*इंद्रावती एनीकेट की मरम्मत के लिए किसानों को खुद उठाना पड़ा फावड़ा* *राज्य सरकार एवं प्रशासन की उदासीनता से नाराज़ किसान खुद कर रहे एनीकेट की मरम्मत* इंद्रावती नदी पर स्थित भोंड एनीकेट की जर्जर स्थिति को लेकर क्षेत्र के किसान लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की लगातार उदासीनता से नाराज़ होकर अब किसानों ने स्वयं ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रभावित किसान फावड़ा, तगाड़ी और ट्रैक्टर लेकर एनीकेट स्थल पहुंचे और श्रमदान के माध्यम से बोरी बंधन कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। जनपद पंचायत सदस्य हेमराज बघेल ने बताया इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की हालत लंबे समय से खराब है, जिसके कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे खेती-किसानी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है और पिछले वर्षों में कई किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों ने कई बार जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को आवेदन और निवेदन पत्र देकर एनीकेट की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का आरोप है कि पहले भी उन्होंने बोरी बंधन कर अस्थायी रूप से एनीकेट को बचाने की कोशिश की थी और प्रशासन से आग्रह किया था कि जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत कराई जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण इस बार किसानों ने फिर से खुद ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया। किसानों ने बताया कि इस काम के लिए किसी प्रकार का सरकारी बजट या सहायता उपलब्ध नहीं है, बल्कि किसान स्वयं आपस में चंदा इकट्ठा कर बोरी बंधन का कार्य कर रहे हैं। इंद्रावती नदी के प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई किसानों की फसलें बर्बाद होते हुए देखी हैं। इस साल किसानों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन समय रहते एनीकेट की मरम्मत करा देंगे, ताकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। लेकिन जब सरकार और प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई, तो किसानों की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने खुद ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया ।नारायणपाल के निवासी मनीराम बघेल ने बताया कि इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब इंद्रावती नदी से प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण का यह पद सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह गया है और जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शरद अवस्थी की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल ने कहा कि सरकार खुद को किसानों की हितैषी बताती है और सुशासन का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि किसान खुद चंदा करके एनीकेट की मरम्मत करने को मजबूर हैं, तो यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सुशासन के दौर में किसान खुद अपने संसाधनों से नदी पर बने एनीकेट की मरम्मत कर रहे हैं।किसानों ने यह भी बताया कि तीन महीने पहले भी उन्होंने चंदा इकट्ठा कर एनीकेट की मरम्मत की थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण फिर से वही स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा पक्की मरम्मत कराई जाती, तो बार-बार इस तरह के अस्थायी उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ती। शासन और प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। अब किसानों ने प्रशासन से उम्मीद छोड़ दी है और अपनी मेहनत और सहयोग से ही एनीकेट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एनीकेट की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले समय में खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और इसका जिम्मेदार पूरी तरह शासन और प्रशासन होगा। इस दौरान इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के सचिव सुभाष कश्यप, मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल, मनी बघेल, बलदेव बघेल, समदू बघेल, डमरू बघेल, युवराज ठाकुर, चंदन ठाकुर, मंबोध बघेल, जग्गू ठाकुर, नेपाल ठाकुर, दिनेश मौर्य, दया बघेल, मनीष ठाकुर, झापू ठाकुर, हिमान ठाकुर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार सच में किसानों के हित की बात करती है, तो इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की स्थायी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें। *इंद्रावती एनीकेट की मरम्मत के लिए किसानों को खुद उठाना पड़ा फावड़ा* *राज्य सरकार एवं प्रशासन की उदासीनता से नाराज़ किसान खुद कर रहे एनीकेट की मरम्मत* इंद्रावती नदी पर स्थित भोंड एनीकेट की जर्जर स्थिति को लेकर क्षेत्र के किसान लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की लगातार उदासीनता से नाराज़ होकर अब किसानों ने स्वयं ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रभावित किसान फावड़ा, तगाड़ी और ट्रैक्टर लेकर एनीकेट स्थल पहुंचे और श्रमदान के माध्यम से बोरी बंधन कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। जनपद पंचायत सदस्य हेमराज बघेल ने बताया इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की हालत लंबे समय से खराब है, जिसके कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे खेती-किसानी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है और पिछले वर्षों में कई किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों ने कई बार जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को आवेदन और निवेदन पत्र देकर एनीकेट की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का आरोप है कि पहले भी उन्होंने बोरी बंधन कर अस्थायी रूप से एनीकेट को बचाने की कोशिश की थी और प्रशासन से आग्रह किया था कि जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत कराई जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण इस बार किसानों ने फिर से खुद ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया। किसानों ने बताया कि इस काम के लिए किसी प्रकार का सरकारी बजट या सहायता उपलब्ध नहीं है, बल्कि किसान स्वयं आपस में चंदा इकट्ठा कर बोरी बंधन का कार्य कर रहे हैं। इंद्रावती नदी के प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई किसानों की फसलें बर्बाद होते हुए देखी हैं। इस साल किसानों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन समय रहते एनीकेट की मरम्मत करा देंगे, ताकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। लेकिन जब सरकार और प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई, तो किसानों की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने खुद ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया ।नारायणपाल के निवासी मनीराम बघेल ने बताया कि इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब इंद्रावती नदी से प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण का यह पद सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह गया है और जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शरद अवस्थी की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल ने कहा कि सरकार खुद को किसानों की हितैषी बताती है और सुशासन का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि किसान खुद चंदा करके एनीकेट की मरम्मत करने को मजबूर हैं, तो यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सुशासन के दौर में किसान खुद अपने संसाधनों से नदी पर बने एनीकेट की मरम्मत कर रहे हैं।किसानों ने यह भी बताया कि तीन महीने पहले भी उन्होंने चंदा इकट्ठा कर एनीकेट की मरम्मत की थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण फिर से वही स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा पक्की मरम्मत कराई जाती, तो बार-बार इस तरह के अस्थायी उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ती। शासन और प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। अब किसानों ने प्रशासन से उम्मीद छोड़ दी है और अपनी मेहनत और सहयोग से ही एनीकेट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एनीकेट की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले समय में खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और इसका जिम्मेदार पूरी तरह शासन और प्रशासन होगा। इस दौरान इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के सचिव सुभाष कश्यप, मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल, मनी बघेल, बलदेव बघेल, समदू बघेल, डमरू बघेल, युवराज ठाकुर, चंदन ठाकुर, मंबोध बघेल, जग्गू ठाकुर, नेपाल ठाकुर, दिनेश मौर्य, दया बघेल, मनीष ठाकुर, झापू ठाकुर, हिमान ठाकुर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार सच में किसानों के हित की बात करती है, तो इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की स्थायी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें।
*इंद्रावती एनीकेट की मरम्मत के लिए किसानों को खुद उठाना पड़ा फावड़ा* *राज्य सरकार एवं प्रशासन की उदासीनता से नाराज़ किसान खुद कर रहे एनीकेट की मरम्मत* इंद्रावती नदी पर स्थित भोंड एनीकेट की जर्जर स्थिति को लेकर क्षेत्र के किसान लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की लगातार उदासीनता से नाराज़ होकर अब किसानों ने स्वयं ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रभावित किसान फावड़ा, तगाड़ी और ट्रैक्टर लेकर एनीकेट स्थल पहुंचे और श्रमदान के माध्यम से बोरी बंधन कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। जनपद पंचायत सदस्य हेमराज बघेल ने बताया इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की हालत लंबे समय से खराब है, जिसके कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे खेती-किसानी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है और पिछले वर्षों में कई किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों ने कई बार जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को आवेदन और निवेदन पत्र देकर एनीकेट की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का आरोप है कि पहले भी उन्होंने बोरी बंधन कर अस्थायी रूप से एनीकेट को बचाने की कोशिश की थी और प्रशासन से आग्रह किया था कि जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत कराई जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण इस बार किसानों ने फिर से खुद ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया। किसानों ने बताया कि इस काम के लिए किसी प्रकार का सरकारी बजट या सहायता उपलब्ध नहीं है, बल्कि किसान स्वयं आपस में चंदा इकट्ठा कर बोरी बंधन का कार्य कर रहे हैं। इंद्रावती नदी के प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई किसानों की फसलें बर्बाद होते हुए देखी हैं। इस साल किसानों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन समय रहते एनीकेट की मरम्मत करा देंगे, ताकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। लेकिन जब सरकार और प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई, तो किसानों की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने खुद ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया ।नारायणपाल के निवासी मनीराम बघेल ने बताया कि इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब इंद्रावती नदी से प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण का यह पद सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह गया है और जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शरद अवस्थी की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल ने कहा कि सरकार खुद को किसानों की हितैषी बताती है और सुशासन का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि किसान खुद चंदा करके एनीकेट की मरम्मत करने को मजबूर हैं, तो यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा
करता है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सुशासन के दौर में किसान खुद अपने संसाधनों से नदी पर बने एनीकेट की मरम्मत कर रहे हैं।किसानों ने यह भी बताया कि तीन महीने पहले भी उन्होंने चंदा इकट्ठा कर एनीकेट की मरम्मत की थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण फिर से वही स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा पक्की मरम्मत कराई जाती, तो बार-बार इस तरह के अस्थायी उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ती। शासन और प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। अब किसानों ने प्रशासन से उम्मीद छोड़ दी है और अपनी मेहनत और सहयोग से ही एनीकेट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एनीकेट की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले समय में खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और इसका जिम्मेदार पूरी तरह शासन और प्रशासन होगा। इस दौरान इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के सचिव सुभाष कश्यप, मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल, मनी बघेल, बलदेव बघेल, समदू बघेल, डमरू बघेल, युवराज ठाकुर, चंदन ठाकुर, मंबोध बघेल, जग्गू ठाकुर, नेपाल ठाकुर, दिनेश मौर्य, दया बघेल, मनीष ठाकुर, झापू ठाकुर, हिमान ठाकुर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार सच में किसानों के हित की बात करती है, तो इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की स्थायी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें। *इंद्रावती एनीकेट की मरम्मत के लिए किसानों को खुद उठाना पड़ा फावड़ा* *राज्य सरकार एवं प्रशासन की उदासीनता से नाराज़ किसान खुद कर रहे एनीकेट की मरम्मत* इंद्रावती नदी पर स्थित भोंड एनीकेट की जर्जर स्थिति को लेकर क्षेत्र के किसान लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासन की लगातार उदासीनता से नाराज़ होकर अब किसानों ने स्वयं ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रभावित किसान फावड़ा, तगाड़ी और ट्रैक्टर लेकर एनीकेट स्थल पहुंचे और श्रमदान के माध्यम से बोरी बंधन कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। जनपद पंचायत सदस्य हेमराज बघेल ने बताया इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की हालत लंबे समय से खराब है, जिसके कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे खेती-किसानी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है और पिछले वर्षों में कई किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों ने कई बार जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को आवेदन और निवेदन पत्र देकर एनीकेट की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का आरोप है कि पहले भी उन्होंने बोरी बंधन कर अस्थायी रूप से एनीकेट को बचाने की कोशिश की थी और प्रशासन से आग्रह किया था कि जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत कराई जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी कारण इस बार
किसानों ने फिर से खुद ही एनीकेट की मरम्मत करने का निर्णय लिया। किसानों ने बताया कि इस काम के लिए किसी प्रकार का सरकारी बजट या सहायता उपलब्ध नहीं है, बल्कि किसान स्वयं आपस में चंदा इकट्ठा कर बोरी बंधन का कार्य कर रहे हैं। इंद्रावती नदी के प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई किसानों की फसलें बर्बाद होते हुए देखी हैं। इस साल किसानों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन समय रहते एनीकेट की मरम्मत करा देंगे, ताकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। लेकिन जब सरकार और प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई, तो किसानों की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने खुद ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया ।नारायणपाल के निवासी मनीराम बघेल ने बताया कि इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब इंद्रावती नदी से प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण का यह पद सिर्फ नाम मात्र का बनकर रह गया है और जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शरद अवस्थी की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल ने कहा कि सरकार खुद को किसानों की हितैषी बताती है और सुशासन का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि किसान खुद चंदा करके एनीकेट की मरम्मत करने को मजबूर हैं, तो यह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सुशासन के दौर में किसान खुद अपने संसाधनों से नदी पर बने एनीकेट की मरम्मत कर रहे हैं।किसानों ने यह भी बताया कि तीन महीने पहले भी उन्होंने चंदा इकट्ठा कर एनीकेट की मरम्मत की थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण फिर से वही स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा पक्की मरम्मत कराई जाती, तो बार-बार इस तरह के अस्थायी उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ती। शासन और प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। अब किसानों ने प्रशासन से उम्मीद छोड़ दी है और अपनी मेहनत और सहयोग से ही एनीकेट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एनीकेट की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले समय में खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और इसका जिम्मेदार पूरी तरह शासन और प्रशासन होगा। इस दौरान इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के सचिव सुभाष कश्यप, मीडिया प्रभारी लक्ष्मण बघेल, मनी बघेल, बलदेव बघेल, समदू बघेल, डमरू बघेल, युवराज ठाकुर, चंदन ठाकुर, मंबोध बघेल, जग्गू ठाकुर, नेपाल ठाकुर, दिनेश मौर्य, दया बघेल, मनीष ठाकुर, झापू ठाकुर, हिमान ठाकुर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार सच में किसानों के हित की बात करती है, तो इंद्रावती नदी पर बने एनीकेट की स्थायी मरम्मत जल्द से जल्द कराई जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें।
