मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित बिरसिंहपुर शहर में इन दिनों गंदगी का बोलबाला है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं, सीताबन नदी गंदगी से अटी पड़ी है, और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे शहर की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि इसका असली जिम्मेदार कौन है। क्या केवल नगर पंचायत, प्रशासन और अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, या शहर के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं? पोस्ट में यह भी कहा गया है कि अगर लोग अपने क्षेत्र, बच्चों, भविष्य और अपने गविनाथधाम से प्रेम करते हैं, तो उन्हें जागरूक होना होगा और इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी। लोगों से इस जानकारी को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है, ताकि यह संदेश जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और बिरसिंहपुर में बदलाव की शुरुआत हो सके।
मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित बिरसिंहपुर शहर में इन दिनों गंदगी का बोलबाला है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं, सीताबन नदी गंदगी से अटी पड़ी है, और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे शहर की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि इसका असली जिम्मेदार कौन है। क्या केवल नगर पंचायत, प्रशासन और अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, या शहर के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं? पोस्ट में यह भी कहा गया है कि अगर लोग अपने क्षेत्र, बच्चों, भविष्य और अपने गविनाथधाम से प्रेम करते हैं, तो उन्हें जागरूक होना होगा और इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी। लोगों से इस जानकारी को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है, ताकि यह संदेश जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और बिरसिंहपुर में बदलाव की शुरुआत हो सके।
- मध्य प्रदेश के सतना जिले स्थित बिरसिंहपुर शहर में इन दिनों गंदगी का बोलबाला है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं, सीताबन नदी गंदगी से अटी पड़ी है, और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे शहर की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि इसका असली जिम्मेदार कौन है। क्या केवल नगर पंचायत, प्रशासन और अधिकारी इसके लिए जवाबदेह हैं, या शहर के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं? पोस्ट में यह भी कहा गया है कि अगर लोग अपने क्षेत्र, बच्चों, भविष्य और अपने गविनाथधाम से प्रेम करते हैं, तो उन्हें जागरूक होना होगा और इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी होगी। लोगों से इस जानकारी को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है, ताकि यह संदेश जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और बिरसिंहपुर में बदलाव की शुरुआत हो सके।1
- रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा के बहुरीबांध गाँव से ताल्लुक रखने वाली कल्पना प्रजापति ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) बनकर एक मिसाल कायम की है। साधारण परिवार में जन्मी कल्पना ने बचपन बिना माँ के गुजारा और दो साल पहले उनके पिता का साया भी उठ गया। रिश्तेदारों के सहारे और घर के काम संभालते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी, और बड़े सपने देखना नहीं छोड़ा। रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें टेक्निकल पेपर, साइको टेस्ट और मेडिकल जैसे चरण होते हैं, जो बिजली, मैकेनिकल और फिजिक्स जैसे विषयों की गहन समझ मांगते हैं। गाँव में कोचिंग की सुविधा न होने के कारण कल्पना ने मोबाइल के माध्यम से पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQ) देखे और रात-रात भर जागकर पढ़ाई की, जिसका परिणाम उनके चयन के रूप में सामने आया और पूरे परिवार की आँखें भर आईं। उनके चयन की खबर मिलते ही युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी कल्पना के घर पहुँचे। उन्होंने कल्पना को अपनी बहन मानकर श्रीफल और गणेश जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद, कल्पना के हाथों से उनकी माँ और पिता के नाम पर एक-एक पेड़ भी लगवाया गया। इस प्रतीक का चुनाव इसलिए किया गया ताकि ये पेड़ वैसे ही जड़ें जमाएँ जैसे कल्पना ने अपने हौसले की जड़ें जमा ली हैं। कल्पना की यह जीत सेमरिया के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जहाँ की लड़कियाँ अब कह सकेंगी कि 'कल्पना दीदी बन सकती हैं तो हम क्यों नहीं'। असिस्टेंट लोको पायलट के तौर पर कल्पना अब हजारों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी संभालेंगी, जिसमें इंजन की कमान, सिग्नल की समझ और रात-दिन की ड्यूटी शामिल है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि भले ही साधन कम हों, लेकिन हौसला कभी कम नहीं होना चाहिए। बहुरीबांध की गलियों से निकली यह बेटी अब देश की रेल पटरियों पर देश को चलाएगी।1
- सतना में देर रात एक महिला आरक्षक बरौंधा थाना पहुंची और अपने रेंजर पति के शासकीय आवास का ताला तोड़ने की अनुमति मांगी। इस दौरान महिला आरक्षक ने थाने में काफी हंगामा और बवाल काटा।1
