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नसीराबाद में पटवारियों की बैठक, योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश नसीराबाद में पटवारियों की बैठक, योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश
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नसीराबाद में पटवारियों की बैठक, योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश नसीराबाद में पटवारियों की बैठक, योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश
- Deepak kumar kaloshiyअजमेर, अजमेर, राजस्थान🙏8 hrs ago
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- राजस्थान पुलिस दिवस के अवसर पर आमजन को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी कड़ी में स्कूली छात्रों को साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई राजस्थान पुलिस दिवस के मौके पर पुलिस विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें स्कूली छात्रों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि किस तरह से ऑनलाइन ठगी, फेक कॉल, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। छात्रों को चाहिए कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी निजी जानकारी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पुलिस को सूचना दे कार्यक्रम में छात्रों को साइबर सुरक्षा के टिप्स भी दिए गए और बताया गया कि किसी भी तरह की ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, साइबर सेल द्वारा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। पुलिस विभाग के इस प्रयास का उद्देश्य युवाओं को जागरूक बनाकर साइबर अपराधों पर अंकुश लगाना है, ताकि वे सुरक्षित डिजिटल माहौल में अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियां कर सकें।1
- Post by Kailash Fulwari1
- Post by Moinuddin Khan स्वाधीन भारत1
- भारत में हर साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1944 के मुंबई डॉक विस्फोट में शहीद हुए 66 बहादुर दमकलकर्मियों की याद में समर्पित है, जिन्होंने लोगों की जान बचाते हुए अपनी जान की आहुति दे दी। इस दिन को ‘शहीद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें देशभर में अग्निशमन विभाग द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर शहीद फायर कर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही लोगों को आग से बचाव, सुरक्षा उपायों और जागरूकता के बारे में जानकारी दी जाती है। अग्निशमन कर्मचारी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाते हैं। ऐसे सभी वीरों को इस दिन देश नमन करता है। वीडियो में देखें: 👉 अग्निशमन सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम 👉 शहीद दमकलकर्मियों को दी गई श्रद्धांजलि 👉 आग से बचाव के जरूरी उपाय1
- akele chalne ke Dam rakho bhai sapne aur apne sab Badal jaate Hain 👆🫂🖤😈1
- Post by Ravi Sharma Achary2
- नसीराबाद मे बैसाखी पर्व पर गुरुद्वारा सिंह सभा में भक्ति और सेवा का संगम1
- आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है : जगदीश राणा* (इतिहास, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का संगम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अजमेर का घोष प्रदर्शन नौका नाद हुआ सम्पन्न) अजमेर शहर की पहचान बनी आनासागर झील एक बार फिर एक विशेष अवसर की साक्षी बनी 14 अप्रैल को राष्ट्रऋषि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा “नौका नाद” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ इस आयोजन में श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक चेतना—तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि महाराजा अर्णोराज ने अरावली की पहाड़ियों के बीच तुर्क सेना को बुरी तरह परास्त किया। इस युद्ध में भारी रक्तपात से लहूलुहान हुई अजमेर की धरती को साफ करने और पवित्र करने के उद्देश्य से महाराजा ने चंद्रा नदी (जिसे लूणी की सहायक माना जाता है) के जल को रोककर वहां एक विशाल जलाशय बनवाया ये वही आना सागर है ये आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है।अजमेर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है जिसकी समृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश की वर्तमान राजधानी नई दिल्ली भी एक समय अजमेर के परमवीर चौहान शासकों के अधीन हुआ करती थी। चंद्रमा की ज्योत्सना में नहाई हुई आनासागर की श्वेत छतरियों की झिलमिल आकृतिया इस झील के निर्माता अर्णोराज और चौहान शासकों की गौरवशाली कहानिया कहती हुई प्रतीत होती है इसी ओर संपूर्ण समाज का ध्यान आकर्षित करता है संघ का यह नौका नाद जो आनासागर की लहरों पर सम्पन्न हुआ है । इस अवसर पर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उनके जीवन का संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और समरसता स्थापित करने के लिए था। इसी संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने प्रारंभ से सामाजिक समरसता को अपने कार्य का केंद्र बनाया। इतिहास में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब बाबा साहब संघ के कार्यक्रमों में गए और स्वयंसेवकों के बीच जाति-भेद से परे समरस व्यवहार को देखकर संतोष व्यक्त किया। एक शिक्षा वर्ग के दौरान उन्होंने जब स्वयंसेवकों से उनकी सामाजिक पहचान पूछी, तो यह स्पष्ट हुआ कि वहाँ व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं था—यह उनके लिए एक सकारात्मक अनुभव था।महाराष्ट्र की धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्व दिए—डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार—जिन्होंने अपने-अपने तरीके से समाज में जागरण का कार्य किया। दोनों के कार्य की पद्धति अलग रही, लेकिन लक्ष्य समान था—एक संगठित, समरस और आत्मगौरव से युक्त समाज। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा था कि अस्पृश्यता केवल एक वर्ग के प्रयास से समाप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। इसी दिशा में समाज में संघ “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव को व्यवहार में उतारने का पिछले 100 सालों से निरंतर कार्य कर रहा है। संघ में घोष के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की घोष परंपरा 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक ध्वनियों पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की सजीव अभिव्यक्ति है।नौका नाद कार्यक्रम में संघ के 50 स्वयंसेवक 14 अप्रैल को सायं पांच बजे आनासागर झील के किनारे पुरानी चौपाटी पर अपने वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए सभी स्वयंसेवक झील में चल रहे बेटरी के क्रूज (जहाज) पर सवार हुए । वाद्य यंत्रों के माध्यम से 35 देशभक्ति की धुन शहरवासियों को सुनाई । इनमें शंख, बांसुरी, आनक और प्रणय के साथ नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (कलैरिलेट), गोमुख (यूफोनियम), तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी शामिल थे। क्रूज पर सवार सभी स्वयंसेवक पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के चारों ओर भ्रमण किया। शहरवासी चौपाटी के किनारे खड़े होकर वाद्य यंत्रों की धुन को सुन और सराहा। बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज अपने महापुरुषों, अपने इतिहास और अपनी प्रकृति—तीनों के प्रति सजग होता है, तभी एक सशक्त और समरस राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।1
- Post by Kailash Fulwari1