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कलेक्टर एसपी ने डीजल पेट्रोल बचाने का दिया संदेश, एक साथ सभी अधिकारी बस में सवार होकर शिविर में शामिल होने पहुंचे। राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी आज गुरुवार को सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बाबल्दा में आयोजित जनकल्याण शिविर में शामिल होने के लिए। जिला अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर से बस द्वारा रवाना हुए। इस दौरान अधिकारियों ने शिविर की व्यवस्थाओं एवं विभिन्न विभागों द्वारा प्रदाय की जाने वाली सेवाओं की जानकारी ली। जनकल्याण शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण, शासन की जनहितकारी योजनाओं के लाभ वितरण तथा आमजन से सीधे संवाद पर विशेष जोर दिया जाएगा।।

1 hr ago
user_RDnews
RDnews
खिलचीपुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

कलेक्टर एसपी ने डीजल पेट्रोल बचाने का दिया संदेश, एक साथ सभी अधिकारी बस में सवार होकर शिविर में शामिल होने पहुंचे। राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी आज गुरुवार को सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बाबल्दा में आयोजित जनकल्याण शिविर में शामिल होने के लिए। जिला अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर से बस द्वारा रवाना हुए। इस दौरान अधिकारियों ने शिविर की व्यवस्थाओं एवं विभिन्न विभागों द्वारा प्रदाय की जाने वाली सेवाओं की जानकारी ली। जनकल्याण शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण, शासन की जनहितकारी योजनाओं के लाभ वितरण तथा आमजन से सीधे संवाद पर विशेष जोर दिया जाएगा।।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया में ग्राम गोविंदा में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां आकाशीय बिजली गिरने से 60 वर्षीय भवरलाल पाल की मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि भवरलाल पाल गांव में एक पेड़ के पास खड़े थे, तभी अचानक बिजली की चपेट में आ गए। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहन बड़ोदिया ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने सूचना मिलने पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की और शाम करीब 7 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इस घटना के बाद मोहन बड़ोदिया के पोस्टमार्टम कक्ष की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आई है। पोस्टमार्टम कक्ष में बिजली व्यवस्था न होने के कारण चिकित्सकीय प्रक्रिया टॉर्च की रोशनी में पूरी करनी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पोस्टमार्टम रूम वर्षों से जर्जर अवस्था में है, जहां खिड़की-दरवाजों की उचित व्यवस्था नहीं है और छत भी खस्ताहाल है, इसके बावजूद अब तक नए भवन का निर्माण नहीं हो सका है। यह पोस्टमार्टम कक्ष न केवल मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र बल्कि सलसलाई थाना क्षेत्र के मामलों का भी पोस्टमार्टम करता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से शीघ्र नवीन और सुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम के निर्माण की मांग की है।
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    शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया में ग्राम गोविंदा में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां आकाशीय बिजली गिरने से 60 वर्षीय भवरलाल पाल की मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि भवरलाल पाल गांव में एक पेड़ के पास खड़े थे, तभी अचानक बिजली की चपेट में आ गए। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहन बड़ोदिया ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने सूचना मिलने पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की और शाम करीब 7 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इस घटना के बाद मोहन बड़ोदिया के पोस्टमार्टम कक्ष की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आई है। पोस्टमार्टम कक्ष में बिजली व्यवस्था न होने के कारण चिकित्सकीय प्रक्रिया टॉर्च की रोशनी में पूरी करनी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पोस्टमार्टम रूम वर्षों से जर्जर अवस्था में है, जहां खिड़की-दरवाजों की उचित व्यवस्था नहीं है और छत भी खस्ताहाल है, इसके बावजूद अब तक नए भवन का निर्माण नहीं हो सका है।