- राजपुर। चौकी बारियों पुलिस की कार्यवाही, मवेशियों की खरीद बिक्री एवं तस्करी करने वाले फरार आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा गया सलाखों के पीछे। पूर्व में घटना दिनांक को चौकी बारियों के ग्राम आरा सरना पारा के पास से पिकप वाहन से मवेशी तस्करी होने की सूचना प्राप्त होने पर चौकी बारियों पुलिस के मौके पर पहुँचने पर पुलिस को देखकर तस्कर पिकअप वाहन को लेकर भागने के दौरान खेत में पिकअप के फंस जाने से ड्राइवर मवेशी से भरा पिकअप को छोड़ कर फरार हो गया था। मामले में धारा छ.ग.कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4,6,10 एव पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)घ का अपराध पंजीबद्ध कर विधिवत कार्यवाही करते हुए पूर्व में वाहन स्वामी एवं ड्राइवर को जेल भेजा जा चुका है। मामले में एंड टू एंड कार्यवाही करते हुए मवेशियो की खरीद बिक्री करने वाले फरार आरोपी आबिद खान को घेराबंदी कर सीतापुर रोड अंबिकापुर से विधिवत हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपी द्वारा अपराध करना स्वीकार करने पर आरोपी आबिद खान को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।2
- बालोद शहर के कलाकेंद्र भवन में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) मातृशक्ति संगठन की जिला स्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें 7 मई से 10 मई तक होने वाले प्रांत स्तरीय मातृशक्ति प्रशिक्षण वर्ग की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका, प्रशिक्षण की आवश्यकता और समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को लेकर विचार साझा किए गए। वक्ताओं ने प्रशिक्षण वर्ग में अधिक से अधिक महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बुधवार शाम 6 बजे मिली जानकारी के अनुसार बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित प्रशिक्षण वर्ग महिलाओं के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है, ऐसे में प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें संस्कार, अनुशासन और संगठनात्मक कार्यों की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में प्रभावी योगदान दे सकें। जिला स्तर से अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। इस दौरान संगठन की सेवा गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेशभर में बाल संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों को नैतिक और धार्मिक शिक्षा दी जा रही है। साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से निःशुल्क सिलाई केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए उन्हें रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में यह भी कहा गया कि जिले की महिलाएं संगठन से जुड़कर सेवा, सुरक्षा और संस्कार के मूलमंत्र पर कार्य कर रही हैं, जिससे सामाजिक गतिविधियों में तेजी आई है। प्रशिक्षण वर्ग में भागीदारी से उनकी कार्यक्षमता और अधिक सशक्त होगी। अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण वर्ग को सफल बनाने के लिए समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। संगठन का उद्देश्य समाज में संस्कार, सेवा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना बताया गया।1
- 💥 मोबाइल टावर बैटरी चोरी का खुलासा, 5 आरोपी गिरफ्तार जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के मानपुर, खड़गांव, औंधी और कोहका थाना क्षेत्रों में जियो टावरों से बैटरी चोरी के 4 मामलों का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपियों ने करीब 11.70 लाख रुपये की बैटरियां चोरी की थीं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय.पी. सिंह के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 93 नग बैटरी, दो वाहन, नगदी और मोबाइल सहित कुल करीब 11.21 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया। पांचों आरोपियों को 15 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री यशपाल सिंह ने क्या कहा। आइये सुनते रूबरू उनसे ही।1
- Post by सत्य के अंजोर न्यूज1
- दुर्ग में भीम जयंती के मौके पर आयोजित कव्वाली में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की उपस्थिति पर पार्षद अजीत वैध ने क्या कहा सुनते हैं।1
- स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्राओं ने लिया पुलिस सिस्टम का अनुभव, मिली देश सेवा की प्रेरणा थाने में पहुंचीं छात्राएं, सीखी कानून और सुरक्षा की बारीकियां1
- सोनभद्र में ट्रकों की टक्कर से भीषण आग, लोगों की निष्क्रियता पर उठे सवाल! मदद की जगह वीडियो, इंसानियत पर गंभीर सवाल... क्या इंसान इतना सस्ता हो गया हैं कि वो इंसान ड्राइवर फस गया धीरे धीरे आग बढ़ती गईं कोई भी नहीं मदद के लिये आघे नही आया लेकिन वीडियो तो बननी चाहिए. पोस्ट करना हैं और तो और हस्ते हस्ते इंजॉय करते हुए वीडियो बनाई जान रहिये तो मोबाइल एक तरह का बीमारी बन गया हैं क्योंकि लोगो सब तरह के चीज को छोड़ सकता है लेकिन मोबाइल नहीं छोड़ सकता... ये लोग बचा सकते थे लेकिन बचा लेंंगे तो विडिओ के लिए फिर और न्यूज़ कहा से लाएंगे....1
- ब्रेकिंग न्यूज़… तिल्दा-नेवरा से दिल दहला देने वाली खबर घटना रात करीब 8 से 9 बजे के बीच की बताई जा रही है।” तेज रफ्तार हाईवा की चपेट में आने से एक महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत1
- Post by तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम1