मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है, खुद को उत्तर प्रदेश के बरगढ़ क्षेत्र का बताकर गाँव-गाँव में गठिया और वात रोग की दवाएं बेचते हुए दिख रहे हैं। इन बच्चों के साथ कौन लोग जुड़े हैं, वे किस कंपनी या संस्था की दवा बेच रहे हैं, और इन दवाओं की गुणवत्ता व वैधता का सत्यापन हुआ है या नहीं, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। न ही इन बच्चों के पास कोई लाइसेंस, अनुमति या स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति होने की बात सामने आई है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग वात और गठिया से पीड़ित हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण या सरकारी निगरानी के ये दवाएं बेची जा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभाग इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि ठगी, चोरी और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ते मामलों के बीच ऐसे प्रकरणों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इन बच्चों, उनके संचालकों और उनके द्वारा बेची जा रही दवाओं की तत्काल जांच की जाए। यह मामला बाल श्रम से भी जुड़ा है, जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे दवाएं बेचने के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं। बाल अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाला बाल आयोग भी इस विषय पर मौन है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है, खुद को उत्तर प्रदेश के बरगढ़ क्षेत्र का बताकर गाँव-गाँव में गठिया और वात रोग की दवाएं बेचते हुए दिख रहे हैं। इन बच्चों के साथ कौन लोग जुड़े हैं, वे किस कंपनी या संस्था की दवा बेच रहे हैं, और इन दवाओं की गुणवत्ता व वैधता का सत्यापन हुआ है या नहीं, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। न ही इन बच्चों के पास कोई लाइसेंस, अनुमति या स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति होने की बात सामने आई है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग वात और गठिया से पीड़ित हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण या सरकारी निगरानी के ये दवाएं बेची जा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभाग इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि ठगी, चोरी और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ते मामलों के बीच ऐसे प्रकरणों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इन बच्चों, उनके संचालकों और उनके द्वारा बेची जा रही दवाओं की तत्काल जांच की जाए। यह मामला बाल श्रम से भी जुड़ा है, जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे दवाएं बेचने के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं। बाल अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाला बाल आयोग भी इस विषय पर मौन है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- सतना जिले के सिलपरी में आयोजित श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर भव्य राम विवाह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाराती बने, जिन्होंने घोड़ा गाड़ी और आतिशबाजी के साथ धूमधाम से निकली राम बारात में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र 'जय सियाराम' के उद्घोष से गूंज उठा।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले की जवा तहसील के चटेह गांव में किसानों के साथ कथित तौर पर भ्रष्टाचार और घोटाला किए जाने का मामला सामने आया है। तहसीलदार, एसडीएम जवा, हल्का पटवारी और राजस्व निरीक्षक जैसे अधिकारियों पर यह आरोप लगाया गया है। किसानों के पास पट्टा और इस्लाबी ऋण पुस्तिका होने के बावजूद, उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। बताया गया है कि कंप्यूटर में खसरा-खतौनी और नक्शा नहीं चढ़ाया जा रहा है, जिससे गरीब किसान अत्यधिक परेशान हैं। युवा समाजसेवी और एडवोकेट दयानाथ दिलजीत ने यह जानकारी देते हुए आरोप लगाया है कि पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार जवा और एसडीएम जवा द्वारा किसानों की कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।1
- आज मैहर नगर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य शौर्य यात्रा निकाली गई। इस यात्रा का भाजपा मैहर नगर मंडल अध्यक्ष विकास तिवारी के नेतृत्व में पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। यात्रा में शामिल लोगों ने ध्वज लहराते हुए और भगवा पगड़ियां पहनकर महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, त्याग और स्वाभिमान को याद किया, साथ ही देश प्रेम का संदेश दिया। यात्रा में सजे-धजे बैंड, पारंपरिक वेशभूषा में घुड़सवार और सांस्कृतिक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उनके बताए मार्गों पर चलने का संकल्प लिया। यात्रा के स्वागत के दौरान विकास तिवारी, कल्लू पाल, विनोद चौरसिया, विष्णु चौरसिया, अनिल बढ़ोलिया, हेतराम प्रजापति, मुकेश ओझा, अनिल श्रीवास्तव, सुमित जग्यासी, पवन संतानी, छोटू मैनी, राकेश मौर्य और अभिषेक तिवारी सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।1
- रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा के बहुरीबांध गाँव से ताल्लुक रखने वाली कल्पना प्रजापति ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) बनकर एक मिसाल कायम की है। साधारण परिवार में जन्मी कल्पना ने बचपन बिना माँ के गुजारा और दो साल पहले उनके पिता का साया भी उठ गया। रिश्तेदारों के सहारे और घर के काम संभालते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी, और बड़े सपने देखना नहीं छोड़ा। रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें टेक्निकल पेपर, साइको टेस्ट और मेडिकल जैसे चरण होते हैं, जो बिजली, मैकेनिकल और फिजिक्स जैसे विषयों की गहन समझ मांगते हैं। गाँव में कोचिंग की सुविधा न होने के कारण कल्पना ने मोबाइल के माध्यम से पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQ) देखे और रात-रात भर जागकर पढ़ाई की, जिसका परिणाम उनके चयन के रूप में सामने आया और पूरे परिवार की आँखें भर आईं। उनके चयन की खबर मिलते ही युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी कल्पना के घर पहुँचे। उन्होंने कल्पना को अपनी बहन मानकर श्रीफल और गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद, कल्पना के हाथों से उनकी माँ और पिता के नाम पर एक-एक पेड़ भी लगवाया गया। इस प्रतीक का चुनाव इसलिए किया गया ताकि ये पेड़ वैसे ही जड़ें जमाएँ जैसे कल्पना ने अपने हौसले की जड़ें जमा ली हैं। कल्पना की यह जीत सेमरिया के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जहाँ की लड़कियाँ अब कह सकेंगी कि 'कल्पना दीदी बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं'। असिस्टेंट लोको पायलट के तौर पर कल्पना अब हजारों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी संभालेंगी, जिसमें इंजन की कमान, सिग्नल की समझ और रात-दिन की ड्यूटी शामिल है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि भले ही साधन कम हों, लेकिन हौसला कभी कम नहीं होना चाहिए। बहुरीबांध की गलियों से निकली यह बेटी अब देश की रेल पटरियों पर देश को चलाएगी।1
- दर्शकों से अनुरोध किया गया है कि वे 'भजन संध्या' नामक चैनल को सब्सक्राइब, शेयर और लाइक करें ताकि वे प्रतिदिन नए वीडियो के साथ लाइव रामायण पाठ का श्रवण कर सकें। इस चैनल के माध्यम से सनातन ज्योति धर्म के प्रचार-प्रसार का उद्देश्य भी बताया गया है। संदेश में मैहर की माँ शारदा के दिव्य दर्शन का भी उल्लेख है। यूजर रोहित पाठक जरमोहरा ने 'जय श्री राम जानकी' का उद्घोष किया है।3
- मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित बिरसिंहपुर शहर में इन दिनों गंदगी का बोलबाला है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं, सीताबन नदी गंदगी से अटी पड़ी है, और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे शहर की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि इसका असली जिम्मेदार कौन है। क्या केवल नगर पंचायत, प्रशासन और अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, या शहर के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं? पोस्ट में यह भी कहा गया है कि अगर लोग अपने क्षेत्र, बच्चों, भविष्य और अपने गविनाथधाम से प्रेम करते हैं, तो उन्हें जागरूक होना होगा और इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी। लोगों से इस जानकारी को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है, ताकि यह संदेश जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और बिरसिंहपुर में बदलाव की शुरुआत हो सके।1
- बुधवार को शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मानवता की एक मिसाल देखने को मिली, जब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार ने सड़क पर दर्द से कराहते एक अनाथ बच्चे की मदद की। 12 से 15 वर्ष का राहुल नामक यह बालक, जिसके पैर में गहरा घाव था, उसे कुछ लोग मदद की आस में ऑटो रिक्शा से कलेक्ट्रेट परिसर लाए थे। राहुल के माता-पिता नहीं हैं और उसके संरक्षक इतने गरीब हैं कि इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था, जिससे उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। अपने शासकीय कार्य से बाहर जा रहे एडीएम अरविंद कुमार की नजर इस बेसुध और घायल बच्चे पर पड़ी। बच्चे की दयनीय स्थिति देख वे खुद को रोक नहीं पाए, अपनी गाड़ी रुकवाकर बच्चे के पास पहुंचे। बच्चे की आपबीती सुनकर एडीएम भावुक हो गए और उन्होंने तत्काल एक गाड़ी का इंतजाम कर राहुल को शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया। एडीएम ने अस्पताल प्रबंधन से स्वयं बात की और निर्देश दिए कि बच्चे के इलाज में कोई कोताही न बरती जाए तथा राहुल के उपचार का पूरा खर्च और हरसंभव सहायता प्रशासन व उनके स्तर से सुनिश्चित की जाएगी। एडीएम अरविंद कुमार ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए बच्चे के साथ आई बेबस महिला को मौके पर ही नकद आर्थिक सहायता भी दी, ताकि अस्पताल जाने और शुरुआती जरूरतों में उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों ने एडीएम के इस कार्य की खूब सराहना की, यह कहते हुए कि ऐसे अधिकारी ही असली प्रशासनिक अधिकारी होते हैं जो आम जनता के दर्द को अपना समझते हैं। लोगों ने इसे संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल बताया, जो बच्चे के लिए केवल इलाज नहीं, बल्कि जिंदगी की एक नई उम्मीद लेकर आई है।1
- रीवा जिले की जवा थाना पुलिस ने हत्या के प्रयास के एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। पुलिस के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने फरियादी के घर पहुंचकर देशी कट्टे से फायरिंग की थी। इस दौरान गोली घर के गेट में जा लगी और पीड़ित परिवार ने तत्काल गेट बंद कर अपनी जान बचाई। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और आरोपियों को दबोच लिया। उनके कब्जे से एक 315 बोर का देशी कट्टा, एक जिंदा कारतूस, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई कार जब्त की गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इस पूरी कार्रवाई में जवा थाना प्रभारी सहित अतरैला थाना और पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- आज, बुधवार, 17 जून 2026 को मां शारदा शक्तिपीठ मैहर में संध्याकालीन दिव्य श्रृंगार आरती के दर्शन हुए। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन था जहाँ भक्तों ने माता के इस विशेष रूप के दर्शन किए।2