यह पोस्टमार्टम कक्ष न केवल मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र बल्कि सलसलाई थाना क्षेत्र के मामलों का भी पोस्टमार्टम करता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से शीघ्र नवीन और सुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम के निर्माण की मांग की है।
    user_Mukesh Bamniya
    Mukesh Bamniya
    Voice of people मोमन बड़ोदिया, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • Dance at Shakahari Hanumanji Mandir chhipabarod
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    Dance at Shakahari Hanumanji Mandir chhipabarod
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    53 min ago
  • झालावाड़ शहर के मंगलपुरा गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 8 बजे से 9 बजे तक श्री सुखमनी साहिब का पाठ आयोजित किया गया, जिसके उपरांत शबद कीर्तन किए गए। कार्यक्रम के प्रयोजक डॉक्टर मनदीप सिंह और डॉक्टर ज्योतिका सरीन ने बताया कि एक निबंध लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे विजेताओं को प्रीतम सिंह, जगजीत सिंह बग्गा, नवीन भाटिया और रमेश हरपलानी द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। गुरुद्वारा साहिब में उपस्थित साध संगत को छबील और प्रसादी का वितरण भी किया गया।
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    झालावाड़ शहर के मंगलपुरा गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 8 बजे से 9 बजे तक श्री सुखमनी साहिब का पाठ आयोजित किया गया, जिसके उपरांत शबद कीर्तन किए गए।

कार्यक्रम के प्रयोजक डॉक्टर मनदीप सिंह और डॉक्टर ज्योतिका सरीन ने बताया कि एक निबंध लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे विजेताओं को प्रीतम सिंह, जगजीत सिंह बग्गा, नवीन भाटिया और रमेश हरपलानी द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। गुरुद्वारा साहिब में उपस्थित साध संगत को छबील और प्रसादी का वितरण भी किया गया।
    user_Jhalawar hulchal
    Jhalawar hulchal
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • झालावाड़ में शिक्षकों ने मिनी सचिवालय पर एक जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन 23 अगस्त 2010 की राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के संदर्भ में किया गया था। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए विधायी और नीतिगत संरक्षण की मांग की है। ज्ञापन में देशभर के लाखों शिक्षकों में वर्तमान में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना का उल्लेख किया गया है, जो NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना और सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण है। इन परिस्थितियों से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षकों ने भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के स्थापित सिद्धांत का हवाला दिया, जिसके अनुसार कोई भी नियम, अधिसूचना या नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है। उन्होंने तर्क दिया कि पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों और अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। NCTE ने 23 अगस्त 2010 को TET को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था, जबकि इससे पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों और चयन प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत रूप से की जा चुकी थीं। इन शिक्षकों ने वर्षों से राष्ट्र का निर्माण किया है।
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    झालावाड़ में शिक्षकों ने मिनी सचिवालय पर एक जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन 23 अगस्त 2010 की राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के संदर्भ में किया गया था। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए विधायी और नीतिगत संरक्षण की मांग की है।

ज्ञापन में देशभर के लाखों शिक्षकों में वर्तमान में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना का उल्लेख किया गया है, जो NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना और सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण है। इन परिस्थितियों से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

