पुराने स्टॉक पर नए रेट की मार पान मसाला व तंबाकू विक्रेताओं की मनमानी से उपभोक्ता परेशान पलिया नगर में पान मसाला, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट के होलसेल विक्रेताओं द्वारा पुराने प्रिंट वाले स्टॉक को नए रेट पर बेचे जाने का मामला सामने आया है। इससे खुदरा दुकानदारों और उपभोक्ताओं में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके हैं। जानकारी के अनुसार बाजार में पुराने प्रिंट के कमलापसंद, पान पराग, किशोर, सिगरेट व बीड़ी समेत अन्य तंबाकू उत्पाद अब भी उपलब्ध हैं। आरोप है कि इन उत्पादों पर पुराने रेट छपे होने के बावजूद इन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर बेचा जा रहा है। इससे ग्राहकों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि कंपनियों द्वारा रेट बढ़ाए जाने के कारण उन्हें भी नई कीमतों पर बिक्री करनी पड़ रही है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य पुराना है तो नए रेट वसूलना नियमों के विरुद्ध है। नगर में यह भी चर्चा है कि यदि प्रशासन चाहे तो गोदामों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। बावजूद इसके अब तक कोई छापेमारी या निरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया है। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो मनमानी लगातार बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का शोषण जारी रहेगा। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पुराने स्टॉक पर नए रेट की मार पान मसाला व तंबाकू विक्रेताओं की मनमानी से उपभोक्ता परेशान पलिया नगर में पान मसाला, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट के होलसेल विक्रेताओं द्वारा पुराने प्रिंट वाले स्टॉक को नए रेट पर बेचे जाने का मामला सामने आया है। इससे खुदरा दुकानदारों और उपभोक्ताओं में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके हैं। जानकारी के अनुसार बाजार में पुराने प्रिंट के कमलापसंद, पान पराग, किशोर, सिगरेट व बीड़ी समेत अन्य तंबाकू उत्पाद अब भी उपलब्ध हैं। आरोप है कि इन उत्पादों पर पुराने रेट छपे होने के बावजूद इन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर बेचा जा रहा है। इससे ग्राहकों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि कंपनियों द्वारा रेट बढ़ाए जाने के कारण उन्हें भी नई कीमतों पर बिक्री करनी पड़ रही है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य पुराना है तो नए रेट वसूलना नियमों के विरुद्ध है। नगर में यह भी चर्चा है कि यदि प्रशासन चाहे तो गोदामों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। बावजूद इसके अब तक कोई छापेमारी या निरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया है। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो मनमानी लगातार बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का शोषण जारी रहेगा। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
- Post by अमित कुमार1
- कल मैच हम हार गए लेकिन जितने के लिए हारना भी जरूरी है1
- पढ़ुआ थाना क्षेत्र में हादसा पढ़ुआ थाना क्षेत्र में एक ही दिन दो बड़े सड़क हादसों से इलाका दहल गया। दोनों घटनाओं में पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। फरवरी के आखिरी हफ्ते में घने कोहरे का असर—सुबह इलाके में जबरदस्त कोहरा छाया रहा। कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता कम होने से सफर काफी खतरनाक हो गया। पहला हादसा: दो बसों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत। हादसे में 1 व्यक्ति की मौत और 5 लोग घायल हुए। सभी घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। दूसरा हादसा: बोर्ड परीक्षा देने जा रहे छात्रों से भरी टाटा वैन को अज्ञात ट्रक ने टक्कर मारी। हादसे में 1 की मौत और करीब 16 लोग घायल हुए। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। प्रशासनिक अपडेट: घायलों का हाल जानने जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) जिला अस्पताल पहुंचे।1
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- ओयल अस्पताल की बदहाली का वीडियो वायरल: विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने आए जागरूक व्यक्ति ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल स्क्रिप्ट ब्यूरो संजय कुमार राठौर लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश लोकेशन: लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी (ओयल)। उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी 'ढाक के तीन पात' जैसी ही है। ताजा मामला लखीमपुर खीरी के ओयल अस्पताल से सामने आया है, जहाँ अपनी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाने आए एक जागरूक व्यक्ति ने अस्पताल की चरमराई व्यवस्थाओं का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। वीडियो में उजागर हुई अस्पताल की अनियमितताएं वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि अस्पताल परिसर में मरीजों और विशेषकर दिव्यांगों के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं है। जागरूक व्यक्ति ने वीडियो के माध्यम से दिखाया कि कैसे दूर-दराज से आए दिव्यांग लोग भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। * डॉक्टरों की अनुपलब्धता: वीडियो में आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी समय होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण डेस्क खाली पड़े हैं। * बुनियादी सुविधाओं का अभाव: पीने के पानी, बैठने की उचित व्यवस्था और रैम्प जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए गए हैं। * भ्रष्टाचार और देरी: पीड़ित व्यक्ति ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस ओर खींचा कि कैसे एक छोटा सा काम (प्रमाण पत्र बनवाना) कराने के लिए दिव्यांगों को कई-कई दिनों तक चक्कर कटवाए जाते हैं। सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। लोग स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनहीनता की जमकर आलोचना कर रहे हैं। जागरूक व्यक्ति द्वारा बनाई गई इस 'लाइव रिपोर्टिंग' ने अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद अब स्थानीय नागरिकों में भी आक्रोश व्याप्त है। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल हैरानी की बात यह है कि ओयल अस्पताल अक्सर अपनी अव्यवस्थाओं के लिए चर्चा में रहता है, फिर भी आला अधिकारियों द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्क्रिप्ट ब्यूरो संजय कुमार राठौर की रिपोर्ट के अनुसार, दिव्यांगों के लिए बने नियमों का पालन स्वयं सरकारी अस्पतालों में ही नहीं हो पा रहा है। निष्कर्ष: कार्रवाई की मांग इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक सरकारी तंत्र में सुधार होना मुश्किल है। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो का संज्ञान लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या जिलाधिकारी ओयल अस्पताल की इन अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई करते हैं।1
- पान मसाला व तंबाकू विक्रेताओं की मनमानी से उपभोक्ता परेशान पलिया नगर में पान मसाला, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट के होलसेल विक्रेताओं द्वारा पुराने प्रिंट वाले स्टॉक को नए रेट पर बेचे जाने का मामला सामने आया है। इससे खुदरा दुकानदारों और उपभोक्ताओं में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके हैं। जानकारी के अनुसार बाजार में पुराने प्रिंट के कमलापसंद, पान पराग, किशोर, सिगरेट व बीड़ी समेत अन्य तंबाकू उत्पाद अब भी उपलब्ध हैं। आरोप है कि इन उत्पादों पर पुराने रेट छपे होने के बावजूद इन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर बेचा जा रहा है। इससे ग्राहकों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि कंपनियों द्वारा रेट बढ़ाए जाने के कारण उन्हें भी नई कीमतों पर बिक्री करनी पड़ रही है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य पुराना है तो नए रेट वसूलना नियमों के विरुद्ध है। नगर में यह भी चर्चा है कि यदि प्रशासन चाहे तो गोदामों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। बावजूद इसके अब तक कोई छापेमारी या निरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया है। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो मनमानी लगातार बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का शोषण जारी रहेगा। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।1
- Post by Anurag Patel1
- Post by खीरी न्यूज़ अपडेट1