा से टकरा गई जिसमें पति की मौत हो गई वही पत्नी घायल हुई जिनका उपचार जिला अस्पताल में जारीहै।1
- मृतक के परिजनों का आरोप है कि दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अभी भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई इसी को लेकर मृतक के परिजन आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने न्याय की मांग की ।1
- राजनगर स्वास्थ्य केंद्र का नीति आयोग दिल्ली की टीम ने किया निरीक्षण छतरपुर जिला के राजनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नीति आयोग दिल्ली की टीम ने निरीक्षण किया। नीति आयोग दिल्ली दधीच इन्द्रोडिया ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ अवधेश चतुर्वेदी के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-राजनगर में उपलब्ध 37 विभिन्न विभागों, कमरों और सेवाओं का निरीक्षण किय, जिसमें चिकित्सक कक्ष, पैथोलॉजी लैब और दवा वितरण, प्रसव कक्ष, टीकाकरण केंद्र,लेप्रोसी कक्ष, बोर्ड प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए कमरे,कम्प्यूटर कक्ष, एनआरसी, रसोईघर का निरीक्षण करते हुए सभी उपस्थित कर्मचारियों को समझाइश देते हुए कहा कि आप लोगों की सेवाओं से देश स्वस्थ और विकसित भारत की और अग्रसर हो रहा है आप सभी को बधाई देता हूं, साथ ही बीएमओ डॉ अवधेश चतुर्वेदी जी को अस्पताल में साफ सफाई, मरीजों को अच्छी सुविधाएं देने के लिए बधाई दी और कहा आप सभी की विकसित भारत में अहम भूमिका है। दधीच इन्द्रोडिया ने बताया कि खजुराहो अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्रों का भी निरीक्षण किया है। बीएमओ डॉ अवधेश चतुर्वेदी, डॉ अरविंद्र गुप्ता,डॉ महबूब सलमान, संतोषी यादव स्टाफ नर्स, एम एल परते बीईई, पुष्पेंद्र पटेल फार्मासिस्ट, सोनू यादव एनआरसी, यशोदा रैकवार एएनएम सहित समस्त स्टाफ मौजूद रहे।1
- छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पीड़ित पप्पू अहिरवार का आरोप है कि उनकी जमीन पर दबंगों ने जबरन कब्जा करने की कोशिश की और विरोध करने पर ट्रैक्टर चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश की गई। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। इस वीडियो में देखें पीड़ित का बयान और मौके के दृश्य। 👉 क्या इस मामले में होगी सख्त कार्रवाई? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।1
- छतरपुर जिले में सार्वजनिक कुएं के निर्माण कार्य में मजदूरी भुगतान न होने का मामला सामने आया है। ग्राम निवार, तहसील बक्सवाहा निवासी गब्बर सिंह लोधी ने आज 05 मई दोपहर करीब 12:30 बजे जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देकर बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है।आवेदन में बताया गया कि ग्राम पंचायत चौर्ड के अंतर्गत ग्राम शेखसेमरा में सार्वजनिक कुएं का निर्माण कराया गया था। सरपंच पति देवेंद्र यादव के कहने पर उन्होंने अपने गांव से मजदूर और जुगाड़ मशीन की व्यवस्था कराई। करीब 25 फीट गहराई और 40 फीट चौड़ाई तक खुदाई का काम कराया गया।शिकायतकर्ता के अनुसार मजदूरी, जुगाड़ मशीन और अन्य खर्च मिलाकर कुल 3,23,350 रुपये हुए, जिसमें से उन्हें केवल 1,61,000 रुपये ही दिए गए। शेष 1,62,350 रुपये अब भी बकाया हैं। कई बार मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।उन्होंने यह भी बताया कि जिन मजदूरों और मशीन मालिकों को साथ लाया गया था, वे अब उनसे ही पैसे की मांग कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।पीड़ित ने जिला पंचायत प्रशासन से मामले की जांच कर बकाया मजदूरी का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है।1
- Post by Neelesh Tiwari1
- Post by Mukesh Gautam1