शिक्षकों ने भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के स्थापित सिद्धांत का हवाला दिया, जिसके अनुसार कोई भी नियम, अधिसूचना या नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है। उन्होंने तर्क दिया कि पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों और अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। NCTE ने 23 अगस्त 2010 को TET को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था, जबकि इससे पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों और चयन प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत रूप से की जा चुकी थीं। इन शिक्षकों ने वर्षों से राष्ट्र का निर्माण किया है।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • "कलश यात्रा की भव्यता और महाप्रसादी की दिव्यता! आज का दिन भक्ति और सेवा के नाम। सभी का हृदय से आभार। 🚩✨"
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    "कलश यात्रा की भव्यता और महाप्रसादी की दिव्यता! आज का दिन भक्ति और सेवा के नाम। सभी का हृदय से आभार। 🚩✨"
    user_Suresh nagar
    Suresh nagar
    Social worker नरसिंहगढ़, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा। ​"सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ।। "अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा: ​"सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ,मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" ​हरियालो राजस्थान: धरा का शृंगार, हमारा संकल्प। छबड़ा:अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र,अमीरपुर खेड़ी एवं ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र,भुवाखेड़ी से संचालक स्वामी ध्यान गगन,एस. एल.नागर की अपील ​राजस्थान की वीर भूमि न केवल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जानी जाती है, बल्कि यहाँ के लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम भी सदियों पुराना है।आज के आधुनिक युग में जहाँ कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं, वहाँ "हरियालो राजस्थान" केवल एक अभियान नहीं,बल्कि हमारी संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का एक महायज्ञ भी है।हमारे प्रधान मंत्री जी और हमारे धर्मप्रिय यशस्वी मुख्यमंत्री जी ने भी एक पेड़ मां के नाम की अपील की है,केवल फोटो के लिए पेड़ नही लगावें उसे बच्चे की तरह पाल-पोश बड़ा कर धरती माता को सोंपे ओर अपना कर्ज चुकावे।भुवाखेड़ी ग्राम स्थित खाटूश्याम बाबा की गोशाला की डूंगरी पर परिवार सहित 21 से 24 जून 2026 के 51 कुण्डीय श्री विष्णु महा यज्ञ में पदार्पण कर अपने साथ एक पेड़ और झाली लेकर आवे ओर अपनी स्मृति अक्षुण बनावे।विधित हो ​पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं,बल्कि तपती हुई मरुभूमि को शीतलता भी प्रदान करते हैं। यदि हम आज नहीं चेते,तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही विरासत में मिलेगी।​हमें पेड़ क्यों लगाने चाहिए और उन्हें क्यों बचाना चाहिए? *​पर्यावरण का संतुलन*: राजस्थान में वर्षा की कमी को दूर करने ओर बढ़ती गर्मी की रोकथाम का एकमात्र जरिया घने जंगल और पेड़-पौधे हैं।ये बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर को बढ़ाते हैं।हमें धूप और गर्मी से बचाते है, *​खेजड़ी और रोहिड़ा का संरक्षण*: हमारे राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' ने सदियों से अकाल के समय भी यहाँ के जनजीवन को पाला है।ऐसे अमूल्य पेड़ों को कटने से बचाना हमारा परम कर्तव्य है। *​जीव-जंतुओं का आश्रय*: हरे-भरे पेड़ हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्य पशु चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का घर हैं।पेड़ों के नष्ट होने से इनका अस्तित्व भी खतरे में है। *​एक संवेदनशील नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य:* ​"एक पौधा, एक जीवन": अपने जीवन के हर विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ),पुण्यतिथि आदि पर भी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और केवल लगाएँ ही नहीं, उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी भी लें। *​कुल्हाड़ी पर रोक*: हरे पेड़ों को काटने से खुद भी बचें और दूसरों को भी रोकें। याद रखें, बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, हमें उसी विरासत को आगे बढ़ाना है। *​सामूहिक भागीदारी*: अपने आस-पास के पार्कों,सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करें। *​विशेष संदेश:* पेड़ काटना अपनी ही सांसों की डोर को काटने जैसा है।आइए, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' के इस आह्वान को जन-जन तक पहुँचाएँ। आज ही संकल्प लें कि हम राजस्थान की इस पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाएँगे।हम सब का एक ही नारा,पेड़-पौधे लगावें जग सारा, पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ!
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    अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा।
​"सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ।।

"अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा:
​"सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ;
पेड़-पौधे हम सब लगाएँ,मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!"
​हरियालो राजस्थान: धरा का शृंगार, हमारा संकल्प।
छबड़ा:अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र,अमीरपुर खेड़ी एवं ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र,भुवाखेड़ी से संचालक स्वामी ध्यान गगन,एस. एल.नागर की अपील ​राजस्थान की वीर भूमि न केवल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जानी जाती है, बल्कि यहाँ के लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम भी सदियों पुराना है।आज के आधुनिक युग में जहाँ कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं, वहाँ "हरियालो राजस्थान" केवल एक अभियान नहीं,बल्कि हमारी संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का एक महायज्ञ भी है।हमारे प्रधान मंत्री जी और हमारे धर्मप्रिय यशस्वी मुख्यमंत्री जी ने भी एक पेड़ मां के नाम की अपील की है,केवल फोटो के लिए पेड़ नही लगावें उसे बच्चे की तरह पाल-पोश बड़ा कर धरती माता को सोंपे ओर अपना कर्ज चुकावे।भुवाखेड़ी ग्राम स्थित खाटूश्याम बाबा की गोशाला की डूंगरी पर परिवार सहित 21 से 24 जून 2026  के 51 कुण्डीय श्री विष्णु महा यज्ञ में पदार्पण कर अपने साथ एक पेड़ और झाली लेकर आवे ओर अपनी स्मृति अक्षुण बनावे।विधित हो
​पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं,बल्कि तपती हुई मरुभूमि को शीतलता भी प्रदान करते हैं। यदि हम आज नहीं चेते,तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही विरासत में मिलेगी।​हमें पेड़ क्यों लगाने चाहिए और उन्हें क्यों बचाना चाहिए? *​पर्यावरण का संतुलन*: राजस्थान में वर्षा की कमी को दूर करने ओर बढ़ती गर्मी की रोकथाम का एकमात्र जरिया घने जंगल और पेड़-पौधे हैं।ये बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर को बढ़ाते हैं।हमें धूप और गर्मी से बचाते है,
*​खेजड़ी और रोहिड़ा का संरक्षण*: हमारे राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' ने सदियों से अकाल के समय भी यहाँ के जनजीवन को पाला है।ऐसे अमूल्य पेड़ों को कटने से बचाना हमारा परम कर्तव्य है।
*​जीव-जंतुओं का आश्रय*: हरे-भरे पेड़ हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्य पशु चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का घर हैं।पेड़ों के नष्ट होने से इनका अस्तित्व भी खतरे में है। *​एक संवेदनशील नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य:*
​"एक पौधा, एक जीवन": अपने जीवन के हर विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ),पुण्यतिथि आदि पर भी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और केवल लगाएँ ही नहीं, उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी भी लें।
*​कुल्हाड़ी पर रोक*: हरे पेड़ों को काटने से खुद भी बचें और दूसरों को भी रोकें। याद रखें, बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, हमें उसी विरासत को आगे बढ़ाना है।
*​सामूहिक भागीदारी*: अपने आस-पास के पार्कों,सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करें।
*​विशेष संदेश:*
पेड़ काटना अपनी ही सांसों की डोर को काटने जैसा है।आइए, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' के इस आह्वान को जन-जन तक पहुँचाएँ। आज ही संकल्प लें कि हम राजस्थान की इस पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाएँगे।हम सब का एक ही नारा,पेड़-पौधे लगावें जग सारा,
पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ!
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    2 hrs ago
  • सुसनेर के हरिनगर में विधायक निधि से 3 लाख रुपये की लागत से एक सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस विकास कार्य के लिए जनप्रतिनिधियों ने भूमिपूजन किया। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस सड़क निर्माण को हरी झंडी दी।
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    सुसनेर के हरिनगर में विधायक निधि से 3 लाख रुपये की लागत से एक सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस विकास कार्य के लिए जनप्रतिनिधियों ने भूमिपूजन किया। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस सड़क निर्माण को हरी झंडी दी।
    user_राकेश बिकुन्दीया
    राकेश बिकुन्दीया
    पत्रकार सुसनेर, 10 वर्षो का अनुभव सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।
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    बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए। अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है। नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
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    राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए।

अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है।

नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    2 hrs ago
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