- मध्य प्रदेश के सिरमौर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पड़री में दलित और आदिवासी किसान परिवारों की सैकड़ों एकड़ भूमि का सीमांकन करने में राजस्व विभाग के कर्मचारी असमर्थ दिख रहे हैं। बताया गया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन गरीब परिवारों को 5-5 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी, जिस पर वे खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन करते थे। यूथ कांग्रेस के अनुसार, वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन परिवारों से उनकी जमीन छीनी जा रही है। यूथ कांग्रेस की टीम इस अन्याय के खिलाफ है और उसने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मढ़ा में फूड डिपार्टमेंट की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक वायरल वीडियो में फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल पर हितग्राहियों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें कटवाने का दबाव बनाने और वीडियो बना रहे पत्रकार से उलझने तथा उसे धमकाने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो में विनय कुमार मिश्रा जैसे हितग्राहियों का कहना है कि उनकी राशन पर्ची 3-4 साल से नहीं बन पा रही है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल उनसे सीधे पर्ची बनाने से मना कर रही हैं और कह रही हैं कि पहले सीएम हेल्पलाइन की शिकायत कटवा लो, फिर पर्ची बन जाएगी। हितग्राहियों का सवाल है कि शिकायत कटने के बाद पर्ची कैसे बन पाएगी। पत्रकार को जब यह सूचना मिली कि एक अधिकारी हितग्राहियों पर शिकायतें कटवाने का दबाव बना रही हैं, तो वे मौके पर पहुंचे और पहले शिकायतकर्ता का वीडियो बनाया। इसके बाद जब पत्रकार ने फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल का वीडियो बनाना चाहा, तो उन्होंने पत्रकार से ही सवाल करना शुरू कर दिया कि "तुम कौन होते हो वीडियो बनाने वाले? मेरे से परमिशन ली?" वीडियो में मैडम यह भी कहती दिख रही हैं कि वह GRS को "फालतू में तड़का रही थीं" और उसी दौरान पत्रकार शूटिंग कर रहा था। वीडियो देखते ही मैडम हाइपर हो गईं और उन्होंने पत्रकार का खुद वीडियो बनाकर उसे "मैं बताती हूं" कहकर धमकाना शुरू कर दिया। हितग्राहियों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि शिकायत सिस्टम से हट जाए और अधिकारी विभागीय कार्रवाई से बच सकें। पत्रकार ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और सवाल किया है कि क्या अब किसी अधिकारी का वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस खबर में बताए गए सभी आरोप वायरल वीडियो और हितग्राहियों/पत्रकार के बयानों पर आधारित हैं। फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल या संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और निष्पक्षता के लिए उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। हितग्राहियों ने मांग की है कि पर्ची/राशन की समस्या बिना शर्त हल की जाए और सीएम हेल्पलाइन को दबाव का माध्यम न बनाया जाए, जबकि पत्रकार संगठनों ने भी इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ा है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले से प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत की मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिरमौर तहसील के खरौली गांव की एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने ग्राम पंचायत पर उनकी निजी और पैतृक भूमि पर जबरन कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।1
- चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन के कारण सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई जा रही है, जहाँ सख्त जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद खुलेआम नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यह पूरा मामला राजापुर तहसील के मोरम खनन क्षेत्र 'तीर घुमाई गंगू खंड 3' से जुड़ा है। आरोप है कि एस एस मल्टीसिटी सर्विशेष के प्रोपराइटर सुरेंद्र शुक्ला ने खनन अधिनियम एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया है। खनन स्थलों से 100 से अधिक ओवरलोड ट्रकों और ट्रेलरों का भारी ट्रैफिक देखा जा रहा है, जहाँ हैवी वेट पोकलैंड मशीनों का उपयोग कर खनन किया जा रहा है। खनन स्थल से भंडारण स्थल तक मोरम परिवहन कर रहे ट्रकों का धर्मकांटा नहीं किया जाता, और कई ट्रक बिना नंबर प्लेट के ही अवैध रूप से परिवहन में संलिप्त हैं। इस अवैध गतिविधि में स्थानीय प्रशासन की संलिप्तता के गंभीर आरोप हैं, जिसके चलते प्रशासन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रहा है और वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही है।3
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले की जवा तहसील के चटेह गांव में किसानों के साथ कथित तौर पर भ्रष्टाचार और घोटाला किए जाने का मामला सामने आया है। तहसीलदार, एसडीएम जवा, हल्का पटवारी और राजस्व निरीक्षक जैसे अधिकारियों पर यह आरोप लगाया गया है। किसानों के पास पट्टा और इस्लाबी ऋण पुस्तिका होने के बावजूद, उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। बताया गया है कि कंप्यूटर में खसरा-खतौनी और नक्शा नहीं चढ़ाया जा रहा है, जिससे गरीब किसान अत्यधिक परेशान हैं। युवा समाजसेवी और एडवोकेट दयानाथ दिलजीत ने यह जानकारी देते हुए आरोप लगाया है कि पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार जवा और एसडीएम जवा द्वारा किसानों की कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।1