डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर आनासागर क्रूज में हुआ घोषवादन आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है : जगदीश राणा* (इतिहास, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का संगम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अजमेर का घोष प्रदर्शन नौका नाद हुआ सम्पन्न) अजमेर शहर की पहचान बनी आनासागर झील एक बार फिर एक विशेष अवसर की साक्षी बनी 14 अप्रैल को राष्ट्रऋषि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा “नौका नाद” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ इस आयोजन में श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक चेतना—तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि महाराजा अर्णोराज ने अरावली की पहाड़ियों के बीच तुर्क सेना को बुरी तरह परास्त किया। इस युद्ध में भारी रक्तपात से लहूलुहान हुई अजमेर की धरती को साफ करने और पवित्र करने के उद्देश्य से महाराजा ने चंद्रा नदी (जिसे लूणी की सहायक माना जाता है) के जल को रोककर वहां एक विशाल जलाशय बनवाया ये वही आना सागर है ये आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है।अजमेर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है जिसकी समृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश की वर्तमान राजधानी नई दिल्ली भी एक समय अजमेर के परमवीर चौहान शासकों के अधीन हुआ करती थी। चंद्रमा की ज्योत्सना में नहाई हुई आनासागर की श्वेत छतरियों की झिलमिल आकृतिया इस झील के निर्माता अर्णोराज और चौहान शासकों की गौरवशाली कहानिया कहती हुई प्रतीत होती है इसी ओर संपूर्ण समाज का ध्यान आकर्षित करता है संघ का यह नौका नाद जो आनासागर की लहरों पर सम्पन्न हुआ है । इस अवसर पर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उनके जीवन का संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और समरसता स्थापित करने के लिए था। इसी संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने प्रारंभ से सामाजिक समरसता को अपने कार्य का केंद्र बनाया। इतिहास में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब बाबा साहब संघ के कार्यक्रमों में गए और स्वयंसेवकों के बीच जाति-भेद से परे समरस व्यवहार को देखकर संतोष व्यक्त किया। एक शिक्षा वर्ग के दौरान उन्होंने जब स्वयंसेवकों से उनकी सामाजिक पहचान पूछी, तो यह स्पष्ट हुआ कि वहाँ व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं था—यह उनके लिए एक सकारात्मक अनुभव था।महाराष्ट्र की धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्व दिए—डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार—जिन्होंने अपने-अपने तरीके से समाज में जागरण का कार्य किया। दोनों के कार्य की पद्धति अलग रही, लेकिन लक्ष्य समान था—एक संगठित, समरस और आत्मगौरव से युक्त समाज। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा था कि अस्पृश्यता केवल एक वर्ग के प्रयास से समाप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। इसी दिशा में समाज में संघ “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव को व्यवहार में उतारने का पिछले 100 सालों से निरंतर कार्य कर रहा है। संघ में घोष के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की घोष परंपरा 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक ध्वनियों पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की सजीव अभिव्यक्ति है।नौका नाद कार्यक्रम में संघ के 50 स्वयंसेवक 14 अप्रैल को सायं पांच बजे आनासागर झील के किनारे पुरानी चौपाटी पर अपने वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए सभी स्वयंसेवक झील में चल रहे बेटरी के क्रूज (जहाज) पर सवार हुए । वाद्य यंत्रों के माध्यम से 35 देशभक्ति की धुन शहरवासियों को सुनाई । इनमें शंख, बांसुरी, आनक और प्रणय के साथ नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (कलैरिलेट), गोमुख (यूफोनियम), तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी शामिल थे। क्रूज पर सवार सभी स्वयंसेवक पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के चारों ओर भ्रमण किया। शहरवासी चौपाटी के किनारे खड़े होकर वाद्य यंत्रों की धुन को सुन और सराहा। बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज अपने महापुरुषों, अपने इतिहास और अपनी प्रकृति—तीनों के प्रति सजग होता है, तभी एक सशक्त और समरस राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर आनासागर क्रूज में हुआ घोषवादन आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है : जगदीश राणा* (इतिहास, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का संगम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अजमेर का घोष प्रदर्शन नौका नाद हुआ सम्पन्न) अजमेर शहर की पहचान बनी आनासागर झील एक बार फिर एक विशेष अवसर की साक्षी बनी 14 अप्रैल को राष्ट्रऋषि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा “नौका नाद” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ इस आयोजन में श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक चेतना—तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि महाराजा अर्णोराज ने अरावली की पहाड़ियों के बीच तुर्क सेना को बुरी तरह परास्त किया। इस युद्ध में भारी रक्तपात से लहूलुहान हुई अजमेर की धरती को साफ करने और पवित्र करने के उद्देश्य से महाराजा ने चंद्रा नदी (जिसे लूणी की सहायक माना जाता है) के जल को रोककर वहां एक विशाल जलाशय बनवाया ये वही आना सागर है ये आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है।