झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड की उदनि पंचायत के अंतर्गत स्थित हसुवा टोली गांव आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आज तक बिजली, शुद्ध पेयजल, पक्की सड़क और पुलिया जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय से अत्यधिक दूरी और सुदूर पठारी क्षेत्र में स्थित होने के कारण उनका गांव लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उनके अनुसार, पूर्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी दो बार गांव पहुंचे थे और समस्याओं के समाधान का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों को लगता है कि उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। बरसात के दिनों में गांव की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि गांव के समीप बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण जलस्तर बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। पेयजल संकट इतना गहरा है कि कई बार लोगों को घरों की छत से टपकने वाले बारिश के पानी को छानकर पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा, गांव में न तो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है और न ही बाल विकास से जुड़ी अन्य योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव छोटे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसी वजह से गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। हसुवा टोली के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपायुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी से गांव की समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की है, जिसमें शुद्ध पेयजल व्यवस्था, विद्युतीकरण, सड़क निर्माण और नदी पर पुलिया निर्माण शामिल है। इस दौरान अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वालों में मोनिका लकड़ा, इग्नेशियुष लकड़ा, सरिता बैंग, फ्रांसिस्का लकड़ा, कुंवर गिद्ध, अशोक लकड़ा, निर्मल लकड़ा, यूजीन लकड़ा, गुलाबी, सुशील लकड़ा और रॉबिन लकड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड की उदनि पंचायत के अंतर्गत स्थित हसुवा टोली गांव आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आज तक बिजली, शुद्ध पेयजल, पक्की सड़क और पुलिया जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय से अत्यधिक दूरी और सुदूर पठारी क्षेत्र में स्थित होने के कारण उनका गांव लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उनके अनुसार, पूर्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी दो बार गांव पहुंचे थे और समस्याओं के समाधान का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों को लगता है कि उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। बरसात के दिनों में गांव की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि गांव के समीप बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण जलस्तर बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। पेयजल संकट इतना गहरा है कि कई बार लोगों को घरों की छत से टपकने वाले बारिश के पानी को छानकर पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा, गांव में न तो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है और न ही बाल विकास से जुड़ी अन्य योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव छोटे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसी वजह से गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। हसुवा टोली के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपायुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी से गांव की समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग की है, जिसमें शुद्ध पेयजल व्यवस्था, विद्युतीकरण, सड़क निर्माण और नदी पर पुलिया निर्माण शामिल है। इस दौरान अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वालों में मोनिका लकड़ा, इग्नेशियुष लकड़ा, सरिता बैंग, फ्रांसिस्का लकड़ा, कुंवर गिद्ध, अशोक लकड़ा, निर्मल लकड़ा, यूजीन लकड़ा, गुलाबी, सुशील लकड़ा और रॉबिन लकड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
- गुमला में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय सभागार में जिला टास्क फोर्स (खनन), एनसीओआरडी (NCORD), सड़क सुरक्षा और कारा सुरक्षा से संबंधित एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अवैध खनन एवं खनिज परिवहन पर नियंत्रण, मादक पदार्थों की रोकथाम, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा मंडल कारा की सुरक्षा एवं आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद संबंधित विभागों को आवश्यक व कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। अवैध खनन और खनिज परिवहन के विषय पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बावजूद सभी संभावित बालू घाटों और नदी क्षेत्रों में नियमित छापामारी अभियान चलाकर अवैध बालू उत्खनन और परिवहन पर पूर्ण रोक सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में जिला टास्क फोर्स द्वारा संयुक्त रूप से नियमित निरीक्षण और कार्रवाई करने तथा प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के अंतर्गत कैटेगरी-11 के 18 बालू घाटों (एक इकाई) की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया पूरी कर सैद्धांतिक सहमति दी जा चुकी है, जिस पर उपायुक्त ने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों को ग्राम सभा की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि जिले में बालू उपलब्धता की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन में लगे वाहनों के चालान, ओवरलोडिंग एवं सुरक्षा मानकों की नियमित जांच करने तथा खनिजों को तिरपाल से ढँककर परिवहन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने सभी वृहत खनिज (बॉक्साइट) और लघु खनिज (पत्थर) क्षेत्रों में समाप्त हो चुके खनन पट्टों व चालू पट्टाक्षेत्र से बाहर होने वाले अवैध खनन पर सतत निगरानी रखने का निर्देश दिया। साथ ही, खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों की नियमित जांच कर बाउंड्री पिलर, साइन बोर्ड, क्रशर कवरिंग एवं अन्य वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया। मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए एनसीओआरडी की समीक्षा के दौरान, उपायुक्त ने जिले में व्यापक जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, सार्वजनिक एवं संवेदनशील स्थलों पर मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा जिले के बाहर से आने वाले मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने का आह्वान किया। कारा सुरक्षा की समीक्षा करते हुए, उपायुक्त ने मंडल कारा के नवनिर्मित भवनों को तुरंत हैंडओवर करने तथा विस्तारित कारा खंड में बंदियों को स्थानांतरित करने से पहले सीसीटीवी कैमरा और इलेक्ट्रिक फेंसिंग अनिवार्य रूप से स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने नवनिर्मित बंदी बैरकों में अधूरी निकासी व्यवस्था को पूर्ण करने, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने और प्रशासनिक भवन की छत पर क्षतिग्रस्त प्लास्टर की मरम्मत कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में मंडल कारा का समग्र सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय भी लिया गया। सड़क सुरक्षा की समीक्षा के तहत, उपायुक्त ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए व्यापक जन जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घायलों की सहायता कर अस्पताल पहुँचाने वाले ‘गुड सेमेरिटन’ व्यक्तियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में गुमला-पलमा रोड और पटेल चौक से चंडाली तक सड़क निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने एनएच-78 के दुर्घटना संभावित स्थलों पर हाई मास्क लाइट लगाने, ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में साइनेज और रोड लाइटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पेट्रोल पंपों पर ‘बिना हेलमेट तेल नहीं’ अभियान को सख्ती से लागू करने तथा प्रत्येक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र (PUC Center) स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। परिवहन विभाग को विशेष वाहन जांच अभियान चलाने, हेलमेट चेकिंग प्वाइंट विकसित करने तथा स्कूलों एवं महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान हिट एंड रन मामलों से संबंधित लंबित आवेदनों एवं राहत प्रकरणों की भी समीक्षा हुई। बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारीगण, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, जेल अधीक्षक, उत्पाद अधीक्षक, पुलिस विभाग के पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।2
- बुढ़िया करम पर्व की पूर्व संध्या पर गुमला जिले के डुमरी स्थित सरना धूमकुड़िया भवन परिसर में एक भव्य बुजुर्ग मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पचास से अधिक बुजुर्ग महिला एवं पुरुषों ने भाग लेकर समाज की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं को मजबूत करने का सशक्त संदेश दिया। समारोह के दौरान, समाज के वरिष्ठ बुद्धिजीवियों अकलू भगत, जगरनाथ भगत, रविशंकर भगत, सुमित्रा कुमारी और अन्नपूर्णा देवी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजन आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वक्ताओं ने समुदाय के लोगों से अपने विकास के प्रति सजग रहने और अपनी संस्कृति, परंपरा तथा विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने सरना धर्मस्थलों के संरक्षण, सामाजिक विकास, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डुमरी की महिलाओं द्वारा बुजुर्गों के चरण धोकर सम्मानपूर्वक स्वागत करने के साथ हुआ। इसके उपरांत, बुजुर्गों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और शांतिपूर्ण जीवन की कामना के लिए विशेष प्रार्थना की गई। इस समारोह को सफल बनाने में बेला देवी, मुखिया संजय उरांव, बीरेंद्र भगत, सुखमनी देवी, जसिंता देवी, बिमला कुजूर, फूलकुमारी देवी, गंगोत्री देवी, अजय भगत, मनोज उरांव, देवेश उरांव और लौंगी देवी सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह कार्यक्रम समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक प्रभावी संदेश देने में सफल रहा।1
- सोमवार को सिसई प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सभागार में निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, बसिया और प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिसई की अध्यक्षता में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को आगामी 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलने वाले घर-घर मतदाता गणना अभियान के लिए तैयार करना था, जिसमें उन्हें प्रत्येक मतदाता के घर जाकर गणना प्रपत्र देने और भरवाने की पूरी जानकारी दी गई। अभियान के दौरान बीएलओ की सहायता के लिए राजनीतिक दलों के बीएलए 2 और स्वयंसेवकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदाता से गणना प्रपत्र भरकर वापस लेते समय किसी भी प्रकार के दस्तावेज की माँग नहीं करेंगे। प्रशिक्षण में बीएलओ को गणना प्रपत्र भरने और उसे बीएलओ ऐप में अपलोड करने संबंधी विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। प्रशिक्षण सत्र में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सुधीर प्रकाश (बसिया), सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी रमेश कुमार यादव (सिसई), प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी सोमराई किंडो (सिसई), निर्वाचन शाखा से सुमित केशरी (सिसई), अनुमंडल कार्यालय बसिया की निर्वाचन शाखा से सौरभ गुप्ता, निर्वाचन पर्यवेक्षक (सिसई), और सिसई प्रखंड के सभी बीएलओ उपस्थित थे।1
- जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए अब पैसे खर्च करने की ज़रूरत नहीं है। 'नेचुरल वेदा' द्वारा मुफ्त फैट लॉस का अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें किसी भी प्रकार का कोई पैसा नहीं लगेगा।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के पारही डांडी टोली और अलौदी गांव में एक ही समुदाय के दो पक्षों के बीच शव जलाने और अंधविश्वास को लेकर एक विवाद उत्पन्न हो गया। प्रशासन को इस मामले की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी तत्काल श्मशान स्थल पर पहुँचे। उन्होंने वहाँ मौजूद दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद, थाना प्रभारी ने स्वयं शव को कंधा देकर पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार संपन्न कराने में सहयोग प्रदान किया, जिससे उन्होंने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की।1
- गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित रंजीत नारायण सिंह सरस्वती विद्या मंदिर कुदरा में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव रवींद्रनाथ अधिकारी, प्रधानाचार्य देवेंद्र वर्मा, समाजसेवी संजय वर्मा और योगगुरु गजराज महतो ने संयुक्त रूप से माँ भारती, माँ सरस्वती व ओम् के चित्रों पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विद्यालय के 162 विद्यार्थियों समेत भैया-बहनें, आचार्य-आचार्या और समिति के सदस्यों ने योगाभ्यास किया, जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति व योग जैसी अमूल्य धरोहर से जोड़कर एक स्वस्थ व संस्कारयुक्त समाज का निर्माण करना था, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। योगगुरु गजराज महतो के सानिध्य में विद्यालय परिसर में छात्रों ने विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्यवर्धक योग क्रियाएँ अत्यंत उत्साह के साथ कीं। प्रधानाचार्य देवेंद्र वर्मा के नेतृत्व में विद्या भारती द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, ध्यान और विभिन्न आसनों का क्रमबद्ध तरीके से अभ्यास किया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य देवेंद्र वर्मा ने योग को प्राचीन ऋषिमुनियों की अनमोल देन बताया, जो शरीर, मन तथा आत्मा को एक सूत्र में बांधता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि योग को प्रतिदिन की दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो एक व्यसनमुक्त, स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि योग के जनक महर्षि पतंजलि की योग क्रिया को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्रसभा में पूरे विश्व को अपनाने के लिए प्रमुखता से अपनी बात रखी, जिसके बाद 21 जून 2015 से पूरे विश्व ने योग को अपनाया और तभी से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। योगगुरु गजराज महतो ने योग के वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योग से मानसिक तनाव दूर होता है और उच्च रक्तचाप व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। इस खास दिन पर, विद्यालय परिसर में एलोविरा, गिलोय, सहजन जैसे कई औषधीय पौधे भी लगाए गए। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ और सभी भैया-बहनों के बीच चना-गुड़ का वितरण किया गया, जिससे निरोगी जीवन जीने का संदेश दिया गया।4
- झारखंड के लोहरदगा जिले के मिशन चौक में एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न पंचायतों, आरोग्य मंदिरों और सरकारी-गैर-सरकारी विद्यालयों में अहले सुबह से ही योग शिविरों का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, शिक्षकों एवं बच्चों ने सामूहिक योगाभ्यास करते हुए 'योग करें, निरोग रहें' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित योग शिविरों में स्थानीय मुखिया, वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वहीं, स्वास्थ्य उपकेंद्रों और आरोग्य मंदिरों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सहिया बहनों के नेतृत्व में विशेष योग सत्र चलाए गए। इस मौके पर स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को दैनिक जीवन में योग अपनाने के लाभों से अवगत कराया और उन्हें नियमित प्राणायाम करने की सलाह दी। प्रखंड के सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में भी छात्रों के लिए विशेष योग शिविर लगाए गए, जहाँ छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की देखरेख में विभिन्न योगासनों और ध्यान का अभ्यास किया। शिक्षकों ने जोर देकर कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता को भी बढ़ाता है। योग दिवस को लेकर पूरे चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में व्यापक उत्साह का माहौल देखने को मिला, जहाँ लोगों ने स्वस्थ एवं निरोग समाज के निर्माण के लिए नियमित योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया।1