कटघोरा में छात्रों का फूटा आक्रोश, मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कोरबा/कटघोरा (सुघर गांव)। कटघोरा स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शनिवार सुबह अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कटघोरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। सुबह 7 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने भोजन की गुणवत्ता, खाने में कीड़े मिलने, स्टाफ के कथित अभद्र व्यवहार और विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी के आरोप लगाए। छात्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे जनप्रतिनिधियों को भी उन्होंने अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा विद्यार्थियों से चर्चा कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास शुरू किया। फिलहाल मामले को लेकर वार्ता जारी है।
कटघोरा में छात्रों का फूटा आक्रोश, मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कोरबा/कटघोरा (सुघर गांव)। कटघोरा स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शनिवार सुबह अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कटघोरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। सुबह 7 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने भोजन की गुणवत्ता, खाने में कीड़े मिलने, स्टाफ के कथित अभद्र व्यवहार और विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी के आरोप लगाए। छात्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे जनप्रतिनिधियों को भी उन्होंने अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा विद्यार्थियों से चर्चा कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास शुरू किया। फिलहाल मामले को लेकर वार्ता जारी है।
- निजी विद्यालयों में पसरी अव्यवस्था , स्कूलों की सुरक्षा और सुविधा बहाल1
- अधूरी पुलिया बनी आफत: उफनती नदी में जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंच रहे मासूम, जिम्मेदारों की लापरवाही कब लेगी किसी की जान? *निर्माण कार्य में सुस्ती से ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, ठेकेदार और अधिकारियों पर गंभीर सवाल* *बरसात में पितनी नदी बनी मौत का रास्ता, रोजाना जोखिम उठाने को मजबूर स्कूली बच्चे और ग्रामीण* कोरबा। जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उतरदा और रामपुर के बीच बहने वाली पितनी नदी पर निर्माणाधीन पुल की धीमी रफ्तार अब आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। बरसात के मौसम में नदी उफान पर है, लेकिन पुल निर्माण अधूरा छोड़ दिए जाने से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। हालात इतने भयावह हैं कि तेज बहाव के बीच बच्चों का स्कूल जाना किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण महीनों पहले शुरू हुआ था, लेकिन कार्य की गति इतनी धीमी रही कि बरसात आने से पहले इसे पूरा नहीं किया जा सका। अब आधा-अधूरा पुल ग्रामीणों के किसी काम का नहीं है। दूसरी ओर नदी पूरे उफान पर है और मजबूरी में लोगों को तेज बहाव के बीच नदी पार करनी पड़ रही है। सबसे अधिक चिंता उन मासूम बच्चों की है, जो शिक्षा हासिल करने के लिए हर सुबह मौत से मुकाबला कर स्कूल पहुंचते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई बार छोटे-छोटे बच्चे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करते देखे गए। कई बच्चों के कंधों पर स्कूल बैग और पैरों के नीचे फिसलन भरे पत्थर—ऐसा दृश्य देखकर हर किसी की सांसें थम जाती हैं। जरा सी चूक किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और निर्माण एजेंसी अब भी गहरी नींद में दिखाई दे रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही ने पूरे क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। यदि कार्य समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाता तो आज लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करनी पड़ती। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार की सुस्त कार्यशैली पर किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है। हर दिन बना रहता है हादसे का डर बरसात के दौरान पितनी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नदी पार करना बेहद खतरनाक हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है, जिससे बच्चों और महिलाओं को संभालना मुश्किल हो जाता है। गांव के लोग एक-दूसरे का सहारा लेकर नदी पार करते हैं, लेकिन यह व्यवस्था कब तक चलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से नाराजगी ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि कागजों में विकास कार्य तेजी से पूरे होने का दावा किया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। अधूरी पुलिया आज पूरे क्षेत्र के लिए आफत बन चुकी है। शिक्षा पर भी पड़ रहा असर माता-पिता का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना मजबूरी बन गया है। कई अभिभावक डर के कारण बच्चों को घर पर ही रोक लेते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार की बात करने वाला प्रशासन पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा कराया जाए। साथ ही निर्माण में हुई देरी की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी और कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की होगी। *बड़ा सवाल...* *क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है?* क्या अधूरी पुलिया की कीमत ग्रामीणों की जिंदगी से चुकाई जाएगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सिर्फ फाइलों तक सीमित है? पितनी नदी पर अधूरी पुलिया आज सिर्फ एक अधूरा निर्माण कार्य नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते चेतता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और कार्रवाई का आश्वासन ही मिलता है।2
- त्योहार से पहले सरकार सख्त, चीनी की जमाखोरी पर लगेगी रोक अब एक जगह 4 हजार क्विंटल से ज्यादा चीनी रखने पर कार्रवाई, हर सप्ताह देना होगा स्टॉक का ब्योरा1
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- स्कूल में शर्मनाक कृत्य का आरोप, बच्चों की शिकायत पर प्रधान पाठक गिरफ्तार पामगढ़ के सरकारी प्राथमिक विद्यालय की घटना से मचा हड़कंप, वायरल वीडियो के बीच प्रशासन ने शुरू की सख्त कार्रवाई जांजगीर-चांपा (सुघर गांव)। बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने वाले विद्यालय से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पामगढ़ विकासखंड के डोंगा-कोहरोद स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधान पाठक पर ड्यूटी के दौरान बच्चों के सामने कथित रूप से अशोभनीय हरकत करने का आरोप लगा है। बच्चों की शिकायत के बाद परिजन तत्काल विद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने शिक्षक को आपत्तिजनक अवस्था में देखने का दावा किया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सूचना मिलते ही पामगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच के बाद आरोपी शिक्षक को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच के साथ कठोर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है।2