अजमेर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है जिसकी समृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश की वर्तमान राजधानी नई दिल्ली भी एक समय अजमेर के परमवीर चौहान शासकों के अधीन हुआ करती थी। चंद्रमा की ज्योत्सना में नहाई हुई आनासागर की श्वेत छतरियों की झिलमिल आकृतिया इस झील के निर्माता अर्णोराज और चौहान शासकों की गौरवशाली कहानिया कहती हुई प्रतीत होती है इसी ओर संपूर्ण समाज का ध्यान आकर्षित करता है संघ का यह नौका नाद जो आनासागर की लहरों पर सम्पन्न हुआ है । इस अवसर पर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उनके जीवन का संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और समरसता स्थापित करने के लिए था। इसी संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने प्रारंभ से सामाजिक समरसता को अपने कार्य का केंद्र बनाया। इतिहास में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब बाबा साहब संघ के कार्यक्रमों में गए और स्वयंसेवकों के बीच जाति-भेद से परे समरस व्यवहार को देखकर संतोष व्यक्त किया। एक शिक्षा वर्ग के दौरान उन्होंने जब स्वयंसेवकों से उनकी सामाजिक पहचान पूछी, तो यह स्पष्ट हुआ कि वहाँ व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं था—यह उनके लिए एक सकारात्मक अनुभव था।महाराष्ट्र की धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्व दिए—डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार—जिन्होंने अपने-अपने तरीके से समाज में जागरण का कार्य किया। दोनों के कार्य की पद्धति अलग रही, लेकिन लक्ष्य समान था—एक संगठित, समरस और आत्मगौरव से युक्त समाज। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा था कि अस्पृश्यता केवल एक वर्ग के प्रयास से समाप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। इसी दिशा में समाज में संघ “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव को व्यवहार में उतारने का पिछले 100 सालों से निरंतर कार्य कर रहा है। संघ में घोष के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की घोष परंपरा 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक ध्वनियों पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की सजीव अभिव्यक्ति है।नौका नाद कार्यक्रम में संघ के 50 स्वयंसेवक 14 अप्रैल को सायं पांच बजे आनासागर झील के किनारे पुरानी चौपाटी पर अपने वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए सभी स्वयंसेवक झील में चल रहे बेटरी के क्रूज (जहाज) पर सवार हुए । वाद्य यंत्रों के माध्यम से 35 देशभक्ति की धुन शहरवासियों को सुनाई । इनमें शंख, बांसुरी, आनक और प्रणय के साथ नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (कलैरिलेट), गोमुख (यूफोनियम), तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी शामिल थे। क्रूज पर सवार सभी स्वयंसेवक पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के चारों ओर भ्रमण किया। शहरवासी चौपाटी के किनारे खड़े होकर वाद्य यंत्रों की धुन को सुन और सराहा। बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज अपने महापुरुषों, अपने इतिहास और अपनी प्रकृति—तीनों के प्रति सजग होता है, तभी एक सशक्त और समरस राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
- अजमेर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है, जिसमें आरोपियों ने कबाड़ का सामान बेचने के नाम पर पांच लाख रुपये हड़प लिए। किशनगढ़ निवासी दीपक परेवा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दिलीप सिंह और त्रिलोक जैन ने उसे ग्राम विदुर स्थित क्रेशर प्लांट का कबाड़ माल दिखाकर खुद को अधिकृत बताया। 14 अप्रैल 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर में नोटरी के माध्यम से 11 लाख रुपये का एग्रीमेंट किया गया, जिसमें से पीड़ित ने पांच लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद आरोपी चाबी लाने का बहाना बनाकर मौके से फरार हो गए और फोन बंद कर लिया। जब पीड़ित प्लांट पर पहुंचा तो असली मालिक ने किसी भी सौदे से इनकार कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- Post by Kailash Fulwari1
- अजमेर में जिला स्पेशल टीम और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली नोट के जरिए ठगी करने वाले शातिर आरोपियों का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कागज के टुकड़ों को असली नोट बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। जानकारी के अनुसार, आरोपी 500 रुपये के नोट का झांसा देकर केमिकल और काले कागज का इस्तेमाल करते थे और लोगों को नकली नोट तैयार करने का दिखावा कर ठगी करते थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और एक वाहन भी जब्त किया है। मामले का खुलासा वृत अधिकारी शिवम जोशी ने किया। फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और इस तरह की अन्य वारदातों की जांच में जुटी हुई है। अजमेर पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और लोगों को ऐसे ठगी के मामलों से सतर्क रहने की अपील की गई है।1
- अजमेर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए श्री राम सेवा हिंदुस्तान संगठन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। संगठन के युवा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवी लाल सोनी के नेतृत्व में अकादमी गर्ल्स स्कूल (राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय) में छात्राओं को पानी की बोतल और टिफिन बॉक्स वितरित किए गए। गर्मी के इस मौसम में बच्चों को प्यास, थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस पहल के माध्यम से छात्राओं को राहत देने का प्रयास किया गया, ताकि वे स्कूल आते-जाते समय आसानी से पानी पी सकें और स्वस्थ रह सकें। इस सेवा कार्यक्रम में श्री राम सेवा संगठन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। संगठन का उद्देश्य आगे भी इसी तरह के जनहितकारी कार्य करते हुए विद्यार्थियों और समाज की सेवा करना है।1
- जेकमपुरा में एक छोटे बच्चे द्वारा पुनर्जन्म से जुड़ी रोचक बातें बताई जा रही हैं। बच्चा स्वयं को राजा मानसिंह बताता है, जिसे सुनकर क्षेत्र में जिज्ञासा और चर्चा का माहौल बन गया है।1
- jaswantpura mein road to banaa Gaya Hai Lekin hamari taraf hamare bar nahin banaya chuka hai sarpanch Kaluram Meena1
- नसीराबाद की बेटी सृष्टि शर्मा का जलवा, 10वीं में 92% अंक लाकर किया नाम रोशन1
- Post by Kailash Fulwari1